08 जुलाई 2011
अंक ज्योतिष से जाने सफलतादायक दिशा
दिशा का तो इतना महत्व है कि सोने की दिशा भी यदि उपयुक्त नहीं हो, तो नींद भी नहीं आती है, फिर भाग्योदय एवं सफलता बिना उपयुक्त दिशा के कैसे प्राप्त होगी, आप स्वयं ही समझ सकते हैं।
सफलतादायक दिशा का निर्धारण मूलांक से किया जा सकता है। प्रत्येक व्यक्ति के जन्मदिन की तारीख उसका मूलांक होता है जैसे; किसी व्यक्ति का जन्म 6 फरवरी को हुआ है, तो उसका मूलांक 6 होगा। हम सभी 1 से 9 तक के भीतर ही जन्म लेते हैं और इन अंकों का संबंध नवग्रहों से है।
मूलांक 1 : आपका जन्म दिनाक 1, 10, 19 अथवा 28 है, तो आपकी सफलता की दिशा दक्षिण-पूर्व होगी। स्वास्थ्य की दिशा पूर्व होगी तथा व्यक्तिगत विकास की दिशा उत्तर होगी।
मूलांक 2 : 2, 11, 20 तथा 29 जन्म तारीख वाले लोगों की सफलता की दिशा उत्तर-पूर्व, स्वास्थ्य दिशा पश्चिम, पारिवारिक सुख-शांति की दिशा उत्तर-पश्चिम तथा व्यक्तिगत विकास की दिशा दक्षिण-पश्चिम होगी।
मूलांक 3 : 3, 12, 21 और 30 जन्म तारीख वाले जातकों की सफलता की दिशा दक्षिण, स्वास्थ्य दिशा उत्तर। पारिवारिक सुख-शांति की दिशा दक्षिण-पूर्व होगी।
मूलांक 4 : 4, 13, 22 तथा 31 जन्म तारीख वाले जातकों की सफलता की दिशा उत्तर, स्वास्थ्य दिशा दक्षिण, पारिवारिक सुख-शांति की दिशा पूर्व तथा व्यक्तिगत विकास की दिशा दक्षिण-पूर्व होगी।
मूलांक 5 : 5, 14 और 23 जन्म तारीख वाले जातकों की सफलता की दिशा उत्तर-पूर्व अथवा दक्षिण-पश्चिम, स्वास्थ्य दिशा पश्चिम या उत्तर पश्चिम, पारिवारिक सुख-शांति की दिशा उत्तर-पश्चिम या पश्चिम तथा व्यक्तिगत विकास की दिशा दक्षिण-पश्चिम या उत्तर-पूर्व होगी।
मूलांक 6 : 6, 15, 24 जन्म तारीख वाले जातकों की सफलता की दिशा पश्चिम, स्वास्थ्य दिशा उत्तर-पूर्व, पारिवारिक सुख-शांति की दिशा दखिन-पश्चिम तथा व्यक्तिगत विकास की दिशा दक्षिण-पश्चिम अथवा उत्तर-पूर्व होगी।
मूलांक 7 : 7, 16, 25 जन्म तारीख वाले जातकों की सफलता की दिशा उत्तर-पश्चिम, स्वास्थ्य, दिशा दक्षिण-पश्चिम, पारिवारिक सुख-शांति की दिशा उत्तर-पूर्व तथा व्यक्तिगत विकास की दिशा पश्चिम होगी।
मूलांक 8 : 8, 17, 26 जन्म तारीख वाले जातकों की सफलता की दिशा दक्षिण-पश्चिम, स्वास्थ्य दिशा उत्तर-पश्चिम, पारिवारिक सुख-शांति की दिशा पश्चिम तथा व्यक्तिगत विकास की दिशा उत्तर-पूर्व होगी।
मूलांक 9 : 9, 18, 27 जन्म तारीख वाले जातकों की सफलता की दिशा पूर्व, स्वास्थ्य दिशा दक्धीन-पूर्व, पारिवारिक सुख-शांति की दिशा उत्तर तथा व्यक्तिगत विकास की दिशा काशीं होगी।
Posted by Udit bhargava at 7/08/2011 04:51:00 pm 3 comments
टोने टोटके - कुछ उपाय -12 (Tonae Totke - Some Tips - 12)
यदि परिश्रम के बावजूद कारोबार में उन्नति न हो रही हो तो शभ चंद्र के दिन गरु पष्य योग में प्रातः काल हरे रंग के कपड़े की एक छोटी थैली तैयार करें। श्री गणेश जी के चित्र के समक्ष संकट नाशक गणेश स्तोत्र का पाठ कर इस थैली में 7 मूंग, 10 ग्राम साबुत धनियां, एक पंचमखी रुद्राक्ष, चांदी का 1 रुपये का एक सिक्का, 2 सुपारियां और हल्दी की 2 गांठें रखकर गणेश जी को शद्घ घी के मोदक का भोग लगाएं। फिर यह थैली तिजोरी या कैश बॉक्स में रख दें। यह उपाय निष्ठापूर्वक करें, लाभ होगा।
