15 फ़रवरी 2012

श्री वैष्णोदेवी (त्रिकूट मन्दिर) जी की आरती


आरती श्री वैष्णो देवी (त्रिकूट मन्दिर) जी की

हे मात मेरी, हे मात मेरी,
कैसी यह देर लगाई हे दुर्गे। हे...
भवसागर में गिरा पड़ा हूँ,
काम आदि ग्रह से घिरा पड़ा हूँ।
मोह आदि जाल में जकड़ा पड़ा हूँ। हे...
न मुझमें बल है न मुझमें विद्या,
न मुझमें भक्ति है न मुझमें शक्ति।
शरण तुम्हारी गिरा पड़ा हूँ। हे...
न कोई मेरा कुटुंब साथी,
न ही मेरा शरीर साथी,
आपही उबारो पकड़ के बाँही। हे...
चारण कमल की नौका बनाकर,
में पार हुंगा ख़ुशी मानकर।
यमदूतों को मार भगाकर। हे...
सदा ही तेरे गुणों को गाऊं,
नित प्रति तेरे गुणों को गाऊं। हे...
न में किसी का न कोई मेरा,
चाय है चारों तरफ अँधेरा।
पकड के ज्योति दिखा दो रास्ता। हे...
शरण के ज्योति दिखा दो रास्ता। हे...
करो यां नैया पार हमारी।
कैसी यह देर लगाईं है दुर्गे। हे...

श्री यमुनाजी की आरती

आरती 1

आरती श्री यमुनाजी की
ॐ जय यमुना माता, हरी ॐ जय यमुना माता,
जो नहावे फल पावे ये है सुख दाता। ॐ...
पावन श्री यमुनाजल शीतल अगम बहे धरा,
जो जन शरण में आता कर देती निस्तार। ॐ...
जो जन प्रातः हे उठकर नित्य स्नान करे,
यम के तरस न पावे जो नित्य ध्यान धरे। ॐ...
कलिकाल में महिमा तुम्हारी अटल रही,
तुम्हारा बड़ा महातम चारों वेड कही। ॐ...
आन तुम्हारे माता प्रभु अवतार लियो,
नित्य निर्मल जल पीकर कंस को मार दियो। ॐ...
नमो मात भय शरनी शुभ मंगल करणी,
मन बैचन रह है तुम बिन वेतरणी। ॐ...

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आरती 2

आरती श्री यमुनाजी की
जय कालिंदी, हरी प्रिय जय,
जय रवि ताने, तपोमयी जय ॥ ॥
जय श्यामा अति अभिरामा जय,
जय सुखदा श्रीहरी राम जय ॥ ॥
जय ब्रजमंडल- वासिनी जय जय,
जय द्वारिका निवासिनी जय जय ॥ ॥
जय कलि- कलुष नसावनि जय जय,
जय यमुने जय पावनि, जय जय ॥ ॥
जय निर्वाण प्रदायिनी जय जय,
जय हरी प्रेम दायिनी जय जय ॥ ॥

14 फ़रवरी 2012

नहीं, नहीं, अभी नहीं ! अभी करो इंतजार

आजकल लड़कों और लड़कियों की फ्रेंडशिप को मॉडर्न सोसाइटी में बुरा नहीं समझा जाता, लेकिन इसकी खुमारी में कई लोग हद से गुजरने की कोशिश करते हैं। इसकी पहली सीढ़ी होती है किस करना। कई लड़के 'किस' करके अपने प्यार का इजहार करना चाहते हैं, जो ज्यादातर लड़कियों को पसंद नहीं आता।

अगर आप किसी के साथ रिलेशनशिप में इनवॉल्व हैं, तो हो सकता है कि आपको भी इस स्थिति का सामना करना पड़े। ऐसे में आप शालीनता से इनकार कर सकती हैं। आपको किसिंग जैसी गैरवाजिब डिमांड से इनकार करने का पूरा हक है। आपको अपनी तरफ से ऐसा कोई संकेत नहीं देना चाहिए, जिससे हौसला पाकर कोई ऐसा कदम उठाने की कोशिश करे, जो आपको पसंद नहीं है।

फ्लर्ट कभी नहीं

फ्लर्ट करना बिल्कुल बंद कर दीजिए। लड़कियां ज्यादा खुलकर बातचीत करने लगती हैं, तो लड़कों को आगे बढ़ने का हौसला मिल जाता है। गर्ल्स को एक सीमा में रहकर ही किसी से बातचीत करनी चाहिए।

