15 मई 2011

रिश्तों को बचाएं उलझने से

ईषा पढी-लिखी समझदार कामकाजी स्त्री थी। मुकुल भी आदर्श पति था। लेकिन जब भी परिवार के सभी लोग एक-साथ होते, ईषा के लिए वातावरण सुखद नहीं रहता। आशा के विपरीत मुकुल अपने घरवालों के साथ मिलकर ईषा का उपहास करने का एक भी मौका हाथ से न जाने देता। कब तक वह इसे मजाक समझ कर अनदेखा व अनसुना करती। उसका तनाव दिन-प्रतिदिन बढता जा रहा था। ईषा अपवाद नहीं उसके जैसी अनेक पत्नियां हैं जो इन्हीं छोटी-छोटी बातों से बेवजह आहत होती रहती हैं। कई बार ये छोटी-छोटी शिकायतें इतनी बडी हो जाती हैं कि रिश्ते खोखले लगने लगते हैं। छोटे-छोटे मतभेद बडी तकरार या अहं के टकराव का कारण बन जाते हैं। यह जरूरी है कि इन उलझनों के पीछे छिपे कारणों को जाना और समझा जाए। आमतौर पर मतभेदों की मुख्य वजहें निम्न होती हैं:
1. साथी की कार्यशैली पर बार-बार टीका-टिप्पणी करना
2. व्यवहार और व्यक्तित्व में कमियां निकालना
3. तनाव के क्षणों में व्यर्थ कुतर्क करके परेशान करना
4.जब सहयोग की उम्मीद हो, तब व्यस्तता का बहाना बनाकर टालना
5. विचारों, व्यवहार और एटीट्यूड पर जबरन नियंत्रण की कोशिश
6. निष्ठा, दृढता और आत्मीयता पर सवाल उठाना
7. परिवार में योगदान को नगण्य मानना

ऐसे बढाएं कदम
अगर आपको अपने साथ ऐसा महसूस हो रहा है तो सचेत हो जाएं। समस्याएं उग्र रूप लें इससे पहले आपको इनके समाधान की दिशा में प्रयास शुरू कर देने चाहिए। हालांकि इसमें कोशिशें दोतरफा होनी जरूरी हैं। परंतु सामने वाले की ओर से पहल का इंतजार इतना भी न करें कि देर हो जाए। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि संबंधों को जीत-हार की भावना से लडकर बेहतर नहीं बनाया जा सकता। इन्हें बेहतर सिर्फ एक-दूसरे को समझकर ही बनाया जा सकता है। इसलिए इस दिशा में कदम बढाने से पहले अपने और अपने साथी के स्वभाव, उसकी आदतों और जरूरतों को भी समझने की कोशिश करें। साथ ही यह भी मानकर चलें कि दुनिया में कोई भी इंसान पूर्ण नहीं होता। कमियां आपमें भी हो सकती है और अपनी कमियों को स्वीकारना कोई हार नहीं है। बातचीत के दौरान अगर कहीं आपको लगता है कि गलती आपकी है तो उसे स्वीकारने में संकोच न करें।
इससे बेहतर परिणाम तो मिलेंगे ही, दोनों अपने को जीता हुआ महसूस करेंगे।

मतभेद सुलझाने के तरीके
अपनी भावनाओं को प्रकट करें। नम्र बनें, लेकिन दृढता व आत्मसम्मान कायम रखें। बिना उत्तेजित हुए खुद को सही साबित करने की कोशिश करें। शांत, उदार व समझदार बनें। गुस्से से कभी जीता नहीं जा सकता। अगर आप अपनी भावनाओं पर नियंत्रण और भाषा पर काबू रखें तो ऐसे विवाद सुलझाने में सफलता की संभावना बढ जाती है। दोषारोपण के खेल से बाहर निकलिए। दूसरे की गलतियां निकालने से केवल आग में घी डालने का काम होता है। इसलिए सामने वाले की पूरी बात सुनने व समझने की कोशिश करें। कई बार ऐसा करने पर आप समझ पाएंगी कि सामने वाला सही था और कहीं आपसे भी चूक हुई है।
एक-दूसरे की भावनाओं का आदर करें। दूसरे के प्रति आदर भाव एक सकारात्मक रवैया है, जो दुश्मन को भी अपना बना देता है। जब भी कभी मतभेदों के बीच आदर का भाव दिखता है, संबंधों के बीच तनाव कम होने लगता है। अपनी शिकायतों और इछाओं के बारे में स्पष्ट रहिए। भावनात्मक सहारे के लिए निरर्थक आरोप मत लगाइए। अपने विचारों की दिशा सही रखिए। अव्यावहारिक निर्णयों में कूदने की भूल न करें। पुराने घावों को भरने की कोशिश करिए न कि नए घावों को और बढाने का प्रयास करें। अनादर से दूरियां और बढती हैं। समझौते की ओर कदम बढाइए। यदि आपको लग रहा है कि आपके आसपास के लोग केवल आपकी गलतियों को ही इंगित कर रहे हैं या निष्पक्ष फैसला नहीं कर रहे तो आप किसी अन्य व्यक्ति को माध्यम बना अपनी बात रख सकती हैं।
ये संबंध दीर्घ और सुखद हों, यह हमेशा याद रखें। माफ करना सीखें- यह भूलने से भी कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।

भावनाओं पर नियंत्रण
मैरिज कांउसलर डॉ.अनु गोयल कहती हैं कि मतभेद ऐसे अवरोधक हैं जो हर किसी के रास्ते में कभी न कभी किसी न किसी रूप में जरूर सामने आते हैं। यह महत्वपूर्ण है कि आप इनसे दूर रहने व इनका हल निकालने की कोशिश करें न कि इन्हें बढाने या आग में घी डालने का। ख्ाुशी का वातावरण बनाए रखने की कोशिश करें। ऐसे अपवाद कम ही देखने को मिलेंगे जब कोई मतभेदों के बीच शांति न चाहता हो। कई बार इनसे बचने के लिए माफ करना ही एकमात्र हल होता है। यही रास्ता है जो तमाम तकरारों और मतभेदों के बाद भी आपको खुशी प्रदान कर सकता है। पर यह सब तभी संभव है जब पहले आप अपने डर, असुरक्षा और कमजोरियों पर विजय प्राप्त कर चुकी हों। अन्यथा यह तेरा वो मेरा, यह गलत वह सही, तुम ऐसे मैं वैसी जैसे विचार मतभेदों को ही जन्म देते हैं। ऐसे में सबसे प्रभावी हल है, माफ करना या भूल जाना। यह सामान्य राय है कि आपको बहुत सी हिम्मत, विश्वास और प्रयास चाहिए अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखने के लिए। लेकिन ऐसा हर समय नहीं होता। यह ठीक है कि इमोशंस पर नियंत्रण के लिए आपको हिम्मत जुटानी पडती है और विशेष प्रयास भी करने पडते हैं, लेकिन इससे ज्यादा हिम्मत जुटानी पडती है इन सबको सहने के लिए। कडवाहट को भुलाने में ही समझदारी है। बेहतर संबंधों के लिए कोशिशें हमेशा जारी रखें। इस बीच अपने को समय देना न भूलें। मन शांत व सुखी होने पर ही आप सही दिशा में सोच पाएंगी।

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