मुहांसे
· करेले के छिलकों को मसलकर चेहरे पर लगाएं और कुछ देर तक लगा रहने दें, कुछ देर बाद चेहरा धो डालें। ऐसा सप्ताह में कई बार करें, चेहरे के काले दाग-धब्बे धीरे-धीरे हल्के पड़ जाएंगे।
· संतरे के छिलके छाया में सुखाकर इसका बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की थोड़ी मात्रा लें और उसमें उतना ही बेसन मिला दें। इस मिश्रण को थोड़े पानी में डालकर छोड़ दें। पन्द्रह मिनट बाद इसका गाढ़ा घोल तैयार हो जाएगा। इस लेप को मुँहासों पर लगाएं। दस मिनट बाद गुनगुन पानी से मुँह धो लें। यही क्रिया एक-डेढ़ महीने तक करें, मुहांसे ठीक हो जाएंगे। इसके अतिरिक्त संतरे के छिलके के चूर्ण को ही अगर गुलाबजल में घोलकर भी लेप लगाते रहें, तो इससे भी समान लाभ प्राप्त होगा।
हल्दी तथा बेसन मिश्रण में गाजर और टमाटर का रस मिलाकर लेप बनाकर मुंह पर लगाने से मुंहासे ठीक हो जाते हैं।
· नींबू के पेड़ की छाल के गुदे को चन्दन की तरह घिसकर मुंहासे पर लगाने से मुंहासे ठीक होने के साथ ही दाग-धब्बे मिट जाते हैं।
· नीम की निबोली को छाछ में घिसकर या पीसकर मुंहासों पर सुबह-शाम मलने से फायदा होता है।
· दूध में हल्दी व चन्दन को पीसकर रात को शरीर व चेहरे पर मलने से मुंहासे व दाग मिट जाते है।
चोट लगना, खून बहना
· शरीर के चोट-ग्रस्त भाग पर प्याज को पीसकर उसमें हल्दी मिलाकर तिल के तेल में गरम कर पोटली बनाकर बांधने से दर्द एवं सूजन में फायदा होता है।
· पेड़ या वाहन आदि से गिर जाने पर गुम चोट हो तो एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच पिसी फिटकरी मिलाकर तुरन्त पिला देने से अन्दर का खून थक्का नहीं बनने पाता तथा दर्द से राहत मिलती है।
आंखों में जलन
· हल्दी, फिटकरी और इमली के पत्ताें को समभाग लेकर इन्हें पीसकर पुल्टिस बनाकर सेंक करने से नेत्रों की जलन और लाली दूर होती है।
· साफ रुई को दूध में भिगोकर आंखों पर रखें। ऐसा दिन में 3-4 बार करें। इसमें आंखों को ठंडक मिलती है और उनकी जलन व लालिमा दूर होती है।
एनीमिया (रक्त अल्पता)
· 50 ग्राम काला तिल और 50 ग्राम दालचीनी को मिलाकर पीस लें। इस चूर्ण को आधा कप दूध या पानी के साथ लेने से कमजोरी शीघ्र दूर हो जाती है।
· एक महीने तक छह-सात प्रतिदिन खाने से बेजान शरीर में जान आयेगी और कमजोरी दूर हो जायेगी।
कब्ज
· एरंड का तेल 14 चम्मच (छोटा चम्मच) लेकर समान मात्रा में शहद मिलाकर चटाएं। नवजात शिशुओं में इसकी मात्रा दस बूंद ही होनी चाहिए।
· एक खजूर (गुठली रहित) को रात भर पानी में भिगोकर रखें, सुबह उसे मसल-पीसकर कल्क बना लें। इसे 1-1 चम्मच दिन में 3-4 बार सेवन कराएं। इसके नियमित सेवन से शिशुओं में बार-बार होने वाली कब्ज ठीक हो जाती है
हिचकी
