13 फ़रवरी 2010

रामायण – उत्तरकाण्ड - पूर्व राजाओं के यज्ञ-स्थल एवं लवकुश का जन्म

अयोध्या से प्रस्थान करने के तीसरे दिन शत्रुघ्न ने महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में विश्राम किया। रात्रि में उन्होंने मुनि से पूछा, "हे महर्षि! आपके आश्रम के निकट पूर्व में यह किसका यज्ञ-स्थल दिखाइ पड़ रहा है?"

महर्षि बोले, हे सौमित्र! यह यज्ञ-स्थल तुम्हारे कुल के महान राजाओं ने बनवाया था। मैं उनके विषय में बताता हूँ। तुम्हारे कुल में राजा सौदास बड़े धार्मिक हुये हैं। एक दिन आखेट करते हुये उन्होंने वन में दो भयंकर दुर्दुर्ष राक्षसों को देखा। राजा ने बाण चलाकर उनमें से एक को मार गिराया। यह देखकर दूसरा राक्षस यह कहता हुआ अद‍ृश्य हो गया कि हे पापी! तूने मेरे इस मित्र को निरपराध मारा है, अतः मैं इसका प्रतिशोध अवश्य लूँगा।

कुछ समय पश्‍चात् सौदास का पुत्र वीर्यसह राज्य देकर सौदास ने वशिष्ठ जी को पुरोहित बनाकर इस स्थान पर अश्‍वमेघ यज्ञ किया। उस समय वही राक्षस अपने प्रतिशोध चुकाने के लिये वहाँ आया और वशिष्ठ जी का रूप बनाकर राजा से बोले कि आज मुझे माँसयुक्‍त भोजन कराओ, इसमें सोच-विचार की आवश्यकता नहीं है। राजा ने अपने रसोइये को ऐसा ही आदेश दिया। इस आदेश को सुनकर वह आश्‍चर्य में पड़ गया। तभी वह राक्षस रसोइये के वेश में वहाँ उपस्थित हुआ और भोजन में मनुष्य का माँस मिलाकर राजा को दिया। राजा ने अपनी पत्‍नी सहित वह भोजन वशिष्ठ जी को परोसा। जब वशिष्ठ जी को ज्ञात हुये कि भोजन में मनुष्य का माँस है तो उन्होंने क्रोधित होकर राजा को शाप दिया कि राजन्! जैसा भोजन तूने मुझे प्रस्तुत किया है, वैसा ही भोजन तुझे प्राप्त होगा। तब तो राजा वीर्यसह ने भी क्रोधित हो हाथ में जल लेकर वशिष्ठ जी को शाप देना चाहा। परन्तु रानी के समझाने पर वह जल अपने पैरों पर डाल दिया। इससे उनके दोनों पैर काले हो गये। तभी से उनका नाम कल्माषपाद पड़ गया। तत्पश्‍चात् राजा और रानी ने महर्षि वशिष्ठ के पैर पकड़ कर क्षमा माँगी और पूरा वृतान्त उन्हें कह सुनाया। तब वशिष्ठ जी ने कहा कि राजन्! बारह वर्ष पश्‍चात् आप इस शाप से मुक्‍त हो जाओगे और तुम्हें इसका स्मरण भी नहीं रहेगा। हे शत्रुघ्न! इस प्रकार राजा कल्माषपाद उस शाप को भोगकर पुनः राज्य प्राप्त कर धैर्यपूर्वक प्रजा का पालन करने लगे। उन्हीं राजा सौदास और राजा कल्माषपाद का यह सुन्दर यज्ञ-स्थल है।" यह कथा सुनकर शत्रुघ्न अपनी पर्णशाला में विश्राम करने चले गये।

