04 अप्रैल 2010

शब्दों का जन्म

SHAMPOO (शैंपू)
शैंपू तो आप इस्तेमाल करते होंगे। लेकिन शायद आपको यह न पता हो कि यह शब्द हमारी संस्कृत और हिंदी भाषा से ही बना है। इसका मूल है चांपना जिससे बना चांपो और फिर बना शैंपू। आप किसी भी अच्छी डिक्शनरी में इसे कन्फर्म कर सकते हैं।

क्लीव - जुड़ें या कटें?
अंग्रेज़ी शब्द क्लीव के दो बिल्कुल ही उल्टे मतलब हैं। 1. कसकर जुड़े रहना। 2. काटकर अलग करना। इसी तरह CLIP के भी दो अगल-अलग मतलब हैं - काटना और जोड़ना।

इंग्लिश का सबसे बड़ा शब्द है
PNEUMONOULTRAMICROSCOPICSILICOVOLCANOCONIOSIS.
यानी न्यूमनोअल्ट्रामाइक्रॉस्कोपिकसिलिकोवॉलकेनोकोनीयोसिस। मैं मानता हूं कि इसे पढ़ना आसान काम नहीं, बोलना तो और भी मुश्किल है। लेकिन हम इसे आसान बना देते हैं - बस, इसे तोड़ दीजिए - PNEUMONO ULTRA MICRO SCOPIC SILICO VOLCANO CONIOSIS । हिंदी में यह होगा - न्यूमनो अल्ट्रा माइक्रॉ स्कोपिक सिलिको वॉलकेनो कोनीयोसिस। हमने इसे अलग-अलग लिख दिया है आपकी सुविधा के लिए हालांकि बोला तो एकसाथ ही जाएगा, क्योंकि यह है ही एक शब्द। तो कीजिए इसकी प्रैक्टिस और चौंका दीजिए औरों को।
हां, हम यह बताना तो भूल ही गए कि इसका मतलब क्या है ? यह एक बीमारी का नाम है जो फेफड़े में बहुत ही महीन धूल और राख के कणों के जाने से होती है।

Freelancer - पैसे दो और मेरा भाला ले लो
यह शब्द बना जब एक योद्धा ने कहा कि उसका भाला ( LANCE ) आज़ाद है और कोई भी पैसे देकर उससे युद्ध करवा सकता है। यानी फ्रीलांसर वे सैनिक थे जो पैसे लेकर किसी के लिए भी लड़ने को तैयार थे।

आजकल ऐसे लोगों के लिए MERCENARY (भाड़े के सैनिक) शब्द का इस्तेमाल होता है और फ्रीलांसर उन लोगों को कहते हैं जो किसी संस्थान से न जुड़े हों और स्वतंत्र तौर पर काम करते हों। आम तौर पर यह पत्रकारों के मामले में यूज़ किया जाता है। वे पत्रकार जो किसी अखबार या मैगज़ीन से न जुड़े हों और स्वतंत्र तौर पर काम करते हों, उन्हें फ्रीलांस जर्नलिस्ट कहा जाता है। यह अलग बात है कि आज के फ्रीलांसर के पास भाला नहीं, कलम, कैमरा या कंप्यूटर होता है।

ROBOT यानी बंधुआ मजदूर
रोबॉट शब्द चेक लेखक कॉरल चॉपेक के नाटक (1890-1948) रॉसम्स यूनिवर्सल रोबॉट्स से आया है। चेक भाषा में Robota का मतलब होता है जबरिया काम। यूक्रेनी और रूसी भाषाओं में इससे मिलते-जुलते शब्द हैं जिनका मतलब है शारीरिक काम।

Orange, Silver and Purple - तीन निराले
अगर आपको कभी इंग्लिश में कविता लिखने का मन करे तो इन तीन शब्दों को लाइन के अंत में रखने से बचें क्योंकि इनके तुक से तुक मिलानेवाले कोई शब्द नहीं हैं। ये तीन शब्द हैं - Orange, Silver और Purple.
विश्वास न हो तो कोशिश करके दिखिए।

हमारे अपने हैं Bungalow और Bangle
BUNGALOW (बंगलो) आया है हिंदी के बंगला शब्द से। इसका मतलब है बंगाली स्टाइल का एक-मंज़िला घर। ये घर अमूमन छोटे होते थे और सामने एक चौड़ा बरामदा होता था। बाद में यह बड़े एक-मंज़िला मकानों के लिए भी इस्तेमाल होने लगा।
चूड़ी के लिए इस्तेमाल होनेवाला BANGLE (बैंगल) शब्द भी हिंदी के बंगली शब्द से बना है। इसे कहीं-कहीं बंगुरी, बंगड़ या बांगड़ी भी कहा जाता है।

बजट शब्द बना है बैग से
बजट शब्द बना है थैले से। चमड़े के बैग को पहले कहते थे bough जो आगे चलकर bowgette बना। इसी से निकला है budget , चूंकि वित्त मंत्री के बजट यानी बैग में ही अगले साल की आमदनी और खर्च के काग़जात होते हैं, इसलिए इन काग़जात को ही बजट का नाम दे दिया गया।

फ्रेंच आर्मी से आया है Ambulanceफ्रेंच आर्मी ने अपने घायल सैनिकों को युद्धभूमि से लाने के लिए एक स्पेशल गाड़ी बनाई , जिसमें फर्स्ट एड की चीजें भी होती थीं। इससे घायल सैनिकों को तुरंत इलाज हो सकता था। इस गाड़ी का नाम रखा गया hospital ambulant या चलता-फिरता अस्पताल। लैटिन में ambulo का मतलब होता है चलना , जो बाद में ambulance बन गया।

