01 फ़रवरी 2012

हमारे संविधान में देश के दो नाम हैं - "इंडिया दैट इज भारत।"

संविधान पारित होने के दिन अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान सभा में कहा था की मुझे खेद है कि हम स्वतंत्र भारत का अपना संविधान भारतीय भाषा में नहीं बना सके। संविधान सभा की शुरुआत में ही सेठ गोविंददास,धुलेकर ने हिंदी में संविधान बनाने की मांग की।
वी॰एन॰ राव द्वारा तैयार संविधान का पहला मसौदा अक्टूबर 1947 में आया। डॉ. अंबेडकर की अध्यक्षता वाली समिति का मसौदा फरवरी 1948 में आया। नवंबर 1948 में तीसरा प्रारूप आया। तीनों अंग्रेजी में थे। "हिंदी राजभाषा है, पर अंग्रेजी का प्रभुत्व है।"
दुनिया के सभी देशों के संविधान मातृभाषा में हैं, लेकिन भारत का अंग्रेजी में बना।
हमारे संविधान में देश के दो नाम हैं - "इंडिया दैट इज भारत।"

जम्मू-कश्मीर संबंधी अनुच्छेद 370 शीर्षक में ही अस्थायी शब्द है, लेकिन 63 बरस हो गए, वह स्थायी है।
संविधान की मूल प्रति में श्रीराम, श्रीकृष्ण सहित 23 चित्र थे। राजनीति उन्हें काल्पनिक बताती है। केंद्र द्वारा प्रकाशित संविधान की प्रतियों में वे गायब हैं। इस संविधान में अल्पसंख्यकों को विशेषाधिकार हैं, लेकिन अल्पसंख्यक की परिभाषा नहीं।

भारतीय संविधान में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 1935 के अधिनियम की ही ज्यादातर बाते हैं। ब्रिटिश संसद ने 1892, 1909, 1919 तक बार-बार नए अधिनियम बनाए। 1935 उनका आखिरी अधिनियम था। भारत ने 'भारत शासन अधिनियम 1935' को आधार बनाकर गलती की।
आरोपों के उत्तर में डॉ. अंबेडकर ने बताया कि उनसे इसी अधिनियम को आधार बनाने की अपेक्षा की गई है।

संविधान और गणतंत्र संकट में हैं। भारत की संसदीय व्यवस्था, प्रशासनिक तंत्र व प्रधानमंत्री ब्रिटिश व्यवस्था की उधारी है। भारत ने अपनी संस्कृति व जनगणमन की इच्छा के अनुरूप अपनी राजव्यवस्था नहीं गढ़ी। -- श्री हृदयनारायन दीक्षित

॥ जय हिन्द ॥ जय जय माँ भारती ॥ वन्दे मातरम् ॥

तुम मुझे गाय दो, मैं तुम्हे भारत दूंगा....!!

मित्रों शीर्षक पढ़कर चौंकिए मत। मैं कोई नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जैसा नारा लगाकर उनके समकक्ष बनने का प्रयास नहीं कर रहा। उनके समकक्ष बनना तो दूर यदि उनके अभियान का योद्धा मात्र भी बन सका तो स्वयं को भाग्यशाली समझूंगा। अभी जो शीर्षक मैंने दिया, वह एक अटल सत्य है। यदि भारत निर्माण करना है तो गाय को बचाना होगा। एक भारतीय गाय ही काफी है सम्पूर्ण भारत की अर्थव्यवस्था चलाने के लिए। किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी की आवश्यकता ही नहीं है। ये कम्पनियां भारत बनाने नहीं, भारत को लूटने आई हैं।
 
खैर अब मुद्दे पर आते हैं, मैं कह रहा था कि मुझे भारत निर्माण के लिए केवल भारतीय गाय चाहिए। यदि गायों का कत्लेआम भारत में रोक दिया जाए तो यह देश स्वत: ही उन्नति की ओर अग्रसर होने लगेगा। मैं दावे के साथ कहता हूँ कि केवल दस वर्ष का समय चाहिए। दस वर्ष पश्चात भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे ऊपर होगी। आज की सभी तथाकथित महाशक्तियां भारत के आगे घुटने टेके खड़ी होंगी।

