17 जनवरी 2012

अधिकार नहीं कार्य महत्वपूर्ण

घटना काफी समय पहले की है। लगभग पांच वर्ष पहले की। सर्दी के मौसम में धुंध एक समस्या बन जाती है, मुख्यतः हवाई जहाजों की उड़ान में। एक रात दस बजे जेट एअरलाइंस की यात्रा का समय हो गया था। तभी धुंध बननी प्रारंभ हो गई। जेट के कर्मचारियों ने जल्दी-जल्दी यात्रियों को प्लेन में भेजा और सामान चढ़ाया। प्रयत्न यह था कि धुंध के अधिक होने से पहले टेकअप हो जाए। परंतु धुंध एकदम से बढ़ गई और प्लेन को उड़ने की इजाजत नहीं मिली। प्लेन टेक्सी कर चुका था और उड़ने को तैयार था। उसको वापस लाना भी एक कठिन काम था। परंतु जेट एअरवेज के कर्मचारियों ने स्थिति को बड़ी कुशलता के साथ संभाला। इस बात का पूरा ख्याल रखा गया कि यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो। यात्रियों को पेय पदार्थ सर्व किए गए। लॉबी में पहुंचते ही उनको टिकट शीट और होटल के वाउचर दे दिए गए। बाहर धुंध अधिक थी और कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। कर्मचारियों ने ह्यूमन चेन बनाकर यात्रियों को बस तक गाइड किया। होटल पहुंचने पर जेट के कर्मचारी यात्रियों की सहायता के लिए मौजूद थे। अगले दिन यात्रियों को एअरपोर्ट पहुंचाकर मुंबई के प्लेन में बैठा दिया गया। प्रत्येक यात्री जेट एअरलाइंस के कर्मचारियों की व्यवस्था से बहुत प्रसन्न था और सबने तय किया कि भविष्य में वह केवल जेट से ही यात्रा किया करेंगे।

उसी रात इंडियन एअरलाइंस का प्लेन 7 बजे मुंबई जाने वाला था । यात्री समय पर एअरपोर्ट पहुंच गए, परंतु प्लेन लेट था। आखिर यात्री नौ बजे प्लेन में बैठ गए, पर जहाज को उड़ङ्गने की इजाजत नहीं मिली। यात्री जब लॉबी में आए, तो वहां पूरी तरह अराजकता थी। किसी को कुछ पता नहीं था कि क्या करना है। यात्री एक काउंटर से दूसरे काउंटर भटकते रहे। टिकट शीट लेने में भी छीना झपटी हो रही थी। न होटल का प्रबंध, न बस का और न ही यह पता कि अगली उड़ान कब जाएगी। मेरा एक मित्र उस फ्लाइट पर था और वह आधी रात में किसी तरह कंपनी के गेस्ट हाउस पहुंचा। अगले दिन शाम तक उसको मुंबई की फ्लाइट मिली। उसने तय किया कि वह कभी भी इंडियन एअर लाइंस से यात्रा नहीं करेगा।

कोई शक नहीं है कि दस वर्ष में जेट एअरवेज देश की सर्वप्रथम एअरलाइंस बन गई है। यह कमाल है, उनमें काम करने वाले कर्मचारियों का। मैंने पता लगाने का प्रयत्न किया कि जेट की कार्यक्षमता और यात्रियों कोअधिकतर सुविधा पहुंचाने के प्रयास के पीछे क्या था?

जेट में कर्मचारियों में यह भावना भरी जाती है कि उनको अपनी कंपनी को शिखर पर पहुंचाना है। इसके लिए टीम वर्क पर अधिकतम जोर दिया जाता है और टीम नेता को पूरे अधिकार दिए जाते हैं। चूंकि मौके पर टीम लीडर ही उपस्थित होता है इसलिए उसको ही यह तय करना होता है कि इस संकट की घड़ी में क्या किया जाए। उसको किसी से पूछने की जरूरत नहीं होती। जब एअरपोर्ट पर यह सब हंगामा हो रहा था, तो जेट के उच्च अधिकारियों को कुछ पता नहीं था। जब सब ठीक हो गया, तो उनको अगले दिन सुबह बता दिया गया कि संकट था और उसको किस तरह से संभाला गया। प्रत्येक को शाबाशी मिली।