· सोंठ और पुराना देसी गुड़ बराबर मात्रा में मिलाकर पीसकर दिन में कई बार सूंघने से फायदा होता है।
· यदि हिचकी आ रही हो तो थोड़ी मात्रा में शहद चाटें, सोंठ और छोटी हरड़ को पानी में घिसकर इसका एक चम्मच गाढ़ा लेप एक कप गुनगुने पानी में घोलकर पिलाने से हिचकी में आराम मिलता है।
चेहरे की चमक
· खीरे को कद्दूकस में कसकर उसमें नींबू का रस, हल्दी व बेसन मिलायें। इसे चेहरे पर लगायें।
· बादाम एक-दो लेकर रात को पानी में गला दें। सुबह-दूध के साथ पीसकर चेहरे पर लगायें। 5-10 मिनट के बाद मसलकर चेहरा धो लें। चेहरा चमक उठेगा।
हड्डी टूटना
· लहसुन के लेप से टूटी हुई हड्डियों की चोट में भी आराम मिलता है।
· हड्डी टूटने पर 12 ग्राम शहद में 12 ग्राम गेहूँ की राख मिलाकर चाटने से टूटी हुई हड्डी जुड़ जायेगी। कमर और जोड़ों के दर्द में भी इससे फायदा होगा।
घुटने का दर्द
· घुटने पर जहां दर्द, सूजन और पथराया-सा लगे उस जगह सौंठ भुने गर्म तेल की मालिश करके उस जगह पर कपड़ा बांधें तथा शीत व हवा से बचाएं। खटाई व शीतल पदार्थ से परहेज आवश्यक है।
· सौंठ का चूर्ण या अदरक का रस, काली मिर्च, बायबिडंग तथा सेंधा नमक का चूर्ण बनाकर रख लें। इस चूर्ण की 3-3 ग्राम मात्रा शहद में मिलाकर चाटने से घुटने के दर्द में आराम मिलता है।
सुन्न
· लहसुन की एक गांठ और सोंठ की एक गांठ को लेकर सिल पर पानी का छींटा देकर पीसकर लेप बना लें। इस लेप को उस अंग पर लगायें जो सुन्न पड़ जाता हो। 10 दिनों तक यह प्रयोग नित्य एक बार करते रहें तो लाभ होगा। इस लेप को सूखने पर उतार दें।
· दो चम्मच नारियल तेल में दो बूंद जायफल का तेल डालकर मिला लें। त्वचा की शून्यता वाले जगह पर यह तेल लगाकर मालिश करने से त्वचा-शून्यता दूर हो जाएगी।
19 मार्च 2010
घरेलु उपचार 2
Posted by Udit bhargava at 3/19/2010 08:54:00 am 0 comments
पेचिश (नई या पुरानी)
स्वच्छ सौंफ 300 ग्राम और मिश्री 300 ग्राम लें। सौंफ के दो बराबर हिस्से कर लें। एक हिस्सा तवे पर भून लें। भुनी हुई और बची हुई सौंफ लेकर बारीक पीस लें और उतनी ही मिश्री (पिसी हुई) मिला लें। इस चूर्ण को छः ग्राम (दो चम्मच) की मात्रा से दिन में चार बार खायें। ऊपर से दो घूँट पानी पी सकते हैं। आंवयुक्त पेचिश - नयी या पुरानी (मरोड़ देकर थोडा-थोडा मल तथा आंव आना) के लिए रामबाण है। सौंफ खाने से बस्ती-शूल या पीड़ा सहित आंव आना मिटता है।
या दही, भात, मिश्री के साथ खाने से आंव-मरोड़ी के दस्तों में आराम आता है।
या मैथी (शुष्क दाना) का साग बनाकर रोजाना खावें अथवा मैथी दाना का चूर्ण तीन ग्राम दही में मिलाकर सेवन करें। आंव की बिमारी में लाभ के अतिरिक्त इससे पेशाब का अधिक आना भी बन्द होता है। प्रतिदिन मैथी का साग खाने से आंव की बिमारी अच्छी होती है। और पेशाब का अधिक आना बन्द होता है।