* जिस समय कन्या के परिजन वर-पक्ष से विवाह वार्तालाप के लिए जा रहे हों, उस समय कन्या अपने बालों को खोले रखे तथा उनके लौट कर आने तक न जूडा बनाए न चोटी। कन्या को चाहिए कि अपने परिजनों को विवाह वार्ता के लिए प्रस्थान करते समय प्रसन्नतापूर्वक मिष्ठान विदा करे।
* शीघ्र विवाह के लिए कन्याओं को १६ सोमवार का व्रत तथा प्रत्येक सोमवार को शिव मंदिर में जाकर जलाभिषेक करना चाहिए और शिवजी से शीघ्र विवाह की प्रार्थना करनी चाहिए।
* विवाह के इच्छक लड़के या लडकियां शक्रवार को भगवान शंकर का जलाभिषेक करें तथा शिवलिंग पर ॐ नमः शिवाय बोलते हुए 108 पष्प चढ़ाएं। ऐसा 7 शक्रवार करें, विवाह शीघ्र होगा।
* गरुवार को लक्ष्मीनारायण मंदिर में कलगी और वेसन के 5 लड्डू चढ़ाएं और भगवान से शीघ्र विवाह की प्रार्थना करें।
* वर या कन्याएं पीपल को 43 दिन तक लगातार जल चढ़ाएं, शादी में आने वाली बाधाएं दूर होंगी। यह क्रिया रविवार को न करें। कन्याएं मासिकधर्म के समय जल न चढ़ाएं।
* यदि कोई लडका अथवा लडकी अपने प्रेमी के लिए दीवानी हो और उसे उस दीवानापन से मक्त कराना हो तो लोहे के एक टुकडे को तीन बार आग में गर्म करके तीन बार पानी से बुझाएं और बुझाते समय हर बार यह कहते जाएं कि जिस प्रकार यह गर्म लोहा पानी में शीतल होता है इसके मन को भी शीतल कर दें। हर बार पानी लडके या लडकी के वक्षस्थल पर भी छिड कें। यह क्रिया 3 दिन तक करें, जातक और जातका अपने-अपने प्रेमी को भूल जाएंगे।
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Posted by Udit bhargava at 7/08/2011 03:21:00 pm 0 comments
07 जुलाई 2011
टोने टोटके - कुछ उपाय - 11 (Tonae Totke - Some Tips - 11)
राहु : यदि राहु पूर्णतः अशुभ फलकारी हो, उसके फलस्वरूप लोगों से शत्रुता चल रही हो, घर में हर समय लड़ाई झगड़े होते रहते हों, मन इधर-उधर भटकता रहता हो और मानसिक संतुलन बिगड़ गया हो तो निम्नलिखित उपाय करें। प्रातः काल जल्दी उठकर लाल रंग की मसूर की दाल या कुछ सिक्के सफाई कर्मचारी (मेहतर) को दान करें। अपने पैतृक मकान में प्रवेश करते समय चौखट पर चांदी का टुकड़ा रखें। यदि राहु द्वादश में हो तो जातक अपने साथ होने वाले लड़ाई-झगड़े, मुकदमे आदि से परेशान रहता है। इन सबसे बचाव के लिए जातक को खाना अपनी रसोई में बैठकर खाना चाहिए। पत्नी से कभी झगड़ा नहीं करना चाहिए और किसी को भयभीत नहीं करना ाहिए। साथ ही अपने शयन कक्ष में हनुमान जी का चित्र लगाकर रखना चाहिए। यदि कुंडली में राहु की स्थिति अशुभ हो, तो नदी में नारियल प्रवाहित करना चाहिए। यदि जातक टी. बी. से ग्रस्त हो और औषधियों से कोई लाभ नहीं हो रहा हो, तो उसे जौ को गाय के मूत्र से धोकर लाल कपड़े में बांधकर अपने साथ रखना चाहिए। |
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ग्रहों की धूप : सूर्य : लोहबान, चंदन, जाफरान (केसर)। मंगल : लाल मिर्च, अफीम, लौंग, गुग्गुल। बुध : लोहबान, गुग्गुल, बादाम, चमेली की जड़। गुरु : केसर, नागरमोथा, श्वेत चंदन, लाल चंदन। शुक्र : लोहबान। शनि : काली मिर्च, लाख, गुग्गुल। चंद्र : कपूर, लोहबान। |
