15 जुलाई 2010

तुलसी माला का महत्व ( The importance of Tulsi Mala )

यूं तो मालाएं कई प्रकार की होती हैं। जैसे फूलों की, रत्नों की, बीजों की एवं धातुओं की आदि। कुछ को हम आभूषण के रूप में धारण करते हैं तो कुछ को  मन एवं एकाग्रता के लिये न केवल गले में धारण करते हैं बल्कि हाथों से जाप करने के प्रयोग में भी लाते हैं। ऐसे में अधिकतर लोग तुलसी या रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करते हैं। इसमें भी तुलसी की माला का प्रयोग अधिक होता है। क्यों?

तुलसी की ही माला क्यों ?
तुलसी वैष्णव का धर्म का प्रतीक है। श्री कृष्ण एवं विष्णु को प्रसन्न करने के लिये तुलसी की माला को जप व धारण किया जाता है। कहते हैं श्री कृष्ण की सोलाह हजार पटरानियाँ और आठ पत्निया थीं। उन आठ पत्नियों में से एक पत्नी तुलसी भी थीं। तुलसी कृष्ण को प्रिय थीं इसलिए उपासक, साधक या वैष्णव धर्म प्रेमी तुलसी की माला का प्रयोग करते हैं।

माला धारण करने से लाभ
होंठ व जीभ मिलाकर उपांशु जप करने वाले साधकों को कंठ की धमनियों का प्रयोग करना पड़ता, जिसके लिये अधिक श्रम करना पड़ता है। इस श्रम के चलते साधक को कंठ सम्बंधित रोगों की संभावना भी रहती है। तुलसी अपने गुणों से कंठ को दुरूस्त रखती है तथा इसका स्पर्श व दबाव गले, गर्दन और सीने में एक्यूप्रेशर का काम करता है।

1 टिप्पणी:

  1. बहुत ही उपयोगी जानकारी दी है आपने तुलसी जी के बारे में ....आभार .

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