रूखापन फिर भी नहीं

' किस' की डिमांड पर आप इनकार में सिर हिला सकती हैं। आमतौर पर देखा गया है कि बॉयफ्रेंड जब अपने पार्टनर के नजदीक आने की कोशिश करते हैं, तो लड़कियां उन्हें गुस्से से झटक देती हैं। जहां तक हो सके, ऐसा करने से बचें। इस तरह की बातें रिलेशनशिप को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके बजाय सिर्फ इनकार में सिर हिलाना सही रहेगा।

अभी भी तैयार नहीं

ईमानदार बनिए। अपने फ्रेंड को सच्चाई से बताइए कि आप रिलेशनशिप में इस समय आगे नहीं बढ़ना चाहतीं और उसकी 'किस' की डिमांड पूरी नहीं कर सकती। आपकी मित्रता में सच्चाई और ईमानदारी ही रिलेशनशिप को आगे बढ़ाएगी।

तो वह लायक नहीं

अपने बॉयफ्रेंड को बताइए कि आप जिंदगी के इस मोड़ पर वह सब नहीं करना चाहतीं, जो वह चाहता है। अगर आपका दोस्त आपकी बातों को नहीं मानता और फिर भी आगे बढ़ने की कोशिश करता है, तो वह आपकी दोस्ती के लायक नहीं है।

तुझसे दूर मैं नहीं

' किस' के लिए इनकार करने के बाद भी अपने बॉयफ्रेंड से अच्छा व्यवहार कीजिए। उसे बताइए कि आपको अभी भी उसके गले लगना और हाथों में हाथ डालकर चलना पसंद है।

सेक्सी दिखने की कोशिश न करें पहली डेट पर

अगर आप फर्स्ट डेट पर जा रहे हैं, तो आपकी ड्रेस कैसी हो, यह बहुत मायने रखता है। ड्रेस डिसाइड करने से पहले इन टिप्स पर गौर करें:

- अगर आप सोच रहे हैं कि फर्स्ट डेट पर नई ड्रेस पहन कर जाएं, तो ऐसा बिल्कुल भी न करें। अपने वॉर्डरोब में से कोई भी ड्रेस पहन कर जाएं।

- लड़के अक्सर अपनी फर्स्ट डेट पर लड़की को इंप्रेस करने के लिए डीप नेक या स्लीवलेस टी-शर्ट पहनना पसंद करते हैं, ताकि उनकी गर्लफ्रेंड उनकी सेक्सी बॉडी देख कर इंप्रेस हो जाएं। वहीं लड़कियां भी सेक्सी व हॉट ड्रेस पहनना पसंद करती है। अगर आप ऐसी कोई योजना बना रहे हैं, तो बिल्कुल भी ऐसा न करें।

आपकी फर्स्ट डेट पर सभी का ध्यान आप पर होगा, इसलिए कुछ भी अलग पहननें से न हिचकें, ताकि आप अन्य लड़के/लड़की से अलग दिखें।

-सिंपल पहनें, जिसमें आप सुंदर दिख सकें।

-आप भौंडे कपड़े पहनने से बचें, लेकिन ऐसे कपड़े पहन सकते हैं, जिसमें आपके सिक्स पैक एब्स नजर आएं। वहीं लड़कियां भी ऐसी ड्रेस पहनें, जिसमें उनकी अट्रैक्टिव फिगर नजर आएं।

-आपने जो ड्रेस चुनी है, वह कंफर्टेबल होनी चाहिए ताकि वह आपकी डेट का मजा किरकिरा न करे।

-ड्रेस का चुनाव करते समय उसके कलर का विशेष ध्यान रखें। ड्रेस का कलर आपका फेवरिट हो और आप पर खिलें।

-ड्रेस का चुनाव करते समय उसके कलर का विशेष ध्यान रखें। ड्रेस का कलर आपका फेवरिट हो और आप पर खिलें।

- चेहरे पर ज्यादा मेकअप न थोपें, इससे आपकी नेचरल ब्यूटी दब जाएगी। चेहरे पर लाइट मेकअप करें।