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किराएदार से मकान खाली कराने हेतु : पुष्य नक्षत्र में सांप की रीढ़ की हड्डी लाकर उसे विद्वेषण मंत्र से अभिमंत्रित कर लें और फिर उसका पाउडर बनाकर जो कमरा किराए पर दे रखा हो उसमें बिखेर दें। किराएदार को रात में घर में सांप ही सांप दिखाई देंगे और उनकी आवाजें सुनाई देंगी और वह डरकर मकान खाली करके भाग जाएगा। नजर उतारने के टोटके नमक, राई, लहसुन, प्याज के छिलके, बाल और सूखी हुई मिर्च को आग के एक अंगारे पर डाल दें और उसे नजर दोष से प्रभावित जातक के सिर पर से सात बार उतार लें। जलने पर यदि बदबू आए तो समझें कि जातक नजर दोष से मुक्त है। यदि बदूब नहीं आए तो समझें कि वह नजरदोष से प्रभावित है। हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान जी के कंधों से सिंदूर लेकर अपने माथे पर टीका करें। गेहूं के आटे का दीपक बनाएं और उसमें काले धागे की बत्ती डालकर उसे जलाएं और उसके पास दो सूखी लाल मिर्च रखें। फिर उसे बुरी नजर से प्रभावित व्यक्ति के ऊपर से सात बार उतारें। नजर से प्रभावित व्यक्ति के सिर पर से फिटकरी उतार कर उसे बाएं हाथ से कूटकर उसका चूर्ण बना लें और उसे किसी कुएं या तालाब में फेंक दें। छोटे बच्चे को किसी स्त्री की नजर लगी हो तो उसे घर बुलाकर हाथ फिरा लें तथा बच्चे को प्यार करते हुए आशीर्वाद दे दें। |
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Posted by Udit bhargava at 7/07/2011 08:36:00 am 1 comments
टोने टोटके - कुछ उपाय - 10 (Tonae Totke - Some Tips - 10)
| नजर कामण शांतिकरण |
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मंत्र - क्क नमो सत्नाम आदेश गुरु को क्क नमो नजर जहां पर पीर न जानी बोले छल सों अमृत बानी कहो नजर कहां ते आई यहां की ढेरि तोहि कौंन बताई। कौन जात तेरी को ढाम, किसी बेटी कहो तेरो नाम। कहां से उड़ी कहां को जादा। अब ही बस करले तेरी माया। मेरी बात सुनो चित्त लगाय जैसे होय सुनाऊं आय। तेलन तमोलन चुहड़ी चमारी कायथनी खतरानी कुम्हारी महतरानी राजा रानी। जाको दोष ताहि सिर पर पड़े। हनुमंतवीर नजर से रक्षा करे। मेरी भक्ति गुरु की शक्तिफुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।
विन बाधाओं से मुक्ति हेतु रामायण की कुछ विशेष चौपाइयों का पाठ करना चाहिए, जो इस प्रकार हैं।
| नजर दोष से मुक्ति के लिए: |
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| भूत भगाने के लिए: |
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| कठिन क्लेश से मुक्ति के लिए: |
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| दरिद्रता दूर करने के लिए: |
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| शीघ्र विवाह के लिए: |
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साधना में रक्षा मंत्र चारों ओर खींचना जिसे लक्ष्मण रेखा कहा जाता है।
माममिरक्षय रघुकुल नायक। घृत वर चाप रुचिर कर सायक॥
| मानसिक पीड़ा दूर करने करे लिए: |
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| अकाल मृत्यु बचाव के लिए: |
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| कन्या के विवाह हेतु: |
