06 फ़रवरी 2012

अंधविश्वास से बचाएं लाडले को

हमारे कुछ रीति-रिवाज और मान्यताएं अनजाने में ही कुछ शिशुओं के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ कर बैठते हैं। पुरानी प्रथाएं कब और कैसे जन्मी तथा कैसे जनमानस में पैठ कर गई, इसके इतिहास में जाने के बजाय विज्ञान के धरातल पर कसकर देखना चाहिए। किसी भी मान्यता के अच्छे या बुरे परिणाम हो सकते हैं। इस पर विचार किये जाने की आवश्यकता है।
    शिशु के जन्म पर हर समाज में अपने पारंपरिक रीति-रिवाज होते हैं। ये रिवाज पीढ़ियों से चले आ रहे हैं। घर के बुजुर्गों में इन रिवाजों के लिए आस्था तो होती ही है, साथ ही उन्हें पूर्ण विशवास भी होता है की इन रिवाजों का माँ एवं बच्चे पर सकारात्मक प्रभाव रहेगा। कुछ परम्पराओं में वे सही भी होते हैं, लेकिन कई बार अनजाने में ही सही, ये रिवाज माँ-बच्चे को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे ही कुछ रिवाज व उनके पीछे के तथ्यों को इस लेख में शामिल किया गया है। 

रिवाज : आँखों में कोलोस्ट्रम (प्रसव के बाद पहले दो-तीन दिन में स्तन से आने वाला गाढा दूध) डालना। 
तथ्य : यह एक अच्छी परम्परा है, क्योंकि कोलोस्ट्रम में विशेष प्रकार के एंटीबाँडीज (आईजीए) होते हैं, जो की शिशु की आँखों को इन्फेक्शन से बचाता है।

रिवाज : माँ-बच्चे को सवा महीने अलग कमरे में रखना एवं घर के अन्य सदस्यों को उन्हें नहीं छूना। 
तथ्य : इसके कई फायदें हैं।
1.  माँ एवं बच्चे को इन्फेक्शन की आशंका कम हो जाती है।
2.  माँ-बच्चों में अपनत्व की भावना जागती है।
3.  ठण्ड के दिनों में माँ के शरीर की गर्मी से ही बच्चे का शरीर गर्म रहता है एवं वह अपने शरीर का तापमान आसानी से नियंत्रित कर लेता है।
4.  माँ घर की अन्य दैनिक गतिविधियों से चिंतामुक्त रहती है, जिससे माँ के दूध की मात्रा भी बढ़ती है एवं उसका पूरा ध्यान सिर्फ शिशु पर ही रहता है।

भ्रान्ति : आँखों में काजल या सूरमा लगाना। 
तथ्य : नवजात की आँखें अत्यंत संवेदनशील होती हैं।
काजल लगाने से आँखों में संक्रमण का खतरा होता है, जिसे कंजंक्टिवाइटस कहते हैं। इसमें आँखों से पानी या मवाद आता है। सूरमा में लेड या सींसा की मात्रा अधिक होती है, जो की बच्चे के रक्त में पहुंचकर प्लाम्बिजब नाम की बीमारी की आशंका को बढ़ा देता है, जिससे बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरूद्ध हो जाता है तथा खून की कमी एवं अपक की शिकायत होती है, साथ ही काजल लगाते वक्त सीधे अंगुली द्वारा भी आँखों को नुकसान हो सकता है। काजल में कार्सिनोजेंट्स होते हैं, जिससे कैंसर होने की आशंका होती है।

 भ्रान्ति : जन्म के तुरंत बाद बच्चे को गुड, शक्कर का पानी, शहद, गाय का दूध आदि देना।
तथ्य : शुरू के तीन दिन का दूध गाढा एवं पीला होता है एवं बच्चे की सभी आवश्यकताओं की पूर्ती करता है। यह अत्यंत जरूरी होता है। अन्य पेय पदार्थों को देने से स्तनपान स्थापित करने में रूकावट तो आती है, साथ ही साथ बच्चे को इन्फेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है। बच्चे को डायरिया आसानी से हो सकता है।

