27 जुलाई 2010

सुषमा स्वराज ( Sushma Swaraj )


र्वश्रेष्ठ सांसद के ख़िताब से नवाजी गईं सुषमा स्वराज लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष जैसे प्रतिष्ठित और महत्वपूर्ण पद हैं। इस से पहले वे अपने छात्र जीवन में एस.डी। कालेज में 1973 में 3 बार सर्वश्रेष्ठ कैडेट होने का भी गौरव हासिल किया था। 1977 में जब वे पहली बार हरियाणा  की  श्रममंत्री  बनाई गई  थीं, तब उन की उम्र महज 25 साल थी। कम उम्र में मंत्री बन जाने का उन का रिकॉर्ड अभी भी कायम है। विशेष दम्पती होने का रिकॉर्ड भी लिम्का बुक आफ रिकार्ड्स में उन के नाम दर्ज है।

14 फरवरी के दिन जब सारी दुनिया वैलेंटाइन दे मना रही होती है तब सुषमा स्वराज अपना जन्मदिन मनाती हैं। 1952 में इसी दिन अम्बाला छावनी में वे जन्मी थीं।

बुलंद हौसले
जयप्रकाश नारायण में खासी प्रभावित सुषमा स्वराज कैबिनेट मंत्री भी रहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री भी बनीं और भारतीय जनता पार्टी की तरफ से पहली महिला मंत्री बनने का गौरव भी उन्हें हासिल है। उन के पति कौशल स्वराज भी राजनीति से जुड़े  रहे हैं। वे राज्यसभा के सदस्य और मिजोरम के राज्यपाल रहे हैं।

सुषमा स्वराज में आखिर वह कौन सी बात है, जो उन्हें सफल बनाती है? इस का जवाब ढूंढ पाना आसान काम नहीं है। वे शालीन हैं, अच्छी वक्ता हैं और घोषित तौर पर किसी गुट में कभी नहीं रहीं। अटल और आडवानी दोनों उन की योग्यता का मूल्यांकन करते हुए उन्हें जिम्मेदारियां सौंपते रहे हैं। जब इन का युग ख़त्म हुआ तो वे एक तरह से खुद भाजपा की मुखिया बन गईं। बेल्लारी से सोनिया गाँधी के खिलाफ चुनाव लड़ने की हिम्मत भी उन्होंने की थी तो अब लोकसभा में सोनिया को घेरने की अहम् जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है।

सोनिया गाँधी से उन की चिढ उस वक्त उजागर हुई थी जब 2004 में प्रधानमंत्री बनने के मसले पर सुषमा ने विरोधस्वरूप सिर मुंडाने की घोषणा कर दी थी। हिन्दू दर्शन में इस कृत्य के अपने मायने होते हैं। लिहाजा, सुषमा की धौंस को देश हलके ढंग से नहीं ले पाया था। मगर राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनें तो उन्हें कोई एतराज नहीं।

घरगृहस्थी को भी वे पर्याप्त समय  देती हैं और खुद की फिटनेस के प्रति भी सजग रहती हैं। 58 साल की उम्र में भी उन की फुर्ती देखते बनाती है। बड़ी बड़ी आँखें, लम्बे बाल और मौसम के हिसाब से शालीन पहनावा और इस सब से ज्यादा आकर्षित करती है उन के माथे पर लगी बड़ी बिंदी।

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