-ड्रेस से मैच करती हुई हल्की-फुल्की जूलरी पहनें। हैवी जूलरी पहनने से बचें।

गर हो पहली डेटिंग, तो लड़के क्या करें

डेटिंग का मतलब है एक दूसरे को समझने की कसरत। लेकिन जब आप पहली डेटिंग पर जा रहे हों, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है:

जब बात पहले डेट पर जाने की हो, तो झिझकना एक सामान्य-सी बात है। लेकिन जब बात फर्स्ट इंप्रेशन की हो, तो आपका झिझकना ठीक नहीं। फर्स्ट डेट पर कुछ खासों बातों का खयाल रखना जरूरी होता है, ताकि सामने वाले को आप इंप्रेस कर सके और उसके बारे में काफी कुछ पता कर सकें।

फर्स्ट डेट पर कभी भी उसके पिछले प्यार के बारे में न पूछें। वास्तव में, इसे तो तब तक अवॉइड करना चाहिए, जब तक कि वह खुद इस टॉपिक को नहीं छेड़ती। ऐसा संभव है कि उसका पिछला प्यार दुख पहुंचाने वाला रहा हो या फिर वह अभी भी उसे प्यार कर रही हो। ऐसे में पहले ही दिन का मजा किरकिरा करना ठीक नहीं।

किसी लड़की की रुचियों के बारे में जानने का ट्रिकी फॉर्म्युला यह है कि आप उससे पिछले ट्रैवल डेस्टिनेशन के बारे में बात करें और पूछें कि भविष्य में वह कहां जाना चाहती है। अगर वह ऐसे किसी प्लेस की जानकारी आपको देती है, जहां वह जाना चाहती है तो आप वहां चलने का ऑफर उसे दे सकते हैं। इस टॉपिक पर बातचीत का बड़ा फायदा यह है कि आपको एक-दूसरे के कल्चरल बैकग्राउंड और नए एडवेंचर्स के प्रति खुले नजरिए का पता चल जाएगा।

उससे उसके दोस्तों के बारे में पूछिए। अगर आप उन दोस्तों को नहीं जानते हैं, तब भी वह अपने दोस्तों और उनसे मिलने के बारे में आपको खुशी-खुशी बताएगी। उसके दोस्तों की जानकारी से आप उसके बारे में भी काफी कुछ समझ पाएंगे।

अगर आप पहले डेट पर किसी बार या रेस्तरां में हैं, तो आप यह आसानी से पता लगा सकते हैं कि खाने-पीने के मामले में उसकी रुचि क्या है। और यह भी कि कहीं वह अल्कोहल तो नहीं लेती।

जब आप बात कर रहे हों, तो करियर और एजुकेशन की बातें क्यों छोड़ी जाएं? ऐसे में एकेडमिक अचीवमेंट और जॉब की बातें आपको उसे समझने और उत्साहित करने में मदद करेंगी।

आप उसकी हॉबिज के बारे में बात कर सकते हैं। वह क्या पसंद करती है? खेल में उसकी कितनी दिलचस्पी है? किस तरह का संगीत पसंद है? इन सवालों के जवाब से आपको यह पता चलेगा कि आपके बीच कितना बेहतर बॉन्ड बन सकता है।

बहरहाल, इन सबके बावजूद एक बात हमेशा याद रखें और वह कि एक ही मुलाकात में आप किसी के बारे में सब कुछ नहीं जान सकते हैं। इसलिए सब्र रखें और कुछ चीजें बाद के दिनों के लिए भी छोड़ दें।

पार्टनर की इन आदतों से पुरुषों को होती है चिढ़

इसमें कोई शक नहीं कि पुरुष पत्नी या गर्लफेंड को दिल से चाहते हैं , लेकिन कभी कभार उन्हें उनसे चिढ़ भी होती है। और , इसकी वजह है कुछ आदतें , जिनसे पुरुषों को काफी कोफ्त होती है ...

