18 मार्च 2010

करियर विकल्प - लय-ताल के मेल से बनाए करियर

'इन दिनों टीवी के तमाम चैनल आ जा नच ले, यार परिवार जैसे डांस शो पर थिरक रहे हैं। विदेशों में अमिताभ एंड फैमिली का अनफर्गेटेबल टूर धूम मचा चुका है गोया कि नृत्य कमाई का एक पेटेंट नुस्खा बन चुका है। लय और ताल के मेल से न केवल अपना शौक पूरा किया जा सकता है, बल्कि परफॉर्मिंग आर्टिस्ट से लेकर कोरियोग्राफर का जगमगाता करियर भी बनाया जा सकता है।'

भारतीय संस्कृति का अंग है नृत्य
पुरातनकाल से नृत्य भारतीय समाज का अभिन्न अंग रहा है। पौराणिक काल में कामदेव और रंभा के नृत्य ने धूम मचाई तो ऐतिहासिक काल में एक से बढ़कर एक नृत्यांगनाओं ने अपने पैरों की थिरकन से इतिहास रचे हैं। कभी महिलाओं तक सीमित इस क्षेत्र में पुरुष नर्तकों ने भी जमकर दस्तक दी है।

उदयशंकर, गोपीकृष्ण, बिरजू महाराज से लेकर शामक डावर और गणेश हेगड़े ही नहीं, विदेशों में माइकल जैक्सन अपनी धाक जमा चुके हैं। फिल्मों, म्यूजिक वीडियो और स्टेज शो के चलते तरह-तरह के नृत्य आम जनता के बीच लोकप्रिय हैं। नृत्य की इतनी शैलियाँ और स्वरूप आज प्रचलित हैं कि एक अच्छे-खासे करियर के तौर पर इसे अपनाया जा सकता है।

नृत्य के क्षेत्र में उपलब्ध करियर विकल्प
नृत्य में करियर निर्माण के अनेक अलग-अलग पहलू हैं। इनमें तीन पहलू खास हैं- परफॉर्मिंग आर्टिस्ट, प्रशिक्षक और कोरियोग्राफर। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में युवा वर्ग आकर्षित हो रहा है। यह आवश्यक नहीं है कि कलाकार डांस के एक ही पहलू से जुड़कर अपना करियर बनाए। सचाई तो यह है कि मृणालिनी साराभाई, यामिनी कृष्णमूर्ति, सोनल मानसिंह, मलिका साराभाई, हेमामालिनी, शोभना नारायण और शामक डावर जैसे कलाकार सफल परफॉर्मिंग आर्टिस्ट होने के साथ-साथ नृत्य के विधिवत प्रशिक्षण को भी अपना लक्ष्य बनाए हुए हैं।

क्या है परफॉर्मिंग आर्टिस्ट का करियर?
हम देखते हैं कि देश-विदेश में स्टेज शो देने वाले कलाकार सोलो या ग्रुप में सामूहिक डांस के रूप में अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं, लेकिन यह तो तय है कि कोई भी नर्तक रातोंरात परफॉर्मिंग आर्टिस्ट नहीं बन सकता है। इस क्षेत्र में शीर्ष तक पहुँचने के लिए बरसों तक कठिन परिश्रम और अथक अभ्यास करना पड़ता है। योग्य गुरु और लंबी साधना के बाद ही कोई कलाकार स्टेज शो तक पहुँचने में कामयाब होता है। आजकल टीवी चैनलों ने जरूर यह राह आसान बना दी है, लेकिन वहाँ तक पहुँचने के लिए भी धैर्य और लगन की आवश्यकता होती है।

यदि कोई समझे कि पैरों में घुँघरू मात्र बाँध लेने से कलाकार बना जा सकता है तो यह सही नहीं है। यह एक साधना के साथ-साथ महँगा शौक भी है। आमतौर पर सामूहिक रूप से सीखने पर हजारों रुपए खर्च करना होते हैं। शामक डावर जैसे स्टार प्रशिक्षक के इंस्टीट्यूट पर खर्च कुछ ज्यादा ही होता है, लेकिन वहाँ सीखने वालों को करियर निर्माण के अवसर भी जल्दी और अच्छे मिल जाते हैं। शासकीय प्रशिक्षण केंद्रों पर शुल्क कम होता है, लेकिन अब वहाँ सीखने के लिए युवाओं में उतना क्रेज नहीं रहा, क्योंकि वहाँ का इंफ्रास्ट्रक्चर आज की आवश्यकता से मेल नहीं खाता है।

नृत्य प्रशिक्षक
किसी विशेष नृत्य में व्यावसायिक पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद नृत्य संगीत का प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षक के रूप में भी करियर बनाया जा सकता है। नृत्य की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए लगभग सभी शैक्षणिक संस्थानों में खासकर प्राइवेट स्कूलों में नृत्य प्रशिक्षक के पद रखे जाने लगे हैं। यदि कोई चाहे तो खुद अपना इंस्टीट्यूट खोलकर प्रशिक्षण दे सकता है, लेकिन इसके लिए खुद अपना नाम और काम लोकप्रिय होना जरूरी है।