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| विचार शुद्धि के लिए: |
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| विविध रोगों से रक्षा के लिए: |
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Posted by Udit bhargava at 7/07/2011 07:56:00 am 0 comments
30 जून 2011
बुरी आदतों को संकल्प के द्वारा संयम में बाँध लो
तुम आदतों को छोड़ना चाहते हो, क्योंकि उनसे तुम्हें कष्ट होता है, वे तुम्हें सीमित करती हैं। वासनाओं का स्वभाव है, तुम्हें विचलित करना, तुम्हें बाँध देना और जीवन का स्वभाव है मुक्त होने की चाह। जीवन मुक्त रहना चाहता है। पर जब यह नहीं मालूम कि कैसे मुक्त हों, तब आत्मा-जन्मान्तरों तक मुक्ति की खोज में भटकती रहती है।
समय और स्थान को ध्यान में रखकर संकल्प करो। संकल्प समयबद्ध होना चाहिए। फिर तुम्हारा व्यवहार भी अच्छा होगा और तुम पथ से विचलित होने से भी बच जाओगे। इसलिए समय और स्थान का ध्यान रखकर संकल्प करो।
उदहारण के लिये किसी को सिगरेट पीने की आदत है और वह कहता है, 'मैं सिगरेट पीना छोड़ दूंगा।' पर वह सफल नहीं होता। ऐसे लोग निर्धारति समय, जैसे तीन महीने या 90 दिनों के लिये संकल्प ले सकते हैं। अगर किसी को गाली देने की आदत है, तो वह 10 दिनों तक बुरे शब्दों का प्रयोग नहीं करने का संकल्प करें। जीवन भर के लिये संकल्प मत करो, क्योंकि तुम उसे निभा नहीं पाओगे। यदि कोई संकल्प बीच में टूट भी जाए, तो चिंता मत करो। फिर से शुरू करो। धीरे-धीरे समय की सीमा बढ़ाते जाओ, जब तक वही तुम्हारा स्वभाव ना बन जाए। यही 'संयम' है। हर एक में कुछ संयम होता ही है। जब मन व्यर्थ की चिंताओं में उलझा रहता है, तब दो बातें होती हैं। पहली, तुम्हारी पुरानी आदतें वापस आ जाती है और तुम निरुत्साहित हो जाते हो। तुम अपने को दोषी ठहराते हो और सोचते हो कि तुम्हारा कोई विकास नहीं हुआ।
दूसरी ओर तुम इसे संयम अपनाने का एक नया अवसर मानकर प्रसन्न हो सकते हो। संयम के बिना जीवन कभी सुखी और रोग-मुक्त नहीं हो सकता। उदहारण के लिए, तुम्हें पता है कि एक साथ तीन आइसक्रीम या प्रतिदिन आइसक्रीम खाना उचित नहीं है। ऐसा किया तो बीमार पड़ जाओगे।
जब जीवन में उत्साह और रस का अभाव है, तब आदतें तुम्हें अवरूद्ध कर देती हैं। जब जीवन को एक दिशा मिल जाती है, तब 'संयम' के द्वारा तुम आदतों से ऊपर उठ जाते हो। जो भी आदतें तुम्हें परेशान करती हैं, उन्हें संकल्प के द्वारा संयम में बाँध लो।
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Posted by Udit bhargava at 6/30/2011 09:36:00 pm 0 comments
समूल विनाश की जड़ है क्रोध
कौन चाहता है कि मैं क्रोध करूं, लेकिन फिर भी क्रोधित होता है। कौन चाहता कि मैं लालची कहलाऊँ, लेकिन फिर भी लालच करता है। इन सभी में सबसे हानिकारक है क्रोध। जब यह आता है, तो बुद्धि पर पर्दा पड़ जाता है। इंसान को होश नहीं रहता और वह पागल के समान हो जाता है। उसका परिणाम यह होता है कि जोश में आकर वह क्या बोल जाता है, उसे पता नहीं होता, पर जो उसे सुनता है, उसे सब कुछ याद रहता है और उसे वह कभी नहीं भूलता। सामने वाला, फिर भले ही उससे शत्रुता मौल ले, लेकिन क्रोध में वहां