05 जुलाई 2010

क्यों है गंगा जल पवित्र

गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक जिस तीर्थ से भी गंगा प्रवाहित होती है। वहां आने वाले तीर्थयात्री गंगा के प्रति आस्था के कारण वापसी में अपने साथ पवित्र गंगाजल ले जाना नहीं भूलते। सनातन परंपराओं में गंगाजल का उपयोग धार्मिक, मांगलिक कर्मों में पवित्रता के लिए किया जाता है। शिशु जन्म या मृत्यु के बाद के कर्मों में इसी गंगा जल से गृह शुद्धि की परंपरा है। साथ ही मृत्यु के निकट होने पर व्यक्ति को गंगा जल पिलाने और दाह संस्कार के बाद उसकी राख को गंगा के पवित्र जल में प्रवाहित करने की भी पंरपरा रही है। क्योंकि धार्मिक मान्यताओं में गंगा पापों का नाश क र मोक्ष देने वाली देव नदी मानी गई है। किंतु गंगा मात्र धार्मिक दृष्टि से ही पवित्र नहीं है, बल्कि विज्ञान ने भी गंगा के जल को पवित्र माना है। जानते हैं गंगा के जल की पवित्रता के पीछे छुपे वैज्ञानिक तथ्यों को।
गंगा जल की वैज्ञानिक खोजों ने साफ कर दिया है कि गंगा जल का धार्मिक महत्व ही नहीं है वरन इसका वैज्ञानिक महत्व भी है। क्योंकि गंगा अपने उद्गम स्थल से लेकर मैदानों में आने तक प्राकृतिक स्थानों, वनस्पतियों से होकर प्रवाहित होती है। अत: इस जल में औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसके साथ ही वैज्ञानिक अनुसंधानों में यह पाया गया है कि गंगाजल में कुछ ऐसे जीव होते हैं जो जल को प्रदूषित करने वाले विषाणुओं को पनपने ही नहीं देते बल्कि उनको नष्ट भी कर देते हैं। जिससे गंगा का जल लंबे समय तक प्रदूषित नहीं होता है। इस प्रकार के गुण अन्य किसी नदी के जल में नहीं पाए गए हैं। इस तरह गंगा जल धर्म भाव के कारण मन पर और विज्ञान की नजर से तन पर सकारात्मक प्रभाव देने वाला है।

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