BALLOT - वोटिंग के लिए छोटी गेंदें
यह शब्द आया है इटैलियन शब्द Ballotta से जिसका मतलब होता है गोलियों जैसी छोटी गेंदें। इटली में वोटिंग के लिए ऐसी ही छोटी गेंदों का इस्तेमाल होता था। Ballotta शब्द बना है Balla से जिसका मतलब होता है बॉल। अब हैरत की बात यह है कि हमारा बल्ला और उनका Balla इतना मैच कैसे करता है जबकि दोनों के मतलब बिल्कुल उल्टे हैं।

कहां से आया है यह टमाटर?
टमाटर शब्द कहां से आया है ? आप कहेंगे, अंग्रेजी के tomato से। लेकिन अंग्रेजी का Tomato कहां से आया ? यह आया फ्रेंच, स्पैनिश और पुर्तगाली के Tomate से। अब इंग्लिश में इन तीनों में से किस भाषा से आया, कहना मुश्किल है।

Eureka का मतलब है 'मुझे मिल गया'
युरीका आया है ग्रीक शब्द heureka जिसका मतलब है ' मुझे मिल गया। ' कहा जाता है कि आर्किमीडीज़ ने जब नहाते समय डिस्प्लेसमंट का सिद्धांत खोज निकाला तो वह heureka-heureka चिल्लाते हुए नंगे ही राजदरबार की ओर दौड़ लिए थे।

Cesarean आया है जूलिअस सीज़र से?
सर्जरी द्वारा किसी बच्चे के जन्म को cesarean section क्यों कहा जाता है, इसके बारे में दंतकथा यह है कि रोमन सम्राट जूलिअस सीज़र का जन्म इसी तरह हुआ था। ceasus का अर्थ काटा जाना। इसे गप्प माननेवाले कहते हैं कि ऐसा होता तो उनकी मां जिन्दा नहीं बचतीं जबकि वह कई सालों तक जीवित रहीं। रोमन काल में ऑपरेशन से प्रसव आम था मगर ज्यादातर मामलों में माताओं की मौत हो जाती थी।

किसके नाम पर है एवरिस्ट?
दुनिया की सबसे ऊंची चोटी मांउट एवरिस्ट का नाम भारत के सर्वेयर जेनरल Sir George Everest (1790-1866) के नाम पर रखा गया है। इसे नेपाली में सगरमाथा और तिब्बती में चोमोलुंग्मा कहते हैं। Everest का उच्चारण एवरेस्ट नहीं, एवरिस्ट है।

मेरा रिक्शा है जापानी...
रिच्क्षव

रिक्शा शब्द आया है जापानी शब्द जिन (आदमी)- रिकि (ताकत)- शा (गाड़ी) से। यानी आदमी द्वारा हाथ से खींची जानेवाली गाड़ी। भारत में पहला रिक्शा 1880 में शिमला में आया। अब वह केवल कोलकाता में चल रहा है।

Dollar अमेरिकी है पर अमेरिकी नहीं
1599 में चेकोस्लोवाकिया के शहर Joachimstal की एक चांदी की खान में कुछ सिक्के गढ़े गए जिनको नाम दिया गया Joachimstaler. लोगों में पहले यह Taler और बाद में Daler के नाम से जाना जाने लगा क्योंकि ट के उच्चारण को कई लोग ड बोलते हैं। अंग्रेज़ों ने स्पेलिंग बदलकर Dollar बना दिया। जब उन्होंने अमेरिका में कॉलनी बनाई तो वहां केसिक्के को यही नाम दे दिया। 1785 से यह वहां की ऑफिशल करंसी घोषित हो गई।

Fortnight यानी चौदह रातें
Fortnight बना है old English के féowerténe niht से जो बाद में बना fourtenight. इसका मतलब है fourteen nights यानी चौदह रातें। आम तौर पर चौदह नहीं , पंद्रह दिनों के लिए इस शब्द का इस्तेमाल होता है जिसके लिए हिन्दी में शब्द है पखवारा या पखवाड़ा। यह संस्कृत के पक्ष से आया है।

विचारों का लुटेरा यानी plagiarist
प्लागिअरिस्म

किसी और के शब्दों और विचारों को अपना बता कर पेश करने को कहते हैं plagiarism ( प्लेजरिज़म) और ऐसा काम करने वाले को plagiarist (प्लेजरिस्ट)। यह शब्द बना है लैटिन के plagiarius जिसका मतलब है अपहरण करनेवाला, लुटेरा आदि। लेकिन प्लेजरिज़म और नकल में अंतर है। मसलन किसी बहुत ही मशहूर धुन की नकल कॉपीराइट कानून का उल्लंघन भले हो लेकिन वह प्लजरिज़म नहीं है क्योंकि श्रोता जानता है कि असली धुन किसकी है।

Google शब्द कहां से आया?
1940 में गणितज्ञ एडवर्ड कैसनर ने अपने 9 साल के भतीजे से 1 के बाद 100 शून्य वाले नंबर यानी 10000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000 के लिए कोई शब्द गढ़ने को कहा। उसने गढ़ा Googol हालांकि यह गणित के कैलक्युलेशंस में ज्यादा इस्तेमाल नहीं होता। 1998 में एक सॉफ्टवेयर कंपनी के मालिकों ने इस शब्द में फेरबदल कर इसे अपने सर्च इंजन के लिए इस्तेमाल किया और यह बहुत जल्दी इंटरनेट इस्तेमाल करनेवालों में लोकप्रिय हो गया।