ड्रामेबाजी से दूरी भली

आमतौर पर पुरुष ड्रामा करने वालीं महिलाओं से दूर भागते हैं। फिर महिलाएं भी अपनी जिंदगी के हर क्षण को उसी तरह इन्जॉय करना पसंद करती हैं , जिस तरह पुरुष करते हैं।

बुराई सुनना पसंद नहीं

पुरुषों को अपनी पत्नी या महबूबा के मुंह से किसी अन्य महिला की बुराई सुनना भी अच्छा नहीं लगता। यह एक जांचा - परखा हुआ सच है कि लेडीज दूसरी महिलाओं को अपना कट्टर प्रतिद्वंद्वी मानती हैं , पर यह हमेशा याद रखना चाहिए कोई महिला किसी दूसरे की बुराई कर पुरुषों का दिल नहीं जीत सकती। अगर कोई महिला किसी दूसरी महिला की ड्रेंस सेंस और जूतों को निशाना बनाती है तो वह महिला पुरुषों में लोकप्रिय नहीं हो सकती।

ईर्ष्या से आपसी संबंधों में दरार

महिलाओं के ईर्ष्यालु स्वभाव से पुरुषों को काफी कोफ्त होती है। यह कहना गलत है कि ईर्ष्या से आपसी संबंधों को नई जिंदगी मिलती है , बल्कि इससे गहरे संबंधों में भी दरार आ जाती है। जब लाइफ पाटर्नर में से कोई एक अपने साथी पर अविश्वास करने लगता है , तभी संबंध बिगड़ते हैं।

शंकालु महिलाओं के साथ गुजारा कठिन

पुरुषों को हर समय इमोनशल सपोर्ट के लिए अपनी ओर देखनी वाली महिलाएं भी पसंद नहीं होती। पुरुषों को महिलाओं के शक्की स्वभाव से काफी कोफ्त होती है। पुरुष सोचते हैं कि शक करने वाली महिलाओं के साथ गुजारा करना तो हर समय अपनी मनमर्जी चलाने वाली महिलाओं से भी ज्यादा तकलीफदेह होता है।

बार - बार एक ही सवाल

पुरुषों को अपने पार्टनर से एक ही बात बार - बार सुनना कतई अच्छा नहीं लगता। आमतौर पर महिलाओं का सवाल होता है , आप क्या सोच रहे हैं ? इससे उन्हें यह आशा होती है कि वह पुरुष उनके सामने अपने दिल की भावनाएं उंडेल कर रख देंगे , लेकिन होता इसके उलट है।

अपने लिए कब टाइम निकालें ?

कुछ महिलाएं चाहती हैं कि उनके पति दफ्तर के समय या काम खत्म होने के बाद सारा वक्त केवल उन्हीं के साथ गुजारें , लेकिन उन्हें यह समझना चाहिए कि उनके पति को भी तो अपने लिए कुछ समय चाहिए। यह एक तरह से पुरुषों की प्राइवेट लाइफ में दखल है।

इसके लिए महिलाएं अपने पति की मौजूदगी में रिश्तेदारों से पूछना शुरू कर देती हैं कि आपके पति खाली समय में क्या करते हैं , जो किसी भी गैरतमंद आदमी को बुरा लगेगा। महिलाएं अपने पति की जेब से बिना पूछे पैसे आदि निकाल लेती हैं। इससे भी वह परेशान होते हैं।

आंसू बहाना पसंद नहीं

हर समय भावनाओं के समंदर में बहने वाली महिलाएं भी पतियों को पसंद नहीं आती। पुरुषों को लगातार आंसू बहाने वाली और बात - बात पर गुस्सा करने वाली व तुनकमिजाज महिलाएं भी पसंद नहीं होतीं।

कितनी बार करें शॉपिंग ?

पुरुषों को बार - बार शॉपिंग के लिए पत्नी के साथ जाना पसंद नहीं होता। जब पत्नियां पतियों से शॉपिंग पर बार - बार जाने की जिद करती है तो पुरुषों को वाकई परेशानी होती है।

बातूनी व्यवहार से परेशानी

पत्नी का जरूरत से ज्यादा बोलना भी पतियों को नागवार गुजरता है। महिलाएं किसी बात की जड़ तक पहुंचकर ही मानती हैं , जबकि पुरुषों को गैर जरूरी बात सुनना तक नापसंद होता है।

पार्टनर को सजा देना गलत

पत्नियां पति को सजा देने के लिए कई तरीके अपनाती हैं। कुछ दिन के लिए पति को छोड़कर चले जाना या रूठकर पूरी तरह साथ न निभाना भी उनमें से एक है , लेकिन कई बार यह दांव उलटा पड़ जाता है और गृहस्थी तहस - नहस हो जाती है।

