11 अप्रैल 2011

हस्त मुद्राओं द्वारा चिकित्सा

हमारा शरीर अनन्त रहस्यों से भरा हुआ है। शरीर को स्वस्थ बनाए रखने की शक्ति शरीर में निहित है। बस जरूरत है उसे जानकर अभ्यास करने की। शरीर पंचतत्वों-पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से मिलकर बना है। जब तक शरीर में ये तत्व संतुलित रहते हैं, तब तक शरीर निरोगी रहता है। यदि इन तत्वों में असंतुलन हो जाए तो नानाप्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं। इन तत्वों को हम यदि पुन: संतुलित कर दें तो शरीर निरोगी हो जाता है।

हस्तमुद्रा चिकित्सा के अनुसार हाथ की पांचों अंगुलियां पांचों तत्वों का प्रतिनिधित्व करती है और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के माध्यम से इन तत्वों को बल देती रहती है। अंगूठे में अग्नि तत्व, तर्जनी में वायु तत्व, मध्यमा में आकाश तत्व, अनामिका में पृथ्वी तत्व व कनिष्ठा में जल तत्व की ऊर्जा का केन्द्र है। इस प्रकार अंगुलियों को आपस में मिलाकर मुद्राओं को बनाया जाता है। हमारे ऋषियों ने इस रहस्य को साधना के द्वारा जाना और इसका प्रचार-प्रसार किया जिसके प्रतिदिन अभ्यास से व्यक्ति रोगमुक्त होकर स्वस्थ रह सके।

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ये अद्भुत मुद्राएं करते ही अपना असर दिखाना शुरू कर देती हैं। पद्मासन, स्वस्तिकासन, सुखासन, वज्रासन में करने से जिस रोग के लिए जो मुद्रा वर्णित है उसको इस भाव से करें कि मेरा रोग ठीक हो रहा है, तब ये मुद्राएं शीघ्रता से रोग को दूर करने में लग जाती हैं। बिना भाव के लाभ अधिक नहीं मिल पाता। दिन में 20-30 मिनट तक एक मुद्रा को किया जाए तो पूरा लाभ प्राप्त हो जाता है। एक बार में न हो सके तो दो-तीन बार में कर लें। किसी भी मुद्रा में जिन अंगुलियों का प्रयोग नहीं करते उन्हें सीधा करके रख लेते हैं और हथेली को थोड़ा टाइट रखते हैं। यों तो मुद्राओं की संख्या अनेक है, किन्तु यहां हम आपको कुछ उपयोगी मुद्राओं के बारे में बता रहे हैं-

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विधि: अंगूठे को तर्जनी अंगुली के सिरे पर लगाएं व बाकी तीनों अंगुलियाँ सीधी रहेंगी।

लाभ: मस्तिष्क के स्नायु को बल देकर यह स्मरण शक्ति, एकाग्रता शक्ति, संकल्प शक्ति को बढ़ाती है, बुद्धि का विकास करती है, पढ़ाई में मन लगने लगता है, सिर दर्द व नींद न आना दूर होता है, मन की चंचलता दूर होकर क्रोध, चिड़चिड़ापन, तनाव, चिंता को दूर कर व्यक्ति को आध्यात्मिक बना देती है।

नोट: सात्विक भोजन करने से शीघ्रता से लाभ देती है।
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विधि: अनामिका अंगुली को अंगूठे के अग्रभाग से लगाकर बाकी अंगुलियां सीधी रखें।

लाभ: दुबर्लता को दूर कर वजन को बढ़ाती है, शरीर में स्फूर्ति, कान्ति एवं तेज बढ़ाकर जीवनी शक्ति का विकास करती है, पाचन तन्त्र स्वस्थ बनाती है।

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विधि: कनिष्ठा अंगुली को अंगूठे के अग्रभाग पर लगाकर बाकी अंगुलियों को सीधा रखने से बनती है।