सबसे पहले तो हम यह जानते ही हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। कृषि ही भारत की आय का मुख्य स्त्रोत है। ऐसी अवस्था में किसान ही भारत की रीढ़ की हड्डी समझा जाना चाहिए और गाय किसान की सबसे अच्छी साथी है। गाय के बिना किसान व भारतीय कृषि अधूरी है, किन्तु वर्तमान परिस्थितियों में किसान व गाय दोनों की स्थिति हमारे भारतीय समाज में दयनीय है।

एक समय वह भी था जब भारतीय किसान कृषि के क्षेत्र में पूरे विश्व में सर्वोपरि था। इसका कारण केवल गाय है। भारतीय गाय के गोबर से बनी खाद ही कृषि के लिए सबसे उपयुक्त साधन है। गाय का गोबर किसान के लिए भगवान् द्वारा प्रदत एक वरदान है। खेती के लिए भारतीय गाय का गोबर अमृत है। इसी अमृत के कारण भारत भूमि सहस्त्रों वर्षों से सोना उगलती आ रही है। किन्तु हरित क्रान्ति के नाम पर सन 1960 से 1985 तक रासायनिक खेती द्वारा भारतीय कृषि को नष्ट कर दिया गया। हरित क्रान्ति की शुरुआत भारत की खेती को उन्नत व उत्तम बनाने के लिए की गयी थी, किन्तु इसे शुरू करने वाले आज किस निष्कर्ष तक पहुंचे होंगे ?रासायनिक खेती ने धरती की उर्वरता शक्ति को घटा कर इसे बाँझ बना दिया। साथ ही साथ इसके द्वारा प्राप्त फसलों के सेवन से शरीर न केवल कई जटिल बिमारियों की चपेट में आया बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी घटी है। वहीँ दूसरी ओर गाय के गोबर से बनी खाद से हमारे देश में हज़ारों वर्षों से खेती हो रही थी। इसका परिणाम तो आप भी जानते ही होंगे। किन्तु पिछले कुछ दशकों में ही हमने अपनी भारत माँ को रासायनिक खेती द्वारा बाँझ बना डाला।

इसी प्रकार खेतों में कीटनाशक के रूप में भी गोबर व गौ मूत्र के उपयोग से उत्तम परिणाम वर्षों से प्राप्त किये जाते रहे। गाय के गोबर में गौ मूत्र, नीम, धतुरा, आक आदि के पत्तों को मिलाकर बनाए गए कीटनाशक द्वारा खेतों को किसी भी प्रकार के कीड़ों से बचाया जा सकता है। वर्षों से हमारे भारतीय किसान यही करते आए हैं। किन्तु आज का किसान तो बेचारा रासायनिक कीटनाशक का छिडकाव करते हुए स्वयं ही अपने प्राण गँवा देता है। कई बार किसान कीटनाशकों की चपेट में आकर मर जाते हैं। ज़रा सोचिये कि जब ये कीटनाशक इतने खतरनाक हैं तो पिछले कई दशकों से हमारी धरती इन्हें कैसे झेल रही होगी ? और इन कीटनाशकों से पैदा हुई फसलें जब भोजन के रूप में हमारी थाली में आती हैं तो क्या हाल करती होंगी हमारा ?

केवल चालीस करोड़ गौवंश के गोबर व मूत्र से भारत में चौरासी लाख एकड़ भूमि को उपजाऊ बनाया जा सकता है। किन्तु रासायनिक खेती के कारण आज भारत में 190 लाख किलो गोबर के लाभ से हम भारतवासी वंचित हो रहे हैं।

किसी भी खेत की जुताई करते समय चार से पांच इंच की जुताई के लिए बैलों द्वारा अधिकतम पांच होर्स पावर शक्ति की आवश्यकता होती है। किन्तु वहीँ ट्रैक्टर द्वारा इसी जुताई में 40 से 50 होर्स पावर के ट्रैक्टर की आवश्यकता होती है। अब ट्रैक्टर व बैल की कीमत के अंतर को बहुत सरलता से समझा जा सकता है। वहीँ ट्रैक्टर में काम आने वाले डीज़ल आदि का खर्चा अलग है। इसके अतिरिक्त भूमि के पोषक जीवाणू ट्रैक्टर की गर्मी से व उसके नीचे दबकर ही मर जाते हैं। इसके अलावा खेतों की सिंचाई के लिए बैलों के द्वारा चलित पम्पिंग सेट और जनरेटर से ऊर्जा की आपूर्ति भी सफलता पूर्वक हो रही है। इससे अतिरिक्त बाह्य ऊर्जा में होने वाला व्यय भी बच गया। यदि भारतीय कृषि में गौवंश का योगदान मिले तो आज भी भारत भूमि सोना उगल सकती है। सदियों तक भारत को सोने की चिड़िया बनाने में गाय का ही योगदान रहा है।

ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में भी पशुधन का उपयोग लिया जा सकता है। आज भारत में विधुत ऊर्जा उत्पादन का करीब 67% थर्मल पावर से, 27% जलविधुत से, 4% परमाणु ऊर्जा से व 2% पवन ऊर्जा के द्वारा हो रहा है।

थर्मल पावर प्लांट में विद्युत उत्पादन के लिए कोयला, पैट्रोल, डीज़ल व प्राकृतिक गैस का उपयोग किया जाता है। इसके उपयोग से कार्बन डाई आक्साइड का उत्सर्जन वातावरण में हो रहा है। जिससे वातावरण के दूषित होने से भिन्न भिन्न प्रकार के रोगों का जन्म अलग से हो रहा है। जलविधुत परियोजनाएं अधिकतर भूकंपीय क्षेत्रों में होने के कारण यहाँ भी खतरे की घंटी है। ऐसे में किसी भी बाँध का टूट जाना करोड़ों लोगों को प्रभावित कर सकता है। टिहरी बाँध के टूटने से चालीस करोड़ लोग प्रभावित होंगे।परमाणु ऊर्जा के उपयोग का एक भयंकर परिणाम तो हम अभी कुछ समय पहले जापान में देख ही चुके हैं। परमाणु विकिरणों के दुष्प्रभाव को कई दशकों बाद भी देखा जाता है।

जबकि यहाँ भी गौवंश का योगदान लिया जा सकता है। "स्व. श्री राजीव भाई दीक्षित" अपने पूरे जीवन भर इस अनुसन्धान में लगे रहे व सफल भी हुए। उनके द्वारा बनाए गए गोबर गैस संयत्र से गोबर गैस को सिलेंडरों में भरकर उसे ईंधन के रूप में उपयोग लिया जा सकता है। आज एक साधारण कार को पैट्रोल से चलाने में करीब 4 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से खर्च होता है। जिस प्रकार से पैट्रोल, डीज़ल के दाम बढ़ रहे हैं, यह खर्च आगे और भी बढेगा। वहीँ दूसरी और गोबर गैस के उपयोग से उसी कार को 35 से 40 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से चलाया जा सकता है।

आईआईटी दिल्ली ने कानपुर गौशाला और जयपुर गौशाला अनुसंधान केन्द्रों के द्वारा एक किलो सी॰एन॰जी॰ से 25 से 50 किलोमीटर एवरेज दे रही तीन गाड़ियां चलाई जा रही है।

रसोई गैस सिलेंडरों पर भी यह बायोगैस बहुत कारगर सिद्ध हुई है। सरकार की भ्रष्ट नीतियों के चलते आज रसोई गैस के दाम भी आसमान तक पहुँच गए हैं, जबकि गोबर गैस से एक सिलेंडर का खर्च केवल 50 से 70 रुपये तक आँका गया है।इसी बायोगैस से अब हैलीकॉप्टर भी जल्द ही चलाया जा सकेगा। हम इस अनुसन्धान में अब सफलता के बहुत करीब हैं।

गोबर गैस प्लांट से करीब सात करोड़ टन लकड़ी बचाई जा सकती है, जिससे करीब साढ़े तीन करोड़ पेड़ों को जीवन दान दिया जा सकता है। साथ ही करीब तीन करोड़ टन उत्सर्जित कार्बन डाई आक्साइड को भी रोका जा सकता है। पैट्रोल, डीज़ल, कोयला व गैस तो सब प्राकृतिक स्त्रोत हैं, किन्तु यह बायोगैस तो कभी न समाप्त होने वाला स्त्रोत है। जब तक गौवंश है, अब तक हमें यह ऊर्जा मिलती रहेगी।

