18 मार्च 2010

करियर विकल्प - मनोवैज्ञानिक समझें मानसिकता को

आज के दौर में हर दूसरा व्यक्ति तनावग्रस्त है। ऐसे में बढ़ते तनाव को दूर करने व एक सुखद जीवन व्यतीत करने के लिए लोग मनोवैज्ञानिकों का सहारा ले रहे हैं। मनोवैज्ञानिक अब सिर्फ मानसिक रूप से असंतुलित लोगों का ही इलाज नहीं करते। वह बनते-बिगड़ते रिश्तों, तेजी से तरी की लालसा तथा बढ़ती आत्महत्याओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यही कारण है कि मनोवैज्ञानिकों की मांग दिनोदिन बढ़ती ही जा रही है। अगर आप चाहें तो इस क्षेत्र में भी अपना उज्ज्वल भविष्य देख सकते हैं। साइकोलॉजी वह विज्ञान है, जिसमें दवाइयों का प्रयोग किए बिना लोगों की सोच में परिवर्तन लाया जाता है।

व्यक्तिगत गुण :
सफल साइकेटे्रटिस्ट बनने के लिए अच्छी कम्युनिकेशन योग्यता, धैर्यशीलता तथा सभी उम्र के लोगों के साथ काम करने की कला आनी चाहिए। इसके साथ ही साइकेटे्रटिस्ट के लिए सेंसिटिव, केयरिंग, आत्मविश्वासी होने के साथ क्लाइंट को संतुष्ट करने की योग्यता होनी भी जरूरी है। साइकेटे्रटिस्ट बनने के लिए हर उम्र के लोगों के साथ, विभिन्न परिस्थितियों में किस प्रकार भावनात्मक रूप से जुड़कर उनकी समस्याओं को समझना व उसका निपटारा करना आना चाहिए।

योग्यता :
बीए या बीए ऑनर्स इन साइकोलॉजी में दाखिले के लिए 50 प्रतिशत अंकों के साथ 12 पास होना अनिवार्य है। इसके अलावा आप पीजी या डिप्लोमा भी कर सकते हैं, जिसके लिए 55 प्रतिशत अंकों के साथ साइकोलॉजी विषय में स्नातक डिग्री आवश्यक है। एमफिल या पीएचडी करने के लिए 55 प्रतिशत अंकों के साथ साइकोलॉजी में पीजी जरूरी है।

कमाई :
इस क्षेत्र में सैलरी आपके कार्य क्षेत्र तथा अनुभव पर निर्भर करती है। शुरुआती दौर में आप लगभग 8000 से 10000 रुपए प्रतिमाह आसानी से कमा सकते हैं। कुछ वर्षों के अनुभव के बाद यह कमाई 15000 से 20000 रुपए प्रतिमाह तक हो सकती है। अगर आप अनुभव के बाद खुद की प्रैक्टिस करते हैं तो कहीं अधिक कमा सकते हैं।

संभावनाएँ :
भारत में इस पाठ्यक्रम की माँग को देखते हुए विशेषज्ञों की संख्या काफी कम है। छात्र खुद का क्लीनिक सेंटर खोलकर काफी पैसा कमा सकते हैं। इसके अतिरिक्त साइकेटे्रटिस्ट्स सरकारी व निजी अस्पतालों, क्लीनिकों यूनिवर्सिटी, स्कूलों, सरकारी एंजेसियों, प्राइवेट इंडस्ट्रीज, रिसर्च आर्गेनाइजेशन, बहुराष्ट्रीय कंपनियों और कॉर्पोरेट हाउस में रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। पारंपरिक साइकोलॉजी क्षेत्रों में स्पेशलाइजेशन के अलावा कुछ नए क्षेत्र सामने आए हैं। आपके लिए इनमें भी काफी अवसर हो सकते हैं।

क्या कहती है रिपोर्ट :
ब्यूरो ऑफ लेबर स्टेटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार यह क्षेत्र बहुत तेजी से ग्रोथ करने वाले क्षेत्रों में से एक है। सन्‌ 2006-16 तक 15 प्रतिशत वृद्धि की संभावना है।

कहाँ से करें कोर्स :
जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली
दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली
एमिटी इंस्टिट्यूट ऑफ साइकोलॉजी एंड अलाइड साइंसेस, नोएडा
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी
इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद
पटना विश्वविद्यालय, पटना

Related Posts with Thumbnails