जिस दिन शत्रुघ्न वाल्मीकि के आश्रम में पहुँचे उसी रात को सीताजी ने एक साथ दो पुत्रों को जन्म दिया। तपस्विनी बालाओं से उनके जन्म का समाचार सुनकर महर्षि ने एक कुशाओं का मुट्ठा और उनके लव लेकर मन्त्रच्चार द्वारा उनकी भावी बाधाओं से रक्षा करने की व्यवस्था की। फिर एक का कुश और दूसरे का लव से मार्जन कराया। इस प्रकारे बड़ बालक का नाम कुश और दूसरे का लव रखा गया। शत्रुघ्न को भी यह समाचार पाकर अत्यन्त प्रसन्नता हुई।

अगले दिन प्रातःकाल सब कृत्यों से निवृत हो शत्रुघ्न मधुपुरी की ओर चल दिये। मार्ग में सात रात्रियाँ व्यतीत कर वे महर्षि च्यवन के आश्रम में पहुँचे।

पौष्टिक आहार को दे अहमियत

* गर्मी के मौसम में अपने खान-पान पर पूरा ध्यान दें। संतुलित भोजन (दाल, चावल, सब्जी-रोटी और सलाद-दही) को ही अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

* विटामिन-सी हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता हैं, इसलिए आप अपने भोजन में विटामिन-सी युक्त फलों जैसे:- संतरा, अँगूर, तरबूज, आँवला आदि को शामिल करें।

* तेलयुक्त और मसालेदार भोजन से बचें। जंक-फूड, पिज्जा, बर्गर और वेफर्स को भोजन में शामिल न करें। ताजा फलों के रस को शामिल करना लाभदायक रहेगा।

* प्रतिदिन 8-10 ग्लास पानी पिएँ। प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक ग्लास पानी में नींबू का रस निचोड़कर पीने से चेहरे पर चमक आती हैं और डिहाइड्रेशन से भी बचा जा सकता हैं।

* दिन में एक या दो बार नींबू-पानी-शक्कर डालकर पीना चाहिए। इसके अतिरिक्त दही, छाछ या मीठे शर्बत का सेवन करना चाहिए। इससे शरीर में शीतलता व तरावट बनी रहती है।

रत्नों की श्रेष्ठता

रत्नों की श्रेष्ठता प्रमाणित करने में उसके मुख्यतया तीन गुण हैं- रत्नों की अद्भुत सौंदर्यता, रत्नों की दुर्लभता, रत्नों का स्थायित्व।

मनुष्य विकसित होने के साथ-साथ रत्नों की तरफ भी अधिक आकर्षित हो गया है। अतः रत्नों को विभाजित करते समय विशेष रूप से तीन बातों का ध्यान देते हैं कि प्राप्त रत्न निम्न तीन में से किस प्रकार का है? पारदर्शक है, अल्प पारदर्शक है अथवा अपारदर्शक है।

पारदर्शक रत्न सर्वोत्तम श्रेणी में आता है। यह भी दो प्रकार का होता है-
रंगविहीन- जिस रत्न में रंग बिल्कुल ही न हो।
रंगहीन- जिसमें रंग तो हो, परन्तु हीन दशा में हो अर्थात्‌ रंग न अधिक गहरा हो और न अधिक हल्का तथा पारदर्शक हो, वह श्रेष्ठ होता है।

अधिक गहरा रंग होने के कारण रत्न अपारदर्शक हो जाता है। अपारदर्शक रत्नों में फीरोजा का उच्च स्थान है, तो वैसे नीलम, पुखराज तथा पन्ना भी अपने विशिष्ट रंगों के कारण मनुष्य को अपनी तरफ मोहित करते हैं।

रत्नों की दुर्लभता भी मनुष्य को उसकी तरफ आकर्षित होने का एक प्रमुख कारण है। ठीक उसी तरह जैसे कि आपके सामने से कोई सुंदर आकर्षक नवयौवना आ रही हो उसे एक बार देखने के पश्चात आपके हृदय में बार-बार उसे देखने की लालसा नहीं उठती, क्योंकि उसके चेहरे पर उसके तन पर किसी प्रकार का परदा नहीं है।