हाल ही में कानपुर की एक गौशाला ने एक ऐसा सीएफ़एल बल्ब बनाया है जो बैटरी से चलता है। इस बैटरी को चार्ज करने के लिए गौमूत्र की आवश्यकता पड़ती है। आधा लीटर गौमूत्र से 28 घंटे तक सीएफ़एल जलता रहेगा। यदि सरकार चाहे तो इस क्षेत्र में सकारात्मक कदम उठाकर इससे भारी मुनाफा कमाया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त चिकित्सा के क्षेत्र में तो भारतीय गाय के योगदान को कोई झुठला ही नहीं सकता। हम भारतीय गाय को ऐसे ही माता नहीं कहते। इस पशु में वह ममता है जो हमारी माँ में है। भारतीय गाय की रीढ़ की हड्डी में सूर्यकेतु नाड़ी होती है। सूर्य के संपर्क में आने पर यह स्वर्ण का उत्पादन करती है। गाय के शरीर से उत्पन्न यह सोना गाय के दूध, मूत्र व गोबर में भी होता है। अक्सर ह्रदय रोगियों को घी न खाने की सलाह डॉक्टर देते रहते हैं। साथ ही एलोपैथी में ह्रदय रोगियों को दवाई में सोना ही कैप्सूल के रूप में दिया जाता है। यह चिकित्सा अत्यंत महँगी साबित होती है।जबकि आयुर्वेद में ह्रदय रोगियों को भारतीय गाय के दूध से बना शुद्ध घी खाने की सलाह दी जाती है। इस घी में विद्यमान स्वर्ण के कारण ही गाय का दूध व घी अमृत के समान हैं। गाय के दूध का प्रतिदिन सेवन अनेकों बीमारियों से दूर रखता है।गौ मूत्र से बनी औषधियों से कैंसर, ब्लडप्रेशर, अर्थराइटिस, सवाईकल हड्डी सम्बंधित रोगों का उपचार भी संभव है। ऐसा कोई रोग नहीं है, जिसका इलाज पंचगव्य से न किया जा सके।

यहाँ तक कि हवन में प्रयुक्त होने वाले गाय के घी व गोबर से निकलने वाले धुंए से प्रदुषण जनित रोगों से बचा जा सकता है। हवन से निकलने वाली गैसों में इथीलीन आक्साइड, प्रोपीलीन आक्साइड व फॉर्मएल्डीहाइड गैसे प्रमुख हैं। इथीलीन आक्साईड गैस जीवाणु रोधक होने पर आजकल आपरेशन थियेटर से लेकर जीवन रक्षक औषधियों के निर्माण में प्रयोग मे लायी जा रही है। वही प्रोपीलीन आक्साइड गैस का प्रयोग कृत्रिम वर्षा कराने के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है।साथ ही गाय के दूध से रेडियो एक्टिव विकिरणों से होने वाले रोगों से भी बचा जा सकता है। यदि सरकार वैदिक शिक्षा पर कुछ शोध करे तो दवाइयों पर होने वाले करीब दो लाख पचास हज़ार करोड़ के खर्चे से छुटकारा पाया जा सकता है।

अब आप ही बताइये कहने को तो गाय केवल एक जानवर है, किन्तु इतने कमाल का एक जानवर क्या हमें ऐसे ही बूचडखानों में तड़पती मौत मरने के लिए छोड़ देना चाहिए ???

कुछ तो कारण है जो हज़ारों वर्षों से हम भारतीय गाय को अपनी माँ कहते आए हैं। भारत निर्माण में गाय के अतुलनीय योगदान को देखते हुए शीर्षक की सार्थकता में मुझे यही शीर्षक उचित लगा।

॥ जय हिन्द ॥ जय जय माँ भारती ॥ वन्दे मातरम् ॥    # ये है हिंदुस्तान मेरी जान

माँ क्या तुम जानती हो? - माँ सब जानती है।


चूल्हे-चौके में व्यस्त और पाठशाला से दूर रही माँ नहीं बता सकती कि ”नौ-बाई-चार” की कितनी ईंटें लगेंगी दस फीट ऊँची दीवार में…लेकिन अच्छी तरह जानती है कि कब, कितना प्यार ज़रूरी है
एक हँसते-खेलते परिवार में।

त्रिभुज का क्षेत्रफल और घन का घनत्व निकालना उसके शब्दों में ‘स्यापा’ है…क्योंकि उसने मेरी छाती को ऊनी धागे के फन्दों और सिलाइयों की मोटाई से नापा है।

वह नहीं समझ सकती कि ‘ए’ को ‘सी’ बनाने के लिए क्या जोड़ना या घटाना होता है…लेकिन अच्छी तरह समझती है कि भाजी वाले से आलू के दाम कम करवाने के लिए कौन सा फॉर्मूला अपनाना होता है।

