21 जनवरी 2011

पुनर्विवाह के बाद कैसे करें एडजस्टमेंट ?

अपने दो साल के कडवे, त्रासदीपूर्ण और दर्द भरे दाम्पत्य जीवन से हताश अनुभव को अंत में जब तालाक मिल गया तो उसने राहत की सांस ली। लगा जैसे काल कोठरी में रहने के बाद उसे आजादी मिल गई और वह भी अब खुली हवा में सांस ले सकती है। शादी से उसका विश्वास उठ चुका था। अब बस वह अपनी नौकरी के साथ अकेले खुश रहना चाहती थी। लेकिन साल बीतते-बीतते उसे तन्हाई खलने लगी। इसी बीच उसके मनमोहक व्यक्तित्व से प्रभावित हो कई पुरूषों ने उसे पुनर्विवाह के लिये प्रपोज किया. माता-पिता ने भी बहुत समझाया, लेकिन वह अपनी अतीत की पीड़ादायक यादों से उबर नहीं पा रही थी। कहीं इस विवाह के बाद भी वैसा ही हुआ तो? पहली शादी में भी तो शुरू-शुरू में सब कुछ ठीक चल रहा था। लेकिन कुछ दिनों बाद ही सब कुछ बिखरने-सा लगा था। सहेलियां समझातीं कि सब पुरूष एक से नहीं होते और न ही सब जगह परिस्थितियाँ एक-सी होती हैं। लेकिन आखिर क्या गारंटी कि इस दूसरी शादी में फिर से वही सारी परेशानियां न हों।

आसमान और भी हैं...
इस तरह के अंतर्द्वन्द और प्रश्न प्रत्येक उस महिला तथा पुरूष के सामने खड़े होते हैं, जो तलाक अथवा वैधव्य या विधुरता के बाद पुनर्विवाह कि सोचते हैं कुछ लोग तो अकेले ही जीवन गुजारना पसंद करते हैं और वे कमोबेश अपने फैसले से संतुष्ट भी रहते हैं। किन्तु कुछ के लिये बिना किसी साथी के जीवन गुजारना कठिन हो जाता है और वे फिर से घर बसाना चाहते हैं। प्रसिद्ध लेखिका शोबा डे ने अपनी पुस्तक स्पाउस में लिखा है- 'जिन्दगी में सबको दूसरा मौक़ा जरूर मिलना चाहिए और जब यह सामने हो तो इसे फ़ौरन ले लेना चाहिए'
वास्तव में यदि एक बार विवाह असफल होता है अथवा असमय ही जीवनसाथी का साथ छूट जाता है तो प्रत्येक व्यक्ति को हक़ है कि वह दुबारा विवाह करके नए सिरे से अपनी जिन्दगी शुरू करे।

पुनर्विवाह से पहले जरूरी है प्लानिंग
यों तो विवाह नाम ही समझौते यानी कि एडजस्टमेंट का है, किन्तु पुनर्विवाह में ये बातें अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि पहली बार विवाह करने पर जहाँ एक-दूसरे की बहुत-सी कमियाँ तथा अवगुण दाम्पत्य के शुरूआती खुमार, दैहिक आकर्षण तथा सेक्स के नए-नए अनुभवों के बीच काफी हद तक दब जाती हैं तथा अनदेखी कर दी जाती है, वहीं पुनर्विवाह के मामले में इस तरह की गुंजाइश कम ही रहती है।

दोबारा विवाह करते समय पहले विवाह के कडवे अनुभव उससे जुडी यादें अपने साथी की प्रत्येक गतिविधि को संदेह के घेरे में रखने लगते हैं। अतः यदि आप दुबारा घर बसाने जा रहे हैं तो अपने भावी वैवाहिक जीवन की सफलता के लिये पहले से कुछ प्लानिंग जरूरी है।

सबसे पहले अपने मन में यह बात बैठा लें कि परफेक्ट मैरिज अथवा परफेक्ट जीवनसाथी जैसी कोई चीज दुनिया में नहीं होती। कोई भी शादी चाहे वह कितनी भी अच्छी और कितनी भी सफल क्यों न हो, कमियाँ और दोषों से रहित नहीं होती।