आपको देखने में कोई रोक टोक नहीं है तथा ठीक इसके विपरीत कोई महिला काली कलूटी व बदसूरत हो, परन्तु वह एक लम्बा घूँघट निकाले हुए तथा अपने शरीर को लम्बी चादर से ढँके हुए आ रही हो तो आप बार-बार उसके मुख मंडल के सौंदर्य का रसपान करना चाहते हैं। यहाँ तक कि दूर चले जाने पर भी आप बार-बार मुड़कर देखते हैं कि जरा सी भी उसकी झलक दिखाई दे जाए। ऐसा क्यों? इसलिए कि उसका मुख मंडल, शरीर सौष्ठव आपको देख पाना कठिन है, इसलिए उसकी तरफ लालायित हैं।

जिन रत्नों में स्थायित्व है तथा उनकी चमक व गुणों पर ऋतुओं व अम्ल आदि के द्वारा कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता वह रत्न अधिक मूल्यवान होता है। हर व्यक्ति के पास इसे खरीदने की क्षमता नहीं होती या अधिक मूल्यवान होने के कारण हर तीसरे-चौथे वर्ष उसे खरीद सकना सम्भव नहीं है। अतः रत्नों की कठोरता होना जिससे कि उसे किसी प्रकार का खरोंच या रगड़ने का दाग न पड़े श्रेष्ठ होता है। जैसे-हीरा, पन्ना, पुखराज आदि। रत्नों के विषय में अग्नि पुराण, गरुड़ पुराण, देवी भागवत, महाभारत, विष्णु धर्मोत्तर आदि अनेकों प्राचीन ग्रंथों में वर्णन मिलता है।

12 फ़रवरी 2010

रामायण – उत्तरकाण्ड - मान्धाता की कथा

रात्रि होने पर शत्रुघ्न ने महर्षि च्यवन से लवणासुर के विषय में अन्य जानकारी प्राप्‍त की तथा पूछा कि उस शूल से कौन-कौन शूरवीर मारे गये हैं। च्यवन ऋषि बोले, "हे रघुनन्दन! शिवजी के इस त्रिशूल से अब तक असंख्य योद्धा मारे जा चुके हैं। तुम्हारे कुल में तुम्हारे पूर्वज राजा मान्धाता भी इसी के द्वारा मारे गये थे।"

शत्रुघ्न द्वारा पूरा विवरण पूछे जाने पर महर्षि ने बताया, "हे राज्! पूर्वकाल में महाराजा युवनाश्‍व के पुत्र महाबली मान्धाता ने स्वर्ग विजय की इच्छा से देवराज इन्द्र को युदध के लिये ललकारा। तब इन्द्र ने उने से कहा कि राजा! अभी तो तुम समस्त पृथ्वी को ही वश में नहीं कर सके हो, फिर देवलोक पर आक्रमण की इच्छा क्यों करते हो? तुम पहले मधुवन निवासी लवणासुर पर विजय प्राप्त करो। यह सुनकर राजा पृथ्वी पर लौट आये और लवणासुर से युद्ध करने के लिये उसके पास अपना दूत भेजा। परन्तु उस नरभक्षी लवण ने उस दूत का ही भक्षण कर लिया। जब राजा को इसका पता चला तो उन्होंने क्रोधित होकर उस पर बाणों की प्रचण्ड वर्षा प्रारम्भ कर दी।

उन बाणों की असह्य पीड़ा से पीड़ित हो उस राक्षस ने शंकर से प्राप्त उस शूल को उठाकर राजा का वध कर डाला। इस प्रकार उस शूल में बड़ा बल है। हे रघुकुलश्रेष्ठ! मान्धाता को इस शूल के विषय में कोई जानकारी नहीं थी अतः वे धोखे में मारे गये। परन्तु तुम निःसन्देह ही उस राक्षस को मारने में सफल होगे।