मुद्दतों से खाना बनाती आई माँ ने कभी पदार्थों का तापमान नहीं मापा तरकारी के लिए सब्ज़ियाँ नहीं तौलीं और नाप-तौल कर ईंधन नहीं झोंका चूल्हे या सिगड़ी में…उसने तो केवल ख़ुश्बू सूंघकर बता दिया है कि कितनी क़सर बाकी है बाजरे की खिचड़ी में।

घर की कुल आमदनी के हिसाब से उसने हर महीने राशन की लिस्ट बनाई है ख़र्च और बचत के अनुपात निकाले हैं रसोईघर के डिब्बों घर की आमदनी और पन्सारी की रेट-लिस्ट में हमेशा सामन्जस्य बैठाया है…लेकिन अर्थशास्त्र का एक भी सिद्धान्त कभी उसकी समझ में नहीं आया है।

वह नहीं जानती सुर-ताल का संगम कर्कश, मृदु और पंचम सरगम के सात स्वर स्थाई और अन्तरे का अन्तर….स्वर साधना के लिए वह संगीत का कोई शास्त्री भी नहीं बुलाती थी…लेकिन फिर भी मुझे उसकी लल्ला-लल्ला लोरी सुनकर बड़ी मीठी नींद आती थी।

नहीं मालूम उसे कि भारत पर कब, किसने आक्रमण किया और कैसे ज़ुल्म ढाए थे, आर्य, मुग़ल और मंगोल कौन थे, कहाँ से आए थे? उसने नहीं जाना कि कौन-सी जाति भारत में अपने साथ क्या लाई थी लेकिन हमेशा याद रखती है कि नागपुर वाली बुआ हमारे यहाँ कितना ख़र्चा करके आई थी।

वह कभी नहीं समझ पाई कि चुनाव में किस पार्टी के निशान पर मुहर लगानी है लेकिन इसका निर्णय हमेशा वही करती है कि जोधपुर वाली दीदी के यहाँ दीपावली पर कौन-सी साड़ी जानी है।

मेरी अनपढ़ माँ वास्तव में अनपढ़ नहीं है वह बातचीत के दौरान पिताजी का चेहरा पढ़ लेती है
काल-पात्र-स्थान के अनुरूप बात की दिशा मोड़ सकती है झगड़े की सम्भावनाओं को भाँप कर
कोई भी बात ख़ूबसूरत मोड़ पर लाकर छोड़ सकती है

दर्द होने पर हल्दी के साथ दूध पिला पूरे देह का पीड़ा को मार देती है और नज़र लगने पर सरसों के तेल में रूई की बाती भिगो नज़र भी उतार देती है

अगरबत्ती की ख़ुश्बू से सुबह-शाम सारा घर महकाती है बिना काम किए भी परिवार तो रात को
थक कर सो जाता है लेकिन वो सारा दिन काम करके भी परिवार की चिन्ता में रात भर सो नहीं पाती है।

सच !! कोई भी माँ अनपढ़ नहीं होती सयानी होती है क्योंकि ढेर सारी डिग्रियाँ बटोरने के बावजूद
बेटियों को उसी से सीखना पड़ता है कि गृहस्थी कैसे चलानी होती है।

माँ और मात्रभूमि से बदकार कुछ नहीं !!

॥ जय हिन्द ॥ जय जय माँ भारती ॥ वन्दे मातरम् ॥

मां का दिल

*** मां का दिल !!! मां का दिल !!! मां का दिल !!! मां का दिल !!! ****

बात पुरानी है ! राजा-महाराजाओं का जमाना था ! एक बलोच (ऊंट पालने वाले को बलोच कहते हैं) की एक ऊंटनी गुम हो गई ! काफी खोज-बीन के बाद उस ऊंटनी का सुराग लगा ! ऊंटनी एक सेठ के घर बन्धी थी ! बलोच ने सेठ से ऊंटनी वापिस करने को कहा ! सेठ ने साफ इंकार कर दिया ! वह उसे अपनी ऊंटनी बताता था !
बात बढ गई ! लडाई – झगडे की नौबत आ पहुंची ! लोगों के समझाने-बुझाने पर दोनो राजा के दरबार में जाने को राजी हो गए ! भरे दरबार में मुकदमा शुरू हुआ ! बलोच कहता था ऊंटनी मेरी है और सेठ कहता था ऊंटनी मेरी है !
राजा ने बलोच से पूछा – “तुम कहते हो कि ऊंटनी तुम्हारी है ! तुम्हारे पास इस बात का कोई सबूत है ?”
बलोच बडे अदब से एक कदम पीछे हट कर, झुक कर बोला – “जनाब, एक सबूत है !”
“क्या ?” – सेठ ने घूरा !
“क्या ?” – राजा ने पूछा !
“महाराज, अगर ऊंटनी को मारकर इसके दिल को चीरकर देखें तो उसमें आपको तीन सुराख मिलेंगे !” बलोच ने उत्तर दिया !
राजा हैरान ! सेठ हैरान ! दरबारी हैरान ! सभी हैरान !
“यह तुम कैसे कह सकते हो कि इसके दिल में तीन सुराख हैं !”
राजा ने आश्चर्य से पूछा – “तुम ज्योतिष विद्या जानते हो क्या ?”