Posted by Udit bhargava at 3/19/2010 08:37:00 am 0 comments
बालों का समय से पहले सफेद होना
एक चम्मच भर आंवला चूर्ण दो घूंट पानी से सोते समय अंतिम वस्तु के रूप में लें। असमय बाल सफेद होने और चेहरे की कान्ति नष्ट होने पर जादू का सा असर करता है। (साथ ही स्वर को मधुर और शुद्ध बनाता है तथा गले की घर-घराहट भी इससे ठीक हो जाती है।
या आंवला चूर्ण का लेप - सूखे आंवलों के चूर्ण को पानी के साथ लेई बनाकर इसका खोपड़ी पर लेप करने तथा पाँच दस मिनट बाद केशों को जल से धो लेने से बाल सफेद होने और गिरने बन्द हो जाते है।
या आंवला जल से सिर धोना सर्वोत्तम - विधि इस प्रकार है - 25 ग्राम सूखे आंवलों के यवकूट (मोटा-मोटा कूटकर) किए हुए टुकड़ों को 250 ग्राम पानी में रात को भिगो दें। प्रातः फूले हुए आंवलों को कड़े हाथ से मसलकर सारा जल पतले स्वच्छ कपड़े से छान लें। अब इस निथरे हुए जल को केशों की जड़ों में हल्के-हल्के अच्छी तरह मलिए और दस बीस मिनट बाद केशों को सादे पानी से धो डालिए। रूखे बालों को सप्ताह में एक बार और चिकने बालों को सप्ताह में दो बार धोना चाहिए। आवश्यकता हो तो कुछ दिन रोजाना भी धोया जा सकता है। केश धोने के एक घंटे पहले या जिस दिन केश धोने हों, उसके एक दिन पहले रात में आंवलों के तेल की मालिश केशों में करें।
Posted by Udit bhargava at 3/19/2010 08:31:00 am 0 comments
कब्ज
कब्ज होने पर रात्रि सोते समय दस बारह मुनक्के (पानी से अच्छी तरह धोकर साफ कर बीज निकाल कर) दूध में उबाल कर खाएँ और ऊपर से वही दूध पी लें। प्रातः खुलकर शौच लगेगा। भयंकर कब्ज में तीन दिन लगातर लें और बाद में आवश्यकतानुसार कभी-कभी लें।
या त्रिफला चुर्ण चार ग्राम (एक चम्मच भर) २०० ग्राम हल्के गर्म दूध अथवा गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज दूर होता है।
या दस ग्राम (दो चम्मच) ईसबगोल की भूसी छः घंटे पानी में भिगोकर इतनी ही मिश्री मिलाकर रात सोते समय जल के साथ लेने से दस्त साफ आता है। इसे केवल पानी के साथ वैसे ही, बिना भिगोये ही, रात्रि सोते समय लिया जा सकता है।
या ईसबगोल की भूसी दस से पन्द्रह ग्राम (दो से तीन चम्मच) की मात्रा में २०० ग्राम गर्म दूध में भिगो दें। यह फूलकर गाढ़ी हो जाएगी। इसे चीनी मिलाकर खाएँ और ऊपर से थोड़ा और गर्म दूध पी लें। शाम को इसे लें तो प्रातः मल बंधा हुआ साफ आ जाएगा।
या ईसबगोल की भूसी १० - १५ ग्राम की मात्रा में थोड़े गर्म दूध के साथ मिलाकर नित्य रात को सोते समय खाने से प्रातः को पेट साफ हो जाता है। दूध में आधा पानी मिलाकर एक या दो उबाल आने तक औटाना चाहिये।
या आरंड़ का तेल अवस्थानुसार एक से पांच चम्मच की मात्रा से एक कप गर्म पानी या दूध में मिलाकर रात सोते समय पीने से कब्ज दूर होकर साफ आता है।