किस फूल से करें शिव की पूजा

महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान शिव का पूजन विभिन्न प्रकार के पुष्प चढ़ाने का महत्व है। विशिष्ठ फल की प्राप्ति के लिए विभिन्न फूल चढ़ाए जाते हैं। शिव को बिल्व पत्र अतिप्रिय है। अत: बिल्व पत्र के साथ निम्न पुष्पों को समर्पित करने से आपकी कल्पित कामना पूर्ण होगी।

सभी तरह की बीमारियों से मुक्ति के लिए: करवीर के फूल
आभूषणों की प्राप्ति के लिए: दुपहरिया के फूल।
वाहन के लिए: चमेली के फूल।
योग्य पत्नी के लिए: बेला के फूल।
अन्न के लिए : जूही के फूल।
वस्त्र के लिए: कनेर के फूल।
सुख एवं संपत्ति के लिए: हरसिंगार के फूल।
दुश्मनों पर विजय के लिए: राई के फूल।
धन-संपत्ति के लिए: अक्षत (बिना टूटे हुए चावल)
लंबी उम्र के लिए: 1 लाख दूर्वा गांठ (21 दूर्वा की एक गांठ बनाई जाती है।)
पुत्र प्राप्ति हेतु: 1 लाख धतुरे के लाल डंठल वाले फूल।
भोग एवं मोक्ष: तुलसीदल से पूजन करें।
मोक्ष के लिए: 1 लाख दर्भो (कुश जैसी घास) द्वारा या शमी पत्र से पूजन करें।

शिवरात्रि के अलावा भी अपनी इच्छानुसार इन पुष्पों से ईश्वर का पूजन कर आप अपनी मनवांछित वस्तु शिव से प्राप्त करने की प्रार्थना कर सकते हैं।

दीपावली पर धन-प्राप्ति के चमत्कारी प्रयोग

दीपावली के दिन घनी काली अंधेरी रात होती है। काली अंधेरी रात या कोई भी अंधकार कष्ट का प्रतीक माना गया है, क्योंकि अंधकार में मार्ग दिखाई नहीं देता, व्यक्ति रास्ता भटक जाता है। मन में जब तक दुख: का, ग़म का अंधेरा रहेगा, तब तक व्यक्ति सफलता नहीं पा सकेगा। अंधेरे से उजाले की ओर जाने की प्रक्रिया को ही अमावस्या शांति कहते हैं। जितनी अधिक काली अंधेरी रात होती है, वह इस बात की प्रतीक है कि अब आगे जल्दी रोशनी का पहर आने वाला है। जैसे-जैसे सुबह नज़दीक आती है, अंधेरा और बढ़ता जाता हैं। जैसे-जैसे सुबह की किरण फूटने वाली होती है, व्यक्ति दुनिया की सुध-बुध भूलकर चैन से सोना चाहता है। सुबह का आना इस बात का प्रमाण है कि कोई भी अंधेरा अधिक समय तक नहीं टिकता। अधिक ग़म, अधिक ख़ुशी अधिक समय तक नहीं टिकती। अत्यधिक ग़म इस बात का संकेत हैं कि अब जल्दी ही ख़ुशी मिलने वाली है, अत्यधिक नींद इस बात का संकेत हैं कि सपनों की दुनिया के आगे वास्तविक उपलब्धि हाथ से जाने वाली है। कहा भी गया हैं कि ’जो सोवत हैं वो खोवत है, जो जागत है वो पावत है’ अर्थात ब्रह्म मुहूर्त के बाद सोना ज़िंदगी में बहुत कुछ खो देने का संकेत कहा गया है।

