06 फ़रवरी 2009

चालीसा

श्री हनुमान चालीसा
श्री लक्ष्मी चालीसा
श्री शिव चालीसा
श्री शनि चालीसा
श्री कृष्ण चालीसा
श्री दुर्गा चालीसा
श्री गणेश चालीसा
श्री सरस्वती चालीसा
श्री विन्ध्येश्वरी चालीसा
श्री गायत्री चालीसा

श्री सरस्वती प्रार्थना


सरस्वती प्रार्थना
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥1॥
जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह धवल वर्ण की हैं और जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा, विष्णु एवं शंकर आदि देवताओं द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही संपूर्ण जड़ता और अज्ञान को दूर कर देने वाली माँ सरस्वती हमारी रक्षा करें॥1॥
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥2॥
शुक्लवर्ण वाली, संपूर्ण चराचर जगत्‌ में व्याप्त, आदिशक्ति, परब्रह्म के विषय में किए गए विचार एवं चिंतन के सार रूप परम उत्कर्ष को धारण करने वाली, सभी भयों से भयदान देने वाली, अज्ञान के अँधेरे को मिटाने वाली, हाथों में वीणा, पुस्तक और स्फटिक की माला धारण करने वाली और पद्मासन पर विराजमान्‌ बुद्धि प्रदान करने वाली, सर्वोच्च ऐश्वर्य से अलंकृत, भगवती शारदा (सरस्वती देवी) की मैं वंदना करता हूँ॥2॥

श्री कालीमाता की आरती


आरती
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ,हाथ जोड तेरे द्वार खडे।
पान सुपारी ध्वजा नारियल ले ज्वाला तेरी भेट धरे
सुन जगदम्बे न कर विलम्बे, संतन के भडांर भरे।
सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जै काली कल्याण करे ।।
बुद्धि विधाता तू जग माता ,मेरा कारज सिद्व करे।
चरण कमल का लिया आसरा शरण तुम्हारी आन पडे
जब जब भीड पडी भक्तन पर, तब तब आप सहाय करे ।।
गुरु के वार सकल जग मोहयो, तरूणी रूप अनूप धरे
माता होकर पुत्र खिलावे ,कही भार्या भोग करे
शुक्र सुखदाई सदा सहाई संत खडे जयकार करे ।।
ब्रह्मा विष्णु महेश फल लिये भेट तेरे द्वार खडे
अटल सिहांसन बैठी मेरी माता ,सिर सोने का छत्र फिरे
वार शनिचर कुकम बरणो, जब लकड पर हुकुम करे ।।
खड्ग खप्पर त्रिशुल हाथ लिये, रक्त बीज को भस्म करे
शुम्भ निशुम्भ को क्षण मे मारे ,महिषासुर को पकड दले ।।
आदित वारी आदि भवानी ,जन अपने को कष्ट हरे ।।
कुपित होकर दानव मारे, चण्डमुण्ड सब चूर करे
जब तुम देखी दया रूप हो, पल मे सकंट दूर करे
सौम्य स्वभाव धरयो मेरी माता ,जन की अर्ज कबूल करे ।।
सात बार की महिमा बरनी, सब गुण कौन बखान करे
सिंह पीठ पर चढी भवानी, अटल भवन मे राज्य करे
दर्शन पावे मंगल गावे ,सिद्ध साधक तेरी भेट धरे ।।
ब्रह्मा वेद पढे तेरे द्वारे, शिव शंकर हरी ध्यान धरे
इन्द्र कृष्ण तेरी करे आरती , चॅवर कुबेर डुलाय रहे
जय जननी जय मातु भवानी , अटल भवन मे राज्य करे।।
सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, मैया जै काली कल्याण करे।।