या आरंड़ का तेल बहुत ही अच्छा हानि रहित जुलाब है। इसे छोटे बच्चे को भी दिया जा सकता है और दूध के विकार से पेट दर्द तथा उल्टी होने की अवस्था में भी इसका प्रयोग बहुत हितकारी होता है।
या पुराना से पुराना अथवा बिगड़ा हुआ कब्ज - दो संतरों का रस खाली पेट प्रातः आठ दस दिन पीने से पुराना से पुराना अथवा बिगड़ा हुआ कैसा भी कब्ज हो, ठीक हो जाता है।
Posted by Udit bhargava at 3/19/2010 08:17:00 am 0 comments
मुलहठी के उपयोग ~~~
छोटे बच्चों और बच्चों के लिए आमतौर पर उपयोग में लाई जाने वाली वनौषधियों में एक है- मुलहठी, इसे जेठीमध, मधुक, मधुयस्टि भी कहते हैं। अँग्रेजी में इसे लिकोरिस कहते हैं।
मुलहठी की एक से डेढ़ मीटर ऊँची बेल होती है और इमली जैसे छोटे-छोटे पत्ते होते हैं। इन बेलों पर बैंगनी रंग के फूल लगते हैं इसकी जड़ें जमीन के अंदर फैली होती हैं, जिनका औषधि के लिए उपयोग किया जाता है।
मुलहठी स्वाद में मधुर, शीतल, पचने में भारी, स्निग्ध और शरीर को बल देने वाली होती है। इन गुणों के कारण यह बढ़े हुए तीनों दोषों को शांत करती है।
* खाँसी-जुकाम : कफ को कम करने के लिए मुलहठी का ज्यादातर उपयोग किया जाता है। बढ़े हुए कफ से गला, नाक, छाती में जलन हो जाने जैसी अनुभूति होती है, तब मुलहठी को शहद में मिलाकर चाटने से बहुत फायदा होता है।
* बड़ों के लिए मुलहठी के चूर्ण का इस्तेमाल कर सकते हैं। शिशुओं के लिए मुलहठी के जड़ को पत्थर पर पानी के साथ 6-7 बार घिसकर शहद या दूध में मिलाकर दिया जा सकता है। यह स्वाद में मधुर होती है अतः सभी बच्चे बिना झिझक के इसे चाट लेते हैं।
* मुलहठी बुद्धि को भी तेज करती है। अतः छोटे बच्चों के लिए इसका उपयोग नियमित रूप से कर सकते हैं।
* यह हल्की रेचक होती है। अतः पाचन के विकारों में इसके चूर्ण को इस्तेमाल किया जाता है। विशेषतः छोटे बच्चों को जब कब्ज होती है, तब हल्के रेच के रूप में इसका उपयोग किया जा सकता है। छोटे शिशु कई बार शाम को रोते हैं। पेट में गैस के कारण उन्हें शाम के वक्त पेट में दर्द होता है। उस समय मुलहठी को पत्थर पर घिसकर पानी या दूध के साथ पिलाने से पेट दर्द शांत हो जाता है।
* मुलहठी की मधुरता से पित्त का नाश होता है। आमाशय की बढ़ी हुई अम्लता एवं अम्लपित्त जैसी व्याधियों में मुलहठी काफी उपयुक्त सिद्ध होती है। आमाशय के अंदर हुए व्रण (अलसर) को मिटाने के लिए एवं पित्तवृद्धि को शांत करने के लि मुलहठी का उपयोग होता है। मुलहठी को मिलाकर पकाए गए घी का प्रयोग करने से अलसर मिटता है।
यह कफ को आसानी से निकालता है। अतः खाँसी, दमा, टीबी एवं स्वरभेद (आवाज बदल जाना) आदि फेफड़ों की बीमारियों में बहुत लाभदायक है। कफ के निकल जाने से इन रोगों के साथ बुखार भी कम हो जाता है। इसके लिए मुलहठी का एक छोटा टुकड़ा मुँह में रखकर चबाने से भी फायदा होता है।
