27 सितंबर 2011

बीती ताहि बिसारि दे, आगे की सुधि लेहु


देखें मुस्कुरा कर..
उन आंखों में झांक के देखो तो सही, प्यार झलकता है कि नहीं।
एक कदम बढा के देखो तो सही, राह मिलती है कि नहीं।
हाथ बंटा के देखो तो सही, काम होता है कि नहीं।
एक बार मुस्कुरा के देखो तो सही, दुनिया अपनाती है कि नहीं।
-योग गुरू स्वामी रामदेव
 
अतीत की यादों से मुक्त रहें। बीते हुए समय से सीख लेकर जीवन में आगे बढें। यह संकल्प लें कि समाज में जरूरतमंद लोगों की मदद कर देश की उन्नति में भागीदार बनेंगे। साथ ही, विश्व और घरेलू हिंसा को दूर करने करने का लक्ष्य बनाएं। स्वयं को तनावमुक्त रखने के लिए अपनी व्यस्त दिनचर्या में कुछ समय ध्यान, प्राणायाम, योग, प्रार्थना, संगीत और मौन के लिए भी निकालें। आत्मा समुद्र है, तो मन उसकी लहर और शरीर किनारा। इस प्रकार मन, आत्मा और शरीर तीनों आपस में जुडे हुए हैं। जैसे हम अपने शरीर को पानी से स्वच्छ करते हैं, वैसे ही अपने मन को ज्ञान से और आत्मा को ध्यान या निस्वार्थसेवा से साफ करते रहना चाहिए।
-श्री श्री रविशंकर

अंतर्मन को जगाएं
हम सभी ढोंग, पाखंड, जातिवाद, घिसे-पिटे अंधविश्वास आदि से घिरे हुए हैं। नववर्ष के अवसर पर भारत को एक नया रूप देने, अपने लिए नया भविष्य तय करने का हम सभी संकल्प लें। सभी प्रकार के अविश्वास से बाहर निकलें, क्योंकि यह हमें अंधेरे की ओर ले जाता है। इसके लिए हमें एक लक्ष्य निर्धारित करना होगा। जैसे,

चारित्रिक या अध्यात्मिक उत्थान
बीमारी और बुराइयों से निकलकर देश को आर्थिक समृद्धि प्रदान करने का लक्ष्य। हम सभी जानते हैं कि हमारा मस्तिष्क, शरीर और आत्मा तीनों आपस में जुडे हुए हैं। मन अशांत होने पर इन तीनों में संघर्ष शुरू हो जाता है और हम गलत दिशा की ओर जाने लगते हैं। योग इन तीनों में संतुलन स्थापित करता है। आधे या एक घंटे का योग तीनों में तारतम्य बैठा सकता है। यदि आप दिन भर की भागदौड के बाद तनाव में आ जाते हैं, तो इतना जान लें कि शांति का संबंध अंतर्मन से है।

यदि हमारा अंतर्मन शांत है, तो अमीरी-गरीबी का इस पर कोई फर्क नहीं पडता है। इसलिए हम अपने अंतर्मन को जगाएं। इसके लिए हमें कुछ उपायों पर ध्यान देना होगा।

सृजन, साकारात्मकविचार, उत्पादन और गुणात्मक वृद्धि पर ध्यान देना होगा। सभी लोगों को समान रूप से सम्मान और समृद्धि मिले, यही हमारा संदेश है। -स्वामी रामदेव -नए संकल्प लें बीती ताहि बिसारिदे, आगे की सुधि लेहु।जो बीत गया, उसे सिर्फ याद रखें और आगे कार्य करते रहें। भगवान बुद्ध ने भी अपनी देशना में कहा है कि व्यक्ति को अपनी पिछली बात को भुलाकर नया संकल्प लेना चाहिए। वर्ष 2012 को निष्ठा वर्ष मानते हुए कर्म को पूजा बनाएं, ताकि जीवन की दशा और दिशा दोनों सुधर सके।

लक्ष्य निर्धारित न करें, क्योंकि यह स्वयं अपने आप बन जाता है। मनुष्य प्रगति पथ का पथिक है, उसे वांछित लक्ष्य पाना है, तो विश्वास का दीप जलाना होगा। हमें किसी एक लक्ष्य को पाकर रुक नहीं जाना चाहिए, बल्कि उस सीमा के भी पार जाना चाहिए, जिसके आगे कोई और राह न हो। हम दौड-भाग की जिंदगी में अपनी पुरानी बैट्री बदलना भूल जाते हैं। महर्षि पतंजलिने कहा है कि प्रतिदिन अपने मन को नए तरीके से तैयार करो। इसके लिए उन्होंने रेचन क्रिया करने की सहज विधि बताई। इसके द्वारा आप मन में जमा कूडा-करकट को बाहर निकाल सकते हैं। अपने अंतर्मन को प्रदूषण रहित करते हुए संरचनात्मककार्य करने का संकल्प लें। मन की शांति ढूंढने से नहीं, बल्कि कामनाओं को शांत करने से मिलती है।

दिन भर का तनाव खत्म करने के लिए आप कुछ क्षण के लिए निर्विचारहो जाएं, शून्य में खो जाएं, यानी ध्यान में उतरें। यदि आत्मतत्व जाग्रत हो जाए, तो यह शरीर और मस्तिष्क दोनों को नियंत्रित कर सकता है। नए साल पर हम लोगों को संदेश देते हैं, रहें पृथ्वी पर, लेकिन आंखें रखें अंतरिक्ष पर। हर कार्य सकारात्मक सोच के साथ करें।
-सुदर्शन महाराज

करें मंथन
पुराने साल के विदा होते ही आप अपने अवगुणों, कमियों को भी अलविदा कह दें। यह सच है कि नए साल के अवसर पर हम कई रिजॉल्यूशंसलेते हैं, लेकिन जनवरी की दस तारीख तक आते-आते उन सभी को भूल जाते हैं और पुरानी गलतियों को दोहराने में लग जाते हैं। समय के प्रवाह में हम अपने आपको जितना जागरूक, जितना चैतन्य बना सकते हैं, उतनी ही गहराई से हम अपने जीवन की अमूल्य निधि को शुभ प्रयोग में ला सकते हैं।

जब तक आप मन में यह मंथन नहीं कर पाएंगे कि वर्तमान लक्ष्य को कितना समझदार और जागरूक तरीके से जिया जाए, तब तक अपने लिए कोई लक्ष्य निर्धारित करने का कोई मतलब ही नहीं है। अगर हम अपने इस वर्तमान पल को बदल सकें, तो तय है कि हमारे अगले आने वाले पल, दिन, हफ्ते, महीने, साल बिल्कुल वैसे ही
विवेकपूर्ण बीतेंगे, जैसा कि यह वर्तमान का पल।

यदि दिन भर की भागदौड के बाद हल्का होना चाहते हैं, तो आप एक लंबी गहरी सांस लें और उसे रोक लें। फेफडों में शक्ति और मन में धैर्य के अनुसार श्वास को रोकें। एक समय ऐसा आएगा कि आपके लाख सोचने पर भी श्वास रुकेगा नहीं, वह निकल ही जाएगा। पाठकों को मेरा संदेश है कि वर्तमान में होश से जियो।
जो होश से जीता है, वह मस्त होकर जीता है।

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