आजकल लड़कों और लड़कियों की फ्रेंडशिप को मॉडर्न सोसाइटी में बुरा नहीं समझा जाता, लेकिन इसकी खुमारी में कई लोग हद से गुजरने की कोशिश करते हैं। इसकी पहली सीढ़ी होती है किस करना। कई लड़के 'किस' करके अपने प्यार का इजहार करना चाहते हैं, जो ज्यादातर लड़कियों को पसंद नहीं आता।
अगर आप किसी के साथ रिलेशनशिप में इनवॉल्व हैं, तो हो सकता है कि आपको भी इस स्थिति का सामना करना पड़े। ऐसे में आप शालीनता से इनकार कर सकती हैं। आपको किसिंग जैसी गैरवाजिब डिमांड से इनकार करने का पूरा हक है। आपको अपनी तरफ से ऐसा कोई संकेत नहीं देना चाहिए, जिससे हौसला पाकर कोई ऐसा कदम उठाने की कोशिश करे, जो आपको पसंद नहीं है।
फ्लर्ट कभी नहीं
फ्लर्ट करना बिल्कुल बंद कर दीजिए। लड़कियां ज्यादा खुलकर बातचीत करने लगती हैं, तो लड़कों को आगे बढ़ने का हौसला मिल जाता है। गर्ल्स को एक सीमा में रहकर ही किसी से बातचीत करनी चाहिए।
रूखापन फिर भी नहीं
' किस' की डिमांड पर आप इनकार में सिर हिला सकती हैं। आमतौर पर देखा गया है कि बॉयफ्रेंड जब अपने पार्टनर के नजदीक आने की कोशिश करते हैं, तो लड़कियां उन्हें गुस्से से झटक देती हैं। जहां तक हो सके, ऐसा करने से बचें। इस तरह की बातें रिलेशनशिप को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके बजाय सिर्फ इनकार में सिर हिलाना सही रहेगा।
अभी भी तैयार नहीं
ईमानदार बनिए। अपने फ्रेंड को सच्चाई से बताइए कि आप रिलेशनशिप में इस समय आगे नहीं बढ़ना चाहतीं और उसकी 'किस' की डिमांड पूरी नहीं कर सकती। आपकी मित्रता में सच्चाई और ईमानदारी ही रिलेशनशिप को आगे बढ़ाएगी।
तो वह लायक नहीं
अपने बॉयफ्रेंड को बताइए कि आप जिंदगी के इस मोड़ पर वह सब नहीं करना चाहतीं, जो वह चाहता है। अगर आपका दोस्त आपकी बातों को नहीं मानता और फिर भी आगे बढ़ने की कोशिश करता है, तो वह आपकी दोस्ती के लायक नहीं है।
तुझसे दूर मैं नहीं
' किस' के लिए इनकार करने के बाद भी अपने बॉयफ्रेंड से अच्छा व्यवहार कीजिए। उसे बताइए कि आपको अभी भी उसके गले लगना और हाथों में हाथ डालकर चलना पसंद है।
14 फ़रवरी 2012
नहीं, नहीं, अभी नहीं ! अभी करो इंतजार
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Posted by Udit bhargava at 2/14/2012 10:30:00 pm 0 comments
पार्टनर की इन आदतों से पुरुषों को होती है चिढ़
इसमें कोई शक नहीं कि पुरुष पत्नी या गर्लफेंड को दिल से चाहते हैं , लेकिन कभी कभार उन्हें उनसे चिढ़ भी होती है। और , इसकी वजह है कुछ आदतें , जिनसे पुरुषों को काफी कोफ्त होती है ...
ड्रामेबाजी से दूरी भली
आमतौर पर पुरुष ड्रामा करने वालीं महिलाओं से दूर भागते हैं। फिर महिलाएं भी अपनी जिंदगी के हर क्षण को उसी तरह इन्जॉय करना पसंद करती हैं , जिस तरह पुरुष करते हैं।
बुराई सुनना पसंद नहीं
पुरुषों को अपनी पत्नी या महबूबा के मुंह से किसी अन्य महिला की बुराई सुनना भी अच्छा नहीं लगता। यह एक जांचा - परखा हुआ सच है कि लेडीज दूसरी महिलाओं को अपना कट्टर प्रतिद्वंद्वी मानती हैं , पर यह हमेशा याद रखना चाहिए कोई महिला किसी दूसरे की बुराई कर पुरुषों का दिल नहीं जीत सकती। अगर कोई महिला किसी दूसरी महिला की ड्रेंस सेंस और जूतों को निशाना बनाती है तो वह महिला पुरुषों में लोकप्रिय नहीं हो सकती।
ईर्ष्या से आपसी संबंधों में दरार
महिलाओं के ईर्ष्यालु स्वभाव से पुरुषों को काफी कोफ्त होती है। यह कहना गलत है कि ईर्ष्या से आपसी संबंधों को नई जिंदगी मिलती है , बल्कि इससे गहरे संबंधों में भी दरार आ जाती है। जब लाइफ पाटर्नर में से कोई एक अपने साथी पर अविश्वास करने लगता है , तभी संबंध बिगड़ते हैं।
शंकालु महिलाओं के साथ गुजारा कठिन
पुरुषों को हर समय इमोनशल सपोर्ट के लिए अपनी ओर देखनी वाली महिलाएं भी पसंद नहीं होती। पुरुषों को महिलाओं के शक्की स्वभाव से काफी कोफ्त होती है। पुरुष सोचते हैं कि शक करने वाली महिलाओं के साथ गुजारा करना तो हर समय अपनी मनमर्जी चलाने वाली महिलाओं से भी ज्यादा तकलीफदेह होता है।
बार - बार एक ही सवाल
पुरुषों को अपने पार्टनर से एक ही बात बार - बार सुनना कतई अच्छा नहीं लगता। आमतौर पर महिलाओं का सवाल होता है , आप क्या सोच रहे हैं ? इससे उन्हें यह आशा होती है कि वह पुरुष उनके सामने अपने दिल की भावनाएं उंडेल कर रख देंगे , लेकिन होता इसके उलट है।
अपने लिए कब टाइम निकालें ?
कुछ महिलाएं चाहती हैं कि उनके पति दफ्तर के समय या काम खत्म होने के बाद सारा वक्त केवल उन्हीं के साथ गुजारें , लेकिन उन्हें यह समझना चाहिए कि उनके पति को भी तो अपने लिए कुछ समय चाहिए। यह एक तरह से पुरुषों की प्राइवेट लाइफ में दखल है।
इसके लिए महिलाएं अपने पति की मौजूदगी में रिश्तेदारों से पूछना शुरू कर देती हैं कि आपके पति खाली समय में क्या करते हैं , जो किसी भी गैरतमंद आदमी को बुरा लगेगा। महिलाएं अपने पति की जेब से बिना पूछे पैसे आदि निकाल लेती हैं। इससे भी वह परेशान होते हैं।
आंसू बहाना पसंद नहीं
हर समय भावनाओं के समंदर में बहने वाली महिलाएं भी पतियों को पसंद नहीं आती। पुरुषों को लगातार आंसू बहाने वाली और बात - बात पर गुस्सा करने वाली व तुनकमिजाज महिलाएं भी पसंद नहीं होतीं।
कितनी बार करें शॉपिंग ?
पुरुषों को बार - बार शॉपिंग के लिए पत्नी के साथ जाना पसंद नहीं होता। जब पत्नियां पतियों से शॉपिंग पर बार - बार जाने की जिद करती है तो पुरुषों को वाकई परेशानी होती है।
बातूनी व्यवहार से परेशानी
पत्नी का जरूरत से ज्यादा बोलना भी पतियों को नागवार गुजरता है। महिलाएं किसी बात की जड़ तक पहुंचकर ही मानती हैं , जबकि पुरुषों को गैर जरूरी बात सुनना तक नापसंद होता है।
पार्टनर को सजा देना गलत
पत्नियां पति को सजा देने के लिए कई तरीके अपनाती हैं। कुछ दिन के लिए पति को छोड़कर चले जाना या रूठकर पूरी तरह साथ न निभाना भी उनमें से एक है , लेकिन कई बार यह दांव उलटा पड़ जाता है और गृहस्थी तहस - नहस हो जाती है।
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Posted by Udit bhargava at 2/14/2012 08:53:00 pm 0 comments
20 मार्च 2011
सेक्सः स्त्रियां भी तोड़ें नियम
सेक्स दांपत्य जीवन का एक अहम हिस्सा है, मगर कई बार कल्पनाशीलता के अभाव में यह उबाऊ भी हो सकता है। इसका नतीजा सामने आता है पहले सेक्स के प्रति उकताहट के रूप में और फिर यह आपसी संबंधों में आई नीरसता में बदल जाता है। यह सुनने में अजीब लग सकता है मगर उकताहट भरा सेक्स अक्सर दांपत्य जीवन को भी उकताहट भरा बना देता है। इतना ही नहीं पति-पत्नी के बीच की आपसी समझदारी पर भी इसका असर देखा जा सकता है। इसका असर इतना गहरा होता है कि सेक्स विशेषज्ञ कहते हैं कि आम जीवन में पति-पत्नी के बीच बातचीत और उनके तौर-तरीकों को देखकर बताया जा सकता है कि उनकी सेक्स लाइफ कैसी है।
बदलते दौर में स्त्रियां
बदलते दौर ने हर जगह स्त्रियों की भूमिका को बदला है। गौर करें तो अब घर के तमाम अहम फैसले पत्नियां ही करने लगी हैं। रात को डिनर में क्या बनेगा से लेकर ड्राइंगरूम की सजावट, कार का मॉडल और बच्चों के लिए कौन सा स्कूल बेहतर रहेगा... अक्सर स्त्रियां ही तय करने लगी हैं। बाहरी जीवन में आए इस बदलाव का असर शयनकक्ष पर भी पड़ा है। पहले के मुकाबले सेक्स में उनकी सक्रियता बढ़ी है। बदलते समय के साथ पुरुषों न सिर्फ इस बदलाव को स्वीकार किया है बल्कि वे इसे सकारात्मक तौर पर लेने लगे हैं।
पत्नियों की भूमिका बदली
गौर करें तो रूटीन सेक्स लाइफ को दिलचस्प बनाने की जिम्मा अब सिर्फ पति पर नहीं डाला जा सकता। स्त्रियां अपनी सेक्सुअलिटी और सेक्स इच्छाओं के प्रति जागरुक हो रही हैं। सेक्स भी उनका पैसिव रोल नहीं रह गया है, अब वे इसमें बराबर की भागीदार हैं। यहां सेक्स एक्सपर्ट्स के उन सुझावों पर एक नजर डालेंगे जिन्हें वे खास तौर पर आज के दौर की स्त्रियों को ध्यान में रखकर देते हैं।
नियम बनाएं नहीं नियम तोड़ें
सेक्स एक्सपर्ट्स की सबसे जरूरी सलाह यह है कि सेक्स लाइफ को दिलचस्प बनाने का कोई नियम नहीं है। बल्कि वे बेडरूम में बिताए क्षणों को सुखद बनाने के लिए नियम बनाने की जगह नियम तोड़ने पर ज्यादा जोर देते हैं। उनका मानना है कि पत्नियों का नियम तोड़ना दंपति की सेक्स लाइफ में एक नई ऊर्जा भर देता है। आइये देखें वो कौन से नियम हैं जिन्हें तोड़ने का साहस कभी-कभार हर पत्नी को करना चाहिए।