भ्रान्ति : बच्चे की नाभि पर मिट्टी, घी, गाय का गोबर, कुमकुम आदि लगाना।
तथ्य : ऊपर बताई हुई चीजें लगाने पर टिटेनस की बीमारी की आशंका हो जाती है। शिशु की नाभि से लटकने वाली नाल का बाकी हिस्सा खुला छोड़ देना चाहिये।

भ्रान्ति : कान व नाक में तेल, दूध आदि डालना।
तथ्य : सर्वथा अनुचित है। ऐसा करने पर कान में पपड़ी जमाना, फंगल इन्फेक्शन एवं सुनाने के क्षमता कम होने की आशंका रहती है। नाक में कुछ डालने से सांस में रूकावट हो सकती है, जो कभी-कभार खतरनाक भी हो सकता है।

भ्रान्ति : नवजात शिशु को पुराने उपयोग किये हुए कपडे पह्नानन।
तथ्य : नवजात के कपडे नर्म, मुलायम, वजन में हलके व पसीना सोखने वाले होना चाहिए। एकदम नए कपडे कड़क होते हैं, साथ ही उनसे एलर्जी की आशंका रहती हैं, इसलिए नवजात को या तो नए कपडे एक बार धोकर पहनाए या फिर पुराने कपडे बराबर धोकर एवं प्रेस किये हुए पहनाएं। 

भ्रान्ति : बच्चे को जन्मघुट्टी या ग्राइपवाटर देना।
तथ्य : जन्मघुट्टी देने के पीछे सोच यह है की इससे बच्चे को उसकी पेट की तकलीफ जैसे गैस बनाना, मरोड़ आना, दूध नहीं पचना आदि में सहायता मिलाती है, लेकिन इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है एवं साथ ही यह देखा गया है कि जन्मघुट्टी से बच्चे को दस्त अधिक लगते हैं। ऐसे ही ग्राइपवाटर में अल्कोहल होता है, जिससे बच्चे को कुछ समय के लिए नींद अवश्य आ जाती है, लेकिन यह बच्चे की तकलीफ का स्थायी हल नहीं होता है।

01 फ़रवरी 2012

स्वामी रामदेवजी से ही क्यों डरती है कांग्रेस

स्वामी जी के पास कांग्रेस का वास्तविक इतिहास का साक्ष्य है और कांग्रेस के कारनामो का काला चिटठा है,

अभी तो बात आएगी मंच पर बहस की, जिसकी की आगे के किसी भी चुनाव में जोर देकर मांग की जायेगी, तब ये अज्ञानी प्रवक्ता मंच पर जनता को क्या जवाब देंगे, सरकार हर साल लोगों से 134 प्रकार के टैक्स से कितना पैसा जमा कराती है और ये पैसे कहा खर्च हो जाते है? मंदिरों का पैसा सरकार किस मद में खर्च कराती है जिसे सिर्फ हिन्दू दान देकर इकठ्ठा करता है, ये बहुत बड़ा प्रश्न है

.मंच पर ये बहस नहीं होगी की क्या विकास किया, बहस होगी की राहुल, सोनिया, चिदंबरम, पवार, मनमोहन, विलासराव देशमुख, अहमद पटेल, प्रणव मुखर्जी जैसे लोंगो के भी काले धन के खाते है क्या?