अधिक पुनर्विवाह स्वेच्छा से न करके जरूर अथवा मजबूरीवश किये जाते हैं, अतः विवाह से पहले ये अवश्य जांच लें कि आप एक-दूसरे की जरूरतों पर खरा उतरने के योग्य हैं अथवा नहीं, मसलन यदि आप निसंतान हैं और किसी बच्चे के पिता से शादी करने जा रही हैं तो अपने माँ की भूमिका के लिये अपने आपको तैयार पाती हैं या नहीं।

आप जिससे शादी करने जा रहे हैं, उनके भी बच्चे हैं और आपके भी हैं तो एक-दूसरे के बच्चों की सहमती लेना जरूरी है।

आप जिनसे विवाह करने जा रही हैं, वे तलाकशुदा हैं तो पहले विवाह की असफलता के कारणों की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। यदि पति के कमियों की वजह से पत्नी ने तलाक की पहल की है तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए। यदि पत्नी कि कमियों की वजह से पति ने तलाक लिया है तो आप उनकी पूर्व पत्नी की कमियों के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर लें। देखिये, कहीं आप में भी वही सब कमियाँ तो नहीं।

यदि आप दोनों तलाकशुदा हैं तो एक-दूसरे के तलाक की कागजी कार्यवाही की पूरी जांच-पड़ताल अवश्य कर लें। क़ानून के दायरे में हर पहलू जायज हो तभी विवाह की सहमती दें।

कैसे बैठाएं तालमेल पुनर्विवाह के बाद
यह सच है कि दूसरी शादी को कामयाब बनाने के लिये बहुत मेहनत तथा गंभीरता से प्रयास करने पड़ते हैं, क्योंकि पुनर्विवाह में सिर्फ दो व्यक्ति ही नहीं जुड़ते, बल्कि उनके साथ उनका पहला वैवाहिक अतीत भी जुड़ता है। अतः वैवाहिक जीवन की दूसरी पारी की शुरूआत ठोस धरातल पर करने के लिये आपको बहुत समझदारी से काम लेना होगा।

कहावत है कि दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है, अतः यदि आप तलाकशुदा हैं तो अपनी पिछली असफलताओं से सबक लेकर नई जिन्दगी में बहुत संभल-संभल कर कदम रखना होगा।

एक-दूसरे के पहले विवाह की असफलताओं के कारणों को जानकार उन्हें दूर करने का प्रयास करें। पिछली गलतियों को फिर दोहराने की भूल न करें।

यदि आप विधवा अथवा विधुर हैं तो ध्यान रहे कि आपके वर्तमान जीवन के बीच आपका अतीत कहीं भी न आए हालांकि यह भी मुश्किल है कि जिस साथी के साथ आपने जीवन के इतने साल गुजारे हैं, उनका जिक्र भी न आए किन्तु यदि ऐसा होता है तो एक-दूसरे की यादों के प्रति सम्मान तथा सद्भावना बनाए रखें। यदि आपका पहला दाम्पत्य जीवन सुखमय था तो सफल नुस्खे का प्रयोग अपने वर्मान जीवन में अवश्य करें।

पुनर्विवाह के समय यदि एक दूसरे के बच्चे भी हैं तो परस्पर एक-दूसरे के बच्चो को समझाने और स्वीकार करने का समय दें। एकदम से उनसे एक ईमानदार माँ अथवा पिता की भूमिका की उम्मीद न पालें।

एक विवाह टूटने अथवा जीवनसाथी छूटने से व्यक्ति की दैहिक मांगों में कोई कमी आना जरूरी नहीं। अतः सेक्स के मामले में कोई पूर्वाग्रह न पाएं और दूसरे की इच्छा का पर्याप्त ध्यान रखें।

अधिकांशत पुनर्विवाह कंडीशनल होते हैं, अतः सेक्स को लेकर अधिक डिमान्डिग होने से भी बचें। पुनर्विवाह को लेकर कोई अपराधबोध न पालें और अपने आपको बेचारा बनाकर न पेश करें आत्मविश्वास और एक-दूसरे पर विश्वास बनाए रखें।

अब आपके सामने एक नई और खूबसूरत दुनिया बांहे पसारे खडी है, उसका स्वागत करें और जीवन का आनंद उठायें।

1 टिप्पणी:

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