कुछ याद रहता है। बात अगर क्रोध तक ही हो, तो फिर भी चल जाए, लेकिन क्रोध की पत्नी 'हिंसा' भी तो उसका पूरा साथ निभाती है। इस क्रोध का परिवार बहुत बड़ा है। उसकी दो बेटियाँ है, 'निंदा' और 'चुगली', एक बहिन है 'जिद', इसका एक बड़ा भाई भी है, वह है 'अभिमान'। एक बेटा है 'द्वेष' और बहू है 'ईर्ष्या'। क्रोध जब आता है, तो कभी अकेले नहीं आता। अपने इस पूरे परिवार को लेकर साथ आता है और जब यह पूरा परिवार एक साथ आता है, तब फिर व्यक्ति का सारा व्यक्तित्व ही बदल जाता है। फिर उसे नाश की ओर जाने से कोई रोक नहीं सकता। इसलिए यदि इस संसार रूपी नदी से पार होना है, तो इस पूरे परिवार से बचकर रहना होगा और इस परिवार से बचने का आसान उपाय है, कि इस परिवार के मुखिया क्रोध से ही नाता हटा लिया जाए।
Labels: वैचारिक मंथन
Posted by Udit bhargava at 6/30/2011 09:22:00 pm 0 comments
दैनिक जीवन में मुहूर्त का महत्त्व
भारतीय जीवनशैली में काल की शुभता-अशुभता का बहुत महत्व है। किसी भी कार्य का आरम्भ शुभ समय में ही होना चाहिए, ऐसी हमारे देश के ज्योतिषीयों/विद्वानों तथा बुजुर्गों की मान्यता है। शुभ समय में किया गया कार्य शीघ्र एवं अनुकूल होता है। शुभ समय में शुरू किया गया कार्य आधा हो गया मानते हैं। शुभ समय की जानकारी के लिये ऋषियों ने मुहूर्त नामक पद्वति का आविष्कार किया, जो कि तत्कालीन गोचर (वर्तमान) ग्रहों पर आधारित होती है। मुहूर्त पद्वति ज्योतिष के संहिता भाग के अंतर्गत आती है, जो पूर्णतः गणित पर आधारति होती है। शुभ मुहूर्त का आविष्कार गणितीय शुद्धता है। ऐसा कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि ज्योतिष का विकास मुहूर्तों की उपयोगिता के कारण ही हो पाया है। वर्तमान समय में हर छोटे-छोटे कार्यों के लिये मुहूर्त तय किये जाते हैं।
जैसे-जैसे ज्योतिष का विकास हुआ वैसे ही इसकी उपयोगिता भी बढी है। वर्तमान में गर्भाधानादि 16 संस्कार, ग्राहारम्भ, गृहनिर्माण, यात्रा, व्यापाराम्भ, शपथग्रहण, पदग्रहण, वाहनक्रय, आवेदन पत्र भरने, पर्चादाखिल आदि सभी क्षेत्रों में मुहूर्त देखे जाने की परम्परा है।
वर्तमान समय में व्यक्ति की आवश्यकताएं और क्षेत्र अतिविस्तृत हो गए हैं। जिन कार्यों को कभी छोटा समझा जाता था, वे आज आजीविका के मुख्य साधन बन गए हैं। ऐसे कुछ महत्वपूर्ण कार्यों को प्रारम्भ करने के पूर्व शुभ मुहूर्त के सामान्य सिद्धांत निम्नलिखित हैं:
मुहूर्त संबंधी जानकारी
1. अमावस्या तिथि में मांगलिक कार्यों को प्रारम्भ नहीं करना चाहिए।
2. रिक्ता तिथियों (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दर्शी) में आजीविका संबंधी किसी भी कार्य को प्रारम्भ नहीं करना चाहिए।
3. नंदा तिथियों (प्रतिपदा, षष्ठी, एकादशी) में किसी भी योजना को पारित अथवा क्रियान्वित नहीं करें।
4. रविवार, मंगलवार एवं शनिवार को मेल-मिलाप एवं संधि के कार्य नहीं करें।
5. कोई भी गृह जिस दिन अपनी राशि परिवर्तित करे, उस तिथि और नक्षत्र में किसी भी कार्य की रूपरेखा नहीं बनाएं और ना ही कोई कार्य प्रारम्भ करें।
6. जिस दिन नक्षत्र एवं तिथि योग 13 आए, उस दिन पारिवारिक अथवा सामाजिक उत्सव अथवा कार्य का आयोजन नहीं करें.