इंडियन एअरलाइंस में ऐसा कुछ नहीं है, प्रत्येक छोटी सी बात के लिए उच्च अधिकारियों से पूछा जाता है। उसकी आज्ञा का इंतजार किया जाता है। इससे निर्णय लेने में देर होती है। मौके पर उपस्थित न होने के कारण उन्हें पता ही नहीं होता कि मामला कितना गंभीर है। यात्रियों की परेशानियों को वे महसूस ही नहीं कर पाते। परिणाम यह होता है कि संगठन के प्रति लोगों का विश्वास कम हो जाता है। ऐसा ही उस रात हुआ, जिसका परिणाम यह हुआ कि जेट को यात्रियों का विश्वास प्राप्त हुआ और इंडियन एअर लाइंस को नहीं। आज के समय में सफलता अधिकार के कारण नहीं, बल्कि कार्य के कारण मिलती है। जो इसे समझ लेते हैं, सफलता के मार्ग पर बढ़ते रहते हैं।

अघिकतम कार्य क्षमता की ओर

लगभग कुछ माह पूर्व भारतीय योग संस्थान के राजोरी गार्डन केंद्र के वार्षिक कार्यक्रम में जाने का अवसर मिला। वहां जा कर पता लगा कि योगाभ्यास से किस प्रकार शक्तिशाली व्यक्तित्व का विकास होता है। यही नहीं, अधिकतर समस्याएं, जो आज के समय में कम आयु में ही व्यक्ति को घेर लेती हैं, दूर रखी जा सकती हैं। उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी रोग, मधुमेह, दमा मानसिक तनाव आदि अधिकतर समस्याओं को दूर रख कर एक स्वस्थ्य जीवन जिया जा सकता है। किस प्रकार यह संभव है? और क्या है योग साधना? ये दो प्रश्न मेरे जेहन में उभरे। दोनों का ही उत्तर मैंने खोजने का प्रयत्न किया है।

योग के दर्शन में न जा कर सामान्य ज्ञान के लिए योगाभ्यास व्यक्ति को यह सिखाता है कि शरीर व मन को किस प्रकार प्राकृतिक अवस्था में रखा जाए। अधिकतर समस्याओं का जन्म तभी होता है, जब हम अपने शरीर और मन को इस अवस्था से दूर ले जाते हैं कि दोनों ही उनको स्वीकार नहीं करते। देखा जाए, तो योग का आरंभ उस समय हुआ जब मनुष्य ने कृषि अवस्था में प्रवेश किया। लगभग ऽ००० वर्ष पहले भारत में जब नदियों के किनारे स्थायी निवास प्रारंभ हुए, तो कुछ व्यक्तियों ने प्राकृतिक नियमों तथा उससे संबंधी बातों की खोज प्रारंभ की। ये व्यक्ति, जो ऋषि-मुनि कहलाए, आत्म प्रयोगों के आधार पर अनेक समाधानों पर पहुंचे। इसके आधार पर इन्होंने अनेक नियमों और अभ्यासों को बनाया। व्यक्ति के स्वास्थ्य से संबंधित नियम व अभ्यास ही योग विज्ञान बना।

आखिर कैसे योगाभ्यास अधिकतर मानसिक और शारीरिक समस्याओं को दूर करता है। इसके कई कारण हैं। एक तो योगाभ्यास से शरीर की प्राकृतिक लोच बनी रहती है। अधिकतर समस्याएं, मुख्यतः जोड़ों की, शरीर में दृढ़ता के कारण पैदा होती है। यह इसी प्रकार है कि दरवाजा यदि खुलता रहे, तो सहज रहता है। परंतु अधिक समय प्रयोग न रहने पर जम जाता है।

दूसरे, यह शरीर के विभिन्न अंगों में तालमेल स्थापित करने का अभ्यास कराता है। इससे शरीर में अनुशासन आता है। और इच्छानुसार विभिन्न अंगों को नियंत्रित किया जा सकता है।

तीसरे, यह व्यक्ति में प्रत्येक प्रकार की क्षमता को बढ़ाता है। योग्याभ्यास से हडि्‌डयों में लचक मांसपेशियों में संतुलन, रक्त का सुचारु संचार और विभिन्न गं्रथियों के उचित स्राव के कारण तनाव रहित जीवन संभव होता है। इससे एकाग्रता बढ़ती है और व्यक्ति अधिक व अच्छा काम कर सकता है।