सेक्रेटरी जो रखे गुप्त मामलों का ख्याल
यह शब्द लैटिन के secretarius से आया है जिसका मतलब था गुप्त और कॉन्फिडेंशल मामलों को देखनेवाला अधिकारी। बाद में यह कारोबार और सौदों का रिकॉर्ड रखनेवाले कर्मचारियों के लिए भी यूज़ होने लगा। अमेरिका में सरकार के मंत्रियों को भी सेक्रेटरी कहा जाता है।

केचअप आया चीन से, अरब से सिरप
Ketchup शब्द चीनी ke-tsiap से आया है। चीन से यह डच भाषा में होते हुए इंग्लिश में आया। इसी तरह syrup शब्द का मूल अरबी शब्द शराब या शरबत है। फ्रेंच में इसे sirop कहते हैं जहां से यह अंग्रेजी में आया।

Mango तो अपना ही है यार
आम का अंग्रेजी नाम दक्षिण एशिया की देन है। इसे तमिल में मांकइ और मलय में मांगा कहते हैं। यहीं से manga बनकर पुर्तगाली में गया जहां से 1582 ईसवी में यह शब्द अंग्रेजी में आया। वैसे इसका वैज्ञानिक नाम भी mangifera indica है।

News शब्द कहां से आया?
आम धारणा है कि News n orth, e ast, w est और s outh के शुरुआती अक्षरों के मेल से बना है। लेकिन भाषाई एस्क्सपर्ट इसे नहीं मानते। उनके अनुसार 20वीं शताब्दी से पहले acronym होते ही नहीं थे। न्यूज़ दरअसल New यानी नया से बना है क्योंकि समाचार हमेशा नई चीजों और घटनाओं की जानकारी देते हैं।

संस्कृत की विधवा, अंग्रेजी में विडो
क्या अंग्रेज़ी का विडो संस्कृत के विधवा से बना है ? शायद। वैसे विधवा के लिए बाकी भाषाओं में जो शब्द हैं, वे भी इससे काफी मिलते-जुलते हैं - लैटिन में vidua, फ्रेंच में veuve, इटैलियन में vedova, स्पैनिश में viuda, रशन और चेक में vdova, वेल्श में gweddr, जर्मन में witwe और डच में weduwe ।

Lesbos की कवयित्री से आया लेज़्बिअन
LESBIAN

महिला समलिंगियों के लिए इस्तेमाल होनेवाला शब्द लेज़्बिअन Lesbos (लेज़्बॉस) नामक एक ग्रीक द्वीप से आया है जिसकी एक कवयित्री सैफो(7 वीं शताब्दी ईसापूर्व) युवतियों और महिलाओं के बीच बहुत लोकप्रिय थीं। सैफो की कई कविताएं स्त्रियों के प्रति उनके प्रेम को दर्शाती हैं।

हैट दिया तो बना हैट ट्रिक
HAT TRICK

यह शब्द सबसे पहले 1877 ईसवी में इस्तेमाल हुआ। समझा जाता है कि तब किसी क्रिकेट मैच में लगातार तीन गेंदों पर तीन विकेट लेने पर बोलर को क्लब की तरफ से एक हैट मिलता था। बाद में फुटबॉल और हॉकी में भी लगातार तीन गोल करने पर हैट ट्रिक शब्द का इस्तेमाल होने लगा।

धनुष से बना TOXIC
टॉक्सिक का मतलब होता है ज़हरीला लेकिन यह शब्द आया है toxon से जिसका ग्रीक में मतलब होता है घनुष। तीरों पर जो ज़हर लगाया जाता था, उसे कहते थे toxikon. बाद में लैटिन ने जब इसको अपनाया तो धनुष - बाण से उसका संबंध खत्म हो गया और हर तरह के ज़हर के लिए इसका इस्तेमाल होने लगा। अंग्रेजी में भी इसका यही अर्थ प्रचलित है।

Japan का एक और मतलब भी है
POLISH and JAPAN

ये दोनों ऐसे शब्द हैं जिनका पहला लेटर कैपिटल या स्मॉल लेटर में लिखने का अर्थ बदल जाता है। Polish ( उच्चारण पोलिश) का मतलब होता है पोलंड (ध्यान दें – इसका उच्चारण पोलैंड नहीं है) का निवासी जबकि polish ( पॉलिश ) का मतलब तो आप जानते ही हैं। इसी तरह Japan एक देश का नाम है जबकि japan टिकाऊ फ़िनिश देनेवाला एक टिकाऊ रंग। दोनों का एक ही उच्चारण है जपैन।

चैसिस नहीं, शैसी है मेरे यार...
CHASSIS

गाड़ी की चैसिस ? माफ कीजिए, इसे शैसी बोला जाता है। इसे बहुवचन में भी Chassis ही कहा जाता है हालांकि इसका उच्चारण होगा शैचीज़।

TA-TA for Now

Ta-Ta

गुडबाइ के लिए इस्तेमाल होनेवाले इस शब्द का टाटा परिवार से कोई लेना-देना नहीं है। साल 1823 में इसका सबसे पुराना रेकॉर्ड मिलता है बच्चे की बोली की रूप में। 1941 में बीबीसी के रेडियो कार्यक्रम ITMA (It’s that man again) से यह लोकप्रिय हुआ जिसमें एक कैरक्टर मिसिज़ मॉप विदा कहते समय कहती है TTFN (Ta-ta for now).

