30 जनवरी 2011

तांत्रिक क्रियाओं तथा आत्माओं का सपनों पर प्रभाव

आदमी के मन को तथा आत्मा को जानना एक अध्यात्मिक विषय है। अभी विज्ञानिकों ने मात्र शरीर के बारे में ही जाना है। इस लिए बहूदा यह भ्राँति बनी रहती है कि क्या जो हमारे वेद शास्त्र या धर्म-ग्रंथ कहते हैं, वह अकारण ही कहा गया है? इस वि्षय पर आज का आधुनिक कहे जानें वाला समाज विश्वास क्यूँ नही कर पाता? उसे क्यों लगता है कि यह अंधविश्वास है? हम आयुर्वेद में कही बातों को तो मान लेते हैं, लेकिन अध्यात्मिक विषय पर कही बातों को स्वीकारनें से हम क्यों इंन्कार करते हैं?...इस विषय पर किसी अन्य पोस्ट पर चर्चा करेगें। पहले हम तांत्रिक क्रियाओं तथा आत्माओं का सपनों पर क्या प्रभाव पड़ता है इसके बारे में जानें।

जो लोग धर्म-कर्म पर विश्वास रखते हैं वह जानते हैं कि हम जैसे धर्म भीरू कहे जाने वाले लोग जरा -सी परेशानी आ जाने पर झट से किसी भी देवी-देवता या अपनें इष्ट देव के प्रति मन्नत मान लेते हैं, कि यदि हम इस से निजात पा गए तो आप को प्रसाद चड़ाएंगें। या फिर किसी कार्य के पूरा होनें पर जागरण, कीर्तन, या भोजन आदि करवाएंगें।

लेकिन इस भाग -दोड़ की जिन्दगी में कई बार,जो मन्नत हम मानते हैं वह भूल जाते हैं। उस समय हम में से कुछ लोगों को सपनें आनें लगते हैं। हमारे पूर्वज सपनों में आ आ कर किसी चीज की माँग करते हैं। या फिर डरावनें सपनें आनें लगते हैं। कुछ लोग यह कह सकते हैं कि यह इस लिए होता है की हमारे अचेतन मन में वह बात बैठी रहती है, जो अवसर पा कर सपनों के रूप में हमें दिखाई देनें लगती है।यह बात भी सही हो सकती है,लेकिन अध्यात्मिक विज्ञान बहुत जटिल है इस लिए कुछ भी दावे के साथ नही कहा जा सकता।

एक दूसरा कारण किसी तांत्रिक द्वारा किया गया कोई टोना-टोटका जो की अकसर आप चौराहों पर या किसी अंधेरी जगह, पीपल के या किसी अन्य पेड़ के नीचे,किया हुआ देखते हैं। उन किए हुए टोटकों पर गलती से पैर पड़ जानें या किसी प्रकार से निरादर हो जानें के कारण उस टोट्के के प्रभाव के कारण भी रात को डरावनें या अजीबों गरीब सपनें आनें लगतें हैं।

तीसरा कारण यह भी हो सकता है कि किसी द्वारा आप पर कोई तांत्रिक क्रिया की गई हो तो ऐसे में भी आप को इस तरह के सपनें आ सकते हैं। तथा अतृप्त आत्माओं के आस-पास होनें पर भी ऐसे सपनें आते हैं।


कई बार पूर्व जन्म के किए कृत्यों के कारण भी ऐसे सपनें आते हैं। बहुत से लोग इस बात को भी मानते हैं। ज्यादा तर देखा गया है कि अध्यात्मिक व बहुत अधिक संवेदनशील व्यक्तियों को ही अधिकतर ऐसे सपनें आते हैं। इस तरह से और भी बहुत कारण हो सकते हैं जिस का अभी हमें बिल्कुल भी पता नही है, जो हमारी नींद मे सपनॆ बन कर आते हैं।

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