एक्टिंग क्लासेस में भी डांस ट्रेनर की आवश्यकता होती है। इनकी खासियत होती है कि ये प्रचलित शास्त्रीय नृत्य से हटकर मॉस को अपील करने वाली शैली में प्रशिक्षण देते हैं। इस क्षेत्र में आरंभिक निवेश कर बाद में स्थापित संस्थान के द्वारा अच्छी आय अर्जित की जा सकती है तथा सहयोगी के रूप में दूसरे लोगों को भी रोजगार दिया जा सकता है।

कोरियोग्राफर का चमकीला करियर
सरोज खान, फराह खान, गणेश आचार्य, रेखा हेगड़े और शामक डावर जैसे कलाकारों ने नृत्य कला को एक नई स्टाइल देकर सेलिब्रिटी करियर बना दिया है। इन्हीं कलाकारों के कारण आज नृत्य का प्रोफेशन सम्मानित दर्जा प्राप्त कर सका है। सिनेमा के साथ-साथ टीवी शोज ने इन दिनों डांस को काफी लोकप्रियता प्रदान की है। अब यह आलम है कि बहू और ससुर एक साथ ठुमकते दिखाई देते हैं।

कोरियोग्राफर इन नौसीखिया नर्तकों को प्रशिक्षित करते हैं। स्टेज शो में कलाकारों के साथ जूनियर कलाकारों को प्रस्तुत कर समाँ बाँधने में भी कोरियोग्राफर का ही हाथ होता है। जिस तरह से अमिताभ से लेकर अक्षय कुमार और शाहरुख से लेकर सलमान खान की स्टार नाइट से करोड़ों की सितारों को आय हो रही है उससे कोरियोग्राफर के साथ-साथ सितारों के साथ स्टेज पर परफॉर्मेंस करने वालों की माँग भी बहुत बढ़ गई है। यहाँ इन्हें विदेशी मुद्रा कमाने के साथ-साथ देश-विदेश की सैर करने का मौका भी मिलता है।

शॉर्टकट नहीं है इस क्षेत्र में
वैसे तो पर्दे या स्टेज पर थिरकते कलाकारों को देखना बड़ा अच्छा लगता है, लेकिन बड़े-बड़े लाइट और कैमरे के फ्रेम में नाचने वाले कलाकार ही जानते हैं कि उनका काम कितना कठिन है और उन्हें इसके लिए कितना पसीना बहाना पड़ता है। इस क्षेत्र के अनुभवी डांसरों का कहना है कि नृत्य के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए धैर्य की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है। इसके लिए कोई शॉर्टकट नहीं है।

चमकदार करियर के साथ खनखनाता पैसा
नृत्य का करियर जितना आकर्षक और लोकप्रिय है। अब इस क्षेत्र में पैसा भी अच्छा मिलने लगा है। परफॉर्मिंग आर्टिस्ट आमतौर पर हजारों की आय अर्जित करने लगे हैं। विदेशों में स्टेज शो में यही राशि लाखों में पहुँच जाती है। फिल्मों में डांस डायरेक्टर को अच्छा काम और अच्छा पैसा दोनों मिलता है। आजकल टीवी पर प्रसारित डांस पर आधारित कार्यक्रमों पर जज और निर्णायक के रूप में भी खूब पैसा बरस रहा है।

कोर्स और प्रशिक्षण संस्थान
संगीत नाटक अकादमी के अंतर्गत कार्यरत संस्थानों में कई कोर्स संचालित किए जाते हैं। इसमें 4 वर्षीय फाउंडेशन पाठ्यक्रम, तीन वर्षीय डिप्लोमा तथा दो वर्षीय पोस्ट डिप्लोमा पाठयक्रम होता है। इन पाठ्यक्रमों को पूरा करने वाले छात्र फ्रीलांस कलाकार बन सकते हैं।

सरकारी संस्थानों, दूरदर्शन आदि पर नौकरी कर सकते हैं या स्थापित कलाकारों की शागीर्दगी ग्रहण कर देश-विदेश में कार्यक्रम दे सकते हैं।

कहाँ से प्राप्त करें शिक्षण/प्रशिक्षण
- श्रीराम भारती, तानसेन मार्ग, नई दिल्ली-110 001
- कत्थक केंद्र भगवानदास रोड, नई दिल्ली-110 001
- उमाशंकर स्कूल ऑफ डांस एंड म्यूजिक, ईस्ट ऑफ कैलाश, नई दिल्ली-110 065
- गांधर्व महाविद्यालय, दीनदयाल उपाध्याय मार्ग, नई दिल्ली
- सेंटर फॉर इंडियन क्लासिकल डांस, डिफेंस कॉलोनी, नई दिल्ली
- पंजाब वि.वि., सेक्टर 14, चंडीगढ़
- प्राचीन कला केंद्र, सेक्टर 35, चंडीगढ़
- कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र
- आई.पी.एस. एकेडमी, इंदौर

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