Go Dutch यानी अपना खर्चा खुद करो
इसका मतलब है किसी सामूहिक काम में लोग अपना-अपनी खर्च उठाएं। यह आया है Dutch lunch या Dutch treat से जिसका मतलब है ऐसा भोज जिसमें सभी लोग अपना-अपना पेमंट खुद करें। यह दरअसल जर्मन लोगों को नीचा दिखाने के लिए अंग्रेजों और अमेरिकियों द्वारा गढ़े गए जुमलों में से एक है। Dutch से ही बने कुछ और अपमानजनक जुमले हैं Dutch nightingale (मेढक), Dutch wife (केन से बना एक प्रकार का तकिया), Duch courage ( नशे में दिखाई गई हिम्मत ) आदि।

दो गरिले - एक आया अफ्रीका से, दूसरा स्पेन से
GUERRILLA ( एक स्पेलिंग Guerilla भी) और GORILLA इन दोनों ही शब्दों का उच्चारण गरिला है, गेरिल्ला या गोरिल्ला नहीं और दोनों में कोई संबंध नहीं है।
Guerrilla ( छापामार योद्धा ) शब्द बना है स्पैनिश guerra से जिसका मतलब है युद्ध, जबकि gorilla ( वनमानुष ) एक ग्रीक यात्राकथा में अफ्रीकी स्त्रियों की एक जाति को दिए गए नाम Gorillai से आया है।

ए से लेकर ज़ी तक...
Z – ज़ेड या ज़ी ?

कभी आपने सोचा कि यह टीवी चैनल जिसके लोगो में Z बना हुआ है, उसे ज़ी टीवी क्यों कहते हैं ? क्योंकि अमेरिका में Z को ज़ी बोला जाता है। यानी A-Z को बोलेगें ए टु ज़ी।

हाउसवाइफ और सूई-धागे का डिब्बा...
HOUSEWIFE
हाउसवाइफ का मतलब तो आप जानते होंगे, खासकर घर पर रहकर घर के कामकाज देखने वाली शादीशुदा महिला। लेकिन इसका एक और मतलब है सूई और धागे रखने का डिब्बा। दोनों में क्या संबंध है, इसका अंदाज़ा तो आप लगा ही सकते हैं। वैसे इसका उच्चारण हाउसवाइफ़ से बहुत अलग है – हज़िफ़।

Los Angeles का पूरा नाम
अमेरिकी शहर Los Angeles का पूरा नाम है El Pueblo de Nuestra Señora la Reina de los Ángeles del Río de Porciúncula . इस स्पैनिश नाम का मतलब है इस छोटे खंड के फरिश्तों की रानी हमारी स्वामिनी का शहर।
Los Angeles के कई उच्चारण हैं – लॉस ऐंजलस, लॉस ऐंजलिस, लॉस ऐंगलस, लॉस ऐंजलीज़, लॉस ऐंजिलीज, लॉस ऐंगलीज़। लगता है, जिसको जैसा मन आया, उच्चारण चला दिया। अगर आपको कोई एक नाम चुनने में दिक्कत आ रही है तो LA ही बोलिए.

नमक खरीदने के लिए सैलरी?
SALARY
आज 1 तारीख है सैलरी का दिन। Salary शब्द बना है लैटिन के Sal से जिसका मतलब है नमक। दरअसल रोमन सैनिकों को नमक खरीदने के लिए जो रकम दी जाती थी, उसे कहते थे SALARIUM जिससे बना SALARY जिससे आप नमक ही नहीं, बहुत-कुछ खरीद सकते हैं।

Swansong यानी मौत से पहले की रचना
राजहंस ( Swan - उच्चारण स्वॉन ) के बारे में यह माना जाता है कि वह मरने से पहले बहुत ही मधुर गीत गाता है हालांकि यह सच नहीं है। लेकिन इससे ही बना है यह शब्द और इसीलिए किसी लेखक या कलाकार की मौत या रिटायरमंट से पहले की आखिरी रचना को swansong कहा जाता है।

गुरू को मनाइए विवाह शीघ्र होगा



शीघ्र विवाह के लिए गुरू का रत्न पहनना चाहिए। गुरू यदि निर्बल होता है, तो गुरू संबंधी कारक तžवों का फल क्षीण हो जाता है। संतान संबंधी अड़चन, आर्थिक तंगी, विवाह में देरी, पीठ में दर्द, घुटनों में दर्द, कलेजे में तकलीफ, पाचन शक्ति की तकलीफ, पेट की तकलीफ आदि होने की संभावना बढ़ जाती है। कुंडली में यदि मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु या मीन लग्न हो या चंद्र राशि हो या गुरू लग्न, तृतीय, पंचम, षष्ठम, अष्टम या द्वादश भाव में होता है या जिस कन्या का विवाह नहीं होता है, उसे विवाह कारक गुरू का रत्न पुखराज पहनना चाहिए।
3 रत्ती से ऊपर का पुखराज सोने की अंगूठी में जड़वाकर, गुरू, पुष्य के दिन, प्राण, प्रतिष्ठा कर सूर्यास्त से एक घंटे पहले तर्जनी अंगुली में धारण करना चाहिए। मंदिर में पैसा चढ़ाना, पीपल का पेड़ लगाकर उसकी देख-भाल करना,गुरूवार को जल चढ़ाना, गुरू मंत्र का जप करना, 27 गुरूवार का व्रत करना एवं खाने में चने की दाल का प्रयोग करना, 5 गुरूवार बूंदी के लड्डू का प्रसाद चढ़ाना, हल्दी, केसर, शक्कर, नमक, शहद, बूंदी के लड्डू दान करना, गुरूवार के दिन पिता, गुरू, दादा, बड़े भाई को प्रणाम करना, सोना पहनना, 7 गुरूवार घोड़े को चने की दाल खिलाने से गुरू ग्रह का बल बढ़ाया जा सकता है।