Posted by Udit bhargava at 3/19/2010 08:12:00 am 0 comments
डिप्रेशन से बचने के 5 उपाय~~~
डिप्रेशन एक ऐसी स्थिति है जिसका शुरुआती दौर में तो शरीर पर कोई असर नहीं दिखता, लेकिन धीरे-धीरे यह आदमी के पूरे व्यक्तित्व पर छा जाती है और उसे नष्ट कर देती है। फिर इसका असर शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पडने लगता है और अंतत: इसका शिकार व्यक्ति जीवन से निराश होकर आत्महत्या तक कर बैठता है। इसलिए यह जरूरी है कि पहले तो ऐसे उपाय अपनाए जाएं जिससे इसका शिकार ही न होना पडे। इसके बावजूद अगर कभी हो ही जाएं तो इसके उपचार की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर देनी चाहिए। आइए जानें पांच ऐसे उपाय जो आपको डिप्रेशन का शिकार होने से बचा सकते हैं।
व्यस्त रहें, मस्त रहें ~~~
जब भी आप किसी कारण से उदासी की ओर बढें या आपको कोई नकारात्मक भावना घेर रही हो तो सबसे पहला काम यह करें कि उस विषय पर सोचना ही छोड दें। इसका सबसे बढिया तरीका यह है कि आप इतने व्यस्त हो जाएं कि उस तरफ ध्यान ही न जाए। लगातार ऐसी गतिविधियों में संलग्न रहें जो आपके लिए प्रेरणादायक साबित हों। ऐसे काम करें जिनमें आपकी निजी दिलचस्पी हो। जिन्हें करने में आपको मजा आए। मसलन किताबें पढना, संगीत सुनना, खेलकूद में शामिल होना, घुमक्कडी, लिखना या चित्रकारी करना.. आदि। ऐसे सैकडों काम हैं जिनमें अगर एक बार आप खो जाएं तो फिर कितना समय बीत गया, इसका पता भी न चले। साथ ही इनमें एक बार मशगूल हो जाने के बाद नकारात्मक भावनाएं आपको छू भी न सकें। जरूरत है तो सिर्फ एक बात की और, वह है अपनी रुचियों की ठीक-ठीक पहचान करने की। अपनी रुचियों को पहचानें और ऐसे काम बिल्कुल न करें जिन्हें करना आप पसंद न करते हों।
जब आप एक बार अपनी रुचि की सही पहचान कर लें तो फिर उसी दिशा के अनुरूप जीवन का लक्ष्य भी निर्धारित करें। फिर इस बात का कोई मतलब नहीं रह जाएगा कि कोई स्थिति आपके लिए कितनी कठिन होती है। फिर मुश्किलें हल करने के तरीके भी आप खुद निकाल लेंगे। अच्छे-बुरे जैसे भी दिन आएंगे उन्हें आप झेलने में समर्थ होंगे और हर बाधा को पार भी कर लेंगे।
अंधेरे से बचें ~~~
यह तो आपने महसूस ही किया होगा कि प्रकाश की उपस्थिति में नींद आसानी से नहीं आती है। जबकि अंधेरे में इसके लिए कोई खास कोशिश नहीं करनी पडती है। ऐसा क्यों होता है, कभी सोचा है आपने। दरअसल इसकी वजह एक हार्मोन है। मेलाटोनिन नाम का यह हार्मोन हमें आलस्य, उदासी, चिडचिडेपन, अनमनेपन या हताशा की ओर ले जाने के लिए जिम्मेदार होता है। जब आप सामान्य स्थितियों में सोना चाहते हैं तब सबसे पहले तो यह आपके शरीर के तापमान को कम करता है। फिर यह आपको पहले सुस्ती, फिर शांति और इसके बाद