03 दिसंबर 2010

ज्ञान का सागर - अनमोल वचन (126 - 150)

126  सदा, सहज व सरल रहने से आतंरिक खुशी मिलती है.
127  मन की शांति के लिये अंदरूनी संघर्ष को बंद करना जरूरी है. जब तक अंदरूनी युद्ध चलता रहेगा, शांति नहीं मिल सकती.
128  किसी का बुरा मत सोचो; क्योंकि बुरा सोचते-सोचते एक दिन अच्छा भला व्यक्ति भी बुरे रास्ते पर चल पड़ता है.
129  सारा संसार ऐसा नहीं हो सकता, जैसा आप सोचते हैं. अतः समझौतावादी बनो.
130  महान उद्देश्य की प्राप्ति के लिये बहुत कष्ट सहना पड़ता है, जो तप के समान होता है; क्योंकि ऊंचाई पर स्थिर रह पाना आसान काम नहीं है.
131  जैसे प्रकृति का हर कारण उपयोगी है, ऐसे ही हमें अपने जीवन के हर क्षण को परहित में लगाकर स्वयं और सभी के लिये उपयोगी बनाना चाहिए.
132  हर व्यक्ति संवेदनशील होता है, पत्थर कोई नहीं होता; लेकिन सज्जन व्यक्ति पर बाहरी प्रभाव पानी की लकीर की भांति होता है.
133  जहाँ भी हो जैसे भी हो कर्मशील रहो, भाग्य अवश्य बदलेगा; अतः मनुष्य को कर्मवादी होना चाहिए, भाग्यवादी नहीं.
134  सभी मन्त्रों से महामंत्र है कर्म मंत्र. कर्म करते हुए भजन करते रहना ही प्रभु की सच्ची भक्ति है.
135  जूँ, खटमल की तरह दूसरों पर नहीं पलना चाहिए, बल्कि अंत समय तक कार्य करते जाओ; क्योंकि गतिशीलता जीवन का आवश्यक अंग है.
136  बाहर मैं, मेरा और अंदर तू, तेरा, तेरी के भाव के साथ जीने का आभास जिसे हो गया, वह उसके जीवन की एक महान व उत्तम प्राप्ति है.
137  भाग्यशाली होते हैं वे, जो अपने जीवन के संघर्ष के बीच एक मात्रा सहारा परमात्मा को मानते हुए आगे बढ़ते जाते हैं.
138  सन्यासी स्वरुप बनाने से अहंकार बढ़ता है. कपडे मन रंग्वाओ, मन को रंगों तथा भीतर से सन्यासी की तरह रहो.
139  जीवन चलते का नाम है. सोने वाला सतयुग में रहता है, बैठने वाला द्वापर में, उठ खडा होने वाल त्रेता में, और चलने वाला सतयुग में इसलिए चलते रहो.
140  अपनों व अपने प्रिय से धोखा हो या बीमारी से उठो हो या राजनीति में हार गया हो या शमशान घर में जाओ; तब जो मन होता है, वैसा मन अगर हमेशा रहे तो मनुष्य का कल्याण हो जाए.
141  मनुष्य का मन कछुए की भांति होना चाहिए, जो बाहर की चोटें सहते हुए भी अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ता और धीरे-धीरे मंजिल पर पहुँच जाता है.
142  हर शाम में एक जीवन का समापन हो रहा है और हर सवेरे में नए जीवन की शुरूरात होती है.
143  भगवान् को अनुशाशन एवं सुव्यवस्थितपना बहुत पसंद है. अतः उन्हें ऐसे लोग ही पसंद आते हैं, जो सुव्यवस्था व अनुशाशन को अपनाते हैं.
144  आज का मनुष्य अपने अभाव से इतना दुखी नहीं है, जितना दूसरे के प्रभाव से होता है.
145  जानकारी व वैदिक ज्ञान का भार तो लोग सिर पर गधे की तरह उठाये फिरते हैं और जल्द अहंकारी भी हो जाते हैं, लेकिन उसकी सरलता का आनंद नहीं उठा सकते हैं.
146  जहाँ सत्य होता है, वहां लोगों की भीड़ नहीं हुआ करती; क्योंकि सत्य जहर होता है और जहर को कोई पीना या लेना नहीं चाहता है. इसलिए आजकल हर जगह मेला लगा रहता है.
147  दिन में अधूरी इच्छा को व्यक्ति रात को स्वप्न के रूप में देखता है. इसलिए जितना मन अशांत होगा, उतने ही अधिक स्वप्न आते हैं.
148  कई बच्चे हजारों मील दूर बैठे भी माता-पिता से दूर नहीं होते और कई घर में साथ रहते हुई भी हजारों मील दूर होते हैं.
149  जो व्यक्ति हर स्थिति में प्रसन्न और शांत रहना सीख लेता है, वह जीने की कला प्राणी मात्रा के लिये कल्याणकारी है.
150  जो व्यक्ति आचरण की पोथी को नहीं पढता, उसके पृष्ठों को नहीं पलटता, वह भला दूसरों का क्या भला कर पायेगा.