लियुली वैल्थ पांट

फेंगशुई में पानी से जुडी किसी भी वास्तु को सौभाग्य और समृधि से जोड़कर देखा जाता है। पानी में मौजूद सकारात्मक तत्त्व घर व व्यापार में तरक्कती लाते हैं। क्रिस्टल से बना यह सुन्दर लियुली वैल्थ पांट भी ख़ास तरीके से डिजाइन किया गया है, जिससे भाग्य आपका साथ दे। इसे वैल्थ पांट का आकर देकर छोटे से फव्वारे का रूप दिया गया है। इसमें पानी को लगातार चलाये रखने के लिये रोलिंग बाँल तकनीक का उपयोग किया गया है। इसे अंग्रेगी के कुछ सह्ब्दों से भी जोड़कर देखा जाता है, जैसे 'फ्लोट-अ-लोनऔर 'कैश फ्लो'। इन दोनों का ही अर्थ रुपयों और इसके इसके फ्लो से है। दुनिया के मशहूर फेंगशुई विशेषज्ञ मास्टर लिलियन टू के अनुसार, 'पानी को सही तरीके से रखकर कोई भी पैसे वाला बन सकता है।' कंरियर के कोहाज से लियुली वैल्थ पांट को उत्तर दिशा में रखें, जो अवसरों को आकर्षित करता है। पानी को पूर्व दिशा में रखने से पैसे की घर में आमद होती है। इससे घर में सकारात्मक उर्जा का भी संचार होता है। घर के दरवाजे पर प्रवेश करते ही इसे बायें हाथ पर रखें, जिससे पति-पत्नी के बीच बेहतर सामंजस्य बना रहे। हमेशा याद रखें कि इसे शयनकक्ष में रखना ठीख नहीं है, वर्ना बीमारी, नुकसान, चोरी की आशंका बन सकती है।

भवन-निर्माण में वास्तु का महत्व

वास्तु शास्त्र के अनुसार भवन निर्माण के लिए चुना गया भूखण्ड आयताकार या वर्गाकार होना चाहिए। जिसकी सभी चारों दीवारें 90 अंश का कोण बनाती हों। ऐसा प्लाट वास्तु नियमानुसार उत्तम श्रेणी का प्लाट माना जाता है। हम वास्तु के नियमों को ध्यान में रखकर काफी हद तक वास्तु के द्वारा अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं। भूखण्ड का चयन करते समय हमेशा ध्यान रखें कि भवन निर्माण के लिए चुना गया भूखण्ड बन्द गली व नुक्कड़ का न हो। ऐसे मकान में निवास करने वालों को सन्तान की चिन्ता और नौकरी, व्यापार में हानि, शरीर-कष्ट आदि परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।


घर का तल समतल रखें। फर्श का ढलान दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की तरफ होना चाहिए। भवन निर्माण करते समय ध्यान रखें कि उत्तर-पूर्व व पूर्व दिशा का भाग ज्यादा-से-ज्यादा खुला होना चाहिए। अगर जगह छोड़ पाने की गुंजाइश न हो तो इन दिशाओं की ओर ज्यादा-से-ज्यादा खिड़की एवं दरवाजे रखे जा सकते हैं। ऐसा करने से घर व घर में रहने वालों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है।

घर में बीम डलवाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बीम के नीचे बैठना, सोना या अधिक समय बिताना मानसिक परेशानियों को निमंत्रण देना है। घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा के भाग में कभी किसी प्रकार का गड्ढा न बनायें। मकान के मुख्य द्वार को अन्य द्वारों की अपेक्षा बड़ा बनायें और घर के अन्दर एक सीध में तीन द्वार न बनायें।
दक्षिण दिशा बाला मकान निवास परिवार के लिए शुभ नहीं माना जाता, इसलिए दक्षिणमुखी मकान में निवास न करें। घर के मुख्यद्वार के सामने सीढ़ियाँ न बनायें। सीढ़ियाँ गिनती में 5, 7, 11, 13, 17, 21 होनी चाहिए। सीढ़ियों के नीचे बाथरूम, मन्दिर, शौचालय, रसोई या स्टोर रूम न बनायें। घर के मुखिया का शयनकक्ष दक्षिण-पश्चिम में होना उचित माना गया है। मकान की छत में रोशनी के लिए बनाया गया मोगा ठीक नहीं होता और उसमें लोहे का जाल लगाना और भी खराब फल देता है।

शौचालय बनाते समय यह ध्यान रखें कि सीट की व्यवस्था ऐसी कदापि न हो कि मल-मूत्र विर्सजन करते समय व्यक्ति का मुख पूर्व दिशा की ओर रहे। ऐसा करने से बीमारियाँ व परेशानियाँ व्यक्ति को घेरे रहती हैं। पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करना, पढ़ना श्रेष्ठ है। अन्य कार्य करते समय उत्तर मुखी होना श्रेष्ठ माना गया है। मकान का ब्रह्म स्थान (मध्य स्थान) हमेशा खाली व साफ-सुथरा रखें।

