19 मार्च 2010

घरेलु उपचार 6

कमजोर स्मरण शक्ति
· सोंठ का मगज, मिश्री तथा बादाम गिरी इन तीनों की ढाई सौ ग्राम की मात्रा में लेकर अच्छी तरह से पीसकर चूर्ण बना लें। रात को सोने से पहले 10 ग्राम की मात्रा में चूर्ण की फंकी दूध के साथ चालीस दिनों तक लगातार पीने से याददाश्त अच्छी होने के साथ आंखों की रोशनी भी बढ़ जाती है।
· आधा लीटर पानी में 125 ग्राम धनिया कूट कर उबालें। जब पानी चौथाई भाग रह जाये तब छानकर 125 ग्राम मिश्री मिलाकर फिर गर्म करें। जब गाढ़ा हो जाये तो उतार लें। यह प्रतिदिन दस ग्राम चाटें। इससे मस्तिष्क की कमजोरी दूर हो जाती है और याददाश्त अच्छी हो जाती है।
· गाय के दूध की छाछ में मुलहठी की जड़ का चूर्ण मिलाकर कुछ दिनों तक नियमित पीने से मस्तिष्क की कमजोरी दूर होने के साथ स्मरण शक्ति भी तेज हो जाती है।
· खरबूजे के साथ खरबूजे के बीज भी खाने चाहिए, क्योंकि बीज स्मरण शक्ति बढ़ाने व शरीर का पोषण करने में समर्थ होता है।

नशा
· एक कप पानी में नींबू के रस में जामुन के पत्ते पीसकर पीने से भांग का नशा गायब हो जाता है।
· नींबू चूसने या पुराना नींबू का अचार खाने से भांग का नशा
· धीरे-धीरे उतर जाता है।
· एक कप पानी में एक नींबू का रस निचोड़कर तब तक पिलाएं जबतक भांग का नशा उतर न जाए।
· मादक पदार्थों के नशे को उतारने के लिए हरे धनिए का रस फायदेमंद होता है।

दमा
· थोड़ी से देसी अजवाइन में पच्चीस ग्राम आक की कोपलें और पचास ग्राम गुड़ में कूट-पीस क र दो-दो ग्राम की गोलियां बना लें। सुबह-शाम एक-एक गोली गर्म पानी से लेने से दमा रोग ठीक हो जाता है।
· प्रात: धतूरे का एक बीज आठ दिन तक पानी के साथ निगल लें। दूसरे सप्ताह दो-दो बीज लें। इसी प्रकार प्रति सप्ताह एक-एक बीज बढ़ाते हुए पांचवे सप्ताह पांच बीज लें। उससे पुराना से पुराना दमा ठीक हो जाता है।
· ताजा लौकी पर गीला आटा लेपिये, उसे साफ कपड़े में लपेटें, भूभल में दबाइये। आधा घण्टे बाद कपड़ा-आटा उतार कर उस भुरते का रस निकाल कर सेवन करें। सवा महीने में दमा रोग से छुटकारा मिल जाता है।
· फूली हुई फिटकरी आधा रत्ती मुंह में डाल लें और उसे चूसते रहें। इससे कफ और दमा दोनों से राहत मिलती है।

क्षय रोग
· यदि क्षय के रोगी नियमित रूप से शहद का सेवन करें तो वे क्षय रोग से मुक्त हो जाएंगे। वजन बढ़ने से खांसी कम होती है और रक्त संचार में सुधार हो जाता है।
· टीबी व जिगर के रोगियों के लिए बकरी का दूध बहुत ही लाभदायक होता है।
· सुबह-शाम भोजन के साथ दो पके केलों को एक माह तक सेवन करने से शरीर के रस, रक्त आदि धातुओं के क्षय में कमी आती है तथा शरीर स्वस्थ हो जाता है और खांसी आनी बंद हो जाती है।
· गुलाब के फूलों का सेवन करने से क्षय रोगी को खांसी से राहत मिलने के साथ ही ज्वर और कमजोरी में बहुत फायदेमंद होता है।