काले धन का इतिहास क्या है, पहले कपिल सिब्बल ने कहा कोई भी नुकसान २ जी घोटाले में नहीं हुआ है, फिर अहलुवालिया ने कहा की हा वास्तव में कोई घोटाला नहीं हुआ है, फिर मनमोहन ने कहा इसकी जाँच चल रही है, विपक्ष को टालते रहे, राजा जैसा आदमी जिसके पास अपनी मोबाइल को टाप अप करने का पैसा नहीं हो, यदि वह अपनी पत्नी के नाम 3000 करोड़ रुपया मारीशाश में जमा कर दे, क्या यह सब बिना सोनिया की जानकारी के कर सकता है, उस पार्टी में जहा पर बिना सोनिया के पूछे कोई वक्तव्य तथाकथित प्रवक्ता नहीं दे सकते है
फिर आया महा घोटाला देवास-इसरो डील का जिसमे की 205000 करोड़ की बैंड विड्थ को मात्र 1200 करोड़ के 10 साल के उधार के पैसे में दे दिया गया, भला हो सुब्रमनियम स्वामी जी का जिन्हें इन चोरो को नंगा कर दिया, हमारी कांग्रेसी और विदेशी मिडिया सुब्रमनियम स्वामी की तस्वीर हमेशा से गलत पेश किया है जब की वास्तव में भारत देश को ऐसे ही इमानदार नेताओ की जरुरत है जिसने कभी भी चोरी के बारे में सोचा ही नहीं
फिर आया कामनवेल्थ खेल का 90000 करोड़ का घोटाला, फिर कोयला का घोटाला जिसमे ठेकेदारों द्वारा 10 पैसे प्रति किलो के भाव से कोयला खरीदा जाता है और उसे बाजार में 4 रुपये किलो तक बेचा जाता है, यह रकम अब तक 26 लाख करोड़ होती है
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इटली के 8 बैंक और स्वीटजरलैंड के 4 बैंको को 2005 में भारत में क्यों खोला गया है और इसमे किसका पैसा जमा होता है, ये बैंक किसको लोन देते है और इनका ब्याज क्या है, इनकी जरुरत क्यों आ पड़ी भारत में जब की भारत के ही बैंकरों की बैंक खोलने की अर्जियाँ सरकार के पास धूल खा रही है, इन बैंको को चोरी छुपे क्यों खोला गया है, इन बैंको आवश्यकता क्यों है जब भारत में 80% लोग 20 रूपया प्रतिदिन से भी कम कमाते है
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भारत के किसानो से कमीशन लेने वाले चोर कत्रोची के बेटे को अंदमान दीप समूह में तेल की खुदाई का ठेका क्यों दिया गया 2005 में, किसने दिया ठेका, किसके कहने पर दिया ठेका, क्या वहा पर पहले से ही तेल के कुऊ का पता लगाकर वह स्थान इसे दे दिया गया जैसे की बहुत बार खबरों में अन्य संदर्भो में आती है, यह खबर क्यों छुपाई गयी अब तक, इसे देश को क्यों नहीं बताया गया, मिडिया क्यों इसे छुपा गई, और विपक्ष ने इसे मुद्दा क्यों नहीं बनाया
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सरकार ने पहले कहा की बाबा बकवास कर रहे है, काला धन नाम की कोई चीज नहीं है,
फिर खबर आयी की काला धन है और सबसे ज्यादा भारतीयों का है, यह स्विस बैंको के आलावा 70 और दुसरे देसों में जमा है,
सरकार ने कहा की टैक्स चोरी का मामला है, हम उन देशो से समझौते कर रहे है, जिससे की दोहरा कर न देना पड़े,
यह टैक्स चोरी नहीं भारत देशको लूट डालने का मामला है जिसकी सजा किसान से पूंछो तो सिर्फ मौत देना चाहता है वह भी सब कुछ वसूल लेने के बाद.
फिर बात आई की यदि ये भ्रष्टाचारी और लुटेरे इसमे से 15% टैक्स सरकार को दे तो इसे भारत के बैंको में जमा करने दिया जायेगा और किसी को यह हक़ नहीं होगा की वह पूछे की या इतना पैसा कैसे कमाया या लूटा. सरकार इस पर एक कानून ला रही है, क्यों? किसको बचाया जा रहा है? जिसने भी यह गद्दारी की है उसे तो भीड़ ही मार डालेगी