02 दिसंबर 2010

वास्तुदोष निवारण के आसान उपाय

  अपने घर के उत्तरकोण में तुलसी का पौधा लगाएं
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   हल्दी को जल में घोलकर एक पान के पत्ते की सहायता से अपने सम्पूर्ण घर में छिडकाव करें. इससे घर में लक्ष्मी का वास तथा शांति भी बनी रहती है.

  अपने घर के मन्दिर में घी का एक दीपक नियमित जलाएं तथा शंख की ध्वनि तीन बार सुबह और शाम के समय करने से नकारात्मक ऊर्जा घर से बहार निकलती है.

  घर में सफाई हेतु रखी झाडू को रस्ते के पास नहीं रखें. यदि झाडू के बार-बार पैर का स्पर्थ होता है, तो यह धन-नाश का कारण होता है. झाडू के ऊपर कोई वजनदार वास्तु भी नहीं रखें.
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  अपने घर में दीवारों पर सुन्दर, हरियाली से युक्त और मन को प्रसन्न करने वाले चित्र लगाएं. इससे घर के मुखिया को होने वाली मानसिक परेशानियों से निजात मिलती है.

6   वास्तुदोष के कारण यदि घर में किसी सदस्य को रात में नींद नहीं आती या स्वभाव चिडचिडा रहता हो, तो उसे दक्षिण दिशा की तरफ सिर करके शयन कराएं. इससे उसके स्वभाव में बदलाव होगा और अनिद्रा की स्थिति में भी सुधार होगा.

7   अपने घर के ईशान कोण को साफ़ सुथरा और खुला रखें. इससे घर में शुभत्व की वृद्धि होती है.

8   अपने घर के मन्दिर में देवी-देवताओं पर चढ़ाए गए पुष्प-हार दूसरे दिन हटा देने चाहिए और भगवान को नए पुष्प-हार अर्पित करने चाहिए.

9   घर के उत्तर-पूर्व में कभी भी कचरा इकट्ठा न होने दें और न ही इधर भारी मशीनरी रखें.

10  अपने वंश की उन्नति के लिये घर के मुख्यद्वार पर अशोक के वृक्ष दोनों तरफ लगाएं.

11   यदि आपके मकान में उत्तर दिशा में स्टोररूम है, तो उसे यहाँ से हटा दें. इस स्टोररूम को अपने घर के पश्चिम भाग या नैऋत्य कोण में स्थापित करें.

12   घर में उत्पन्न वास्तुदोष घर के मुखिया को कष्टदायक होते हैं. इसके निवारण के लिये घर के मुखिया को सातमुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए.

13   यदि आपके घर का मुख्य द्वार दक्षिणमुखी है, तो यह भी मुखिया के के लिये हानिकारक होता है. इसके लिये मुख्यद्वार पर श्वेतार्क गणपति की स्थापना करनी चाहिए.

14   अपने घर के पूजा घर में देवताओं के चित्र भूलकर भी आमने-सामने नहीं रखने चाहिए इससे बड़ा दोष उत्पन्न होता है.

15   अपने घर के ईशान कोण में स्थित पूजा-घर में अपने बहुमूल्य वस्तुएँ नहीं छिपानी चाहिए.

16  पूजाकक्ष की दीवारों का रंग सफ़ेद हल्का पीला अथवा हल्का नीला होना चाहिए.

17  यदि आपके रसोई घर में रेफ्रिजरेटर नैऋत्य कोण में रखा है, तो इसे वहां से हटाकर उत्तर या पश्चिम में रखें.

18   दीपावली अथवा अन्य किसी शुभ मुहूर्त में अपने घर में पूजास्थल में वास्तुदोशनाशक कवच की स्थापना करें और नित्य इसकी पूजा करें. इस कवच को दोषयुक्त स्थान पर भी स्थापित करके आप वास्तुदोषों से सरलता से मुक्ति पा सकते हैं.
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19   अपने घर में ईशान कोण अथवा ब्रह्मस्थल में स्फटिक श्रीयंत्र की शुभ मुहूर्त में स्थापना करें. यह यन्त्र लक्ष्मीप्रदायक भी होता ही है, साथ ही साथ घर में स्थित वास्तुदोषों का भी निवारण करता है.

20   प्रातःकाल के समय एक कंडे पर थोड़ी अग्नि जलाकर उस पर थोड़ी गुग्गल रखें और 'ॐ नारायणाय नमन' मंत्र का उच्चारण करते हुए तीन बार घी की कुछ बूँदें डालें. अब गुग्गल से जो धूम्र उत्पन्न हो, उसे अपने घर के प्रत्येक कमरे में जाने दें. इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा ख़त्म होगी और वातुदोशों का नाश होगा.

21  घर में किसी भी कमरे में सूखे हुए पुष्प नहीं रखने दें. यदि छोटे गुलदस्ते में रखे हुए फूल सूख जाएं, तो उस्मने नए पुश्व लगा दें और सूखे पुष्पों को निकालकर बाहर फेंक दें.

22  सुबह के समय थोड़ी देर तक निरंतर बजने वाली  गायत्री मंत्र की धुन चलने दें. इसके अतिरिक्त कोई अन्य धुन भी आप बजा सकते हैं.

23  सायंकाल के समय घर के सदस्य सामूहिक आरती करें. इससे भी वास्तुदोष दूर होते हैं.

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