15 जुलाई 2010

क्या है उपनिषद ? ( What is the Upanishads? )

उप, नि, षद - इनका विश्लेषण किया जाए तो उप अर्थात पास में, नि अर्थात निष्ठापूर्वक और सद अर्थात बैठना। इस प्रकार इसका शाब्दिक अर्थ हुआ - तत्वज्ञान के लिये गुरू के पास निष्ठावान होकर बैठना। ये वेद के अंतिम भाग हैं और इसी कारण से इन्हें वेदान्त भी कहा गया है। उपनिषदों को रहस्यमय ग्रन्थ भी कहा गया है। रहस्यात्मक तत्वज्ञान गुरू और शिष्यों के मध्य चर्चा का विषय रहा है। शिष्यों के तत्वज्ञान से सम्बंधित प्रशनों के उत्तर गुरू देते आए हैं और वे ही प्रश्नोत्तर, गुरू-शिष्य के मध्य के संवाद, इन ग्रंथों में संकलित हैं।

उपनिषदों में ज्ञान काण्ड की प्रधानता है इसलिए इनमें ब्रह्म के स्वरुप, जीव एवं ब्रह्म के आपसी सम्बन्ध और ब्रह्म-प्राप्ति के मार्ग आदि से सम्बंधित ज्ञान का विस्तृत वर्णन है। इसे अध्यात्मा विद्या अथवा ब्रह्म विद्या भी कहते हैं।

वेदों की जितनी शाखाएं हैं उतने ही उपनिषद थे. प्रत्येक का अपना-अपना उपनिषद था। परन्तु आज वे सभी उपनिषत उपलब्ध नहीं हैं। आज तक 108 उपनिषद मिले हैं जिनमें 10 उपनिषद ऋग्वेद से सम्बन्ध रखते हैं। 19 शुक्ल यजुर्वेद के, 32 कृष्ण यजुर्वेद के, 16 सामवेद के और 31 अथर्वेद के बतलाए जाते हैं। वास्तव में उपनिषदों की संख्या बहुत अधिक थी। ये 108 उपनिषद तो उपनिषद साहित्य के सार थे। इन 108 उपनिषदों में भी केवल 12 या 13 ही प्रामाणिक माने जाते हैं।

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