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इन्ही लोगो की वजह से भारत में इतनी महागायी है की लोग शादी खर्च से बचने के लिए बेटियों की जान ले ले रहे है, किसान आत्महत्या कर रहा ई, गरीब दवा नहीं करा रहा है, बच्चे स्कुल नहीं जा रहे है, इन्हें तो किसी कीमत पर नहीं छोड़ा जा सकता है, ये यूरिया घोटाला करते है और यूरिया किसान को दुगुने दाम बचा जाता है, फिर गेहू सस्ते में खरीदा जाता है, और अब तो घोटाला 115% हो जायेगा, 115 चुराओ, 15 सरकार को देकर 100 खुद रख लो
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हमारे देश में क्यों अनुसन्धान के लिए पर्याप्त पैसा नहीं दिया जाता है, यह कीसकी चाल है, जिसकी वजह से हम 5-10 गुना दाम में विदेशी चीजे खरीदते है
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ऐसे कौन से कारण है जिनके कारन हम नेहरू के द्वारा ट्रांसफर अफ पॉवर अग्रीमेंट 14 अगस्त 1947 को दस्तखत करने के बाद भी आज तक विक्सित नहीं बन पाए, जब की हमारी जनता हफ्ते में 90 घंटा काम करती है जबकि कामचोर अंग्रेज हफ्ते में सिर्फ 30 घंटा काम करते है
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क्या कारण है की हमारे 45 रुपये में 1 डालर और 90 रुपये में 1 पौंड मिलाता है, जब की 1947 में 1 रुपये में 1 डालर मिलता था.
क्या कारण है की हमारे देश में एक भी सोलर ऊर्जा वैज्ञानिक नहीं है और दुनिया भर के परमाणु वैज्ञानिक है जो हमें हमेशा झूठा अश्वाव्हन देते है की यह परमाणु बिजली सस्ती और निरापद है भारत की परमाणु से सम्बंधित कुल बाजार 750 लाख करोड़ का होगा. जब की हम भारत में 400000 मेगावाट सोलर बिजली बना सकते है
हम अभी तक सुरक्षित अन्ना भण्डारण की व्यवस्था क्यों नहीं बना पाए जब की हमारे पास धन की कमी ही नहीं है, क्योकि अन्न को सडा दिखाकर उसे कौड़ियो के भाव शराब माफिया को बचा जाता है जब की गरीब अन्ना बिना मर रहा है, इसके लिए तो कोई एक व्यक्ति जिम्मेदार होगा, उसकी सजा क्या है
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मीडिया को निष्पक्ष बनाने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है, सभी भारतीयों को पता चल गया है की मिडिया , टीवी और पत्रिकाए सरकार को बिक चुकी है, बड़े शर्म की बात है, शाम को सिर्फ 4 रोटी खाने के लिए भारत माता से गद्दारी क्यों?
अगर देश में 2 लाख करोड़ रुपये की नकदी सर्कुलेशन में है तो देश की अर्थव्यवस्था करीब 100 लाख करोड़ रुपयों की होती है. और हमारे देश में रिजर्व बैंक अबतक लगभग 18 लाख करोड़ रुपयों के नोट छाप चुका है और कमसे कम 10 लाख करोड़ रुपये सर्कुलेशन में है. इस हिसाब से देश की अर्थव्यवस्था करीब 400 से 500 लाख करोड़ रुपये होनी चाहिए लेकिन अभी हमारी अर्थव्यवस्था केवल 60 लाख करोड़ की है. जबकि इतनी अर्थव्यवस्था के लिए दो लाख करोड़ से भी कम सर्कुलेशन मनी की जरूरत है
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अगर 400 लाख करोड़ रूपये का काला धन देश में वापिस आ जाता है तो देश की अर्थव्यवस्था करीब 20,000 लाख करोड़ रुपये होगी … क्या आप जानते हैं कि इस समय अमेरिका सबसे शक्तिशाली देश है और उसकी अर्थव्यवस्था करीब 650 लाख करोड़ की है… मतलब 400 लाख करोड़ रुपये वापिस मिलने पर हम अमरीका से भी 30 गुना ज्यादा शक्तिशाली बन सकते है
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दोस्तों, स्वामी जी की टीम निरक्षरों की नहीं बल्कि बहुत पढ़ी लिखी, ज्ञानी, दानी, समर्पित, इमानदार और राष्ट्रप्रेमी टीम है, इसमे ज्यादातर इंजिनियर और आई टी के लोग जुड़े है, इनमे कई लोग ऐसे भी हैं जो करोड़ों रुपयों की नौकरी और कारोबार छोड़कर केवल देश के लिए स्वामी जी के साथ जुड़े हैं.

