20 मई 2010

डहेलिया मनमोहक रंगों का संगम

गुलाब और गुलदाऊदी के बाद डहेलिया ही एक ऐसा फूल है जिस की सैकड़ों किस्में अलग-अलग रंगों तथा आकार में खिलती हैं। गमलों, क्यारियों एवं बार्डर में लगे इस के फूलों की छटा देखते ही बनती है।


फूलों में डहेलिया अपने रंग एवं आकार के कारण सब से आकर्षक लगता है। जब बगीचे में यह फूल खिला हो तो बगीचा खिल उठता है। नए घरों एवं उद्यानों में इसे आप भी उगा सकते हैं।

स्थान का चुनाव
डहेलिया को क्यारियों और गमलों दोनों में उगाया जा सकता है। इसे उगाने के लिये पूर्ण रूप से खुला स्थान हो, जहाँ 4 से 6 घंटे धूप आती हो। क्यारियों में कंकड़पत्थर न हों। उस की मिट्टी में गोबर की सड़ी खाद (10 किलो प्रति वर्ग मीटर ) अवश्य मिला दें। गमलों में उगाना चाहें तो मिट्टी व गोबर की खाद की बराबर मात्रा को गमलों में भर दें। ध्यान रहे गमलों का ऊपरी हिस्सा लगभग 2 से ढाई इंच खाली हो ताकि पानी के लिये स्थान हो। गमले आकार में 12 इंच या 14 के चुने।

पौधे स्वयं तैयार करें
डहेलिया के नए पौधे आप स्वयं भी तैयार कर सकते है। सब से अच्छी विधि कटिंग द्वार पौधा तैयार करना है। पुराने पौधों की शाख़ाओं के ऊपरी भाग से सितम्बर के महीने में 8 सेंटीमीटर लम्बी कटिंग काट लें। इन को मोटे रेट या बदरपुर में 2 इंच की दूरी पर डेढ इंच गहराई में लगाएं। लगाने के बाद 3 दिन तक कटिंग लगाए गए गमलों को छायादार स्थान पर रखें। इन से 15 दिन के बाद जड़ें निकल जाती हैं। इस के बाद ही इन्हें 10 से 12 इंच के गमलों में लगाते हैं।

कैसे उगायें
यदि गमलों में उगाना हो तो उस में दोमट मिटटी एवं गोबर की खाद बराबर हिस्सों में मिला कर भर दें। एक गमले में एक ही पौधा रोपें। पौध रोपने के तुरंत बाद पानी देना चाहिए। क्यारी में लगाना हो तो 45 सेंटीमीटर दूरी पर पौधे रोपें। क्यारी को 10 इंच गहरा खोद लें। इस के बाद 100 ग्राम सुपर फास्फेट, 100 ग्राम सल्फेट पोटेशियम, 25 ग्राम मैग्नेशियम सल्फेट प्रति वर्ग मीटर क्षेत्र के हिसाब से दें। साथ ही फूल में चमक लाने के लिये खादी फसल में एक चम्मच मैग्नेशियम  सल्फेट को 10 लीटर पानी में घोल कर छिडकाव कर दें।

देखभाल
डहेलिया  के पौधे जब 1 फुट ऊंचे हो जाएँ तथा उन पर 8 से 12 पत्तिया आ जाएँ तब पौधे के ऊपरी भाग को हाथ से नोच दें। ऐसा करने से बगल की शाकाएं अधिक निकलेंगी तथा पौधे पर कई फूल आएँग। साथ ही पौधा घना दिकाई देगा। प्रति पौधा 4 से 6 शाखाओं को ही रखना चाहिए।

सहारा देना
 पौधों को सीधा बढ़ने और रखने के लिये सहारा देना आवश्यक होता है। सहारा देने के लिये बांस की पतली डंडियाँ जमीन अथवा गमले में गाड़ दी जाती है। पौधे को सुतली से 2 स्थानों पर बाँध देते हैं। ध्यान रखें, पौधों को सुतली या तार से ज्यादा कस कर न बांधें।

कलियों को तोड़ना

पौधों पर फूल के आकार व गुणवत्ता को देखते हुए प्रति पौधा 3 पुष्प कलिकाओं को ही रखा जाता है। केवल शीर्ष कालिका को ही रखना चाहिए, बाकी को मटर के आकार का होने पर तोड़ देते हैं। प्रदर्शनी के लिये पौधे पर 3 शाखाओं को ही रखना चाहिए, ताकि फूल का आकार बड़ा हो सके, शेष सभी सहाखाओं एवं कलिकाओं को तेज चाकू से काटते रहें।

पानी देना
गरमी पड़ने पर सप्ताह में 2 बार पाने देने की जरुरत पड़ती है। जाड़े के मौसम में 8 से 10 दिन के अन्तराल पर पौधों को पानी देना चाहिए।

1 टिप्पणी:

  1. सर आपने डहेलिया के बारे में बहुत अच्छी जानकारी दिए हैं , फूलों के बारे में और अधिक जानकारी के लिए आप इस ब्लॉग की मदद ले सकते हैं
    http://sangwaribagwani.blogspot.in/

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