नींद में ले जाता है, लेकिन जब आप चिंता या तनाव से ग्रस्त होते हैं तो यही मेलोटेनिन आपको निराशा की भावना से भरने लग जाता है। जहां सामान्य स्थितियों में यह आपको शांति और राहत देता है, वहीं तनाव की स्थिति में यह आपके भीतर अनावश्यक रूप से बेचैनी, आशंकाएं, भय और हताशा उत्पन्न करता है। इसलिए जब आप डिप्रेशन का शिकार खुद को महसूस कर रहे हों तो कभी भी अंधेरे में न रहें। पूरे प्रकाश में रहें। बल्कि कोशिश यह करें कि ऐसी जगह रहें जहां भरपूर प्राकृतिक प्रकाश हो। यानी घर में बैठे या लेटे रहने के बजाय बाहर निकलकर घूमें-टहलें।
अपने लिए समय निकालें~~~
व्यस्त रहने का यह अर्थ बिल्कुल न लें कि आप अपने आपको भूल ही जाएं। अपने व्यावसायिक या पारिवारिक कामकाज करते हुए अपने स्वास्थ्य का भी पूरा खयाल रखें। साथ ही अपने रचनात्मक शौक भी पूरे करते रहें। कभी मधुर संगीत सुनें या अपनी पसंद की किताबें पढें। चाहें तो कहीं घूम आएं। या जो कुछ भी आपका शौक हो उसे पूरा करें। हां, शौक पूरा करते समय यह ध्यान जरूर रखें कि आपका शौक रचनात्मक हो। कोई ऐसा शौक पूरा करने की कोशिश न करें, जो आपकी ऊर्जा को नकारात्मक दिशा दे।
नहाने में वक्त थोडा ज्यादा लगाएं। हो सके तो देर तक शॉवर के नीचे बैठें। इससे ताजगी मिलेगी। जरूरत महसूस हो तो थकान मिटाने के लिए मसाज भी करा सकते हैं। इससे आपको शारीरिक तनाव से मुक्ति मिलेगी और जब शरीर तनावमुक्त होगा तो मन के तनावमुक्त होने के मार्ग खुलेंगे। इसलिए डिप्रेशन को दूर भगाने के लिए मौज-मस्ती जरूरी है।
संतुलित आहार लें~~~
डिप्रेशन अपने मूल रूप में मानसिक स्थिति है और मन बहुत हद आपके शरीर पर निर्भर है। शरीर स्वस्थ बना रहे, इसके लिए संतुलित आहार सबसे ज्यादा जरूरी है। ऐसी स्थिति में नशीले द्रव्य तो बिल्कुल ही न लें। बहुत ज्यादा मीठी चीजों से भी बचें। चीनी और कैफीन या एल्कोहॉल थोडी देर के लिए तो आपका ऊर्जा स्तर बढाती जरूर हैं, लेकिन बाद में ये चीजें आपको तनाव और हताशा की ओर ले जाती हैं। इसलिए ऐसी चीजों से बचें।
मेलजोल बढाएं ~~~
यह तो आप जानते ही हैं कि अकेलापन अपने आपमें कई रोगों की जड है। अकेलापन दो स्थितियों में भाता है। एक तो तब, जबकि आप कोई ऐसा रचनात्मक कार्य करना चाहें जिसमें पूरी एकाग्रता और शांति की जरूरत हो और दूसरी तब, जब आप लोगों के सवालों से बचना चाहते हों। लेकिन दूसरी स्थिति में अकेले कभी न पडें। यह अकेलापन जिंदगी से पलायन तक के लिए मजबूर कर सकता है। जबकि अगर आप समाज में हों तो सवालों के अलावा आपको अपने कई तरह के संशय के जवाब भी मिल सकते हैं। इसलिए अकेले पडने से बचें। लोगों से मिले-जुलें और मस्त रहें।
Posted by Udit bhargava at 3/19/2010 07:48:00 am 0 comments
रामायण – लंकाकाण्ड - अकम्पन का वध