हमने तो दिलों को जीता है

जब ज़ीरो दिया मेरे भारत ने, दुनिया को तब गिनती आई,
तारों की भाषा भारत ने, दुनिया को पहले सिखलाई,

देता ना दशमलव भारत तो, यूँ चाँद पे जाना मुश्किल था,
धरती और चाँद की दूरी का, अंदाज़ लगाना मुश्किल था,

सभ्यता जहाँ पहले आई, पहले जनमी है जहाँ पे कला,
अपना भारत वो भारत है, जिसके पीछे संसार चला,
संसार चला और आगे बढ़ा, ज्यूँ आगे बढ़ा, बढ़ता ही गया,
भगवान करे ये और बढ़े, बढ़ता ही रहे और फूले-फले,

है प्रीत जहाँ की रीत सदा, मैं गीत वहाँ के गाता हूँ,
भारत का रहने वाला हूँ, भारत की बात सुनाता हूँ,

काले-गोरे का भेद नहीं, हर दिल से हमारा नाता है,
कुछ और न आता हो हमको, हमें प्यार निभाना आता है,
जिसे मान चुकी सारी दुनिया, मैं बात वही दोहराता हूँ,
भारत का रहने वाला हूँ, भारत की बात सुनाता हूँ,

जीते हो किसी ने देश तो क्या, हमने तो दिलों को जीता है,
जहाँ राम अभी तक है नर में, नारी में अभी तक सीता है,
इतने पावन हैं लोग जहाँ, मैं नित-नित शीश झुकाता हूँ,
भारत का रहने वाला हूँ, भारत की बात सुनाता हूँ,

इतनी ममता नदियों को भी, जहाँ माता कहके बुलाते है,
इतना आदर इन्सान तो क्या, पत्थर भी पूजे जातें है,
उस धरती पे मैंने जन्म लिया, ये सोच के मैं इतराता हूँ,
भारत का रहने वाला हूँ, भारत की बात सुनाता हूँ॥

॥ जय हिन्द ॥ जय जय माँ भारती ॥ वन्दे मातरम् ॥

जीवन का आदर्श जहॉं पर परमेश्वर का धाम है॥

चंदन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है,
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है,
हर शरीर मंदिर सा पावन हर मानव उपकारी है,
जहॉं सिंह बन गये खिलौने गाय जहॉं मॉं प्यारी है,
जहॉं सवेरा शंख बजाता लोरी गाती शाम है।

जहॉं कर्म से भाग्य बदलता श्रम निष्ठा कल्याणी है,
त्याग और तप की गाथाऍं गाती कवि की वाणी है,
ज्ञान जहॉं का गंगाजल सा निर्मल है अविराम है।

जिस के सैनिक समरभूमि मे गाया करते गीता है,
जहॉं खेत मे हल के नीचे खेला करती सीता है,
जीवन का आदर्श जहॉं पर परमेश्वर का धाम है॥
~पूर्णिमा मिश्रा जी