7. जब भी कोई ग्रह उदय अथवा अस्त हो, तो उससे तीन दिन पूर्व और बाद तक भी अपने किसी विशेष कार्य की शुरूआत नहीं करें।
8. अपनी जन्म राशि का और जन्म नक्षत्र का स्वामी जब अस्त हो, वक्री हो अथवा शत्रु ग्रहों के मध्य हो, उस समय में भी निजी जीवन से जुड़े और आय संबंधी क्षेत्रों का विस्तार अथवा योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं करें। बुध ग्रह को अस्त का दोष कम लगता है।
9. तिथि, नक्षत्र एवं लग्न की समाप्ति हो रही हो, उस समय जीवन, मृत्यु और आय से जुड़े किसी कार्य को अंजाम नहीं देना चाहिए।
10. क्षय तिथि को भी त्यागना चाहिए।
11. समीपवर्ती ग्रहण जिस नक्षत्र में हुआ हो, उस नक्षत्र को अगले ग्रहणपर्यंत शुभ कार्यों से दूर रखा जाता है।
12. जन्म राशि से चौथी, आठवीं और बारहवीं राशि पर जब चन्द्रमा हो, उस समय प्रारम्भ किए गए कार्य नष्ट हो जाते हैं।
13. शुभ कार्यों के प्रारम्भ में भद्राकाल से बचना चाहिए।
14. चन्द्रमा जब कुम्भ अथवा मीन राशि में हो, उस समय घर में अग्नि संबंधी वस्तुएँ जैसे ईधन, गैस सिलेंडर, प्रेट्रोल, अस्त्र-शस्त्र, नए बर्तन, बिजली का सामान अथवा मशीनरी नहीं लानी चाहिए।
15. विवाह के लिए मंगलवार को कन्या का और सोमवार को वर का वरण नहीं करना चाहिए।
16. जन्मवार एवं जन्म नक्षत्र में नए कपडे पहनना अच्छा होता है।
17. पुष्य नक्षत्र केवल विवाह को छोड़कर अन्य सभी कार्यों में शुभ होता है।
18. देवशयन अवधि में बालक को स्कूल में दाखिला नहीं दिलाना चाहिए।
19. चार (गतिशील यात्रा संबंधी) कार्यों हेतु चार लग्न (मेष, कर्क, तुला, मकर), स्थिर कार्यों (विवाह एवं भवन निर्माण) के लिये स्थिर लग्न (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) तथा द्विस्वभाव राशियों का पूर्वार्ध स्थिर कार्यों के लिये प्रयोग किया जा सकता है।
20. घर के किसी बुजुर्ग का श्राद्ध दिवस हो अथवा मृत्यु तिथि हो, उस दिन भी किसी नए कार्य की शुरूआत नहीं करनी चाहिए।
21. साक्षात्कार लेने और देते अथवा परीक्षा फ़ार्म भरने में नन्दा और ज़या तिथियाँ शुभ मानी जाती हैं।
22. सूर्य जब बुध और गुरू की राशियों में हो, तो उस समय नए भवन में प्रवेश नहीं करना चाहिए।
23. मंगलवार को धन उधार नहीं लेना चाहिए और बुधवार को नहीं देना चाहिए।
24. मंगलवार को ऋण चुकाना और बुधवार को धन संग्रह करना शुभ होता है।
25. सोमवार और शनिवार को पूर्व दिशा में, गुरूवार को दक्षिण दिशा में, रविवार और शुक्रवार को पश्चिम दिशा में, मंगलवार और बुधवार को उत्तर दिशा में व्यावसायिक अथवा पारिवारिक कार्य हेतु यात्रा नहीं करनी चाहिए।
Posted by Udit bhargava at 6/30/2011 06:49:00 pm 0 comments


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