मिर्गी
· जिन्हें मिर्गी के दौरे पड़ रहे हों वे 250 ग्राम दूध में, 60 ग्राम मेंहदी के पत्तों का रस मिलाकर देने से रोगी को आशातीत सफलता हाथ लगती है। प्रतिदिन भोजन करने के दो घंटे बाद नियमित रूप से दो सप्ताह तक सेवन करने से मिर्गी रोग ठीक हो जाता है।
· करौदें के 25 पत्ते छाछ में पीस कर दो सप्ताह तक नित्य सेवन करने से मिर्गी आना बन्द हो जाता है। यह प्रयोग पित्त जनित मिर्गी में विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध हुआ है।
· मिर्गी का दौरा पड़ने से बेहोशी की हालत में रोगी को लहसुन कूटकर सुंघाने से होश आ जाता है। दस कली लहसुन को दूध में उबालकर नित्य खिलाने से मिर्गी रोग दूर हो जाता है। यह प्रयोग लम्बे समय तक करने से फायदा होता है।
· मिर्गी से पीड़ित रोगी के पैरों के तलुवों में आक की नौ-दस बूंदे प्रतिदिन शाम को मालिश करने से एक डेढ़ माह में फायदा नजर आने लगता है।

लकवा
· आधा लीटर सरसों का तेल में 250 ग्राम लहसुन को पीसकर इन दोनों को दो किलो पानी लोहे की कड़ाही में मिलाकर गर्म करें। जब सारा जल जाये तो उतार कर ठण्डा करें। ठण्डा होने पर छानकर नित्य इस तेल की मालिश करें। इस तरह एक माह प्रयोग करने से लकवा ठीक हो जाता है।
· एक ओर के अंग में लकवा हो गया हो तो 25 ग्राम छिला हुआ लहसुन पीसकर दूध में उबालें। खीर की तरह गाढ़ा होने पर उतार कर ठण्डा होने पर नित्य प्रात: खाली पेट खाने से लकवा ग्रस्त अंग धीरे-धीरे काम करने लगता है।
· जो लकवे रोग से पीड़ित हैं, उन्हें क रेले की सब्जी भोजन के साथ खाने से फायदा होता है।
· कालीमिर्च पीसकर तेल के साथ लकवे में मालिश करने से लाभ होता है।

हाथ-पैर फटना
· यदि एड़ियां फटने की संभावना हो तो रात को सोते समय एड़ियों पर जैतून का तेल मालिश करने से एडियों की फटने की संभावना कम हो जाती है।
· यदि बिवाइयां हो गई हों तो कच्चा प्याज पीसकर बिवाइयों पर बांधने से सदा के लिए ठीक हो जाएंगी।
· बिवाइयों पर अरण्डी के पत्तों को हल्का सेंक कर उस पर देशी घी व हल्दी को लेप बांधने से दर्द कम होगा तथा बिवाइयां सदा के लिए ठीक हो जाएंगी।
· चार बूंद अमृतधारा को 10 ग्राम वैसलीन में मिलाकर फटी बिवाई व फटे होंठों पर लगाने से दर्द ठीक हो जाता है तथा फटी हुई चमड़ी जुड़ कर ठीक हो जाती है।

सौन्दर्य विकार

· यदि गर्दन और चेहरे पर झुरियां पड़ गई हों तो नींबू का रस शहद में मिलाकर दो सप्ताह तक लगाने से चेहरे तथा गरदन की झुर्रियां गायब हो जाती हैं।
· नींबू तथा ऑंवले का रस समान मात्रा में निकालकर मिला लें। इन दोनों के मिश्रण को चेहरे तथा गर्दन पर लगाने से चेहरे की झांइयां धीरे-धीरे मिट जाती हैं और चेहरे का रंग साफ हो जाता है।
· यदि चेहरे पर दाग-धब्बे व झांई हो तो तुलसी के रस में समान मात्रा में नींबू का रस मिलाकर लगाने से चेहरे पर चेचक के दाग-धब्बे तथा झांई मिट जाती है। यदि तुलसी की पत्तियों को थोड़ी-सी अजवायन मिलाकर पीस लें और इसका लेप कुछ दिनों तक करें तो इससे आशातीत लाभ मिलता है।
· 100 ग्राम शहद में नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लेप करके पंद्रह मिनट के बाद धो डालें। तीन सप्ताह तक नियमित रूप से लगाने से चेहरे पर पड़ी झुर्रियां मिट जाती हैं और चेहरा खिलने लगता है।

दांतों का रोग
· यदि दांतों में रोग लग गए हों तो अनार की छाल को बारीक पीसकर उसमें पीसी हुई फिटकरी मिलाकर मंजन करने से दांतों के रोग दूर हो जाते हैं।
· यदि दांत दर्द हो रहा तो तुलसी की पत्तियां चबाने से दर्द में राहत मिलती है।

दाद
· चुटकी भर चाय की पत्ती दाद वाले स्थान पर बांध देने से दर्द कम हो जाता है और घाव भी धीरे-धीरे ठीक होने लगता है।
· नीम की हरी पत्तियों को दही में पीस दाद व खुजली पर लगाने से फायदा होता है।

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