श्री लक्ष्मीजी की आरती




महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं सुरेश्र्वरी
हरिप्रिये नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं दयानिधे ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता मैया जय लक्ष्मी माता
तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता....
उमा ,रमा,ब्रम्हाणी, तुम जग की माता
सूर्य चद्रंमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥.ॐ जय लक्ष्मी माता....
दुर्गारुप निरंजन, सुख संपत्ति दाता
जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि सिद्धी धन पाता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता....
तुम ही पाताल निवासनी, तुम ही शुभदाता
कर्मप्रभाव प्रकाशनी, भवनिधि की त्राता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता....
जिस घर तुम रहती हो , ताँहि में हैं सद् गुण आता
सब सभंव हो जाता, मन नहीं घबराता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता....
तुम बिन यज्ञ ना होता, वस्त्र न कोई पाता
खान पान का वैभव, सब तुमसे आता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता....
शुभ गुण मंदिर सुंदर क्षीरनिधि जाता
रत्न चतुर्दश तुम बिन ,कोई नहीं पाता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता....
महालक्ष्मी जी की आरती ,जो कोई नर गाता
उँर आंनद समाता,पाप उतर जाता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता....
स्थिर चर जगत बचावै ,कर्म प्रेर ल्याता
रामप्रताप मैया जी की शुभ दृष्टि पाता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता....
ॐ जय लक्ष्मी माता मैया जय लक्ष्मी माता ,
तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता....

श्री अम्बें जी की आरती


सर्वमंगल मांग्लयै , शिवे सर्वार्थसाधिके
शरण्ये त्र्यम्बिके गौरी , नारायणी नमोऽस्तुते ॥
जय अम्बे गौरी , मैया जय श्यामा गौरी
तुमको निसदिन ध्यावत , हरि ब्रम्हा शिवरी ॥ जय अम्बे गौरी.....
मांग सिंदुर विराजत , टीको मृगमद को
उज्जवल से दोऊ नैना , चन्द्रवदन नीको ॥ जय अम्बे गौरी.....
कनक समान कलेवर , रक्ताम्बर राजे
रक्त पुष्प गल माला , कण्ठन पर साजे ॥ जय अम्बे गौरी.....
केहरि वाहन राजत , खडग खप्पर धारी
सुर नर मुनि जन सेवत , तिनके दुःख हारी ॥ जय अम्बे गौरी.....
कानन कुंडल शोभित , नासाग्रे मोती
कोटिक चंद्र दिवाकर , राजत सम ज्योति ॥ जय अम्बे गौरी.....
शुंभ निशंभु बिदारे , महिषासुर धाती
धूम्र विलोचन नैना , निशदिन मदमाती ॥ जय अम्बे गौरी.....
चंड मुंड संहारे , शोणित बीज हरे
मधु कैटभ दोउ मारे , सुर भयहीन करे ॥ जय अम्बे गौरी.....
ब्रम्हाणी रुद्राणी , तुम कमलारानी
आगम निगम बखानी , तुम शिव पटरानी ॥ जय अम्बे गौरी.....
चौसंठ योगिनी गावत , नृत्य करत भैरुँ
बाजत ताल मृदंगा , अरु डमरुँ ॥ जय अम्बे गौरी.....
तुम ही जग की माता , तुम ही हो भरता
भक्तन की दुःखहर्ता , सुख सम्पत्ति कर्ता ॥ जय अम्बे गौरी.....
भुजा अष्ट अति शोभित , वर मुद्रा धारी
मनवांच्छित फल पावे सेवत नर नारी ॥ जय अम्बे गौरी.....
कंचन थाल विराजत अगर कपुर बात्ती
श्री माल केतु में राजत कोटि रतन ज्योती ॥ जय अम्बे गौरी.....
या अम्बे जी की आरती जो कोई नर गाये
कहत शिवानंद स्वामी , सुख संपत्ति पाये ॥ जय अम्बे गौरी.....
जय अम्बे गौरी , मैया जय श्यामा गौरी
तुमको निसदिन ध्यावत , हरि ब्रम्हा शिवरी ॥

