14 मई 2010

पति-पत्नी की दोस्ती असंभव?

श्रीमती शालिनी एक परिपक्व उम्र की महिला हैं। पिछले कुछ दिनों से वे किसी तनाव से गुजर रही थीं। वे चूँकि गृहिणी हैं सो कारण भी कुछ घरेलू ही थे। नौकरीपेशा महिलाओं के साथ तो दोहरी समस्याएँ रहती हैं। यद्यपि मेरी उनसे बहुत अंतरंग बातें नहीं होती थीं लेकिन इस बार वे जैसे अपना मन ही खोलकर रख गईं। हुआ यूँ कि घर में छोटी-मोटी बातों के चलते एक दिन उन्हें कुछ उदास देखकर उनके ‍पति ने पूछ लिया, 'क्या बात है? कुछ परेशान हो क्या?' आँखों में तैरते आँसुओं को रोकते हुए उन्होंने एक-दो समस्याएँ अपने पति को बताई।

साथ ही कहने लगीं - 'मैं बहुत परेशान हूँ। समझ में नहीं आता इस समस्या से कैसे निपटूँ?' पति ने आम आदमी की तरह जवाब दिया - 'तुम औरतें सोचती बहुत हो। इस कान से सुनो उस कान से निकाल दो या अपनी किसी दोस्त के साथ शेयर करो।'
'तुम्हें तो पता है मेरी ऐसी कोई घनिष्ठ मित्र नहीं और मेरे सबसे अच्छे दोस्त तो तुम ही हो'
'मैं और दोस्त? हो ही नहीं सकता। नेव्हर।'
'मैं तो सोचती थी, हम दोनों एक-दूसरे के अच्छे दोस्त हैं।'
'ऐसा भ्रम न पालना। पति-पत्नी एक-दूसरे के दोस्त हो ही नहीं सकते।
कई बातें ऐसी होती हैं जो मैं तुम्हें नहीं बता सकता और बताता भी नहीं हूँ। लेकिन अपने दोस्त को बता सकता हूँ।

छनाक की आवाज भी नहीं हुई और बगैर कोई आवाज किए पत्नी का दिल टूटा। एक ही झटके में उसका मोह भंग हो गया। इतने वर्षों के वैवाहिक जीवन में वह यही समझती थी कि उसके सच्चे दोस्त उसके पति हैं। और वह स्वयं उनकी मित्र। अब इस उम्र में क्या वे दोस्त ढूँढ़ेंगी, जिसे वह अपने मन की सारी बातें कह सकें? और वे तो पिछले कई वर्षों से अपने मन की सारी बातें अपने पति से कह लेती थीं यहाँ तक कि स्त्रियोचि‍त निंदा रस से भरी बातें भी वे अपने पति से कर लिया करती थीं। (हालाँकि ये बात उन्हें अब उन्हें ध्यान आ रही है कि पतिदेव हाँ, हूँ से ज्यादा जवाब नहीं देते थे।)

अपनी बात का ऐसा अप्रत्याशित जवाब पाकर वे एकाएक ही मानो सुन्न होकर चुप्पी लगा गई। लेकिन अनायास ही मेरे सामने एक प्रश्न मुँह बाए खड़ा हो गया। क्या सचमुच पति-पत्नी दोस्त नहीं हो सकते? क्या पत्नी अच्छा भोजन बनाकर पेट तक व प्रेम प्रदर्शित कर हृदय तक ही पहुँच सकती है? क्या पति-पत्नी दोस्त बनकर एक-दूसरे की दिमागी उलझनों को नहीं सुलझा सकते? दोस्ती का मतलब क्या है? यही न कि दो दोस्त एक-दूसरे के दुख दर्द को बाँटें। एक-दूसरे की खुशी में खुश हो व एक-दूसरे की उन्नति को देखकर गर्व करें। यही बात पति-पत्नी के साथ होती है। फिर दोस्ती न होने का क्या कारण है?

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