महाशिवरात्रि पर इस तरह करें स्नान

मेष - कुंभ स्नान नई चेतना देने वाला है। राज्यभाव में चंद्रमा की उपस्थिति अनुकूल है तथापि अन्य ग्रहों की अनुकूलता के लिए स्नान करते समय लाल पुष्प एवं हल्दी जल में प्रवाहित करें तथा इस मंत्र का जाप करें- ऊं ऐं क्लीं सौ:।

वृषभ - भाग्यवर्धक योग है। अन्य ग्रहों की अनुकूलता एवं शीघ्र शुभ फल की प्राप्ति के लिए स्नान करते समय अखंड़ चावल व चंदन प्रवाहित कर स्नान करें, हो सके तो अपने साथ गौमती चक्र रखें। ऊं ऐं क्लीं श्रीं मंत्र का जप करें।

मिथुन - ग्रहगोचर सम बने हुए हैं। विशेष परिश्रम से सफलता मिल सकेगी। दूध मिश्रित जल तथा जौं प्रवाहित कर स्नान करें। स्नान के समय शंख या सीप अपने साथ रखें तथाऊं क्लीं ऐं सौ: मंत्र का जप करने से विशेष सफलता प्राप्त होगी।

कर्क - ग्रहगोचर विशेष फलदायी हैं। स्नान के पूर्व शहद, लाल फूल तथा तिल का प्रवाह करें। स्फटिक साथ में रखकर स्नान किया जाए तो शुभ फल प्राप्ति में सहयोग मिल सकेगा। ऊं ह्रीं क्लीं श्रीं मंत्र का जप आपको यशस्वी बना सकता है।

सिंह - छठे भाव में सूर्य बुध चक्र की उपस्थिति तथा सप्तम में स्थित गुरु शुक्र सफलतादायक हैं। तिल, सुगंधित इत्र तथा गोमूत्र का प्रवाह करते हुए ऊं ह्रीं श्रीं सौ: मंत्र जाप करते हुए स्नान करें। रुद्राक्ष धारण कर स्नान करना फलदायी हो सकेगा।

कन्या - जन्मस्थ शनि तथा गुरु शुक्र से षडाष्टक योग मिश्रित फलदायी है। ऐसे में स्नान के समय तिल, सुपारी व एकाधिक सिक्के प्रवाहित करें। ऊं क्लीं ऐं सौ: इस मंत्र का जाप करते हुए स्नान करें तो सफलता सहज हो सकेगी।

तुला - द्वाद्वश शनि तथा चतुर्थ में बुध सूर्य चंद्र की उपस्थिति सफलता प्राप्ति में संदेह दर्शाती है। ऐसे में स्नान के पूर्व सुगंधित इत्र, श्वेत पुष्प तथा तिल का प्रवाह करते हुए ऐं क्लीं श्रीं मंत्र का जाप सफलता दिलाने में मददगार साबित हो सकता है।

वृश्चिक - पराक्रम में सूर्य बुध तथा भाग्य में मंगल शुभ है। चतुर्थ गुरु शुक्र व्यवधान कारक हैं। ऐसे में स्नान करते समय चने की दाल, चावल व हल्दी प्रवाहित करें। स्नान करते समय ऊं ऐं क्लीं सौ: मंत्र का जाप करें।

धनु - लग्न में राहु तथा पराक्रम में गुरु शुक्र आध्यात्मिक उन्नतिकारक हैं। शुभफल की विशेष प्राप्ति के लिए स्नान के पूर्व श्वेत वस्त्र, चावल व मुलेठी लपेटकर प्रवाहित करें तथा स्नान के समय ऊं ह्रीं क्लीं सौ: मंत्र का जाप सफलतादायी रहेगा।

मकर - लग्न में सूर्य या सप्तम में मंगल की उपस्थिति सम बनी हैं। शुभ फल की प्राप्ति के लिए स्नान के समय अरगजा युक्त जल एवं तिल प्रवाहित करें तथा गोमती चक्र साथ में रखते हुए ऊं ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं सौ: मंत्र का जप करें, सफलता प्राप्त होगी।