श्रीराणी सतीजी की आरती


ॐ जय श्री राणी सती माता , मैया जय राणी सती माता ,
अपने भक्त जनन की दूर करन विपत्ती
अवनि अननंतर ज्योति अखंडीत , मंडितचहुँक कुंभा
दुर्जन दलन खडग की विद्युतसम प्रतिभा
मरकत मणि मंदिर अतिमंजुल , शोभा लखि न पडे,
ललित ध्वजा चहुँ ओरे , कंचन कलश धरे
घंटा घनन घडावल बाजे , शंख मृदुग घूरे,
किन्नर गायन करते वेद ध्वनि उचरे
सप्त मात्रिका करे आरती , सुरगण ध्यान धरे,
विविध प्रकार के व्यजंन , श्रीफल भेट धरे
संकट विकट विदारनि , नाशनि हो कुमति,
सेवक जन ह्रदय पटले , मृदूल करन सुमति,
अमल कमल दल लोचनी , मोचनी त्रय तापा
त्रिलोक चंद्र मैया तेरी ,शरण गहुँ माता
या मैया जी की आरती, प्रतिदिन जो कोई गाता,
सदन सिद्ध नव निध फल , मनवांछित पावे

गणेशजी की आरती


ॐ गजाननं भूंतागणाधि सेवितम्, कपित्थजम्बू फलचारु भक्षणम्
उमासुतम् शोक विनाश कारकम् ,नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम्
गणपति की सेवा मंगल मेवा सेवा से सब विघ्न टरै
तीन लोक तैतिस देवता द्वार खडे सब अरज कारै ॥
रिद्धी सिद्धी दक्षिण वाम विराजे ,अरु आंनद से चवँर ढ़ुले
धूप दीप और लिये आरती भक्त खडे जयकार करे ॥ गणपति की सेवा मंगल मेवा......
गुड के मोदक भोग लगे हैं,मुषक वाहन चढ़ा करैं
सौम्यरुप सेवा गणपति की ,विघ्न भाग जा दूर पडे ॥ गणपति की सेवा मंगल मेवा......
भादों मास और शुक्ल चतुर्थी दिन दोपहरी पूर्ण पडे
लियो जन्म गणपति प्रभुजी ने दुर्गा मन आनंद भये ॥ गणपति की सेवा मंगल मेवा......
अद्भुत बाजा बजे इंद्र का ,देववधू जयगान करे
श्री शंकर जी के आनंद उपज्यों ,नाम सुने सब विघ्न टरैं ॥ गणपति की सेवा मंगल मेवा......
आनि विधाता बैठे आसन ,इंद्र अप्सरा नृत्य करे
देख वेद ब्रम्हाजी जाको विघ्नविनायक नाम धरै ॥ गणपति की सेवा मंगल मेवा......
एक दंत गजबदन विनायक ,त्रिनयन रुप अनूप धरैं प
ग खम्बा सा उदर पुष्ट हैं देख चंद्रमा हास्य करैं ॥ गणपति की सेवा मंगल मेवा......
दे श्राप श्री चंद्र देव को कलाहीन तत्काल करें
चौदह लोक मे फिरे गणपति तीन भवन में राज्य करैं ॥ गणपति की सेवा मंगल मेवा.....
. उठी प्रभात जब धरें ध्यान कोई ताके कारज सर्व सरे
पूजा काले गावे आरती ,ताके सिर यश छत्र फिरे ॥ गणपति की सेवा मंगल मेवा......
गणपति की पूजा पहले करनी ,काम सभी निर्विघ्न सरै
श्री प्रताप गणपति प्रभुजी की हाथ जोड स्तुति करैं ॥ गणपति की सेवा मंगल मेवा......
गणपति की सेवा मंगल मेवा , सेवा से सब विघ्न टरै
तीन लोक तैतिस देवता द्वार खडे सब अरज करै ॥