दीपावली की अमावस्या के दिन लकड़ी की दो चौकी लें। जिस दिन दीपावली की अमावस्या पड़े, उस दिन उस समयावधि से पहले सरसों के तेल का एक बड़ा दिया जला देवें और शनिदेव की तस्वीर, प्रतिमा या मंत्र के आगे तेल का दिया रखकर यह प्रार्थना करें कि हमारे घर में लक्ष्मी के आगमन में, सफलता में जो भी विघ्न, बाधा, परेशानी, रुकावट आ रही हैं, वे दूर हो जायें और उस दिये को अखण्ड जलने दें। दूसरे दिन के दीपावली पूजन हो जाने तक उसे जलाना चाहिए। जब दीपावली पूजन का मुहूर्त हो, उस समय लकड़ी की एक चौकी पर महालक्ष्मी माता की तस्वीर रखें और दूसरी चौकी पर शनि देव की तस्वीर, काला वस्त्र चौकी पर बिछाकर रखें। लक्ष्मी जी वाली चौकी पर रक्त लाल रंग का वस्त्र बिछायें। लक्ष्मी जी की हल्दी, कुमकुम, अष्टगंध, मिष्ठान, खील-बताशे, पकवान व खीर-पूड़ी अर्पण कर विधिवत पूजन करें। उन्हें लाल पुष्प व लाल वस्त्र अर्पण करें। शनिदेव को काले अक्षत, नीले पुष्प से पूजन करके, उड़द व तिल से बने पकवान भोग में अर्पण करें। जब भोग लगायें, तब जल भी साथ में रखें। एक-एक सूखा नारियल और एक-एक पानी वाला नारियल दोनों चौकी पर रखें। सामने बैठकर एक माला शनि महामंत्र की और एक माला महालक्ष्मी मंत्र की जाप करें। मंत्र जाप प्रत्येक सदस्य भी अपने-अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए व जीवन में वैभव की प्राप्ति के लिए कर सकता है। जो मंत्र जाप करने हैं, वे निम्न हैं :

शनि महामंत्र
ऊँ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम्।
छाया मार्तण्ड सम्भूतं तम् नमामि शनैश्चरम्।।

महालक्ष्मी मंत्र
ऊँ श्रीं ह्यीं कमले कमलालये प्रसीद श्रीं ह्यीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मये नम:।

इन दोनों मंत्रों के जाप के पूर्व अपने गुरू का व गणपति जी का मंत्र भी ११-११ बार पाठ कर लें। मंत्र पाठ के बाद आरती करें, कपूर जलायें। फिर जो भी प्रसाद शनिदेव के आगे रखा है और जो भी लक्ष्मी जी के आगे रखा हो, वो सभी अलग-अलग कपड़े में बाँध दें। शनिदेव के काले वस्त्र की चौकी पर उड़द, तिल, गुड़ के जो भी पकवान उड़द, तिल, गुड़ के साथ रखे थे, उन्हें काले कपड़े में बांध दें और लक्ष्मी जी वाला सारा सामान लाल कपड़े में बांध दें। मगर दोनों चौकी से पानी वाला नारियल अलग निकाल कर सामान को बांधना हैं। काले कपड़े वाला सामान किसी ग़रीब को या भिखारी को उसी रात्रि में दे दें। साथ में एक भोजन का बड़ा पेकेट भी उसे भोजन करने के लिए दें। लाल कपड़े वाला सामान किसी भी मंदिर के पुरोहित को दे दें। पानी वाले नारियल जो अलग निकाले थे, दोनों अपने घर के दरवाज़े पर यह कहकर फोड़ें कि मेरी ज़िन्दगी में धन प्राप्ति में, सफलता प्राप्ति में जो भी बाधा आ रही हैं उसे दूर करने के लिए हम यह श्रीफल बलि दे रहे हैं। नारियल फोड़ने के बाद उसके दोनों टुकड़ों में शक्कर में थोड़ा-सा दो चम्मच घी मिलाकर भर देवें। शक्कर से भरे यह नारियल अपने घर के अंदर या बाहर पीपल के बड़े पेड़ के नीचे ऐसी जगह पर अलग-अलग रखें, जहाँ पर खूब चीटिंया लगनी चाहिए। इस प्रकार से शनिदेव का प्रकोप इस दिन शांत होता हैं और महालक्ष्मी जी शीघ्र प्रसन्न हो जाती हैं। यदि घर में या घर के आस-पास कोई विधवा महिला हो तो दीपावली वाले दिन उसे भोजन, उपहार, वस्त्र आदि श्रद्धा से अवश्य देना चाहिए। ऐसा करने से सुहाग अमर होता है और परिवार में सुख बढ़ता है।

दूसरा उपाय यह हैं कि शनि मंत्र का और श्री यंत्र का अभिषेक पंचामृत से करें। फिर शुद्ध जल में धोकर व पोंछकर, अष्टगंध, केशर, चंदन से यंत्रों को लेपित करें। पुष्प, धूप, दीप, अगरबत्ती से आरती करके प्रसाद, मिष्ठान का अर्पण करें। दोनों यंत्रों के आगे अलग-अलग थाली में एक व्यक्ति की खुराक के बराबर भोजन सजाकर रखें। रात्रि भर भोजन रखा रहने दें। दूसरे दिन वह भोजन श्रद्धा से गाय को खिलाकर आयें।