कुंभ - लग्नस्थ गुरु शुक्र तथा लाभ भाव में राहु आध्यात्मिक चेतना जाग्रत करने वाला है। स्नान के समय गोमूत्र एवं यज्ञ भस्म प्रवाहित करें तथा ऊं ह्रीं ऐं क्लीं श्रीं मंत्र का जप करें। इससे सफलता अर्जित कर सकेंगे।

मीन - पंचमस्थ मंगल तथा राज्य भाव में राहु की उपस्थिति शुभ है। अन्य ग्रहों की शुभता के लिए स्नान के समय पंचामृत एवं तुलसी का प्रवाह कर ऊं ह्रीं क्लीं सौ: मंत्र का जप करें। स्नान के समय तुलसीमाला पहनना विशेष लाभकारी रहेगा।

चाहत 'स्लिम श्रीमती' की

हाल ही में हुए एक सर्वे की रिपोर्ट बताती है कि स्लिम लाइफ पार्टनर चाहने के मामले में भारतीय पुरुष सबसे आगे हैं। तो जाहिर है कि ऐसे में महिलाओं को अपनी बॉडी को लेकर खासा कॉन्शस होने की जरूरत है।


अगर आप शादी करना चाहती हैं और साथ ही फास्ट फूड व तमाम स्नैक्स इंजॉय करती हैं और वर्कआउट का नाम लेने पर आपको बेहोशी छाने लगती है, तो आपके लिए एक बुरी खबर है। दरअसल, हाल ही में हुआ एक सर्वे बताता है कि स्लिम लाइफ पार्टनर पाने की चाहत में भारतीय पुरुष सबसे आगे हैं। यही नहीं, तमाम शादीशुदा पुरुष यह चाहते हैं कि उनकी पत्नियां वजन कम कर लें। 16 देशों में 16 हजार से भी ज्यादा लोगों पर किए गए इस सर्वे में भारतीय पुरुष अपने लाइफ पार्टनर के वजन को लेकर सबसे ज्यादा असंतुष्ट दिखे।

ऐक्टर जावेद जाफरी कहते हैं, 'मुझे लगता है कि भारतीय महिलाएं अपनी डाइट को लेकर कॉन्शस नहीं हैं और वह हमेशा यही साचेकर चलती हैं कि अगर उनका पार्टनर उनसे प्यार करता है, तो वह उनके मोटापे को भी जरूर चाहेगा।' यही वजह है कि पुरुष मैगजींस में स्टार्स की तस्वीरें देखकर आहें भरते हैं और यह बात उन पुरुषों पर भी लागू होती है, जो अपनी पत्नी के अलावा किसी और को न देखने की बात पूरे दावे के साथ कहते हैं।

दरअसल, इन दिनों एक्स्पोजर इतना ज्यादा हो चुका है कि पुरुष बिस्तर में भी ऐसी ही बॉडीज़ की उम्मीद करते हैं और प्रॉब्लम की जड़ यह है कि महिलाओं को लगता है कि पतला होना बेशक इन हो, लेकिन फैट को उसकी जगह पर जरूर होना चाहिए। वैसे, 68 प्रतिशत भारतीय यह मानते हैं कि इन दिनों लोगों पर पतले होने का बहुत प्रेशर है और हम वेट के बारे में बहुत सोचते हैं।

टीवी ऐक्टर चेतन हंसराज की शादी पांच साल पहले लविनिया से हुई थी। वह कहते हैं, 'यह बहुत नॉर्मल बात है कि हम अक्सर उसी चीज की चाहत रखते हैं, जो हमारे पास नहीं होती। वैसे, यह सही है कि शादी के बाद भारतीय महिलाओं का वजन काफी बढ़ जाता है और इसे हमारे यहां का एक ट्रडिशन ही कहा जाएगा। हालांकि अगर महिलाएं शेप में रहेंगी, तो वे खुश भी रहेंगी।'