अनावृत होने से डरें नहीं
आम तौर पर शादी के कुछ साल बाद सेक्स को तमाम कामों की तरह फटाफट निपटाने पर ज्यादा जोर दिया जाने लगता है। इसका सबसे पहला असर यह होता है कि पत्नियां पूरी तरह से अपने कपड़े उतारने से डरती हैं। उन्हें यह भी डर होता है कि ऐसी स्थिति में परिवार के किसी सदस्य ने बुला लिया तो? फिलहाल यहां एक्सपर्ट्स की राय मानें और कभी-कभार पति के सेक्सी मूड को देखते हुए उऩ्हें अपने शरीर के उतार-चढ़ाव से खेलने का पूरा मौका दें। यह स्त्रियों में अपनी सेक्सुअलिटी के प्रति आत्मविश्वास पैदा करेगा।
फोरप्ले को नजरअंदाज न करें
सेक्स में फोरप्ले की भूमिका को नजरअंदाज न करें। इसे महज एक शारीरिक क्रिया में न बदल दें। दरअसल फोरप्ले ही पति-पत्नी मे आपसी संवाद और समझदारी बढ़ाता है। यह आपके सेक्स को ज्यादा उत्तेजक, उत्साह से भरा बनाता है। देर तक आपके भीतर उसकी सिहरन बरकरार रहती है। इतना ही नहीं यह आपकी व्यस्त दिनचर्या से आपके मन-मस्तिष्क को बाहर निकालता है, आपको ज्यादा फ्रेश और ज्यादा उर्जा से भरा हुआ बनाता है।
मल्टीपल आर्गेज्म आजमाएं
मप्लीपल आर्गेज्म के बारे में स्त्रियों ने सुना तो बहुत होता है मगर उसके व्यावहारिक रूप के बारे में उन्हें कुछ भी पता नहीं होता है। शोध बताते हैं कि आर्गेज्म के बाद भी स्त्रियों की योनि में देर तक उत्तेजना बनी रहती है। यानी आपका शरीर तृप्ति के बाद भी सहवास की मांग करता रहता है। अक्सर संसर्ग के बात दंपति एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं और इस सुख से वंचित रह जाते हैं। तो यह नियम तोड़ने के लिए जरूरी है कि सहवास खत्म होने के बाद भी प्रेम करना जारी रखें। आपके पति को दोबारा तैयार होने में थोड़ा वक्त लगेगा। फोरप्ले को दोबारा किया जा सकता है। अपने साथी से नाजुक अंगों को दोबारा सहलाने को कहें। आप दोबारा ज्यादा मादकता से भरे सुख को पाने के लिए तैयार होंगी।
अंधेरे की आजादी
अंधेरा आपके सेक्स व्यवहार को एक नई आजादी देता है। आप तौर पर दंपति सेक्स के दौरान तेज रोशनी नापसंद करते हैं। मगर इस बार धीमे नाइट लैंप को भी आफ कर दें। अंधेरे में एक-दूसरे के शरीर के स्पर्श को महसूस करें। एक-दूसरे की सांसों के उतार-चढ़ाव और कानों में गूंजती फुसफुसाहट और अस्फुट आवाजें आपके लिए एक नया अनुभव होंगी...
सेक्सुअल फैंटेसी शेयर करें
महिलाएं अक्सर अपनी सेक्सुअल फैंटेसी शेयर करने से हिचकिचाती हैं। आमतौर पर उन्हें इस बात का भय सताता है कि कहीं पति ने उन्हें गलत समझ लिया तो... मगर यह नियम तोड़ने के लिए भी आपको साहस करना होगा। एक सर्वे के मुताबिक पति न सिर्फ पत्नियों की सेक्सुअल फैंटेसी के बारे में जानने को उत्सुक रहते हैं बल्कि यह उनके भीतर उत्तेजना भी बढ़ाता है। आप उनके लिए सिर्फ एक सेक्स मशीन नहीं बल्कि इच्छाओं से भरी एक बहुआयामी स्त्री के रूप मे सामने आती हैं। तो एक अपनी कल्पनाएं आजमा कर देखें॥ उन्हें बताएं कि आपने सपना देखा कि आपके फेवरेट फिल्म स्टार ने आपको गोद में उठा रखा था.. फिर देखिए वे आपकी कल्पनाओं में कैसे पंख लगाते हैं...
कामसूत्रः ... अगर मूड में आ गए हैं तो हड़बड़ी मत करिए। मंजिल तक पहुंचने में वक्त लीजिए।
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Posted by Udit bhargava at 3/20/2011 06:50:00 am 0 comments
13 मार्च 2011
सेक्स से जुड़े आश्चर्यजनक तथ्य
सेक्स को हमेशा से इंसान एक खास संवेदना के रूप में देखता है। गौर करें तो किसी भी व्यक्ति के जीवन की खुशियां बहुत कुछ उसकी सेक्स लाइफ पर ही निर्भर होती हैं। मगर जीवन का इतना अहम हिस्सा होने के बावजूद इंसान की यह संवेदना हमेशा एक रहस्य का आवरण लिए रहती है।
प्राचीन कहावतों पर यकीन करें तो सेक्स को कोई अपने जीवन काल में भी पूरा नहीं समझ सकता, क्योंकि वह ब्रह्मांड की तरह विस्तृत, गहरा और असीम है। प्रत्येक व्यक्ति का यौन अनुभव दूसरे किसी से अलग हो सकता है। आइए हम आपको सेक्स से जुड़े कुछ आश्चर्यजनक तथ्य बताते हैं, उम्मीद है कि यह आपके लिए दिसचस्प होगा।
इंसान और डाल्फिन, विश्व की दो ऐसी प्रजातियां हैं जो अपने आनंद के लिए सेक्स का सहारा लेती हैं।
यदि पूरी दुनिया भर में हो रही सेक्सुअल गतिविधियों पर नजर डाली जाए तो यह एक दिन में करीब 100 मिलियन बैठती है।
पुरुष औसतन प्रत्येक सात सेकेंड में एक बार सेक्स के बारे में सोचते हैं।
अमेरिका मे हुए एक शोध से पता चला है कि बीते तीन दशकों में वहां के एक औसत पुरुष की शुक्राणु संख्या में करीब तीस प्रतिशत की गिरावट आई है।
यौन क्रिया के दौरान महिलाओं के मुकाबले पुरुषों को कहीं ज्यादा पसीना आता है। स्त्रियां की शारीरिक संरचना में बदन से निकलने वाले पानी को नियंत्रित करने की क्षमता होती है।
मानव शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा त्वचा है। एक औसत वयस्क के शरीर में इसका वजन छह पाउंड होता है।
आज धड़ल्ले से इस्तेमाल होने वाला कंडोम सन 1500 में ही अस्तित्व में आ गया था।
कंडोम का सबसे दिलचस्प इस्तेमाल द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान देखने में आया था। उस वक्त सिपाही अपनी राइफलों की नली को इससे ढका करते थे क्योंकि भीतर खारा पानी जाने से वह खराब हो जाती थीं।
यौन क्रिया काफी खर्चीली भी है। इस तरह कि एक औसत महिला पूरी तरह से उत्तेजित होकर सेक्स क्रिया करने के दौरान 70 से 120 कैलोरी प्रति घंटे की दर से खर्च करती है और एक पुरुष 77 से 155 कैलोरी।
शायद आपके लिए यह जानना दिलचस्प हो कि चुंबन से दंतक्षय की दर को कम किया जा सकता है। क्योंकि अतिरिक्त लार से मुंह साफ रखने में मदद मिलती है। एक मिनट के लिए लिया गया चुंबन शरीर की 26 कैलोरी जला सकता है।
किसी व्यक्ति के पूरे जीवन में चुंबन के लिए खर्च किए जाने वाले समय को जोड़ा जाए...तो यह 336 घंटे या 20.160 मिनटों के बराबर बैठता है। यानी कि पूरे जीवन में कुल 14 दिन।
सिर्फ नपुंसकता 26 अमेरिकी राज्यों में तलाक के लिए बड़ा आधार है।
महिलाओं के लिए संभोग एक कारगर दर्द निवारक है। क्योंकि संभोग के दौरान शरीर में एंडोमार्फीन का स्राव होता है, जो कि एक शकितशाली दर्द निवारक माना जाता है।
मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि पश्चिमी समाज में पैर यौन आकर्षण का सबसे प्रमुख केंद्र हैं।
सेक्स में सक्रिय व्यक्ति की दाढ़ी उसकी निष्क्रिय अवस्था में रहने की तुलना में कही ज्यादा तेजी से बढ़ती है।
एक स्वस्थ मनुष्य संभोग के दौरान करीब पांच मिलीलीटर वीर्य स्खलित करता है, जिसमें तीस करोड़ से पचास करोड़ तक शुक्राणु मौजूद होते हैं।
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Posted by Udit bhargava at 3/13/2011 06:59:00 am 0 comments
06 मार्च 2011
स्त्रियों में सेक्स संबंधी उदासीनता
महिलाओं से जुड़ा एक बेहतर पॉपुलर सवाल है, "आखिर एक औरत के मन में है क्या?" अमेरिका में चिकित्सकों और शोधकर्ताओं की एक पूरी टीम इस सवाल का जवाब पाने में जुट गई और इस तलाश में कई अहम जानकारियां सामने आईं। दरअसल इस सवाल में अक्सर पूछा जाने वाला एक और अहम सवाल छिपा होता है जो निश्चित तौर पर एक स्त्री के सेक्स संबंधी दिलचस्पियों की पड़ताल करता है। यह सवाल दरअसल स्त्री की उम्र और सेक्स के रिश्ते से जुड़ा हुआ है। कई लोग मानते हैं कि एक स्त्री की उम्र उसकी सेक्स संबंधी दिलचस्पियों पर काफी असर डालती है। यह माना जाता है कि उम्र बढ़ने के साथ एक स्त्री काम क्रीड़ाओं में पहले जैसी दिलचस्पी नहीं लेती।
लाइफ पार्टनर भी जिम्मेदार
हालांकि हाल में हुए कई शोध से यह बात साफ हो गई है कि मध्यम आयु वर्ग की महिलाओं मे संभोग के प्रति दिलचस्पी होना अथवा न होना सिर्फ बढ़ती उम्र पर निर्भर नहीं करता। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि उसका और उसके लाइफ पार्टनर का स्वास्थ्य कैसा है और सेक्स संबंधी गतिविधियों में वे कितनी दिलचस्पी लेते हैं। आम धारणा के विपरीत शोध में यह पाया गया है कि मध्यम आयु में भी औरतें न सिर्फ सेक्सुअली काफी सक्रिय होती हैं बल्कि कई मामलों में उनकी दिलचस्पी बढ़ती भी पाई गई है।