तीसरा उपाय यह हैं कि दीपावली के दिन शनिदेव की प्रसन्नता व लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्ति हेतु महालक्ष्मी पूजन के मुहूर्त में हवन ज़रूर करें। हवन के लिए घर में ही यज्ञ कुण्ड जैसा बनाकर या किसी लोहे या ताँबे के पात्र में आम की लकड़ी, गोबर के कण्डे जलाकर घर में ही चारू सामग्री तैयार करके हवन करें। ये हवन की चारू सामग्री जो तिल, शक्कर, घी, चावल से मिलकर बनती है, पूरे १०८ बार शनि महामंत्र की इससे आहुति दें और १०८ बार महालक्ष्मी मंत्र की इससे आहुति दें। शनिदेव को बाद में उड़द, तिल, गुड़ से बने पकवान अग्नि में समर्पित करें। लक्ष्मी जी को ३३ बार खीर-पूड़ी की आहुति समर्पित करें। फिर एक-एक करके सूखा नारियल दोनों देवी-देवताओं के मंत्र के साथ पूर्णाहुति के लिए अग्नि में डालें। गुरू गणपति जी के लिए घी की आहुति दें। यह बड़ा प्रभावकारी उपाय है।

दीपावली का पावन त्यौहार “कार्य सिद्धी” एवं “आर्थिक समृद्धि” सम्बन्धित प्रयोगों को सफलता पूर्वक सिद्ध करने के लिए अबुझ मुहूर्त है। छोटे-छोटे प्रयोगों को करके भी हम आर्थिक समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं। आप भी अपने अनुकूल एक या एक से अधिक प्रयोगों को पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ करें। आपकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी और माँ लक्ष्मी की कृपा अवश्य प्राप्त होगी।

प्रयोग ४ : आर्थिक वृद्धि के लिए सदैव शनिवार के दिन गेहूँ पिसवायें तथा गेहूँ में एक मुट्ठी काला चना अवश्य डालें।

प्रयोग ५ : यदि आपके घर में पहली संतान पुत्र के रूप में प्राप्त हो, तो उसका दाँत जब भी गिरे उसे ज़मीन पर गिरने से पहले हाथ से उठाकर पवित्र स्थान पर रख दें और गुरू पुष्य नक्षत्र में दाँत को गंगा जल से शुद्ध करें और उसे धूप-दीप दिखाकर चाँदी की डिबिया में रख लेवें। इस डिबिया को सदैव अपने पास रखें या अपने धन स्थान में रखें। जब बच्चे के जन्म नक्षत्र आवे तो पुन: दाँत को शुद्ध करें और उसे धूप-दीप दिखायें ऐसा प्रत्येक माह करें। आपके पास धन की कोई कमी नहीं होगी।

प्रयोग ६ : यदि आप आर्थिक रूप से बहुत ही समस्याग्रस्त हैं तो २१ शुक्रवार “वैभव लक्ष्मी” का पूजन करें, व्रत करें और एक वर्ष से कम आयु की ५ कन्याओं को खीर एवं मिश्री प्रत्येक शुक्रवार को खिलायें। कुछ समय बाद ही आपकी परेशानी कम होने लगेगी।प्रयोग ७ : यह एक ऐसा प्रयोग हैं जिससे आर्थिक सम्पन्नता स्थायी रूप से प्राप्त की जा सकती है। आप यह प्रयोग दीपावली की रात्रि को करें। इसे आप स्वयं भी कर सकते हैं या किसी योग्य ब्राह्मण से करवा सकते हैं।

