01 फ़रवरी 2012

गरीबी को मिटाने की ये बाते सिर्फ बाते हैं

गरीबी को मिटाने की ये बाते सिर्फ बाते हैं,
जो खुद पैसों के भूखे है, वो क्या गरीबी मिटायेगें,
गरीबो का लहू तो इनकी गाड़ियो का डीजल है,
गरीबी मिट गई तो, ये क्या रिक्शा चलायेगें।
नदी के घाट पर भी अगर नेता लोग बस जाए,
तो प्यासे लोग एक-एक बूंद पानी को तरस जाए,
गनीमत है मौसम पर नेताओं की हकूमत चल नहीं सकती,
नहीं तो सारे बादल इन कमीने नेताओ के खेतो में बरस जाये।

॥ वन्दे मातरम् ॥
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" 1945 में "विन्सटन चर्चिल" ने 'ब्रिटिश पार्लियामेंट' में कहा था की भारत आज़ाद होने लायक देश नही है क्यूंकी अगर हम भारत को आज़ादी देंगे तो भी ये लोग सालों तक मानसिक गुलाम रहेंगे। ये लोग मानसिकता में अंग्रेज़ हो चुके हैं सिर्फ शरीर से दिखने में भारतीय हैं, इनकी आत्मा भी अंग्रेज़ियत वाली हो चुकी है इसलिए ये लोग बार बार अपने ही देश और लोगों का अपमान कराएंगे।"

ये जो मानसिक गुलामी है अपने बारे में गलत सोचने की, अपने को उल्टा/छोटा मानने की, हमारी काबिलियत नही है, दुनिया हमसे बहुत आगे निकाल गयी है, हम टेक्नालजी में बहुत पिछड़े हैं......ये एक तरह की भावना है, जिसको "Inferiority Complex" कहा जाता है।

हमारे महान क्रांतिकारियों ने हमें "अंग्रेजों और गुलामी" से आज़ादी दिलाई, अब हमें खुद को जल्दी से जल्दी "अंग्रेज़ियत और मानसिक गुलामी" से आज़ाद करना चाहिए।

॥ वन्दे मातरम् ॥

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ये जितने घाव हैं सीने पे सब फूलों के गुच्छे हैं,
हमें पागल ही रहने दे हम पागल ही अच्छे हैं।

......ये पंक्तियाँ 'राम प्रसाद बिस्मिल जी' द्वारा कही गयी थीं।

॥ वन्दे मातरम् ॥
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विश्व के सबसे प्राचीन देश:
* भारतवर्ष : 8.5 करोड़ वर्ष पुराना
* इटली (रोम) : 4500 वर्ष पुराना
* जर्मनी : 3000 वर्ष पुराना
* फ़्रांस : 2500 वर्ष पुराना
* ब्रिटेन : 2000 वर्ष पुराना
* यूएसए (अमेरिका) : 250 वर्ष पुराना।
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जीवन की सच्चाई:
जब व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसको जलाने के बाद वो मात्र '20 ग्राम मिट्टी' में बदल जाता है और उस मिट्टी में 8 रुपये का कैल्सियम, 2-2.5 रुपये का फास्फोरस और 10-11 रुपये के अन्य माइक्रो न्यूटरिएण्ट्स होते हैं मतलब मरने के बाद आदमी की 'कीमत 20 रुपये' से ज्यादा नहीं है। इसलिए विलासिता को छोडकर अपना राष्ट्रधर्म निभाएँ जिससे जिस मिट्टी में पैदा हुए हैं, शायद उसका थोड़ा सा भी कर्ज़ चुका सकें।

॥ वन्दे मातरम् ॥
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एक आदमी एक दिन में इतनी ऑक्सीजन लेता है, जितने में 3 ऑक्सीजन के सिलेंडर भरे जा सकते हैं। एक ऑक्सीजन सिलेंडर की कीमत होती है रु.700 इस तरह हम देखते हैं कि एक आदमी एक दिन में रु.2100 की ऑक्सीजन लेता है और 1 साल में रु.7,66500 कि और अपने पूरे जीवन (अगर आदमी कि उम्र 65 साल हो) में लगभग रु. 5 करोड़ का ऑक्सीजन लेता है जो कि पेड़-पौधों द्वारा हमें फ्री में मिलती है और हम उन्ही पेड़ पौधों को समाप्त कर रहे है।

अब भी समय है, दोस्तों संभल जाओ, अधिक से अधिक पौधेरोपित करो और प्राण वायु मुफ्त पाओ।
॥ वन्दे मातरम् ॥
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