शोध के दौरान जब यह जानकारी हासिल करने की कोशिश की गई कि जो महिलाएं सेक्स में सक्रिय नहीं हैं उसके पीछे क्या वजह है, तो पता चला कि कई भावनात्मक कारणों से उनकी सेक्स और अपने पार्टनर में दिलचस्पी खत्म हो चुकी है। उम्र बीतने के साथ औरतों में सेक्स के प्रति रूचि खत्म होने का बड़ा कारण उनके पार्टनर का व्यवहार होता है। पार्टनर में सेक्स के प्रति दिलचस्पी घटना या किसी प्रकार की अक्षमता का सीधा असर स्त्रियों की यौन सक्रियता पर पड़ता है। ऐसी भी स्त्रियां हैं जिनकी सेक्स में दिलचस्पी खत्म होने की अन्य वजहें भी रही हैं, मगर उनकी संख्या कम है।
उल्लेखनीय है कि यह शोध जर्नल ऑफ अमेरिकन जराचिकित्सा सोसाइटी की ओर से किया गया था। इसमें मध्यम आयु वर्ग की सेक्स संबंधी हर तरह की दिलचस्पियों को शामिल किया गया था, जिसमें हस्तमैथुन भी शामिल था। शोध के दौरान स्त्रियों का एक बड़ा वर्ग सेक्सुअल एक्टीविटीज में उम्र बढ़ने के साथ ज्यादा सक्रिय होता पाया गया। शोध से यह स्पष्ट नतीजे सामने आए कि किसी भी स्त्री कि सेक्स संबंधी सक्रियता का उसकी उम्र के साथ कोई सीधा रिश्ता नहीं है। बल्कि वह उम्र बढ़ने के साथ सेक्स का ज्यादा आनंद उठा सकती है। शोध कार्य में लगे डाक्टरों की टीम की कुछ सिफारिशों में यह भी शामिल था कि किसी भी स्त्री के सेक्स हेल्थ को उसके पूरे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से अलग रखकर नहीं देखा जा सकता।
कुछ सुझाव
यह पूरा अध्य्यन जर्नल ऑफ अमेरिकन जराचिकित्सा सोसायटी में प्रकाशित हुआ था। इस आधार पर मनोवैज्ञानिकों तथा सेक्स सलाहकारों ने कुछ सुझाव भी रखे हैं।
ध्यान दें आपकी पार्टनर किसी दवा के साइड इफेक्ट की वजह से भी सेक्स में दिलचस्पी खो सकती है। यदि ऐसा है तो डाक्टर की सलाह लें।
कई बार स्त्रियां मानसिक दबाव के चलते भी सेक्स में रुचि नहीं लेती हैं। बच्चों में ज्यादा व्यस्त हो जाने तथा सामाजिक मान्यताओं के चलते उन्हें लगता है सेक्स बहुत दिलचस्पी लेना उचित नहीं। इसके लिए जरूरी है के कपल थोड़ा समय अपने लिए भी निकालें।
कई बार खान-पान संबंधी आदतों का भी सेक्स लाइफ पर असर पड़ता है। कुछ खाने के आइटम व्यक्ति में उत्तेजना को कायम रखते हैं और उनका मूड बनाने में मदद करते हैं। बढ़ती उम्र में खान-पान पर ध्यान देकर सेक्स लाइफ को बेहतर बनाया जा सकता है।
कई बार ऐसा होता है कि बच्चों के बाद महिलाएं अपने शरीर को लेकर असहज हो जाती हैं और हीन भावना का शिकार हो बैठती हैं। इसके चलते भी वे सेक्स से जी चुराने लगती हैं। इसका सबसे बेहतर इलाज है नियमित व्यायाम। इससे न सिर्फ शरीर को खूबसूरत बनाया जा सकता है बल्कि यह मूड बनाने में भी मददगार है।
बढ़ती उम्र में घर-परिवार और बढ़ती कामकाजी जिम्मेदारियों के कारण वे थकने लगती हैं और सेक्स के लिए उनमें पर्याप्त एनर्जी नहीं बचती। इसके लिए जरूरी है कि भागदौड़ के बीच थोड़ा वक्त अपने लिए भी निकाला जाए। किसी भी कपल को चाहिए कि वे खुद के आराम और मनोरंजन के लिए वक्त निकालें।
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Posted by Udit bhargava at 3/06/2011 06:37:00 am 0 comments
30 जनवरी 2011
बेहतर सेक्स के लिए बेहतर भोजन
जिस तरह अच्छा भोजन आपको शरीर और मन से स्वस्थ रखता है, ठीक उसी तरह अच्छा भोजन आपको सेक्स लाइफ में भी फिट रखता है। सारी दुनिया में खानपान से जुड़ी ऐसी तमाम मान्यताएं हैं, जिन्हें मनुष्य के यौन जीवन में प्रभावी माना जाता था। आज भी यह माना जाता है कि अपने खाने में थोड़ा सा परिवर्तन करके आप अपनी सेक्स लाइफ को बेहतर बना सकते हैं और यहां तक कि बहुत सी यौन दुर्बलताओं पर काबू पा सकते हैं। आइए एक नजर डालें कुछ इसी तरह की खानपान परंपराओं पर जो कि अनुभव की कसौटी पर भी खरी साबित हुई हैं।
शहदः फारसी कहावत के मुताबिक कोई भी जोड़ा लगातार तीस दिनों तक शहद और पानी का सेवन करता है तो उनकी वैवाहिक जीवन बहुत सुखमय और स्वर्गिक आनंद से भरा हुआ होता है। दरअसल इस मान्यता के पीछे वैज्ञानिक आधार यह है कि शहद में उच्च गुणवत्ता वाले अमीनो-एसिड और कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं जो दंपति को लंबी यौनक्रिया के लिए पर्याप्त ऊर्जा प्रदान करते हैं।
गाजरः इसे पुरुषों में यौन शक्ति बढ़ाने वाला माना जाता है। लंबे समय से गाजर का इस्तेमाल पु्रुषों की यौन क्षमता को मजबूती प्रदान करने में होता आया है। माना जाता है कि गाजर में मौजूद विटामिन्स का सामंजस्य व्यक्ति के स्नायु तंत्र को मजबूत बनाता है और व्यक्ति के जीवन में यौन सक्रियता लाता है।
सरसों: वर्षों से सरसों को सेक्सुअल ग्लैंड्स के लिए लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि सरसों के इस्तेमाल से स्त्री-पुरुष में यौन भावना को बढ़ाता है।
अदरकः इसकी तीखी खुशबू और स्वाद का यौन भावना से सीधा रिश्ता है। इसमें मौजूद तत्व व्यक्ति के भीतर रक्त संचार को तेज करते हैं। इसीलिए इसे हर लिहाज से एक बेहतर सेक्स उत्प्रेरक माना जाता है।
चाकलेटः इसमें मौजूद तत्व मस्तिष्क से एक खास तरह के हारमोन के रिसाव को प्रेरित करते हैं। इस हारमोन की मौजूदगी व्यक्ति में शांति और आनंद की भावना को लाता है, जो कि सेक्स उत्प्रेरक का काम करता है। आम तौर पर डार्क चाकलेट एक बेहतर सेक्स उत्प्रेरक का काम करती है।
समुद्री भोजन: यह लिस्ट काफी लंबी हो सकती है। बहुत सी खाने-पीने की चीजें सीधे यौन शक्तिवर्धन से जुड़ी हुई मानी जाती हैं। आम तौर पर समुद्री भोजन को एक बेहतर सेक्स उत्प्रेरक माना जाता है। जहां एक तरफ सेक्स क्षमता को बढ़ाने में इस तरह की बहुत सी खानपान से जुड़ी मान्यताएं काफी कारगर साबित हुई हैं वहीं दूसरी तरफ इस बारे में किसी तरह की वैज्ञानिक जागरुकता के अभाव में भ्रामक धारणाएं भी कम नहीं हैं।
कुछ भ्रामक धारणाएं
इन भ्रामक धारणाओं में बाघ व कछुए का मांस तथा स्पेनिश फ्लाई को यौन शक्तिवर्धक मान लिया गया है। इन धारणाओं से जहां बाघ और कछुए जैसी खतरे में मानी जाने वाली प्रजातियों को मारकर उनका मांस चोरी-छिपे बेचा जाता है, वहीं स्पेनिश फ्लाई में मौजूद जहरीले तत्व थोड़ी देर के लिए यौन उत्तेजना तो देते हैं मगर वे शरीर तथा मनुष्य की सेक्स क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि बेहतर सेक्स के लिए स्वास्थ्यवर्धक खाने की आदत डालें। बेहतर स्वास्थ्य बेहतर सेक्स की कुंजी है।
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Posted by Udit bhargava at 1/30/2011 06:56:00 am 1 comments
16 जनवरी 2011
फोरप्लेः सबसे सही शुरुआत
क्या आपको लगता है कि सेक्स आपके जीवन का बस एक नीरस हिस्सा बनकर रह गया है। इसके प्रति न तो आपके मन में कोई उत्सुकता है और न रोमांच... बल्कि आप इसे जैसे-तैसे रोजमर्रा के किसी काम की तरह निपटाना चाहते हैं। यदि हां, तो शायद आपको फोरप्ले के बारे में गंभीरता से सोचना होगा।
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Posted by Udit bhargava at 1/16/2011 06:49:00 am 0 comments
02 जनवरी 2011
जीवन में लाएं प्यार की ऊर्जा
प्यार शायद दुनिया के सभी प्राणियों को कुदरत की तरफ से दिया गया सबसे बेहतरीन तोहफा है। यही जीवन में रंग भरता है और जीवन तथा इस सृष्टि की निरंतरता को बनाए रखता है। शायद इसी वजह से प्राचीन हिन्दू परंपराओं में इसे जीवन के चार अहम उद्देश्य धर्म, अर्थ और मोक्ष के साथ काम के रूप में अहमियत दी गई है। प्राचीन हिन्दू धर्म जीवन में आने वाले इस आनंद की अनुभूति को उतना ही अहम मानता है, जितना कि ज्ञान की तलाश को।
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Posted by Udit bhargava at 1/02/2011 07:02:00 am 0 comments
09 दिसंबर 2010
आपके अंदाज में है सेक्स अपील
हिन्दी सिनेमा के सबसे सेक्सी दृश्यों को याद करें। शायद आपके आंखों के आगे बारिश में भीगती नायिका की झलक कौंध जाएगी। जिसके कपड़े भीगकर बदन से चिपक गए हों। पारदर्शी कपड़ों से शरीर बाहर झांक रहा हो। इससे भी ज्यादा सेक्सी आपको लगी होंगी शायद उस अभिनेत्री की अदाएं। यह साफ बताता है कि हमारी सेक्सुअल फैंटेसी में शारीरिक भाव-भंगिमाएं यानी कि बॉडी लैंग्वेज की क्या भूमिका है।
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जो दीवाना बना दे...