मकान टी-जंक्शन पर नहीं होना चाहिए। घर के सामने कोई बड़ा पेड़, खम्बा आदि या कोई अवरोध नहीं होना चाहिए। रसोईघर की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि खाना बनाते समय गृहणी रसोई घर में आने वाले व्यक्ति को आसानी से देख सके। रसोई का मुख्यद्वार खाना बनाते समय गृहणी के पीछे न पड़े या कम-से-कम कोण पर रसोई में आने वाले व्यक्ति को आसानी से देख सके। घर में पानी की व्यवस्था करते समय ध्यान रखें इसके लिए उचित उत्तर-पूर्व, उत्तर व पूर्व दिशा है। मकान में भूल कर भी तहखाना (बेसमेंट) नहीं बनबाना चाहिए। यदि तहखाना बनाना जरूरी हो तो उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में बना सकते हैं।

वास्तु में दक्षिण-पूर्व कोण को आग्नेय कोण कहा जाता है, इसलिए जनरेटर, ट्रांसफॉर्मर, मोटर आदि विद्युत उपकरण इस दिशा में लगाना उचित माना जाता है। पानी की टंकी के लिए छत पर पश्चिम दिशा या उत्तर-पश्चिम दिशा का चयन ही ठीक रहता है। मकान के छत पर घर के पुराने, बेकार या टूटे -फूटे समान को न रखें घर की छत हमेशा साफ-सुथरी रखें। शयनकक्ष में पलंग/चारपाई की व्यवस्था ऐसी करें कि सोने वाले का सिर दक्षिण एवं पैर उत्तर दिशा की तरफ हो। शयनकक्ष में दर्पण ऐसे न लगा हो कि सोने वाला व्यक्ति का कोई भी अंग दिखाई पड़े। घर में दर्पणों को लगाते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। दर्पण के लिए हमेशा उत्तर-पूर्व, उत्तर, पूर्व दिशा को ही उत्तम माना गया है।

घर के भारी सामान जैसे अलमारी, सन्दूक, भारी वस्तुओं के लिए दक्षिण व पश्चिम दिशा का स्थान चयन करना चाहिए। रसोई घर की व्यवस्था दक्षिण-पूर्व में करें तो अति उत्तम होगा। खाना पकाते समय गृहणी को पूर्व की तरफ मुख करके खाना बनाना चाहिए। पूजाघर के लिए उत्तर-पूर्व दिशा का स्थान सर्वोत्म माना गया है। बच्चों की पढ़ाई के लिए पूर्व दिशा व पूर्व मुखी बैठकर पढ़ना अच्छा माना गया है। महमानों के ठहरने की व्यवस्था वायव्य दिशा (उत्तर-पश्चिम) में करनी चाहिए। इसी कोंण में उन लड़कियों के सोने या रहने की व्यवस्था करनी चाहिए जो विवाह योग्य हों।

सीढ़ियाँ दक्षिण-पश्चिम दिशा में बनवायें। अगर ऐसा सम्भव न हो तो एन्टी क्लोक वाइस सीढ़ियों का निर्माण ठीक माना गया है। मजबूत तने वाले या ऊँचे-ऊँचे पौधे उत्तर-पूर्व, उत्तर व पूर्व दिशा में ही होने चाहिए। घर के आस-पास या घर के अन्दर कैक्टस, कीकर, बेरी या अन्य कांटेदार पौधे व दूध वाले पौधे लगाने से घर के अन्य लोग तनावग्रस्त, चिड़चिडे़ स्वभाव व घर की स्त्रिायों के स्वास्थ्य को हानि पहुँचाते हैं। घर में तुलसी का पौधा उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में रखें और तुलसी का पौधा जमीन से ऊँचाई पर ही लगाना उचित है। तुलसी के पौधे पर कलावा, लाल चुन्नियाँ नही बांधना चाहिए। तुलसी का पौधा अपने आप में पूर्ण मन्दिर के समान माना जाता है। इसलिए किसी भी प्रकार निरादर नहीं होना चाहिए। घर में तेज खुशबूदार पौधों को नहीं लगाना चाहिए। घर में चौड़े पत्ते वाले पौधे, बौनसाई पौधे व ऐसी बेलें जो नीचे की तरफ झुकी होती है नहीं लगाना चाहिए। पौधे लगाते समय ध्यान रखें कि पौधे सही प्रकार बढ़ें, सूखें नहीं, सूखने पर तुरन्त बदल दें। घर में फलदार पौधे भी लगाना हानिकारक हो सकता है। मैंने देखा है कि जिस वर्ष फलदार पौधे पर फल कम लगे या न लगें अपेक्षा पहले के वर्षों के, ऐसे में आपको नुकसान या परेशानी का सामना ज्यादा करना पड़ेगा। घर में पीले फूलों वाले पौधे लगाना शुभ माना जाता है। बैडरूम में पौधे नहीं लगाने चाहिए, इसके स्थान पर आर्टिफिशल पौधे रख सकते हैं। गमलों की आकृति कभी भी नोंकदार नहीं होनी चाहिए। गमलों में डाली जाने वाली मिट्टी शमशान, कब्रिस्तान या कूड़ेदान आदि से न लाई गई हो। पौधे लगाते समय ध्यान रखें कि पौधे इस तरह से लगाये जायें जिसमें कोपलें, पत्तियाँ व फूल जल्द ही निकलें। ऐसे पौधे अच्छे भाग्य के परिचायक होते हैं।