आज के जीवन में सफलता के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति औरों से एक कदम आगे रहे। यह तभी संभव है, जब वह योगाभ्यास से शारीरिक तथा मानसिक क्षमता को अधिकतम करे।

06 जनवरी 2012

आत्मसम्मान

उस समय मैं दिल्ली के एक कॉलेज में पढ़ाता था। एक दिन सुबह एक मित्र अपने यहां काम करने वाली माई के बेटे राज को लेकर आए। उसके नंबर बहुत अच्छे तो नहीं थे, परंतु वह आगे पढ़ना चाहता था। साथ ही उसको वित्तीय सहायता की भी आवश्यकता थी। लड़के की आवश्यकता और एक गरीब परिवार की सहायता के उद्‌देश्य से मैंने न केवल उस लड़के को बीए में दाखिला दिया, बल्कि उसके लिए आर्थिक सहायता का भी प्रबंध कर दिया। कुछ दिनों के बाद मुझे वह लड़का एक लड़की के साथ रेस्तरां में बैठा हुआ दिखा। तीन साल में वह पढ़ने में कम और अन्य बातों में अधिक समय व पैसा लगाने लगा था। उसने किसी तरह बीए तो पास कर लिया परंतु आज 30 साल बाद वह एक सरकारी दफ्तर में क्लर्क है।

कुछ ही समय बाद मैं टाइम्स ऑफ इंडिया की मैगजीन में संपादन करने लगा। एक दिन दफ्तर में एक लड़का मामूली से कपड़े पहने आया। वह एक सामान्य परिवार का था और दिल्ली के कॉलेज में पढ़ना चाहता था। उसकी भी वही समस्या थी। दाखिला और आर्थिक सहायता। परंतु राज और मानस में एक अंतर था। मानस स्कॉलरशिप और अनुदान के रूप में आर्थिक सहायता नहीं चाहता था। वह ट्‌यूशन करना चाहता था, जिससे वह जो भी धन प्राप्त करे, वह उसकी मेहनत से कमाया हुआ हो। मानस के लिए भी मैंने दाखिले और ट्‌यूशन की व्यवस्था कर दी। मानस ने सदैव स्वयं को संतुलित रखा। उसने कठिन मेहनत की और सिविल सर्विसेज में अच्छे अंक लाया। आज वह आईएएस है तथा दिल्ली में जॉइंट सेक्रेटरी है।

क्या कारण है कि दो लड़कों में से एक निम्न स्तर पर रह गया परंतु दूसरा सफलता की ऊंचाइयों को पार करता चला गया। दोनों में आत्मसम्मान का फर्क है। राज में आत्मसम्मान नहीं था, जबकि मानस में यह भरपूर था। राज ने पैसे को लापरवाही से गंवाया और मानस ने इसका प्रयोग अपनी स्किल्स को बेहतर करने में लगाया, यदि आप सफल व्यक्तियों केजीवन का अध्ययन करें, तो इस अंतर को अवश्य पहचान सकते हैं।

कैसे होते हैं आत्मसम्मानी? कई बातों से आप इसको पहचान सकते हैं। पहला, वे आशावादी होते हैं, कभी भी उत्तरदायित्व से नहीं भागते। गांधी जी का ही उदारहण लें। अधिकतर लोग मानते थे कि अंग्रेजी राज्य कभी समाप्त नहीं हो सकता। गांधी जी ने विश्वास दिलाया कि अंग्रेजों को भारत छोड़ना होगा। उन्होंने अपना पूरा उत्तरदायित्व भी निभाया। जिन लोगों में आत्मसम्मान की कमी होती है। वे दूसरों की आलोचना ही करते रहते हैं और बताते रहते हैं कि काम क्यों नहीं हो पा रहा है। वे काम के बजाए गप्पबाजी में ज्यादा समय गुजारते हैं।

दूसरे, मानस जैसे व्यक्तियों में आत्मविश्वास होता है और कुछ कर गुजरने का जुनून। वे दूसरे व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील होते हैं और उनके आत्मसम्मान की इज्जत करते हैं। राज जैसे व्यक्ति बातें ज्यादा करते हैं और अपने बारे में ही बोलते रहते हैं। दूसरों को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ते। इससे उनकी दूसरों से अनबन बनी रहती है और कोई उनका विश्वास नहीं करता। मानस जैसे व्यक्तियों को लोग आदर से देखते हैं।