पुरुषों के अंदाज
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Posted by Udit bhargava at 12/09/2010 05:02:00 pm 0 comments
14 नवंबर 2010
क्या हो सेक्स की सही उम्र
सहमति के आधार पर सेक्स करने की मिनिमम उम्र कितनी होनी चाहिए, यह एक बहस का विषय है, लेकिन हाल ही में लॉ कमिशन ने इस मुद्दे पर अपनी बेबाक राय जाहिर की। आइये जानते हैं, इस बारे में एक्सर्पट्स क्या सोचते हैं:-
पिछले दिनों लॉ कमिशन ने लड़कियों के लिए सहमति के आधार पर सेक्स की उम्र 16 साल करने की सिफारिश की। कमिशन की इस सिफारिश ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। कई एक्सपर्ट का मानना है कि सेक्स के लिए 16 साल की उम्र बहुत कम है। सेक्स एंड मैरिज थेरेपिस्ट डॉक्टर विनोद छब्बी कहते हैं, '18 साल से कम उम्र में सेक्स करने की छूट देना ठीक नहीं है। वैसे भी उम्र को सेक्स करने की छूट देने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 16 साल की उम्र में लड़की सेक्स के लिए इमोशनली तैयार होती है?'
देखा जाए तो इन मामलों में इमोशंस बहुत बड़ा रोल निभाते हैं। सोशल वर्कर और काउंसिलर निवेदिता कश्यप बताती हैं, '13 साल की उम्र से बच्चों में सेक्स के बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ जाती है। ऐसे में अगर उन्हें छूट दे दी जाए, तो वे इसे सिर्फ एक खेल की तरह लेंगे। लड़कों पर भले ही इस बात का कोई फर्क न पड़े, लेकिन लड़कियां हर चीज से इमोशनली जुड़ जाती हैं। ऐसे में उनकी स्टडी और फैमिली रिलेशन प्रभावित हो सकते हैं।'
अगर लड़कियां सेक्स से इमोशनली जुड़ जाएं तो उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। 18 वर्षीय स्टूडेंट मंजूषा अपनी फ्रेंड का उदाहरण देती हैं, 'मेरी फ्रेंड ने अपने बॉयफ्रेंड के साथ फिजिकल रिलेशन बनाए थे। उसका मानना था कि यह बॉयफ्रेंड के साथ की जाने वाली सबसे कूल एक्टिविटी है। वह अपने बॉयफ्रेंड से भावनात्मक रूप से भी जुड़ गई थी। उसे भरोसा था कि उसका बॉयफ्रेंड उसके अलावा किसी और लड़की से रिलेशन नहीं बनाएगा, लेकिन जब उसे पता चला कि उसके बॉयफ्रेंड के किसी और लड़की के साथ भी रिलेशन हैं, तो उसे काफी झटका लगा।' डॉ विनोद के मुताबिक, इस उम्र के लड़के और लड़कियां गर्भधारण से बचने के साधनों का इस्तेमाल करना पसंद नहीं करते। उन्हें लगता है कि यह सब झंझट है। ऐसे में उन्हें सेक्सुअल डिजीज होने का खतरा भी बना रहता है।
20 साल के रितिक भी 16 की उम्र में सेक्स की छूट देने से सहमत नहीं हैं। वह कहते हैं, 'ज्यादा दिनों की बात नहीं है, जब डीपीएस एमएमएस कांड को लेकर हंगामा हुआ था। उसमें सभी लड़के-लड़कियों की उम्र 16 से कम ही रही होगी।' उधर निवेदिता कहती हैं, 'हमारे यहां के गांवों में आज भी बाल विवाह का चलन काफी जोरों पर है। वहां के बच्चे टेलिविजन, नेट, किताबों और दोस्तों के माध्यम से सेक्स के बारे में काफी तेजी से जान रहे हैं। अगर हमारे लॉ मेकर्स उन्हें ध्यान में रखकर सेक्स की उम्र निर्धारित कर रहे हैं, तो इसे कम से कम 18 साल किया जाना चाहिए।'
ऐसा भी नहीं है कि सभी एक्सपर्ट सेक्स की उम्र को 16 साल किए जाने के खिलाफ हैं। फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉक्टर कामिनी राव कहती हैं, '16 साल का कोई भी बच्चा अपनी जरूरतों के बारे में अच्छी तरह जानता है। वह काफी मैच्योर होता है और अपने फैसले खुद ले सकता है। जरूरी नहीं कि इस उम्र के बच्चों के बीच होने वाले सेक्स का रिजल्ट प्रेग्नेंसी ही हो।' ब्रिटनी स्पियर्स की बहन जैमी लिन के कम उम्र में प्रेग्नेंट होने की घटना याद दिलाने पर वह कहती हैं, 'इतनी कम उम्र में इस तरह के कदम वही बच्चे उठाते हैं, जो अपनी वैल्यूज को भूल चुके हैं। हमें अपने बच्चों को संस्कारी बनाना चाहिए। पैरंट्स को कभी भी अपने टीनएज बच्चों को जरूरत से ज्यादा फ्रीडम नहीं देनी चाहिए।'
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Posted by Udit bhargava at 11/14/2010 10:28:00 am 1 comments
05 सितंबर 2010
क्या आपकी शादी होने जा रही है? ( What are you getting married? )
अधिकाश युवक भावी पत्नी को लेकर तरह-तरह के ख्यालों में खोये रहते हैं। उनमें कुछ बातें ऐसी भी होती हैं, जो उन्हें तनाव व दुःख में डुबो देती हैं। जैसे शिशन के आकार, उत्थान, टेढापन, लिंग पर उभरी नसों का होना, वृषण कोष का आकार, वीर्य की मात्रा व पतलापन, सम्भोग क्षमता, समय, स्त्री जननांगो के बारे में अज्ञानता, सेक्स तकनीक, शीघ्र स्खलन आदि के बारे में सोच-सोचकर वे दुःख में घिर जाते हैं। सौ में से साठ प्रतिशत मामलों में युवक हस्तमैथुन से उपजी काल्पनिक नपुंसकता को लेकर चिंतित रहते हैं।
इसी प्रकार युवतियों में शादी से पूर्व प्रथम शारीरिक संबंध के दौरान होने वाले दर्द रक्तस्त्राव के बारे में चिंता रहती है। कुछ युवतियों में इस बात का भय रहता है की प्रथम शारीरिक संबंध के दौरान काफी दर्द होगा, खून बहेगा.... आदि। इस चिंता के कारण कुछ लड़कियां यौन संबंध के दौरान असहज हो जाती हैं। परिणाम स्वरुप यौन संबंधों में मिलने वाले आनंद के स्थान पर संबंध बनाने में ही दिक्कत आती है। संभावित दर्द व रक्त स्त्राव की कल्पना मात्र से ही लड़की अपने आपको तथा योनि द्वार को इतना कस लेती हैं की संभोग हो पाना ही कठिन हो जाता है।
युवक-युवतियों में ऐसी स्थिति को दूर करने के लिये उन्हें उचित ज्ञान-विज्ञान व तकनीकी को समझाए जाने की जरूरत है। साथ ही उनकी इस धारणा को बदलने की जरूरत है, जो उनमें भय व अंधविश्वास की जड़ है। यहाँ संक्षेप में शादी से पूर्व और शादी के बाद की स्थितियों पर गौर करते हुए कुछ आवश्यक बातों पर प्रकाश डाल रहे हैं, ताकि लड़के-लडकियां इसे आत्मसात करके सहजता से नए यौन-जीवन का सुखद शुभारम्भ कर सकें-
पत्नी के साथ संभोग के लिये मन में उत्साह, शारीरिक सक्रियता, आत्मबल, आत्मविश्वास व आत्मा नियंत्रण आवश्यक है। बाकी बातें गूढ़ हैं, जैसे की शिशन छोटा, टेढा होना, शीघ्र स्खलन आदि। हाँ, पुरूष को स्त्री जननांगों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। उसी प्रकार से दुल्हन को यह बात गाँठ बाँध लेनी चाहिए की प्रथम सहवास के समय जो हल्का-सा दर्द होता है, वह संभोग में मिलने वाले आनंद के मुकाबले में कहीं नहीं ठहरता। दर्द सिर्फ क्षण भर के लिये होता है, फिर गायब हो जाता है। यह कोई ऐसा दर्द नहीं की दुल्हन बेहोश हो जाए।
प्रथम सहवास के दौरान कौमार्य झिल्ली फटती है और रक्तस्त्राव होता है। लेकिन वह मामूली-सा। योनीद्वार पर एक पतली झिल्ली होती है, जिसे हाईमन कहते हैं। योनिद्वार इससे ढका होता है। युवक-युवतियों को यह जान लेना चाहिए की झिल्ली की उपस्थिति का कौमार्य से कोई सीधा संबंध नहीं है। स्कूल-काँलेज में होने वाले खेल-कूद, साइकिल चलाने, दौड़ने आदि के दौरान यह झिल्ली फट सकती है। अतः झिल्ली का फटना कौमार्य नष्ट होना हरगिज नहीं माना जाता चाहिए।
दूल्हा-दुल्हन को प्रथम सहवास के दौरान कमरे में अन्धेरा नहीं रखना चाहिए। अन्धकारक के दौरान दोनों को शारीरिक संरचना (जननांगों के बारे में) का ज्ञान नहीं हो पाता। उसके अलावा अन्धकार के कारण स्त्री-पुरूष को एक-दूसरे से मिलने वाली उत्तेजना तथा आकर्षण का लाभ नहीं मिल पाता।
सुहागरात को कक्ष में प्रवेश करने से पूर्व पुरूष अपने मन में यह संकल्प करके न जाए की उसे हर हाल में दुल्हन के साथ यौन संबंध कायम करना है। यह जरूरी नहीं है की पहली रात में ही यौन संबंध स्थापित किया जाए। यह सब पति-पत्नी की सहमति, इच्छा, वातावरण आदि पर निर्भर करता है। दुल्हन का स्वभाव होता है की वह पहले प्यार चाहती है, फिर सेक्स। पुरूष को उसकी भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
सुहागरात को पति हो या पत्नी, दोनों में से किसी को भी अपने पूर्व संबंधों (अगर भूलवश ऐसा हो) के बारे में चर्चा नहीं करनी चाहिए। विवाहित संबंध परस्पर विश्वास व सहयोग के तालमेल पर टिके होते हैं। इस विश्वास को पहली रात में ही तोड़ने की चेष्टा न करें।