घर में लाएं सकारात्मक ऊर्जा और सुख समृद्धि

फेंगशुई चीनी वास्तुकला है, जो लोगों को अपने आसपास के माहौल को सुख शांति और समृद्धिपूर्ण बनाये रखने में काफी सहायक सिद्ध होती है। इसके लिए फेंगशुई ने कई वस्तुओं और प्रतीकों के इस्तेमाल का सिद्धान्त है। वास्तव में फेंगशुई सौभाग्यसूचक वस्तुओं और प्रतीकों के जरिए खुशहाली घर में लाने के टिप्स बताती है। इन दिनों फेंगशुई फिर से प्रचलन में है। घर या ऑफिस में वास्तु निर्माण, साज सज्जा और बनावट किस तरह की हो जिससे सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित हो, फेंगशुई इसके तरीके बताती है। यह आर्ट किसी भी तरह के वातावरण में शांति और बैलेंस लाने का एक अच्छा बेहतरीन जरिया है। फेंगशुई के जरिए घर में शांति और समृद्धि का वास होता है।

वास्तव में जिन वस्तुओं के जरिए फेंगशुई खुशहाली, सम्पन्नता, शांति और सकारात्मक ऊर्जा लाने की मददगार साबित होती है, वे सभी चीन में सौभाग्यवर्धक वस्तुओं और चिन्हों के रूप में जाने जाते है। पेन, घंटियां, मोमबत्तियां, ड्रेगन की आकृति के खिलौने और चीनी देवी देवताओं की मूर्तियां, ये सभी सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह और विचारों में पवित्रता लाने में सहायक होते हैं।

भारतीय वास्तु के साथ-साथ फेंगशुई आर्ट भी विश्व में लोकप्रिय हो रही है। फेंगशुई आर्ट में तमाम वैराइटी हैं, लेकिन इनमें फेंगशुई पेंटिंग्स सबसे ज्यादा यूज की जाती हैं। ऎसी पेंटिंग्स लगाने से घर में सुख समृद्धि का वास होता है, ऎसा माना जाता है। घर की साज सज्जा को इनसे खूबसूरत रंगों का टच मिलता है। पेंटिंग्स में फेंगशुई आर्ट को इमेज के हिसाब से इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए पानी की पेंटिंग्स वातावरण में यही एलिमेंट लाती है। फेंगशुई आर्ट पीस कई तरह से बनाए जाते हैं और इनके मतलब भी अलग-अलग होते हैं। ऎसे में अलग-अलग लोग इन्हें अलग-अलग तरीकों से देखते हैं और इनकी अलग परिभाषा देते हैं। फेंगशुई आर्टपीस बहुत ध्यान से खरीदने चाहिए।

पेंटिंग्स खरीदने से पहले रखें कुछ बातों का ध्यान फेंगशुई आर्टपीस को लेने से पहले उसके रंग और वे क्या रिप्रजेंट करते हैं, इन पर भी गौर करें। यह वाकई बहुत महत्वपूर्ण है।

ध्यान दें कि पेंटिंग्स और उसके भीतर की इमेज लगाई जाने वाली जगह पर सौहार्द पैदा कर सकें। यहां तक कि पेंटिंग का फैब्रिक और फ्रेम भी उसके एलिमेंट के अनुरूप होना चाहिए।

फेंगशुई गाइड लाइन के अनुसार एक अंधेरा कोना किसी भी जगह पर बुरा प्रभाव डालता है, क्योंकि यह ची यानी "एनर्जी" का फ्री फ्लो नहीं होने देता। ऎसे अंधेरे कोने में फेंगशुई आर्टपीस रखने से उस जगह पर उजाला और जान आ जाती है। इससे ची यानी एनर्जी अट्रैक्ट होती है।

वैसे, फेंगशुई के तमाम पीसेज आप घर में लगा सकते हैं, क्योंकि ये किसी भी स्पेस में सौहार्द पैदा करने के लिए बहुत अनुकूल हैं।

दस हज़ार डाँलर का नियम

जब हम छोटे थे, हमें मिठाई तब तक नहीं मिलती थी, जब तक हम लौकी क़ी सब्जी न खा के दिखा दें।

हम जैसे-जैसे बड़े होते जाते हैं, यह प्रतिक्रिया थोड़ी परिष्कृत होती जाती है। फर्क इतना होता है क़ी आपसे लोग काम लेने के लिये काम से निकाल देने की धमकी नहीं देते पर एक अलग तरह का पाजिटिव प्रेशर बनाया जाता है। एक बात तो है क़ी लौकी और मिठाई की युक्ति में थोडा फेरबदल करने पर इससे आज भी अच्छे परिणाम पाए जा सकते हैं। एक श्रेष्ट टीम के बेहत सफल कोच ने अपनी काँलेज की बास्केटबाँल टीम में ऐसा ही नियम अपनाया और नाम रखा दस हजार डाँलर का नियम।

उसने औसत से कम प्रदशन कर रही अपनी टीम से कहा, 'तुम कहते हो क़ी तुम किसी भी नए खिलाड़ी से ज्यादा फ्री थ्रो बेकार जाने देते हो और इसमें सुधार नहीं कर सकते।'

उसने आगे कहा, 'अब, अगर में तुम्हे आगे आने वाले सीजन में होने वाले मैचेस में औसत से ज्यादा फ्री थ्रो खेलने पर दस हजार डाँलर दूं,' तो क्या तुम उसका साथ फीसदी टारगेट छू पाओगे।'

उसे उत्तर मिला, 'हाँ, मुझे पता है, मैं कर लूँगा।'

