02 दिसंबर 2009

शिवाजी को धर्य से मिली अपने लक्ष्य में सफलता


बीजापुर के शासक आदिल शाह ने शिवाजी के बढ़ते पराक्रम को ध्वस्त करने की गरज से कई सूरमाओं को उन्हें परास्त करने भेजा। अंत में युद्ध करने आए अफजल खां को भी वीर शिवाजी ने मार गिराया।
अनेक लोग काम करते समय बहुत उतावले हो जाते हैं। वे चाहते हैं कि जो भी होना हो, तुरंत हो जाए। लेकिन व्यक्ति के ध्यान में सदा अपना लक्ष्य और सफलता ही रहनी चाहिए। इस संबंध में शिवाजी का एक प्रसंग है- बीजापुर के शासक आदिल शाह ने जब देखा कि शिवाजी अपना साम्राज्य बढ़ाते जा रहे हैं तो उसने कई सूरमाओं को उन्हें परास्त करने हेतु भेजा।
पर जो भी गया, वह या तो मारा गया या फिर हारकर लौटा। परेशान होकर आदिल शाह ने अपने सबसे वीर योद्धा अफजल खां से शिवाजी को जिंदा या मुर्दा लेकर आने को कहा। अफजल खां विशाल सेना लेकर चल दिया।
मार्ग में उसने सैकड़ों मंदिरों को ध्वस्त कर दिया। महिलाओं को अपमानित किया। खेतों में खड़ी फसलों में आग लगा दी। लोग शिवाजी से जाकर शिकायत करते, पर वे शांत भाव से सुनते रहते। इससे अफजल का साहस और बढ़ गया। उसने पंढरपुर का प्रसिद्ध मंदिर और शिवाजी की कुलदेवी का मंदिर भी तोड़ डाला। लोग त्राहि-त्राहि करने लगे।
कुछ लोग तो शिवाजी को भला-बुरा भी कहने लगे। पर शिवाजी ने धर्य नहीं खोया। वे अपनी योजना से चल रहे थे। उन्होंने ऐसा वातावरण बनाया कि अफजल खां स्वयं ही पहाड़ी पर स्थित प्रतापगढ़ के किले तक आ पहुंचा। वहां शिवाजी ने उस पर आक्रमण करके उसे यमलोक पहुंचा दिया। केवल इतना ही नहीं, किले के आसपास छिपे सैनिकों ने उसकी सेना के एक आदमी को भी जीवित नहीं छोड़ा।
वस्तुत: यदि शिवाजी अपना धर्य खो देते तो वे सफल नहीं होते। इसलिए ध्यान हमेशा अंतिम लक्ष्य और सफलता की ओर ही होना चाहिए।

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