यौन संबंध स्थापित करने से पूर्व पुरूष दुल्हन का मूड देखकर उसे इसके लिये तैयार करे। चूंकि स्त्रियाँ स्वभाव से ही लज्जाशील व संकोची होती हैं, अतः वह जल्दी तैयार नहीं होती। इसके लिये पुरूष को ही पहल करने की जरूरत पड़ती है। पति, स्त्री से प्यार करे, उसे हौले से आलिंगन में ले, स्त्री के बालों को सहलाए, उसे चूमे, स्त्री का सिर अपनी गोदी में रखकर उसकी आँखों के समक्ष एक रोमांटिक सीन तैयार करे, शेरो-शायरी करे, साथ ही स्त्री के अंगों पर हाथ फेरता रहे। कुछ देर के प्रयास में स्त्री का मूड बनने लगेगा। इसके बाद प्यार व फोर प्ले शुरू कर देना चाहिए। हालांकि पहली रात में युवक इतने बेसब्र होते हैं की वे जल्द से जल्द दुल्हन का जिस्म पा लेना चाहते हैं। वे खुद पर ज्यादा देर तक नियंत्रण में नहीं रख सकते। पर उन्हें याद रखना चाहिए की फर्स्ट इम्प्रेसन का प्रभाव ताउम्र बना रहता है। पत्नी का दिल जीतने और सफल संभोग के लिये थोड़ा धैर्य, थोड़ी समझदारी आवश्यक है।
जब लगे की स्त्री काम विहल्ल होती जा रही है, जैसे की स्त्री आँख मूंदने लगे। चुम्बनों का आदा-प्रदान करने लगे, अपनी टाँगे पुरूष की टांगों पर फेंकने की चेष्टाएं समेत उसके शारीरिक गतिविधियों में यौन बदलाव आते ही पुरूष को संभोग का कार्य शुरू कर देना चाहिए। संभोग में सहज आसनों का प्रयोग करना चाहिए अथवा दोनों की सहमति होने पर ही आगे बढना चाहिए
जिस प्रकार पुरूष को स्त्री जननांगों का ज्ञान होना चाहिए आवश्य है, उसी तरह स्त्री को भी पुरूष के जननांगों के बारे में जानकारे होना जरूरी है। उत्तेजित अवस्था में लिंग मोटा व लंबा हो जाता है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि योनि की दीवारें लचीली होती हैं। वह आसानी से प्रवेश के समय फ़ैल जाती हैं। इसलिए लिंग प्रवेश को लेकर मन में किसी तरह की कोई चिंता न पालें पति का सहयोग करें, लज्जाशील अवश्य रहें, मगर इतना भी नहीं की पति को आगे बढ़ने में परेशानी हो। संभोग के लिये तत्पर होने पर शरीर को ढीला छोड़ दें।
संभोग के बाद पति-पत्नी को तुरंत एक दूसरे से अलग नहीं हो जाना चाहिए। चूंकि यह पहली रात होती है, अतः संभोग के बाद प्यार व वार्तालाप करें, घर-गृहस्थी की चर्चा कर सकते हैं, अनुशासन व पारिवारिक सामंजस्य पर बातें करें। बीच-बीच में चुम्बन-आलिंगन करते रहें। पत्नी को ऐसे लगेगा की वह अजनबियों के बीच में नहीं है तथा उसका पति उसके दिल में रहता है।
अतः यदि आपका विवाह होने जा रहा है, और आप सुखी दाम्पत्य जीवन जीना चाहते हैं, तो सर्वप्रथम अपनी गलतफहमियों व शंकाओं का समाधान करें, अच्छी यौन विज्ञान की पुस्तक पढ़ें अथवा किसी कुशल सेक्स विशेषज्ञ से परामार्श करें। अभी से ही आने वाले कल की तैयारे में जुट जाएं।
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Posted by Udit bhargava at 9/05/2010 02:00:00 pm 1 comments
28 अगस्त 2010
सेक्स में झिझक कैसी ? ( What kind of hesitation in sex? )
उन की बातों को सुन कर मुझे बड़ी हैरानी हुई, क्योंकि उन के विवाह को 10 वर्ष हो गए हैं और उन के 2 बच्चे भी हैं। जब वे उपरोक्त बातें बता रही थीं, तब उन के चेहरे के भाव और स्वर से ऐसा लग रहा था की झिझक और शर्म से वे खुद भी परेशान हैं।
मुझे लगता है, यह समस्या किसी एक 'भाभी' को न हो कर कई महिलाओं की है।
भारतीय परिवेश में शहरों को छोड़ दें तो कस्बों में जो स्त्री-पुरुष रहते हैं, उन में यौन संबंधों को ले कर झिझक और शर्म बनी हुई है। पढ़े लिखे पति-पत्नी भी इस संबंध में खुले विचार नहीं रखते।
वैसे भी पतियों की मानसिकता ऐसी है की यदि स्त्री पहल करे तो भी पुरुष आश्चर्यचकित रह जाता है और कई बार तो पति पत्नी पर शक भी करने लगा है की कहीं वह किसी से....
हम भी नहीं कहते की बिलकुल बेशर्म हो जाना चाहिए, पर अपनी भूमिका के साथ तो ईमानदारी निभानी ही चाहिए।
आसनों से परहेज क्यों
विवाह के बरसों बाद भी पति-पत्नी एक-दूसरे के सामने नग्न होने में झिझकते हैं। यही कारण है की वे अंधेर में संबंध बनाना पसंद करते हैं। यह शर्म और झिझक इस कदर बाधा उत्पन्न करती है की वे पूरा-पूरा आनंद नहीं उठा पाते। कई बार तो रोशनी में स्त्रियाँ सिमटी हुई रहती हैं, तो पति बेकाबू हो जाते हैं या झगड़े पर उतारू हो जाते हैं, क्योंकि उन का यह मानना होता है की मैं तुम्हारा पति हूँ तो मुझ से शर्म कैसी ?
शर्म और झिझक के अलावा कई अन्य बातें भी संबंध के दौरान आग में घी का काम कर बाधा उत्पन्न करती हैं।
सेक्स के विषय में लोगों में गलत धारणाएं व्याप्त होने के कारण वे उस का आनंद नहीं ले पाते। विशेषरूप से स्त्रियों में यह आम धारणा बनी हुई है की सेक्स घ्रणित कार्य है। कहने का मतलब यह है की पत्नी संबंध तो बनाती है, लेकिन यदि उसे आनंद न मिले तो भी वह आनंद की मांग नहीं करती, जिस से आगे चल कर उसे शारीरिक और मानसिक यंत्रणा भोगनी पड़ती है। कई बार पुरूष भी बेबुनियाद बातों को आदर्श क रूप दे कर सेक्स सुख से वंचित रह जाते हैं। मसलन, वे उन आसनों का प्रयोग नहीं करते, जिन में पत्नी की स्थित ऊपर की ओर हो, क्योंकि उन के अंतर्मन में यह बात बैठी है की अगर वे ऐसे आसनों का पयोग करेंगे तो उन के 'दर्जे' में गिरावट आ जाएगी, जबकि सही पति वही है, जो खुद तो सुख पाए ही, पत्नी को भी सुख मिले, इस का भी ख़याल रखे।
इस के अलावा सेक्स के संबंध में सुनीसुनाई बातें भी डर उत्पन्न कर शारीरिक संबंध में बाधा उत्पन्न करती हैं. जैसे मुख मैथुन को गलत मानना।
गर्भनिरोधक उपाय की उचित जानकारी न होने के कारण गर्भ ठहरने का खतरा भी संबंध में बाधा उत्पन्न कर देता है। नए आसनों को अपनाने में हिचक के कारण भी बाधा उत्पन्न होती है। इन सब से हट कर एक अन्य बात, मानसिक तनाव भी संबंध में उत्पन्न करता है।
झिझक से बचें
चुकीं स्त्रियाँ सेक्स सुख को अनैतिक मानती हैं, इसलिए वे सेक्स सुख की इच्छा को दबाते हुए अनिच्छा जाहिर करती हैं। जब पति संबंध में पहल करता है, तब यदि पत्नी शर्मवश अपनी ओर से कोई क्रिया नहीं करती, तो पति समझ लेता है की उस की पत्नी ठंडी औरत है। इस का नतीजा यह होता है की पति-पत्नी के संबंधों में न चाहते हुए भी तनाव उत्पन्न हो जाता है।
आप निरर्थक आदर्शों और गलत धारणाओं के कारण सेक्स सुख में बाधा न उत्पन्न होने दें। यदि बाधा उत्पन्न हो भी जाए तो अपने जीवनसाथी से खुल कर बातें करें। आप समय पड़ने पर इस विषय में अपने मित्रों और सहेलियों से भी बात कर सकते हैं। क्योंकि उपरोक्त बाधाओं को वार्तालाप के द्वारा ही दूर कर पाना सम्भव है। यदि इन से भी बाधाएं दूर न हों तो यौन विशेषज्ञ और मनोरोग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। यदि आप ऐसा करने में झिझक महसूस करेंगे तो आप निश्चित ही रिश्ते के बिखराव को आमंत्रण देंगे। इसलिए समझदारी इसी में है की आप समय से पहले सचेत हो जाएं।
- डा. विभा सिंह
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Posted by Udit bhargava at 8/28/2010 06:21:00 am 0 comments
18 अगस्त 2010
9 मिस्टेक्स आँफ सेक्स ( 9 Mistakes of Sex )
यह परेशानी सिर्फ आरती की नहीं है, बल्कि अधिकतर महिलाओं को इस प्रकार की परेशानी से दो-चार होना पड़ता है, क्योंकि अक्सर महिलाएं अंतरंग पलों में जाने-अनजाने में ऐसी गलतियाँ कर बैठती हैं जो पुरुष को ना पसंद होती हैं और जिसका परिणाम यह होता है की सेक्स लाइफ में परेशानी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जाती है, इसलिए बहुत जरूरी है महिलाएं कुछ बातों का ख़ास ध्यान रखें। डाँ. अनूप धीर कहते हैं, 'वैवाहिक जीवन में रोमांस को बनाए रखना एक कला है, इसलिए पति-पत्नी दोनों को चाहिए की आपसी समझदारी से प्यार के सागर में डूबें और सुखी वैवाहिक जीवन का भरपूर आनंद उठाएं।'
यह बात सही है की यौन संबंध जीवन का एक अहम अंग है, पर कुछ कारणों से महिलाएं इसका आनंद नहीं उठा पाती है, क्योंकि उनके मन में सेक्स के प्रति अनिच्छा घर कर जाती है, जिसको निकालना जरूरी होता है, आखिर शादी को सफल बनने में सेक्सुअल लाइफ अच्छी होनी चाहिए इसलिए कुछ चीजों का ध्यान बहुत जरूरी होता है।
क्या करें
यह बात सही है की सेक्स सिर्फ तन की जरूरत नहीं है, बल्कि प्यार जताने का माध्यम भी है, इसलिए बहुत जरूरी है की वैवाहिक जीवन में रोमांस को बनाए रखने के लिये बहुत कुछ छोटी-छोटी बातें व सेक्स ट्रिक्स अपनाई जाएं, ताकि शादी-शुदा जिन्दगी प्यार से सराबोर रहे।
आज मूड नहीं
भागती-दौड़ती जिन्दगी में समयाभाव के चलते सेक्सुअल लाइफ ज्यादा प्रभावित हो रही है, जिसका नतीजा यह है की पति-पत्नी जब बेडरूम में होते हैं, तो मुंह फेर कर या तो सो जाते हैं या फिर आज मूड नहीं का बहाना बनाकर टाल देते हैं, जोकि गलत है।
क्या करें ?