समय है आत्मसम्मानी बनने का।

आपसी रिश्ते

लगभग 25 साल पहले मेरे कैरियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया। कॉलेज की आराम की नौकरी छोड़कर एक नई पत्रिका कैरियर कम्पटीशन टाइम्स के संपादन का ऑफर मिला। निमंत्रण भारत के एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र समूह से था, परंतु मुझे डर था कि मैं इस महत्वपूर्ण कार्य को सफलता से कर पाऊंगा या नहीं। मार्ग निर्देशन के लिए मैं अपने एक सम्मानित गुरु केपास गया, वे जेएनयू में प्रोफेसर थे,। उनको सब बातें बताईं और पूछा कि क्या निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा, 'अवश्य जाओ, क्योंकि इस प्रकार का अवसर जीवन में एक बार ही मिलता है, परंतु याद रखना सफल व्यक्ति के मित्र कम शत्रु अधिक बनते हैं। सबसे अधिक खतरा अपनों से होता है, संभलकर चलना, तो कोई समस्या नहीं आएगी।'

मैंने घर आकर उनकी राय पर सोचा। संक्षेप में उन्होंने अंतरव्यक्तिगत संबंधों पर महत्व देने को कहा था। काफी सोचने के बाद मैंने तय किया कि हां करने से पहले मैं पत्रिका में काम करने वाले व्यक्तियों से मिल लूं। समय लेकर मैं पत्रिका के दफ्तर गया। सब लोगों ने जोरदार स्वागत किया। मैंने केवल एक प्रश्न पूछा, 'आपमें से किसी का हक तो नहीं मारा जाएगा? यदि आपमें से कोई भी इस पद का दावेदार है, तो मैं नहीं आऊंगा।' सबने कहा कि उनमें से कोई भी इस पद की अपेक्षा नहीं करता है। मैंने जॉइन कर लिया है। नौ वर्षों में मुझे सबका पूर्ण सहयोग मिला है और कभी कोई समस्या नहीं आई।

यह सारी समझ संवेदनशील होने की है। यह संवेदनशीलता अधिक महत्वपूर्ण बन जाती है, जब आप सफलता की उच्चतम सीढ़ी पर होते हैं और अधिक महत्वपूर्ण बन जाती है। जैसे-जैसे आप सफल होते जाते हैं, वैसे-वैसे आपके पास अधिक अधिकार या पैसा या दोनों ही आते जाते हैं। आपके मित्र तथा संबंधी आपसे मदद की आशा करने लगते हैं। ऐसा प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि या तो आप पैसे से उनकी मदद करें या उनको उनके कामों में मदद पहुंचाएं। ऐसा उम्मीद करना स्वाभाविक है, क्योंकि यह मानवीय स्वभाव है कि हम दूसरे से मदद की अपेक्षा करें। मदद करने में कोई हानि भी नहीं है, यदि इससे अन्य व्यक्तियों को नुकसान नहीं पहुंचता। यहीं पर संवेदनशीलता की आवश्यकता आती है।

हर एक व्यक्ति का हर काम नहीं कराया जा सकता है और न ही कराना चाहिए। यहां पर विवेक से काम लेना होता है। देखना होता है कि कौन सा काम कराना चाहिए और कौन सा नहीं। जो काम हो सकता है, उसको करने से आपसी संबंध अच्छे होते हैं, परंतु समस्या तब आती है, जब काम कराना संभव नहीं होता है। उस समय यदि आप संभलकर नहीं चले, तो व्यक्तिगत संबंध खराब हो जाते हैं, जो आपके पास काम लेकर आया है वह बहुत आशा रखता है और मानकर चलता है कि आप पर उसका हक है। यदि आप टका सा जवाब दे देते हैं, तो वह अपमानित अनुभव करता है। अच्छा हो कि आप उसको कारण बताएं और समझाएं कि आप उसकी पूरी मदद करना चाहते हैं, परंतु उसका काम क्यों नहीं हो सकता। यदि उसको यकीन हो जाएगा कि आपके प्रयत्न के बावजूद काम नहीं हुआ, तो उसको कोई गिला नहीं होगा और आपके आपसी संबंध बरकरार रहेंगे।