॥ जय हिन्द ॥ जय जय माँ भारती ॥ वन्दे मातरम् ॥

प्यार का एक निशां, वही है मेरा हिन्दुस्तां।

जहाँ हर चीज है प्यारी, सभी चाहत के पुजारी,
प्यारी जिसकी ज़बां, वही है मेरा हिन्दुस्तां।

जहाँ ग़ालिब की ग़ज़ल है, वो प्यारा ताज महल है,
प्यार का एक निशां, वही है मेरा हिन्दुस्तां।

जहाँ फूलों का बिस्तर है, जहाँ अम्बर की चादर है,
नजर तक फैला सागर है, सुहाना हर इक मंजर है,
वो झरने और हवाएँ, सभी मिल जुल कर गायें,
प्यार का गीत जहां, वही है मेरा हिन्दुस्तां।

जहां सूरज की थाली है, जहां चंदा की प्याली है,
फिजा भी क्या दिलवाली है, कभी होली तो दिवाली है,
वो बिंदिया चुनरी पायल, वो साडी मेहंदी काजल,
रंगीला है समां, वही है मेरा हिन्दुस्तां।

कही पे नदियाँ बलखाएं, कहीं पे पंछी इतरायें,
बसंती झूले लहराएं, जहां अनगिनत हैं भाषाएं,
सुबह जैसे ही चमकी, बजी मंदिर में घंटी,
और मस्जिद में अजां, वही है मेरा हिन्दुस्तां।

कहीं गलियों में भंगड़ा है, कही ठेले में रगडा है,
हजारों किस्में आमों की, ये चौसा तो वो लंगडा है,
लो फिर स्वतंत्र दिवस आया, तिरंगा सबने लहराया,
लेकर फिरे यहाँ-वहां, वहीँ है मेरा हिन्दुस्तां।
~चंचल भारद्वाज जी

ॐ ॥ जय हिन्द ॥ जय जय माँ भारती ॥ वन्दे मातरम् ॥ ॐ

गरीबी को मिटाने की ये बाते सिर्फ बाते हैं

गरीबी को मिटाने की ये बाते सिर्फ बाते हैं,
जो खुद पैसों के भूखे है, वो क्या गरीबी मिटायेगें,
गरीबो का लहू तो इनकी गाड़ियो का डीजल है,
गरीबी मिट गई तो, ये क्या रिक्शा चलायेगें।
नदी के घाट पर भी अगर नेता लोग बस जाए,
तो प्यासे लोग एक-एक बूंद पानी को तरस जाए,
गनीमत है मौसम पर नेताओं की हकूमत चल नहीं सकती,
नहीं तो सारे बादल इन कमीने नेताओ के खेतो में बरस जाये।

॥ वन्दे मातरम् ॥
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" 1945 में "विन्सटन चर्चिल" ने 'ब्रिटिश पार्लियामेंट' में कहा था की भारत आज़ाद होने लायक देश नही है क्यूंकी अगर हम भारत को आज़ादी देंगे तो भी ये लोग सालों तक मानसिक गुलाम रहेंगे। ये लोग मानसिकता में अंग्रेज़ हो चुके हैं सिर्फ शरीर से दिखने में भारतीय हैं, इनकी आत्मा भी अंग्रेज़ियत वाली हो चुकी है इसलिए ये लोग बार बार अपने ही देश और लोगों का अपमान कराएंगे।"

ये जो मानसिक गुलामी है अपने बारे में गलत सोचने की, अपने को उल्टा/छोटा मानने की, हमारी काबिलियत नही है, दुनिया हमसे बहुत आगे निकाल गयी है, हम टेक्नालजी में बहुत पिछड़े हैं......ये एक तरह की भावना है, जिसको "Inferiority Complex" कहा जाता है।

हमारे महान क्रांतिकारियों ने हमें "अंग्रेजों और गुलामी" से आज़ादी दिलाई, अब हमें खुद को जल्दी से जल्दी "अंग्रेज़ियत और मानसिक गुलामी" से आज़ाद करना चाहिए।