“महाराज” – बलोच ने बडे अदब से उत्तर दिया –“जब किसी मां का बेटा भरी जवानी में मर जाता है तो उस मां के दिल में एक सुराख हो जाता है ! जो जिन्दगी भर नहीं भरा जा सकता ! इस ऊंटनी को मैंने बचपन से पाला है ! इसकी आंखों के सामने इसके तीन बेटे एक के बाद एक भगवान को प्यारे हो गए ! इसलिए इसके दिल में तीन सुराख अवश्य मौजूद होंगे ! मां का दिल जो ठहरा !”
दरबार में सन्नाटा-सा छा गया ! सभी हैरानी से एक-दूसरे का मुंह ताकने लगे !
कहने की जरुरत नहीं कि राजा ने सेठ की सफाई सुनने की भी आवश्यकता न समझी ! ऊंटनी बलोच के हवाले करने का हुक्म दे दिया !

जय हिंद !! जय भारत !! वन्देमातरम !!

अन्ना के खिलाफ साजिश क्यों ?

अन्ना का गलत ईलाज करके उन्हें और बीमार करने वाले डॉ संचेती को पद्म सम्मान देने के पीछे की साजिश सामने आनी चाहिए.....!!

मित्रों जब डॉ संचेती को केन्द्र सरकार ने पद्म सम्मान देने की घोषणा किया तभी एक घिनौनी साजिश की बू आने लगी जिसे कई अखबारों ने भी छापा है।

सभी जानते है की अन्ना हजारे ने पांच राज्यों मे कांग्रेस के खिलाफ प्रचार करने की घोषणा की थी, जिससे कांग्रेस के पैरों तले जमीन खिसक गयी थी क्योकि यूपी का चुनाव कांग्रेस के युवराज के लिए एक लिटमस टेस्ट बन गया है। यूपी के नतीजे ही राहुल गाँधी का भविष्य तय करने वाले है।

फिर अन्ना हजारे को मामूली जुकाम और कफ, सीने मे जकडन जैसी एक आम समस्या हों गयी। पुणे के डॉ संचेती ने पहले रालेगन आकर अन्ना का चेकअप किया फिर उन्हें अपने नर्सिंग होम मे दाखिल करने की सलाह दिया और अन्ना करीब 15 दिनों तक उनके अस्पताल मे भर्ती रहे।

लेकिन अन्ना की तबियत और ज्यादा बिगड़ने लगी जिससे डॉ नरेश त्रेहन अपनी टीम के साथ अन्ना के गांव मे उनका चेकअप किये और कहा की अन्ना को बहुत गलत और हाई एमजी डोज़ वाली दवाए दी गयी है।

अब अन्ना कल दिल्ली आकर डॉ नरेश त्रेहन की निगरानी मे फिर से अपना ईलाज करवाएँगे।

लेकिन इसी बीच जब पद्म सम्मानों की घोषणा हुयी तो 'डॉ संचेती' का नाम देखकर पूरा मेडिकल जगत नहीं नहीं बल्कि पूरा भारत चौक उठा।

कुछ सवाल उठते है :

1. आखिर डॉ संचेती की अब तक क्या उपलब्धियां रही है जिससे उन्हें पद्म भूषण जैसा सम्मान दिया गया ? उन्होंने अब तक मेडिकल जगत मे कोई भी उल्लेखनीय योगदान नहीं किया है।

2. क्या इस देश मे डॉ संचेती से काबिल डॉ कोई नही है ?