29 दिसंबर 2011

टोने टोटके - कुछ उपाय - 15 (Tonae Totke - Some Tips - 15)

रामचरित मानस द्वारा मंत्रोपचार करने हेतु निम्न चौपाइयों का पाठ करें।

सहज स्वरुप दर्शन के लिए
भगत बछल प्रभु कृपा निधाना।
विस्ववास प्रगटे भगवाना॥

ज्ञान प्राप्ति के लिए
छिति जल पावक गगन समीरा।
पंच रचित अति अधम सरीरा ॥

भक्ति प्राप्त करने के लिए
भगत कल्पतरू प्रनत हित कृपासिंध सुख धाम।
सोई निज भगति मोहि प्रभु देहु दया करि राम॥

श्री हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए
सुमिरि पवन सुत पावन नामू।
अपने वश करि राखे रामू॥

मोक्ष प्राप्ति के लिए
सत्यसन्ध छोड़े सर लच्छा।
कालसर्प जनु चले सपच्छा॥

सीताराम जी के दर्शन के लिए
नील सरोरुह नील मनि, नील नीरधर स्याम।
लाजहिं तन सोभा निरखि कोटि कोटि सत काम॥
 
श्री रामचंद्र जी को वश में करने के लिए
केहरि कटि पट पीतधर सुषमा सील निधान।
देखि भानु कुल भूषनहि विसरा सखिन्ह अपान॥

ईश्वर से अपराध क्षमा करने के लिए
अनुचित बहुत कहेंऊं अग्याता।
छमहु क्षमा मंदिर दोउ माता॥

विरक्ति के लिए
भरत चरत करि नेमु तुलसी जे सदर सुनहिं।
सीय राम पद प्रेमु आवसि कोई भव रस विरति॥

भगत्स्मारणा करते हुए आराम से मरने के लिए
रामचरन पद प्रीति करि बाली कीन्ह तनु त्याग।
सुमन माल जिमि कंठ ते गिरत न जानइ नाग॥

प्रेम बढाने के लिए
सव नर करहिं परस्पर प्रीति।
चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीति॥
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काल की रक्षा के लिए
मोरे हित हरि सम नहिं कोऊ।
एहिं अवसर सहाय सोई होऊ॥
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निंदा से निवृत्ति के लिए
राम कृपा अबरेव सुधारी।
बिबुध धरि भइ गुनद गोहारी॥

विद्या प्राप्ति के लिए 
गुरू गृह पढ़न गये रघुराई।
अल्प काल विद्या सब आई॥

उत्सव होने के लिए
सिय रघुवीर विवाहु जे सप्रेम गावहिं सुनहिं ।
तिन्ह कहुं सदा उछाहु मंगलायतम राम जसु॥

कन्या को मनोवांछित वर के लिए
जै जै जै गिरिराज किशोरी।
जय महेश मुख चन्द्र चकोरी॥

यात्रा की सफलता के लिए
प्रविसि नगर कीजे सब काजा।
ह्रदय राखि कौसल पुर राजा॥

परीक्षा में पास होने के लिए 
जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी ।
कवि उर अजिर नवावहिं बानी ॥
मोरि सुधारिहि सो सब भाँती ।
जासुकृपा नहिं कृपा अघाती ॥

आकर्षण के लिए 
जेहि के जेहिं पर सत्य सनेहू ।
सो तेहि मिलइ न कछु सन्देहू॥

स्नान से पुण्य लाभ के लिये
राम कृपा अवरेव सुधारी।
बिबुध धारि भइ गुनद गोहारी॥

खोई हुई वस्तु पुन: प्राप्त करने के लिये
गई बहोर गरीब नेबाजू।
सरल सबल साहिब रघुराजू॥

जीविका प्राप्ति के लिये
विस्व भरन पोषन कर जोई।
ताकर नाम भरत अस होई॥

दरिद्रता दूर करने के लिये
अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के ।
कामद धन दारिद द्वारिके॥

लक्ष्मी प्राप्ति करने के लिये
जिमि सरिता सागद महुं नाहीं।
जघपि ताहि कामना नाहीं॥
तिमि सुख सम्पति विनहिं बोलाएं।
धरमसील पहिं जाहिं सुभाएं॥

पुत्र प्राप्ति के लिए
प्रेम मगन कौसल्या निसिदिन जात न जान।
सुत सनेह बस माता बाल चरित कर गान॥