॥ वन्दे मातरम् ॥

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ये जितने घाव हैं सीने पे सब फूलों के गुच्छे हैं,
हमें पागल ही रहने दे हम पागल ही अच्छे हैं।

......ये पंक्तियाँ 'राम प्रसाद बिस्मिल जी' द्वारा कही गयी थीं।

॥ वन्दे मातरम् ॥
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विश्व के सबसे प्राचीन देश:
* भारतवर्ष : 8.5 करोड़ वर्ष पुराना
* इटली (रोम) : 4500 वर्ष पुराना
* जर्मनी : 3000 वर्ष पुराना
* फ़्रांस : 2500 वर्ष पुराना
* ब्रिटेन : 2000 वर्ष पुराना
* यूएसए (अमेरिका) : 250 वर्ष पुराना।
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जीवन की सच्चाई:
जब व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसको जलाने के बाद वो मात्र '20 ग्राम मिट्टी' में बदल जाता है और उस मिट्टी में 8 रुपये का कैल्सियम, 2-2.5 रुपये का फास्फोरस और 10-11 रुपये के अन्य माइक्रो न्यूटरिएण्ट्स होते हैं मतलब मरने के बाद आदमी की 'कीमत 20 रुपये' से ज्यादा नहीं है। इसलिए विलासिता को छोडकर अपना राष्ट्रधर्म निभाएँ जिससे जिस मिट्टी में पैदा हुए हैं, शायद उसका थोड़ा सा भी कर्ज़ चुका सकें।

॥ वन्दे मातरम् ॥
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एक आदमी एक दिन में इतनी ऑक्सीजन लेता है, जितने में 3 ऑक्सीजन के सिलेंडर भरे जा सकते हैं। एक ऑक्सीजन सिलेंडर की कीमत होती है रु.700 इस तरह हम देखते हैं कि एक आदमी एक दिन में रु.2100 की ऑक्सीजन लेता है और 1 साल में रु.7,66500 कि और अपने पूरे जीवन (अगर आदमी कि उम्र 65 साल हो) में लगभग रु. 5 करोड़ का ऑक्सीजन लेता है जो कि पेड़-पौधों द्वारा हमें फ्री में मिलती है और हम उन्ही पेड़ पौधों को समाप्त कर रहे है।

अब भी समय है, दोस्तों संभल जाओ, अधिक से अधिक पौधेरोपित करो और प्राण वायु मुफ्त पाओ।
॥ वन्दे मातरम् ॥
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कटते भी चलो, बढ़ते भी चलो, बाजू भी बहुत हैं, सर भी बहुत

ऐ खाकनशीनों उठ बैठो, वह वक्त करीब आ पहुंचा है,
जब तख्त गिराए जाएंगे, जब ताज उछाले जाएंगे।

अब टूट गिरेंगी जंजीरें, अब जिंदानों की खैर नहीं,
जो दरिया झूम के उट्ठे हैं, तिनकों से न टाले जाएंगे।

दरबार-ए-वतन में जब इक दिन सब जाने वाले जाएंगे,
कुछ अपनी सजा को पहुंचेंगे, कुछ अपनी सजा ले जाएंगे।

ऐ जुल्म के मारों लब खोलो, चुप रहने वालों चुप कब तक,
कुछ हश्र तो इनसे उट्ठेगा, कुछ दूर तो नाले जाएंगे।

दरबार-ए-वतन में जब इक दिन सब जाने वाले जाएंगे,
कुछ अपनी सजा को पहुंचेंगे, कुछ अपनी सजा ले जाएंगे।

कटते भी चलो, बढ़ते भी चलो, बाजू भी बहुत हैं,सर भी बहुत,
चलते भी चलो कि अब डेरे, मंजिल पे ही डाले जाएंगे।

~ Kanwrajsingh Rathore