मित्रों, असल में केंद्र सरकार ने डॉ संचेती से मिलकर अन्ना हजारे के खिलाफ एक बड़ी गंदी साजिश रची है।

जय हो अन्ना हज़ारे !! जय हो स्वामी रामदेव !!

विभिन्न लोगों के भारत और भारतियों पर विचार:::

हम सभी भारतीयों का अभिवादन करते हैं, जिन्होंने हमें गिनती करना सिखाया, जिसके बिना विज्ञान की कोई भी खोज संभव नहीं थी।!" - एल्बर्ट आइनस्टाइन (सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी, जर्मनी)

भारत मानव जाति का पालना है, मानवीय वाणी का जन्म स्थान है, इतिहास की जननी है और विभूतियों की दादी है और इन सब के ऊपर परम्पराओं की परदादी है। मानव इतिहास में हमारी सबसे कीमती और सबसे अधिक अनुदेशात्मक सामग्री का भण्डार केवल भारत में है!" - मार्क ट्वेन (लेखक, अमेरिका) 

*   यदि पृथ्वी के मुख पर कोई ऐसा स्थान है जहां जीवित मानव जाति के सभी सपनों को बेहद शुरुआती समय से आश्रय मिलता है, और जहां मनुष्य ने अपने अस्तित्व का सपना देखा, वह भारत है।!" - रोम्या रोलां (फ्रांसीसी विद्वान) 

*   सभ्यताएं दुनिया के अन्य भागों में उभर कर आई हैं। प्राचीन और आधुनिक समय के दौरान एक जाति से दूसरी जाति तक अनेक अच्छे विचार आगे ले जाए गए हैं. . . परन्तु मार्क, मेरे मित्र, यह हमेशा युद्ध के बिगुल बजाने के साथ और ताल बद्ध सैनिकों के पद ताल से शुरू हुआ है। हर नया विचार रक्त के तालाब में नहाया हुआ होता था . . . विश्व की हर राजनैतिक शक्ति को लाखों लोगों के जीवन का बलिदान देना होता था, जिनसे बड़ी तादाद में अनाथ बच्चे और विधवाओं के आंसू दिखाई देते थे। यह अन्य अनेक राष्ट्रों ने सीखा, किन्तु भारत में हजारों वर्षों से शांति पूर्वक अपना अस्तित्व बनाए रखा। यहां जीवन तब भी था जब ग्रीस अस्तित्व में नहीं आया था . . . इससे भी पहले जब इतिहास का कोई अभिलेख नहीं मिलता, और परम्पराओं ने उस अंधियारे भूतकाल में जाने की हिम्मत नहीं की। तब से लेकर अब तक विचारों के बाद नए विचार यहां से उभर कर आते रहे और प्रत्येक बोले गए शब्द के साथ आशीर्वाद और इसके पूर्व शांति का संदेश जुड़ा रहा। हम दुनिया के किसी भी राष्ट्र पर विजेता नहीं रहे हैं और यह आशीर्वाद हमारे सिर पर है और इसलिए हम जीवित हैं. . .!" - स्वामी विवेकानन्द (भारतीय) 

*   यदि हम से पूछा जाता कि आकाश तले कौन सा मानव मन सबसे अधिक विकसित है, इसके कुछ मनचाहे उपहार क्या हैं, जीवन की सबसे बड़ी समस्याओं पर सबसे अधिक गहराई से किसने विचार किया है और इसकी समाधान पाए हैं तो मैं कहूंगा इसका उत्तर है भारत।" - मेक्स मुलर (जर्मन विद्वान) 

*   “दुनिया के कुछ हिस्से ऐसे हैं जहां एक बार जाने के बाद वे आपके मन में बस जाते हैं और उनकी याद कभी नहीं मिटती। मेरे लिए भारत एक ऐसा ही स्थान है। जब मैंने यहां पहली बार कदम रखा तो मैं यहां की भूमि की समृद्धि, यहां की चटक हरियाली और भव्य वास्तुकला से, यहां के रंगों, खुशबुओं, स्वादों और ध्वनियों की शुद्ध, संघन तीव्रता से अपने अनुभूतियों को भर लेने की क्षमता से अभिभूत हो गई। यह अनुभव कुछ ऐसा ही था जब मैंने दुनिया को उसके स्याह और सफेद रंग में देखा, जब मैंने भारत के जनजीवन को देखा और पाया कि यहां सभी कुछ चमकदार बहुरंगी है।” - किथ बेलोज़ (मुख्य संपादक, नेशनल जियोग्राफिक सोसाइटी) जय जय माँ भारती, मेरा भारत महान !!