सम्पत्ति प्राप्ति के लिये
जे सकाम न सुनहिं जे गावहिं।
सुख सम्पत्ति नाना विधि पावहिं॥

ऋद्धि सिद्धि प्राप्त करने के लिये
साधक नाम जपहिं लय लाएं।
होंहि सिद्ध अनि मादक पाएं॥

सर्वसुख प्राप्त करने के लिए
सुनहिं बिमुक्त विरत अरू विषई।
चहहिं भगति गति संपत्ति नई॥

मनोरथ सिद्धि के लिये

भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर और नारि।
तिन कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि॥

कुशल क्षेम के लिये
भुवन चारिदस भरा उछाहू।
जनकसुता रघुवीर विग्प्राहू॥

मुकदमा जीतने के लिये
पवन तनय बल पवन समाना।
बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना॥

शत्रु के सामने जाना हो उस समय के लिये
कर सारंग साजि कटि माथा।
अरि दल दलन चले रघुनाथा॥

शत्रु को मित्र बनाने के लिये
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई।
गोपद सिंधु प्रबल सितलाई॥

शत्रुता नाश के लिये
बयरू न कर काहू सन कोई।
राम प्रताप विषमता खोई॥

शास्त्रार्थ में विजय पाने के लिये
तेहि अवसर सुनि सिव धनु भंगा।
आयउ भृगुकुल कमल पतंगा॥

विवाह के लिये
तब जनक पाइ बसिष्ठ आयसु व्याह साज सवांरिके।
माडवी श्रुतकीरति उरमिला कुंअरि लई हवनाति के॥

कैसी हो आपकी ड्रीम पार्टनर

अच्छे पार्टनर की तलाश सभी को रहती है, लेकिन अच्छाई के पैमाने सबके अलग-अलग होते हैं। फिर भी कुछ चीजें तो ऐसी हैं ही, जिन्हें हर पुरुष अपनी पाटर्नर में देखना चाहता है। आइए देखें क्या हैं वे चीजें:
किसी महिला या पुरुष को अपने पार्टनर में किन गुणों की तलाश होती है, अगर यह सवाल अलग-अलग लोगों से पूछा जाए तो उनके जवाब एक हो ही नहीं सकते। कई लोग शारीरिक सुंदरता को महत्व देते हैं तो कुछ लोग मन की खूबसूरती के दीवाने होते हैं। कुछ लोग इस सवाल का वह जवाब भी देंगे, जो आपके जहन में है। अलग-अलग लोगों के मन में अपनी ड्रीम गर्ल या सपनों के शहजादे की अलग-अलग तस्वीर होती है, फिर भी महिलाओं के कुछ ऐसे गुण हैं, जिनकी चाहत ज्यादातर पुरुषों को होती है। आइए इनकी चर्चा करते हैं।

टॉल वुमन
अगर कोई महिला अन्य महिलओं की तुलना में लंबी है, उसका ड्रेसिंग सेंस गजब का है, वह नियमित एक्सरसाइज करती है और खुद पर उसका पूरा होल्ड है, तो वह निश्चित रूप से पुरुषों को अपनी ओर आकर्षित करेगी।

बोल्ड एंड ब्यूटिफुल
पुरुष यह अच्छी तरह जानते हैं कि महिलाएं भावुक होती हैं। पता नहीं, वे किस बात पर हर्ट हो जाएं और उनकी आंखों से आंसुओं की धारा बहने लगे। पति या प्रेमी इस बात का पूरा ख्याल तो रखते हैं कि उनकी किसी बात से उनकी वाइफ या गर्लफ्रेंड को ठेस न पहुंचे, लेकिन उनके मन के किसी कोने में बोल्ड और ब्यूटिफुल वुमन की इमेज भी होती है, जो विपरीत माहौल में उनके कंधे से कंधा मिलाकर चल सके।

सॉफ्टवेयर सैवी
ज्यादातर महिलाएं मजबूत कद-काठी वाले पुरुषों को पसंद करती है, जबकि पुरुषों के मन में नरम स्वभाव की महिलाएं जल्दी घर बना लेती हैं। अगर वह महिला कंप्यूटर फ्रेंडली है, तो फिर तो क्या कहने। अगर कोई महिला कंप्यूटर के नेटवर्क, सिस्टम और कनेक्शन से अच्छी तरह परिचित है, तो इससे उसकी स्मार्टनेस में चार चांद लग जाते हैं।