दीपावली की रात्रि में एक मोती शंख या दक्षिणावर्ती शंख को दीपावली पूजन के साथ ही पूजें। किसी भी लक्ष्मी मंत्र की पाँच माला या “श्री सूक्त” के सात पाठ करें। शंख को पूजा स्थान पर ही रहने दें। अगले दिन प्रात:काल स्नान करके लाल आसन पर बैठकर अपने सामने शंख को रख कर उसी मंत्र का या “श्री सूक्त” का पाठ करें। प्रत्येक मंत्र के के बाद एक साबुत चावल का दाना शंख में डालें। इस प्रकार आप १०८ बार मंत्र पाठ कर इतने ही चावल के दाने शंख में डालें। इस प्रकार प्रत्येक दिन पाठ करें। यह आपको तब तक करना हैं जब तक कि शंख चावलों से न भर जाये। जिस दिन शंख भर जाये उस दिन शाम को एक सुहागिन, पाँच एक वर्ष से कम की कन्यायें और कम-से-कम एक ब्राह्मण को भोजन कराके और दक्षिणा देकर विदा करें तथा शंख को किसी लाल वस्त्र में बाँधकर अपने धन स्थान में रख दें। जिस दिन यह प्रयोग समाप्त हो, उसके ४० दिन तक शंख को धूप अवश्य दिखायें। इसके बाद शंख को पूजा स्थान या धन स्थान पर रखकर भूल जायें। आपके इस प्रयोग से माँ लक्ष्मी का आपके यहाँ स्थायी वास हो जायेगा। सावधानी यह रखें कि इस प्रयोग की चर्चा किसी से ना करें और जो चावल प्रयोग में लायें वो खण्डित ना हो। ऐसा लगातार चार दिन तक करें। आप पर माँ लक्ष्मी की अवश्य कृपा होगी।

शास्त्रानुसार प्रत्येक पूर्णिमा पर प्रात: १० बजे पीपल वृक्ष पर माँ लक्ष्मी का फेरा लगता है। इसलिए जो व्यक्ति आर्थिक रूप से परेशान हो, वो इस समय पीपल के वृक्ष के पास जाये, उसका पूजन करें, जल चढ़ाये और लक्ष्मी जी की उपासना करे और कम-से-कम कोई भी एक लक्ष्मी मंत्र की एक माला करके आये।

13 फ़रवरी 2012

पूजन के वक्त सावधानियां

कुछ ऎसी गूढ़ बातें हैं जो देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के वक्त ध्यान जरूर दी जानी चाहिए।
  1. घर या व्यावसायिक स्थल में पूजा का स्थान हमेशा ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) दिशा में ही होना चाहिए।
  2. पूजा हमेशा आसन पर बैठकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके ही करनी चाहिए। दीपक अवश्य जलाएं।
  3. दो शिवलिंग की पूजा एक साथ नहीं करनी चाहिए, लेकिन नर्बदेश्वर, पारदेश्वर शिवलिंग और सालिगराम घर में शुभ होते हैं।
  4. धर्म शास्त्रों के अनुसार तुलसी पत्र ऎसे दिन नहीं तोड़ने चाहिए, जिस दिन सूर्य संक्रांति हो, पूर्णिमा, द्वादशी, अमावस्या तिथि हो, रविवार का दिन हो, व्यतिपात, वैधृति योग हो। रात्रि और संध्याकाल में भी इन्हें नहीं तोड़ना चाहिए।
  5. भगवान गणपति के दूब चढ़ानी चाहिए, जिससे भगवान गणपति प्रसन्न होते हैं। जबकि देवी के दूब चढ़ाना निषेध बताया गया है।
  6. घी का दीपक हमेशा देवताओं के दक्षिण में तथा तेल का दीपक बाई तरफ रखना चाहिए।
  7. इसी प्रकार धूपबत्ती बाएं और नैवेद्य (भोग) सन्मुख रखना चाहिए।
  8. दो सालिगराम जी, दो शंख और दो सूर्य भी पूजा में एक साथ नहीं रखें। सालिगराम बिना प्राण प्रतिष्ठा के भी पूजा योग्य है।
  9. तीन गणेश व तीन दुर्गा की भी घर में एक साथ रखकर पूजा नहीं करनी चाहिए। ऎसा करने पर जातक दोष का भागी बनता है।
  10. देवताओं को खंडित फल अर्पण नहीं करने चाहिए। जैसे- आधा केला, आधा सेब आदि।
  11. पूजा के पश्चात देसी घी से प्रज्वलित दीपक से आरती अवश्य करनी चाहिए। यदि दीपक किसी कारणवश उपलब्ध नहीं हो, तो केवल जल आरती भी की जा सकती है। आरती करने से पूजा में संपूर्णता आ जाती है।
  12. देवताओं पर चढ़े हुए जल और पंचामृत को निर्माल्य कहा जाता है, जिसे पैरों से स्पर्श नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे बहुत बड़ा पाप लगता है। इसे किसी पेड़ में या बहते हुए जल में विसर्जित कर देना चाहिए।

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