मूड नहीं है की शिकायत को एक नियम के तौर पर न लें, बल्कि इस व्यवहार को बदलें, क्योंकि अगर यार बात एक बार रिश्तों के बीच आ गई तो हमेशा बनी रहेगी। इसलिए मूड खराब है या मूड नहीं है जैसी चीजों को पास न फटकने दें, बल्कि मूड को बदलकर सेक्स का भरपूर मजा उठाएं।
संवादहीनता
सेक्स के दौरान पत्नी क्या चाहती है, यह बात पति नहीं जान पाता क्योंकि पत्नी कभी खुलकर इस बारे में कहती नहीं है, जो सेक्सुअल लाइफ में जहर का काम करती है।
क्या करें ?
प्यार और रिश्ते की मजबूती के लिये कम्यूनिकेशन का होना बहुत जरूरी है, इसलिए इसे न तोड़ें, क्योंकि इससे सेक्स लाइफ बेहतर होती है, मतलब बिना झिझक के खुलकर बात करें।
संतुष्टि न मिलना
महिलाएं अक्सर यही सोचती हैं की वह किसी न किसी रूप में अपने पार्टनर को संतुष्ट करें। उनकी इस प्रकार की सोच पति के रूझान को कम करती है, क्योंकि सेक्स में संतुष्टि सिर्फ पति की नहीं होती।
क्या करें ?
महिलाओं की तरह पति भी चाहते हैं की पत्नी को पूरी संतुष्टि मिले, इसलिए अगर सेक्सुअल लाइफ में पति की तरफ से कुछ परेशानी है तो उन्हें बताएं, ताकि वो उस कमी को दूर करके आपको पूरी तरह संतुष्ट कर सकें।
पहले तुम, पहले तुम
अक्सर देखने में आता है की पति ही सेक्स के लिये पहल करता है, पत्नी कभी नहीं करती। इस तरह का व्यवहार यह दर्शाता है की सामने वाले की चाहत है बस, जो की पति को पसंद नहीं आती।
क्या करें ?
चलिए हमेशा वो पहल करते हैं तो फिर क्यों न आप पहल करें। अरे जनाब बराबर का हिसाब रखें। आपके द्वारा की गई पहल क्या अक्सर दिखाएंगी, वो तो पहल करने पर ही पता चलेगा। आपकी एक छोटी-सी पहल सेक्स लाइफ में नई स्फूर्ति का संचार कर सकती है।
फोर प्ले का न होना
जैसे-जैसे समय बीतता जाता है, सेक्स को अधिकतर स्त्रियाँ एक झंझट के तौर पर लेने लगती है। उन्हें लगाने लगता है बस जल्दी से ये काम ख़त्म हो। पत्नी का इस तरह का व्यवहार पति को दुखी करता है, जिसके कारण वह फोर प्ले का आनंद नहीं उठा पाते।
क्या करें ?
सेक्स को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है की फोर प्ले का भरपूर मजा उठाएं, क्योंकि जितना बेहतर फोर प्ले होगा उससे सेक्स ज्यादा अच्छा होगा। इसके समय को कम करने के बजाए बढाएं। नए-नए तरीकों से फोर प्ले करें, ताकि उत्साह बना रहे।
उत्साह में कमी
सेक्स के दौरान कई बार स्त्रियाँ अपने उत्साह को दबाए रखती है, उनको लगता है की पति कहीं कुछ गलत न समझे। आपका इस तरह का व्यवहार पार्टनर को यह दर्शाता है की आप सिर्फ औपचारिकता निभा रही हैं।
क्या करें ?
पूरे जोश के साथ पार्टनर का साथ दें, ताकि उनको ये न लगे की आपका उत्साह कम है, उनको उत्साहित करने के लिए हंसी-मजाक का भी सहारा ले सकती हैं। आपका उत्साह देखकर पति को यह महसूस होगा की आप उनसे पूरी तरह जुडी हुई हैं।
बंधनों में बंधना
सेक्स के दौरान अधिकतर महिलाएं पति को कुछ नियमों में बाँध देती हैं, जैसे-लाइट आँफ करना, समय का ध्यान आदि। उनके इस तरह के बंधन से पति का मूड काफी खराब हो जाता है, जसको कंट्रोल कर पाना पति के हाथ में नहीं होता और वह सारा गुस्सा पत्नी पर निकालते हैं।
क्या करें ?
पति को किसी प्रकार के बंधनों में न बांधें, बल्कि अपनी सोच को बदलें। अपने आपसे कुछ प्रश्न करें और अगर आपको लगे की आपको उन प्रशनों का उत्तर नहीं मिल रहा है तो पति से शेयर करें, वो आपकी समस्या का समाधान कर सारी परेशानियों को दूर कर देंगे।
बदलाव का मन हो
सेक्सुअल लाइफ में अगर पति थोड़ा चेंज लाना चाहते हैं तो पत्नी फालतू का काम कह कर इग्नोर कर देती है। वह सोचती है की बस एक काम है, जिसको ख़तम करना जरूरी है। उनकी यह सोच पति के एक्सपेरीमेंट पर पानी फेर देती है।
क्या करें ?
पतिदेव सेक्सुअल लाइफ में बदलाव चाहते हैं तो उन्हें करने दीजिये, क्योंकि एक जैसी सेक्स लाइफ से वह बोर हो जाते है। इसलिए अलग प्रकार के पोजीशन तराई करें, फिर चाहे वह कालीन हो या फिर गाडी की बैक सीट। बस आप एक मौक़ा तो उन्हें दीजिये, फिर देखिएगा जिन्दगी कितनी रंगीन हो जाएगी।
सचेत रहना
फिगर को लेकर महिलाएं बहुत ज्यादा कांशियस रहती हैं। उनके दिलो-दिमाग में यह बात घर कर जाती है की अगर वह मोटी बा बहुत ज्यादा पतली हो गई तो पति उनको छोड़ देगा। उनकी यही सोच सेक्स में नीरसता लाती है।
क्या करें ?