स्पेशल मोमेंट्स
महिलाओं या पुरुषों को ऐसे हमसफर की तलाश होती है, जो जिंदगी में खास लम्हों को याद रख सके। सभी लोग चाहते हैं कि मैरिज एनिवर्सरी या बर्थडे पर सबसे पहले वह ही उन्हें विश करें, जो उनकी लाइफ में सबसे स्पेशल हैं। इसके अलावा खास मौकों पर ड्रेस पहनने का आपका सेंस भी काफी महत्वपूर्ण है।

फ्रेश रिलेशनशिप
परफ्यूम और बॉडी लोशन तो सभी पसंद करते हैं, लेकिन संडे की सुबह सोकर उठने पर बेड टी के साथ सुगंधित शैंपू से धुले उनके बालों की खुशबू आपका स्वागत करे, तो समझ लीजिए आपके रिश्तों की ताजगी अभी बरकरार है।

डिफरेंट नेचर
जिस तरह पांचों उंगलियां एक सी नहीं होतीं, उसी तरह सभी पुरुषों और महिलाओं के व्यवहार में कुछ न कुछ अंतर होता है। कुछ लोग केवल फिजिकल फिटनेस और खूबसूरती को महत्व देते हैं, तो कुछ लोगों को कामकाजी और तेजतर्रार महिलाएं पसंद आती हैं।

टेक हेल्प
ज्यादातर पुरुषों को स्मार्ट लेडीज पसंद आती हैं, लेकिन उन्हें यह भी अच्छा लगता है कि कभी-कभी उनकी गर्लफ्रेंड उनकी मदद मांगे या कहे कि यह काम आपके बगैर तो हो ही नहीं सकता। इससे उन्हें पता चलता है कि जिसे वे स्पेशल मान रहे हैं, उसकी जिंदगी में उनके लिए खास जगह है।

विस्पर मोर
पुरुष चाहते हैं कि उनकी ड्रीम गर्ल उनके कान में धीरे से कुछ कहे। दरअसल, इस तरह उनकी गर्म सांसों की हल्की महक और प्यार भरी मीठी बातें पुरुषों के अंदर सेंसेशन पैदा करती हैं।

पेट नेम
पुरुषों की इच्छा होती है कि उनकी ड्रीम गर्ल उनका कोई पेट नेम रखें। हालांकि उनकी इच्छा यह भी होती है कि यह काम उनकी मर्जी से किया जाए। इससे उन्हें प्यार की गहराई का अहसास होगा।

होल्ड हैंड्स
ज्यादातर पुरुषों को ऐसी महिलाएं पसंद आती हैं, जिनमें पब्लिक प्लेस पर उनका हाथ थामकर चलने की हिम्मत हो। ऐसा करके पुरुषों को लगता है कि उनकी ड्रीम गर्ल का नेचर उनके प्रति पजेसिव है। पुरुषों की चाहत होती है कि उनकी पार्टनर उनके साथ हंसी-मजाक की बातें करें, साथ पिक्चर देखे और रोमांस करे।

पावरफुल लव स्टोरीज

प्यार वो जज्बा है, जो कभी भी किसी को भी हो सकता है। बात चाहे सिलेब्रिटी की हो, पावरफुल लोगों की हो या फिर आम आदमी की, प्यार की हिलोरें सबके दिल में एक जैसे ही उछाल मारती हैं। यही वजह है कि वर्ल्ड में ऐसे तमाम उदाहरण हैं, कामयाबी के शिखर पर बैठे लोगों ने इश्क की पींगें बढ़ाईं, लेकिन ऐसे लोगों की इश्क की कहानियों को लोग न केवल दिलचस्पी से सुनते हैं, बल्कि कई बार इन कहानियों में गॉसिप्स का मसालेदार तड़का भी लगाया जा सकता है। हाल ही में निकोलस सरकोजी और उनकी गर्लफ्रेंड (अब पत्नी बन चुकी हैं) के बारे में काफी कुछ कहा और लिखा गया है। मीडिया की सुर्खियों में रहे फ्रांसीसी राष्ट्रपति के इस रोमांस के बहाने वर्ल्ड के कुछ और पावरफुल लोगों के रोमांस की बात भी ध्यान में आना स्वाभाविक है। ऐसे ही कुछ और पावरफुल लव स्टोरीज की चर्चा करते हैं।