31 जनवरी 2012

ये भारत है

जब भारत की सरकार स्वामी रामदेव जी के फंडे पर काम करके 30 करोड नौकरियों का जुगाड मात्र 10 साल में कर सकती है तो वह आरक्षण के पीछे क्यों पड़ी हुई है।
पढ़िए कैसे......और अगर पसंद आये तो शेयर करें.....!!
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1. आज के दिन भारत की लाखों छोटी मोटी खिलौना बनाने वाली कम्पनियाँ इसलिय बंद हो गयी कि सरकार की तरफ से उनको न तो कोई आर्थिक मदद मिली न तकनीकी, यदि 100 का औसत पकडें तो करीब 2 करोड़ लोग बेरोजगार हो गए।

2. भारत में साबुन से लेकर बनियान तक बनाने वाली 5000 विदेशी कंपनियों ने भारत का सब रोजगार (करीब 12 करोड़) विदेशो में भेज दिया है साथ ही साथ हर साल करीब 15 से 16 लाख करोड़ रुपये विदेश जा रहा है।

3. इस पर तुर्रा यह की रोज रोज एफ़डीआई को नए नए क्षेत्र में खोला जा रहा है। यदि खुदरा में भी एफ़डीआई खोल दिया जाये तो भारत का 12 करोड़ रोजगार और भारत से बाहर विदेशो में पैदा होगा जिससे भारत के लोग और बेरोजगार होंगे।

4. स्वामी रामदेवजी ने कितने लोगो को स्थाई रोजगार अपने योग और आयुर्वेद के बल पर दिया है इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया है। इनके हर आरोग्य केंद्र पर 5 से 6 लोगों को नौकरी मिल रही है। एक एक जिले में 2 से 4 ऐसे केंद्र हैं और भारत में 628 जिले हैं। इसके बाद इनका उत्पाद बेचने वाले हर दूकान पर 2 से 4 लोगो को नौकरी मिली हुई है और यह आरोग्य केंद्र अब हर गाँव में खोलने की योजना है।

तो सोचिये मात्र देशी चीजों से कितना रोजगार पैदा होगा। पतंजलि योगपीठ में भी शायद 8000 लोग नौकरी करते है। यदि गाय- खेती-योग-आयुर्वेद की चौकड़ी पर ध्यान दिया जाये तो इससे कम से कम 5 करोड रोजगार मात्र 3 साल में पैदा हो जायेगा तथा विदेशियों पर निर्भरता कम हो जायेगी।

5. जिस तरह से अमेरिका भारत को तेल को लेकर परेशानी में डाल रहा है, स्वामी रामदेव जी की चले तो गौ हत्या बंद करवाकर उसी गोबर गैस को सिलिंडर में भर कर गाड़ियों में सीएनजी जैसा उपयोग किया जाये और हर घर पर 200 वाट का सोलर पैनल दिखे।

6. वकीलों की जमात कांग्रेस सरकार अंग्रेजो की तरह ही 500 रुपये और 5 लाख करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार को बराबर मानकर पहले 500 रुपये वाले को जेल भेजती है बाद में जनता को आरक्षण और कुशवाहा जैसे मामलों में उलझाकर महत्वपूर्ण समय बिताकर इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन से जीत हासिल कर लेती है। कलमाड़ी, कनिमोझी जैसे सेकड़ों हजारों करोड़ के भ्रष्टाचारी देशद्रोही जमानत पा लेते हैं और 500 रूपये वाला जेल में सड़ रहा होता है।

ये अब किसी भी हालत में खत्म होना चाहिए और राष्ट्रभक्तों की जमात पहले देश चलाये फिर दुनिया...अब भारत को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो भारत के अंतिम व्यक्ति की सोचे, समान और मुफ्त शिक्षा व्यवस्था, चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराये, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाये और न्याय व्यवस्था भी सुधारे। वर्तमान में न्याय के नाम पर सिर्फ फैसले सुनाये जा रहे हैं और विदेशी न्याय व्यवस्था के कारण देश में अपराध बढ़ रहे हैं...!!

जागो भारतियों जागो...!!
जय भारत स्वाभिमान !
जय स्वामी रामदेव जी !!
जय हिंद !! जय भारत !! वन्देमातरम !!