सबसे पहले अपने सोच को बदलें। अगर आप फिगर को लेकर सतर्क रहती हैं तो एक्सरसाइज करें। एक बात को गाँठ बाँध लें की एक बेहतर सेक्स के लिये शरीर से ज्यादा जरूरी होती है प्यार की।
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Posted by Udit bhargava at 8/18/2010 07:01:00 pm 0 comments
23 जुलाई 2010
रोमांचक सैक्सुअल लाइफ ( Thriller Sexual life )
अलार्म क्लाक
अलार्म क्लाक से खेल खेलें। सेक्स करने से पहले टाइम सेट कर दें। सेक्स के दौरान जब यह अलार्म बजेगा तो दोनों में से एक अपनेआप को फ्रीज कर दे, साथ ही दूसरा उस के शरीर को एन्जॉय जरे। ऐसा दोनों बारीबारी से करें। इस तरह करने से आप की सेक्स की इच्छा और कैपिसिटी दोनों ही काफी बढ़ जाती हैं।
रोल प्लेइंग
इस गेम के जरिये आप बहुत कुछ अपने मन का कर सकती हैं। चाहे तो उन्हें स्ट्रिपटीज एक्ट के साथ रोमांटिक ड्रामा करने के लिये कहें या आप खुद उन की पसंद की सेक्सी ड्रेस पहन सकती हैं, साथ में कुछ नॉटी एक्ट भी हो जाए तो सौ फीसदी सम्भव है की आप के पार्टनर को फिर कुछ और तब तक नजर नहीं आयेगा जब तक आप नहीं चाहेंगी।
रंगों का महत्व
आँखों के द्वारा हमारे दिमाग को 75% जानकारी पहुँचती है। यह हम पर निर्भर करता है की हम अपनी जिन्दगी को किस तरह खुशनुमा बना सकते हैं। यदि आप अपने कमरे में कैंडल्स डेकोरेट करकर के बोर हो चुकी हैं तो आप इलेक्ट्रिक बल्ब कमरे में लगाएं, जो अलग अलग कलर्स में हो साथ ही कम वाट्स के हों। पर्पल कलर स्त्रियों में सेक्स को और अधिक बढ़ा देता है।
वनीला टी
यदि आप खाना खाने के बाद कुछ लेना चाहते हैं तो वनीला टी लें। एक सर्वेक्षण के अनुसार 342 व्यक्तियों में, जो नापुन्द्स्क थे, उन में भी वनीला लेने से कामोत्तेजना को बढ़ते हुए देखा गया। इसलिए वनीला लेने पर आप अपने पार्टनर के साथ सेक्स को और अधिक एन्जॉय कर सकेंगे।
रोले द डाइस
कागज़ पर दोनों पार्टनर नंबर के साथ काम लिख लीजिये, जैसे ही आप डाइस को घुमाएंगी, जो नंबर आयेगा, आप के पार्टनर को वही करना पडेगा। एक बार आप डाइस घुमाएंगी और एक बार वह। इसी तरह जितनी बार चाहें। डाइस घुमाती जाएं। डाइस घुमाने के बहाने आप वह करा सकती हैं जिसे कहते हुए आप को आज तक झिझक होती रही हैं।
सेक्स और खाने की हैबिट
सेक्स और खाने की हैबिट दोनों का एक दूसरे से काफी गहरा सम्बन्ध है। जिस तरह जल्दबाजी में खाया गया खाना लाभदायक नहीं होता, उसी तरह सेक्स के दौरान जल्दबाजी सही नहीं। इस से आप को पूरी तरह संतुष्टि नहीं मिल पाएगी। इसलिए सेक्स करें। लेकिन जल्दबाजी नहीं। फिर देखिएगा, आप को कितनी संतुष्टि मिलती है।
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Posted by Udit bhargava at 7/23/2010 08:18:00 am 0 comments
22 जून 2010
लड़के-लड़कियों को सेक्स एजुकेशन अलग-अलग
सेक्स एजुकेशन के बाबत जानकारी देने के लिए को-एजुकेशनल स्कूलों में जल्द ही लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग क्लास होगी। यह क्लास हफ्ते में एक बार 30 मिनट की होगी।
छात्रों को मेल टीचर और छात्राओं को फीमेल टीचर सेक्स एजुकेशन के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। क्लास में स्टूडंट्स को यह बताया जाएगा कि सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इनफेक्शन (एसटीआई) क्या होता है, इसके लक्षण क्या होते हैं, एचआईवी कैसे फैलता है, क्या एचआईवी से बचने के लिए संयम एक बेहतर विकल्प है, इस खतरनाक बीमारी से बचने के लिए क्या क्या सावधानी बरतनी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि देश की पहली आधिकारिक सेक्स एजुकेशन मैनुअल में इस बीमारी की रोकथाम के बाबत कुछ अहम सुझाव दिए गए हैं। इन सुझावों पर लोग अगस्त तक अपनी राय दे सकते हैं। उम्मीद है कि इस मैनुअल (नियमावली) को अक्टूबर तक अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
बहरहाल, टीचरों से कहा गया है कि वे स्टूडंट्स से कुछ नई बीमारियों के नाम पूछें। जब स्टूडंट एचआईवी/एड्स का जिक्र करेंगे तभी टीचर इस बीमारी के बारे में चर्चा शुरू करेंगे। इस दौरान टीचर यह बताएंगे कि किस तरह से वायरस की उत्पत्ति होती है, महिलाओं और बच्चों को प्रभावित होने का ज्यादा खतरा क्यों रहता है और किस तरह से यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के शरीर में पहुंचता है।
ऐसा भी हो सकता है कि जब क्लास में इतने अहम विषय पर टीचर जानकारी दे रहे हों तब बच्चे इसे हंसकर टाल दें अथवा इसे गंभीरता से न लें। लेकिन, टीचर की बातों पर ध्यान देना ही बेहतर है क्योंकि मैनुअल के मुताबिक, टीचरों को हिदायत दी गई है कि क्लास समाप्त होने के बाद वे स्टूडंट्स से सवाल करें ताकि जो जानकारी उन्हें दी गई वह बेकार न जाए।
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Posted by Udit bhargava at 6/22/2010 08:07:00 pm 0 comments
14 मई 2010
10 बातें, जो 'उसे' आपका दीवाना बना देंगी
क्या आप अपनी डेट को अपना दीवाना बना देना चाहते हैं? लील लॉन्डेस ने एक किताब लिखी है - How to Make Anyone Fall in Love With You. इस किताब में उन्होंने कुछ ऐसे टिप्स दिए हैं, जिनसे आप 'उसे' लुभा सकते हैं, और अपना दीवाना बना सकते हैं। लीजिए, 10 टिप्स आप भी पढ़िए....
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Posted by Udit bhargava at 5/14/2010 06:10:00 pm 0 comments
60 सालों में कितना बदल गया है महिला का फिगर
पिछले साठ सालों में वैसे तो दुनिया में काफी कुछ बदला है, लेकिन सौंदर्य के मामले में हमारे मानकों में भी बड़ी तब्दीली आई है। खासकर महिलाओं के मामले में। महिलाओं के सौंदर्य का पैमाना काफी कुछ बदल गया। इसकी सीधी वजह आज के दौर की लाइफ स्टाइल है। 1949 में महिलाओं की सुंदरता का पैमाना आज की महिला की सुंदरता और उसकी फिगर के हिसाब से बिल्कुल अलग है। 1949 के जमाने में 37-27-39 को आदर्श फिगर माना जाता था। जबकि , आज के दौर में 38-34-40 को महिलाओं का आइडियल फिगर माना जाता है। आइए देखते हैं कि किस तरह महिला की खूबसूरती का पैमान इन 60 सालों में बदल गया है :
लंबाई
1949 में : 5 फुट दो इंच
2009 में 5 फुट चार इंच
वजह : बेहतर डाइट , अच्छे घर और अच्छी दवाइयों की वजह से महिलाओं की ग्रोथ बढ़ी।
वजन
1949 में : 61 किलो
2009 : 65 किलो
वजह : फैट , शुगर , अल्कोहल का ज़्यादा इस्तेमाल। कम घरेलू काम और बेहतर ट्रांसपोर्टेशन।
ब्रेस्ट
1949 में : 37 बी
2009 में : 38 सी (+)
वजह : ब्रेस्ट का साइज बढ़ने की एक वजह है मोटापा बढ़ना , मिनोपॉज यानी मासिक धर्म के दौरान हार्मोन थेरेपी।
कमर
1949 में : 27 इंच
2009 में : 34 इंच
वजह : सैचुरेटेड फैट वाली डाइट लेना और कम कसरत के चलते महिलाओं की वेस्टलाइन बढ़ गई है।
हिप्स
1949 में : 39 इंच
2009 में : 40 इंच
वजह : 60 सालों में ज़्यादा बदलाव नहीं। एस्ट्रोजन लेवल के असंतुलित होने के नाते फैट अब हिप्स की बजाय कमर पर इकट्ठा होती है।
पैरों का आकार
1949 में : 3.5
2009 में : 6
वजह : भारी शरीर को थामने के लिए पैर भी ज्यादा चौड़े और बड़े होने चाहिए। यही वजह है कि अब महिलाओं के पैरों का आकार पहले की तुलना में बढ़ गया है।
उम्र
1949 में : 70.9
साल 2009 में : 81.5
वजह : ज़्यादा साफ सुथरा रहन - सहन और भोजन आदि की आदतें। बेहतर दवाएं और पोषण भी महिलाओं की लंबी उम्र और सुंदरता के लिए जिम्मेदार है।
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Posted by Udit bhargava at 5/14/2010 06:00:00 am 0 comments
15 साल की उम्र से पहले सेक्स करने में लड़कियां आगे
यह ख़बर उन लोगों को झटका दे सकती है जो स्कूलों में सेक्स एजुकेशन की खिलाफ़त कर रहे हैं। शादी से पूर्व सेक्स युवा पुरुषों में बेहद आम है, लेकिन चौंकाने वाली बात है कि 15 साल की उम्र तक विवाह पूर्व सेक्स के मामले में महिलाएं पुरुषों से आगे निकल गई हैं। एक सर्वे के मुताबिक युवा पुरुषों का इंटरव्यू किया गया, जिसमें करीब 15 फीसदी ने यह माना कि उन्होंने विवाह पूर्व सेक्स किया है। वहीं, इंटरव्यू की गईं महिलाओं में से 4 फीसदी ने माना कि उन्होंने शादी से पहले सेक्स किया है। इनमें से करीब 24 फीसदी महिलाओं ने 15 साल की उम्र तक ही विवाह पूर्व सेक्स कर लिया था जबकि पुरुषों में यह प्रतिशत 9 रहा। इंटरव्यू में 15 साल से लेकर 24 साल तक के युवा शामिल थे।
शादी से पहले सेक्स के मामले में ग्रामीण नौजवान शहरी यूथ से काफी आगे हैं। यह बात भारत सरकार कह रही है। केंद्रीय हेल्थ मिनिस्टर गुलाम नबी आजाद ने एक सर्वे जारी किया है, जिसमें यह बात कही गई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पूरे देश में 15 पर्सेंट पुरुष और 4 पर्सेंट महिलाएं शादी से पहले सेक्स संबंध बनाते हैं। लेकिन हेल्थ और फैमिली वेलफेयर मिनिस्ट्री द्वारा कराई गई इस स्टडी में पाया गया है इन नौजवानों में ग्रामीणों की तादाद कहीं ज्यादा है। स्टडी के मुताबिक गांवों में 17 पर्सेंट पुरुष शादी से पहले सेक्स संबंध बनाते हैं, जबकि शहरों में इनकी तादाद सिर्फ 10 पर्सेंट है। इस मामले में महिलाएं भी गांवों में ही आगे हैं। गांवों में 4 पर्सेंट महिलाएं शादी से पहले शारीरिक संबंध बनाती हैं, जबकि शहरों में इनकी तादाद सिर्फ 2 पर्सेंट है।