वज्रदंष्ट्र की मृत्यु का समाचार सुनकर रावण के सेनापति अकम्पन को उसके शौर्य एवं पराक्रम की प्रशंसा करते हुये राम-लक्ष्मण के विरुद्ध युद्ध करने के लिये भेजा। रावण की आज्ञा पाकर महापराक्रमी अकम्पन सोने के रथ में बैठकर असंख्य चुने हुये भीमकर्मा सैनिकों के साथ नगर से बाहर निकला। उसे अपने ऊपर अगाध विश्वास था। वह समझता था कि उसके सामने मनुष्य और वानर तो क्या, देवता भी नहीं ठहर सकते। रणभूमि में पहुँचते ही उसने दसों दिशाओं को कँपाने वाला सिंहनाद दिया। उसके सिंहनाद से अविचल वीर वानर सेना राक्षस दल पर टूट पड़ी। एक बार फिर अभूतपरूर्व मारकाट मच गई। उन सबके ललकारने और गरजने के स्वर के सामने सागर का गर्जन भी फीका प्रतीत होता था।
अकम्पन ने एक बाण छोड़कर सम्पूर्ण वातावरण को अन्धकारमय कर दिया। हाथ को हाथ सूझना बंद हो गया। योद्धा अपने तथा विपक्षी दल के सैनिकों में भेद न कर सके। वानर वानरों को और राक्षस राक्षसों को मारने लगे। घायल होने पर उनके मुख से निकलने वाली ध्वनि से ही आक्रमणकारी को ज्ञान होता था कि उसने अपने ही दल के सैनिक पर वार किया है। तब सुग्रीव ने एक बाण छोड़कर इस अन्धकार को दूर किया। अपने साथियों को अपने ही हाथों से मरा देख वानरों ने क्रुद्ध होकर वृक्षों, शिलाओं, दाँतों तथा नाखूनों से रिपुदल में भयंकर मारकाट मचा दी जिससे उसके पाँव उखड़ने लगे।
अपनी सेना को भागने के लिये उद्यत देख अकम्पन मेघों के सदृश गर्जना करके अग्नि बाणों से वानर दल को जलाने लगा। वानर सेना को इस प्रकार अग्नि में भस्म होते देख परम तेजस्वी पवनपुत्र हनुमान ने आगे बढ़कर अकम्पन को ललकारा। जब अन्य वानरों ने हनुमान का रौद्ररूप देखा तो वे भी उनके साथ फिर फुर्ती से युद्ध करने लगे। उधर हनुमान को देखकर अकम्पन भी गरजा। उसने अपने तरकस से तीक्ष्ण बाण निकालकर हनुमान को अपने लक्ष्य बनाया। उन्होंने वार बचाकर एक विशाल शिला अकम्पन की ओर फेंकी। जब तक वह शिला अकम्पन तक पहुँचती तब कर उसने अर्द्धचन्द्राकार बाण छोड़कर उस शिला को चूर-चूर कर दिया। इस प्रकार शिला के नषृट होने पर हनुमान ने कर्णिकार का वृक्ष उखाड़कर अकम्पन की ओर फेंका। अकम्पन ने अपने एक बाण से उस वृक्ष को भी नष्ट किया और एक साथ चौदह बाण छोड़कर हनुमान के शरीर को रक्तरंजित कर दिया। इससे हनुमान के क्रोध की सीमा न रही। उन्होंने एक विशाल वृक्ष उखाड़कर अकम्पन के सिर पर दे मारा। इससे वह प्राणहीन होकर भूमि पर गिर पड़ा। अकम्पन के मरते ही सारे राक्षस सिर पर पैर रख कर भागे। वानरों ने उन भागते हुये शत्रुओं को पेड़ों तथा पत्थरों से वहीं कुचल दिया। जो शेष बचे, उन्होंने रावण को अकम्पन के मरने की सूचना सुनाई।
Posted by Udit bhargava at 3/19/2010 05:43:00 am 0 comments

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