राजीव का लव ऐट र्फस्ट साइट
अगर आपने कभी जवाहर लाल नेहरू की ऑटोबायोग्राफी पढ़ी हो, तो आपको पता होगा कि इस भरे-पूरे ग्रंथ में उन्होंने कमला नेहरू के साथ अपनी अरेंज्ड मैरिज के बारे में महज कुछ लाइनें लिखी हैं। इस मुद्दे पर उन्होंने सिर्फ शादी की डेट, वेन्यू और पत्नी के नाम आदि जैसी सूचनाएं ही पाठकों के सामने रखी हैं। अपनी अरेंज्ड मैरिज में शायद उन्हें कुछ ऐसा रोमांटिक नजर नहीं आया, जिसे दर्शकों के सामने रखना वह जरूरी समझते। अगर उनकी पुत्री और पोतों ने भी उनके रास्ते को ही चुना होता, तो दुनिया वाले तमाम शानदार लव स्टोरीज से महरूम रह जाते। राजीव गांधी की बात करें तो उनका प्यार लव एट र्फस्ट साइट का एक बेहतरीन नमूना था। कैंब्रिज के कैंपस में वह दिन आम दिनों की तरह ही था। राजीव पॉलिटिक्स पर होने वाले एक डिस्कशन में हिस्सा ले रहे थे। जैसे ही सोनिया वहां पहुंचीं, राजीव और सोनिया दोनों को ही कुछ-कुछ हो गया।

जेएफके का प्यार
जॉन एफ कैनेडी की गिनती अमेरिका के सबसे ज्यादा ग्लैमरस राष्ट्रपतियों में की जाती है। मर्लिन मुनरो के साथ उनके रोमांस की खबरें लोगों के बीच बेहद चर्चा का विषय बनीं। कैनेडी की एक बर्थडे पर ईवनिंग गाउन में लिपटी ग्लैमरस मर्लिन ने उन्हें विश करने के लिए हैपी बर्थ डे... गाया। गाने को सुनकर कैनेडी अपना दिल मर्लिन को दे बैठे और उसके बाद जब उन्होंने इतनी अच्छी विशेज के लिए मर्लिन का शुक्रिया अदा किया, तो उस शुक्रिया में वहां मौजूद लोगों को प्यार की मिठास नजर आई।

रश्दी का रोमांस
सलमान रश्दी की लेटेस्ट बुक 'फरी' के बारे में रिव्यूअर कहते हैं कि इसका मेन हीरो सलमान की निजी जिंदगी का चित्र पेश करता है। बुक में एक अंग्रेज लड़की के साथ मलिक सोलंका की शादी दिखाई गई है और फिर यह दिखाया गया है कि कैसे वह उस लड़की को छोड़कर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने अमेरिका चला जाता है। गौर से देखा जाए तो यह सब सलमान रश्दी की जिंदगी की ही कहानी नजर आती है। जब से ईरान के अयातुल्ला ने रश्दी को जान से मार डालने का फतवा जारी किया, तब से रश्दी का कद एक हीरो की तरह हो गया है। उनकी कहानी को लव इन द फास्ट लेन कहा जा सकता है। एक बड़े एज गैप के बावजूद सलमान रश्दी पद्मालक्ष्मी से रोमांस करते नजर आए और उसके बाद अब चर्चा इस बात की है कि सलमान साहब रिया सेन के साथ इश्क फरमा रहे हैं।

डायना की कहानी
इश्क और रोमांस की बात चलने पर ऐसा हो ही नहीं सकता कि प्रिंसेस डायना का नाम न आए। ऐसी बहुत कम महिलाएं हैं, जिन्हें टाइम मैगजीन ने अपने कवर पर छापा है, लेकिन प्रिंसेस डायना टाइम मैगजीन के कवर पर सबसे ज्यादा छपने वाली महिला हैं। प्रिंस चार्ल्स के साथ उनकी लव स्टोरी की चर्चा की जाए तो उसमें एक सिजलिंग रोमांस के सभी एलिमेंट नजर आ जाएंगे। इस रोमांटिक कहानी में सब कुछ है, एक हीरो, एक हीरोइन, एक विलेन।