इस स्टडी में सेक्स एजुकेशन को बेहद जरूरी बताते हुए कहा गया है कि रूरल और अर्बन दोनों ही इलाकों में नौजवान असुरक्षित यौन संबंध बनाते हैं। यह स्टडी छह राज्यों में की गई है। ये राज्य हैं - आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, राजस्थान और तमिलनाडु। साल 2006 से 2008 के बीच हुई इस स्टडी में 15 से 29 साल के 58,000 नौजवानों को शामिल किया गया था।
इस बारे में हेल्थ मिनिस्टर गुलाम नबी आजाद ने कहा कि 19 साल के कम उम्र के 8 पर्सेंट से ज्यादा युवा सेक्स संबंधों में इन्वॉल्व हैं, जिससे पता चलता है कि देश में सेक्स एजुकेशन कितनी जरूरी हो गई है। इस स्टडी के मुताबिक शादी से पहले सेक्स के मामलों में कॉन्डम का इस्तेमाल न के बराबर होता है। इतना ही नहीं, जो लोग शादी से पहले ऐसे संबंध बनाते हैं, उनमें से ज्यादातर के एक से ज्यादा पार्टनर्स होते हैं।
रिपोर्ट के रिलीज के मौके पर मौजूद नॉबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने कहा कि लोगों कॉन्ट्रासेप्टिव्स की जानकारी तो काफी है, लेकिन इनका इस्तेमाल बहुत कम है। इसका पता यहीं से चल जाता है कि 70 पर्सेंट से ज्यादा युवा नहीं जानते थे कि कॉन्डम का इस्तेमाल सिर्फ एक बार हो सकता है।
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Posted by Udit bhargava at 5/14/2010 05:47:00 am 0 comments
28 अप्रैल 2010
तो डेट बन जाएगी यादगार
- अगर आप पहली बार किसी से मिल रहे हैं, तो सबसे पहला सवाल यही होगा कि मुलाकात की कहां जाए। वैसे, अधिकतर कपल्स इस मामले में मॉल को प्रेफर करते हैं। लेकिन जरूरी नहीं है कि आप जिसके साथ डेट पर जा रहे हैं, उसे भी मॉल या फिर रेस्तरां में जाना पसंद हो। दरअसल, कुछ लोग शांत जगह पर मिलना पसंद करते हैं, ताकि आराम से बात की जा सके। इसलिए आप अपने साथ दूसरे व्यक्ति की भी पसंद का ध्यान रखकर चलें।
- लड़के/ लड़कियां डेट के लिए अपनी ड्रेस सोचते समय भी बहुत कन्फ्यूज होते हैं। वैसे, पहली मुलाकात के लिए सिंपल व सोबर ड्रेस पहनें, ताकि आपका फर्स्ट इंप्रेशन अच्छा जाए। अक्सर लड़कियां ज्यादा खूबसूरत दिखने के लिए डार्क कलर व हैवी मेकअप करना पसंद करती हैं, वहीं लड़कों को भी ज्यादा रफ ऐंड टफ लुक फॉलो करने से बचना चाहिए।
- चूंकि आप लड़के/ लड़की को इंप्रेस करना चाहते हैं, इसलिए तय समय पर पहुंचें। इससे आपका इंप्रेशन अच्छा बनेगा और उसे भी लगेगा कि आप मिलने के लिए वाकई उत्सुक थे।
- डेट पर जाने से पहले अपने फ्रेंड की पसंद-नापसंद जान लें, ताकि मिलते वक्त आप इन बातों का ध्यान रख सकें। जाहिर है कि उसकी पसंद से चलने से आपकी इमेज अच्छी बनेगी।
- अगर आप पहली डेट पर ही फिल्म देखने का प्लान बना रहे हैं, तो लाइट मूवी देखें। आप कॉमिडी या रोमांटिक मूवी प्रेफर कर सकते हैं। इससे आप दोनों का मूड अच्छा रहेगा। अगर आपको ऐक्शन या हॉरर फिल्में पसंद आती हैं, तो भी आप अपनी पसंद को इग्नोर करके लाइट फ्लेवर की फिल्म ही देखें।
- फिल्म देखने में इतने मशगूल न हो जाएं कि साथ बैठे अपने फ्रेंड को ही भूल जाएं। इससे उसे लगेगा कि आप उसकी कंपनी इंजॉय नहीं कर रहे हैं। आप फिल्म के बीच-बीच में अपनी फ्रेंड से भी बात करते रहें।
- अगर आप डेट पर नर्वस फील कर रहे हैं, तो अपने फ्रेंड को जरूर बताएं। इससे वह आपकी फीलिंग्स को समझेगा और आपके असहज होने को वह अच्छी तरह समझ सकेगा।
- आप जब खाने का ऑर्डर करें, तो अपने फ्रेंड की पसंद जरूर जान लें। खाने व ड्रिंक में उसकी पसंद पूछते रहें। इससे उसे लगेगा कि आपकी उसकी बहुत केयर करते हैं और जाहिर है कि इस तरह आपकी दूसरी मुलाकात जरूर होगी।
- अपनी डेट की तारीफ करना न भूलें। तुम्हारी आंखें बहुत सुंदर है, ड्रेस का कलर तुम पर खिल रहा है, तुम्हारी स्माइल बहुत अच्छी है जैसी बातें आपकी दोस्ती को अच्छा बनाएंगी। लेकिन इस दौरान आपको ओवर होने की जरूरत नहीं है।
- वापस जाने के बाद अपनी डेट को एक प्यारा-सा मेसेज जरूर करें और उसे बताएं कि उसके साथ दिन बिता कर आपको कैसा लगा।
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Posted by Udit bhargava at 4/28/2010 07:18:00 pm 0 comments
...तो कंसीव करना होगा आसान
प्रोसेस छिपाना
कंसीव न कर पाने पर डॉक्टर्स अक्सर कपल को फर्टिलिटी टेस्ट कराने के लिए रिफर करते हैं। दरअसल , डॉक्टर्स कपल्स को यह कहने से बचते हैं कि कंसीव न कर पाने का कारण हो सकता है कि उनकी इंटरकोर्स प्रोसेस ठीक न हो , वे सही तरीका इस्तेमाल न कर रहे हों या बहुत दिनों बाद संबंध बना रहे हों। इसलिए कपल्स को इंटरकोर्स से पहले प्रॉपर सेक्स एजुकेशन के साथ इमोशनल और फिजिकल बारीकियों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।
उम्र ज्यादा होना
उम्र बढ़ने के साथ कंसीव करने की क्षमता भी कम होती जाती है। इसकी शुरुआत 32 साल के बाद होने लगती है। दरअसल , हर महिला में लिमिटेड एग्स होते हैं , जिनकी क्वॉलिटी उम्र बढ़ने के साथ घटने लगती है। वहीं पुरुषों में भी उम्र आगे बढ़ने के साथ सीमन की क्वॉलिटी कम होने लगती है।
तुरंत उठना
पार्टनर के साथ फिजिकल रिलेशनशिप बनाने के बाद तुरंत उठकर वॉशरूम न जाएं। थोड़ी देर रुकें। इससे मैक्सिमम सीमन वजाइना में जाएगा। लीकेज से बचने के लिए इंटरकोर्स के दौरान हिप्स के नीचे पिलो रखना भी फायदेमंद रहेगा।
लुब्रिकेंट का इस्तेमाल
हर दिन एक जैसी सेक्स प्रोसेस करने से सेक्स के प्रति रुचि कम होती जाती है और वजाइना में ड्राईनेस आने लगती है। ऐसे में सेक्स को आसान बनाने के लिए कपल्स आर्टिफिशल चीजों मसलन , वैसलीन या किसी क्रीम का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इन चीजों का पीएच लेवल स्पर्म्स को नुकसान पहुंचा सकता है। यानी इनके इस्तेमाल से आपकी सारी मेहनत खराब चली जाती है। इनकी जगह फोरप्ले के ऑप्शन पर जाना बेहतर रहेगा।
गैप करना
अगर लंबे समय तक फिजिकल रिलेशनशिप न बनाया जाए , तो भी कंसीव करने के चांस कम हो जाते हैं। दरअसल , यह स्पर्म्स बनने की क्षमता पर असर डालता है। अगर आप हर एक दिन छोड़कर फिजिकल रिलेशनशिप बनाते हैं , तो स्पर्म्स बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है और ऐसे में प्रेग्नंट होने के चांस ज्यादा रहते हैं।
बॉडी साइकल को समझें
महिलाओं के ऑव्युलेशन पीरियड के दौरान फिजिकल रिलेशनशिप बनाना ज्यादा फायदेमंद रहता है। पीरियड्स शुरू होने के दिन से 12 वें से 18 वां दिन कंसीव करने के लिए बेहतर माने जाते हैं। जो कपल्स काम के सिलसिले में अक्सर ट्रिप पर रहते हैं , वे इस शेड्यूल के मुताबिक अपने अपॉइंटमंट तय कर सकते हैं। 12 वें से 18 वें दिन के दौरान एक दिन छोड़कर सेक्स करने से कंसीव करने के चांस बढ़ जाते हैं।
सीमन अनैलिसिस करवाएं
कंसीव न कर पाने की स्थिति में सीमन भी चेक करवाएं। पुरुष की ' पोटेंसी ' और ' फर्टिलिटी ' दो अलग - अलग बातें हैं। यह टेस्ट तीन दिन तक सेक्स न करने के बाद करवाया जाना चाहिए। वैसे , सीमन को बॉडी से बाहर आने के 10 मिनट के अंदर ही लैब में पहुंचाया जाना चाहिए , इसलिए देर से बचने के लिए लैब में ही सैंपल देना सही रहता है।
स्मोकिंग से बचें
इस दौरान महिलाएं सिगरेट अवॉइड करें। निकोटिन आपको कम उम्र में ही उम्रदराज तो दिखाता ही है , साथ ही बच्चा पैदा करने की क्षमता में भी कमी लाता है। सिगरेट पीने से मिसकैरिज और प्रेमचर डिलिवरी के चांसेज़ भी बढ़ जाते हैं। वहीं स्मोकिंग करने से पुरुषों में स्पर्म्स बनने की मात्रा में कमी आती है , इसलिए अपने आने वाले बेबी के लिए ऐसा कोई रिस्क न लें और सिगरेट पीना तुरंत छोड़ दें।
सेक्स को फन की तरह लें
सेक्स को निपटाने वाला प्रोसेस न मानकर फन की तरह लें। अगर आप इसे एक काम की तरह लेने लगेंगे , तो आपका मूड तो इससे प्रभावित होगा ही साथ ही सेक्स के प्रति रुचि में कमी , वजाइना में ड्राइनेस जैसी कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। अगर आप इसे फन की तरह लेंगे , तो यह आपको अच्छी फीलिंग देगा।
इन्फेक्शन्स से बचें
सेक्सुअल ट्रांसमिशन डिज़ीज सेक्स की वजह से एक व्यक्ति से दूसरे में पास होती हैं। इनकी वजह से कंसीव करने का चांस भी कम हो जाता है और ये बच्चे को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। इन बीमारियों के खास लक्षण नहीं होते , इसलिए आपको और भी सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे में बच्चे के लिए ट्राई करने से पहले इस बारे में चेकअप जरूर करवाएं।
Labels: सेक्स रिलेशन
Posted by Udit bhargava at 4/28/2010 07:11:00 pm 0 comments







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