वैसे ऐक्टर सोनू सूद इस मामले में बैलेंस्ड विचार रखते हैं। वह कहते हैं, 'मुझे लगता है कि पूरी दुनिया के पति अपनी पत्नियों को स्लिम देखना चाहते हैं और फिर फिट रहने में बुराई भी क्या है। अगर पति महिलाओं को स्लिम रहने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, तो इसमें महिलाओं का भी तो फायदा है। लेकिन पुरुषों को हमेशा अपनी वाइफ से प्यार करना चाहिए, फिर चाहे वह मोटी हो या पतली।' वहीं सुपरमॉडल जेसी रंधावा से हाल ही में शादी करने वाले सालसा एक्सपर्ट संदीप सोपरकर का कहना है कि किसी भी खूबसूरत महिला के साथ चलने से हर पुरुष को गर्व महसूस होगा। वैसे, ऐसा ही कुछ तो महिलाएं भी महसूस करेंगी।

फिटनेस एक्सपर्ट्स का मानना है कि दूसरे देशों की तुलना में भारतीय महिलाएं कुछ मोटी होती हैं। फिटनेस इंस्ट्रक्टर चंद्रशेखर रेड्डी कहते हैं, 'शादी के बाद महिलाओं का वजन काफी बढ़ जाता है। जब उनकी उम्र 20 के दशक में होती है, तो वे पढ़ाई व करियर में बिजी होती हैं। इस दौरान वे ज्यादा फिजिकल ऐक्टिविटी नहीं करतीं, जिससे उनका मेटाबॉलिजम कम हो जाता है। जब वे 35 की उम्र में पहुंचती हैं, तो उनका अपनी डाइट व बॉडी पर कोई कंट्रोल नहीं रहता है।'

दो शादियां कर चुके सिंगर लकी अली कहते हैं, 'मैं चाहता हूं कि मेरी पत्नी अपनी हेल्थ का ख्याल रखे, जो वे रखती भी हैं।' तो आप भी देख रही हैं न कि बॉडी व हेल्थ को लेकर अब आपको कितना कॉन्शस होने की जरूरत है!

प्रतिदिन की सैर लाभदायक

मोटापा न केवल खूबसूरती का दुश्मन है वरन अनेक रोगों का घर है। मोटापा विभिन्न रोगों को निमंत्रण भी देता है। मोटापा एक ऐसा रोग है जो बहुत प्रयत्न के बाद भी शायद ही पीछा छोड़े। खानपान, रहन-सहन में थोड़ी-सी लापरवाही मोटापे का द्वार खोल देती है।

इसके लिए आप अपने आचार-व्यवहार, रहन-सहन पर अंकुश लगाए बगैर छरहरे नहीं रह सकते। स्वास्थ्यप्रद क्रियाकलापों को हम अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें तो मोटापे के जालिम पंजों से बचा जा सकता है।

- मानसिक कार्य करने वाले व्यक्ति, अधिकारी जिनको पैदल चलने का काम कम पड़ता है, अक्सर मोटापे का शिकार हो जाते हैं। ऐसे व्यक्ति को खानपान का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। प्रतिदिन व्यायाम व सैर भी लाभदायक होती है।

- सुबह-शाम ताजा भोजन करें। समय व श्रम की बचत करने के लिए बहुत-सी महिलाएँ फ्रिज की बदौलत ढेर सारा खाना बना लेती हैं। समय व श्रम की बचत के और भी कई तरीके हैं, उन्हें आजमाइए।

- बासी भोजन में पौष्टिकता अमूमन पूरी तरह नष्ट हो जाती है। गरिष्ठ, तले, मसालेदार, खटाईयुक्त भोजन से परहेज करें। इनसे मोटापे के साथ-साथ अन्य बीमारियों की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

- भोजन चाहे हल्का-फुल्का हो या गरिष्ठ अपनी क्षमता के अनुसार ही ग्रहण करें। जितनी कैलोरी ग्रहण की है, शारीरिक श्रम द्वारा उतनी ही खर्च भी करें।