'हाँ, मुझे भी पता है क़ी तुम कर लोगे, लेकिन केवल एक चीज कम होगी। मैं तुम्हे दस हजार डाँलर नहीं दूंगा। तुम सारे खिलाड़ी सही दिशा पर जा रहे हो। बस हर बार जब तुम फ्री थ्रो खेलो, तो यह सोचना क़ी तुम दस हजार डाँलर पाने के लिये खेल रहे हो।' इसके बाद वह खिलाड़ी, जो एक पचास फीसदी फ्री थ्रो ही खेल पाता था, अब सत्तर फीसदी फ्री थ्रो खेलने लगा।

भिन्न स्थिति में सामान नियम
'इस सेक्सन में काम करने वाले किसी भी अन्य कर्मचारी क़ी तुलना में काफी देर में तुम्हारा काम पूरा होता है। मैंने तुम्हारे सारी वजहें सुन ली हैं, लेकिन वह तार्किक नहीं लगती हैं। मैं तुम्हारे लिये एक प्रस्ताव रखता हूँ। अगर अगले वर्ष तुम काम पूरा करने में एक बार भी लेट हुए, तो मैं तुम्हे दस हजार डाँलर दूंगा। क्या दस हजार डाँलर के लिये तुम यहाँ पर समय से आकर समय पर काम पूरा कर सकते हो।'

'आप शर्त लगायें, सर! मैं करके दिखा दूंगा।' कर्मचारी का उत्तर मिला। प्रत्युतर में उससे कहा गया, 'बस एक फार्म होगा। न तुम आइंदा लेट ह्होगे और न ही मैं तुम्हे दस हजार देने वाला हूँ, लेकिन मैं चाहता हूँ क़ी समस्या का समाधान करने के लिये तुम वैसे ही करो, जैसे क़ी तुम्हे दस हजार डाँलर मिलने वाले हों। तुम कर सकते हो, यह तुमने अभी स्वयं ही स्वीकार किया है। बस प्रेरित होने की बात है।'

बदली स्थिति में सामान नियम
इस बार प्राब्लम की लोकेशन आपका सिर है। जो भी समस्या है, वह केवल आपकी है। आपके केस में बांस वह सभी असुरक्षाएं और डर हैं, जिनसे अगर आपने समाधान खोजने की कोशिश नहीं की, तो आप लगातार ग्रस्त रहेंगे, अब खुद पर दस हजार डाँलर का नियम लागू करने की कोशिश करें। अगर आपको अलग से दस हजार डाँलर मिलते तो क्या आप अपनी समस्या के समाधान के लिये सक्रिय होते।

कहे की बात नहीं कि आप वाकई दस हजार डाँलर मिलने की बात सुनते ही अपनी समस्या का समाधान खोजने की दिशा में तत्पर हो जायेंगे। प्रेरणा की ही तो बात है। फिर वह चाहे साकार हो या निराकार। प्रेरित होकर कार्य करने की आदत डालिए। आप कर सकते हैं।

गुरुस्पीक्स - असफलता से डरें नहीं

संसार में आलोचकों की तो कोई कमी नहीं हैं लेकिन उन लोगों का सदा अकाल ही रहता है जो हमारे सर्वश्रेष्ठ प्रदशन पर खुलकर तारीफ़ कर सकें। कम से कम आप तो किसी की सही तारीफ़ का कोई भी मौक़ा न गवाएं। तारीफ़ करने में बिलकुल न हिचकें। इससे उस व्यक्ति को तो प्रोत्साहन मिलेगा ही, वह आपको अपना शुभचिंतक ही समझेगा।

जीवन का आनंद हमारे विचारों में ही निहित रहता है। तब तक हम अंदर से आनंद महसूस नहीं करेंगे, बाहर भला दूसरों से कैसे बाँट सकते हैं। हमारे पास इश्वर का दिया ऐसा बहुत कुछ है जिसके लिये हमें उसका कृतज्ञ होना चाहिए। परम पिता क़ी कृपा का सम्मान कीजिये और सदैव प्रसन्न रहने का प्रत्यं कीजिये। प्रसंता बड़े-से-बड़े तनाव को मिटा सकती है। आपके पास बहुत कुछ होता है प्रसन्न रहने को। शेक्सपियर ने कहा है, 'यदी किसी गुण का अभाव है तो भी मान लो क़ी वह तुम में है।'

इसके पिव्रीत, नकारात्मक एवं निन्दात्मक रहने दुखी रहने की पहली सीढी है। खुश रहने का एक दूसरा उपाय है, साधारण से हटकर अपना काम दिखाना, जिसमें, कुछ विशिष्टता व विलक्षणता रहे। यदी आप अपने काम के प्रति प्रतिबद्ध और उतकृष्टता के प्रति निष्ठावान रहेंगे तो आप भी ऐसे करिश्मे जरूर दिखा सकते हैं। आम आदमी साधारणता के प्रति इतना समर्पित हो जाता है क़ी उसके ऊपर उठकर कुछ प्राप्त करने की छह ही नहीं रखता।

समस्याएं तो हर एक के जीवन में आती हैं। इनके समाधान के लिये सारे संभव हल एक कागज़ पर लिख लें। फिर उनमें से जो सबसे ज्यादा सही और सुलभ लगे, उसका प्रयोग करें। यदि आप सही मात्र में सही समय पर सही काम करते हैं तो सफल होना कोई कठिन काम नहीं है। योग्यताओं का जितना अधिक इस्तेमाल होगा, उतनी ही वह निखरेगी। अगर कोई तरीका कारगर साबित न हो, दूसरा अपनाएं। असफल होने पर पछताने के बजाय आगे देखें।



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दस हजार डाँलर का नियम
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