लाभ: चर्मरोग, रक्त विकार दूर करती है, शरीर में रूखापन दूर कर त्वचा को चमकीली व मुलायम बनाती है, चेहरे की सुन्दरता को बढ़ा देती है।

नोट: कफ प्रकृति वाले व्यक्ति इसका अभ्यास ज्यादा न करें।

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विधि: तर्जनी अंगुली को मोड़कर अंगूठे के मूल में लगाकर हल्का सा दबाएं। बाकी अंगुलियां सीधी रहेंगी।

लाभ: वात रोगों में विशेष लाभकारी है। प्रकुपित वायु को शान्त कर देती है, साइटिका, कमर दर्द, गर्दन दर्द, पारकिंसन, गठिया, लकवा, जोड़ों का दर्द, घुटने का दर्द दूर करती है।
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विधि: मध्यमा अंगुली को मोड़कर अंगूठे के मूल में लगाकर अंगूठे से दबाएं व बाकी अंगुलियां सीधी रखें।

लाभ: गले के रोग व थाइराइड में लाभकारी है, दांत मजबूत होते हैं, कर्ण रोगों में लाभकारी है।
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विधि: अनामिका अंगुली को अंगूठे के मूल में लगाकर अंगूठे से दबाकर बाकी अगुलियों को सीधा करके रखें।

लाभ: मोटापा कम करती है, वजन को घटाने वाली है, शरीर में उष्णता बढ़ाती है, शक्ति का विकास करती है, कोलेस्ट्राल का बढ़ना, मधुमेह व लीवर के रोग में लाभ पहुंचाती है, शरीर को संतुलित बना देती है।

नोट: कमजोर व्यक्ति इसका अभ्यास न करें। गर्मी में भी ज्यादा न करें।
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विधि: अनामिका तथा कनिष्ठा अंगुलियों को अंगूठे के अग्रभाग पर लगाकर बाकी दोनों अंगुलियों को सीधा रखें।

लाभ: मन को शान्त कर शरीर की दुर्बलता को दूर करती है, रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ा देती है, नेत्र ज्योति बढ़ाती है, थकान दूर कर शरीर में तरोताजगी देती है, त्वचा व आंखों को निर्मल बना देती है, विटामिन की कमी को दूर करती है।
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विधि: मध्यमा तथा अनामिका अंगुलियों को अंगूठे के अग्रभाग से लगाकर बाकी अंगुलियों को सीधी रखें।

लाभ: कब्ज, मधुमेह, किडनी विकार, वायु विकार, बवासीर को दूर करती है, शरीर को शुद्ध कर नाड़ी दोषों को दूर कर देती है, मूत्र का अवरोध दूर कर दांतों को मजबूत करती है, पसीना भी लाती है।

नोट: यह मुद्रा मूत्र अधिक लाती है।
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विधि: यह मुद्रा तर्जनी अंगुली को अंगूठे के मूल में लगाकर मध्यमा व अनामिका अंगुलियों को अंगूठे के अग्रभाग पर लगाकर छोटी अंगुली को सीधा करके बनती है।

लाभ: हृदय रोगों में विशेष रूप से लाभकारी है। प्रतिदिन 10-15 मिनट इसके अभ्यास से हृदय मजबूत होता है, दिल का दौरा पड़ते ही इसको करने से आराम मिलता है, गैस बनना, सिरदर्द, अस्थमा व उच्च रक्तचाप में लाभकारी है। सीढि़यों पर चढ़ने से पहले ही अगर इसको लगाकर चढ़ा जाए तो सांस नहीं फूलती।

विधि: दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में फंसाकर बांधकर बाएं हाथ के अंगूठे को खड़ा रखें।

लाभ: सर्दी, जुकाम, खांसी, साइनुसाइटिस, अस्थमा, निमन् रक्तचाप को दूर कर शरीर की गर्मी को बढ़ा देती है, कफ को सुखाने का कार्य करती है।

नोटः आवश्यकता होने पर ही करें, अनावश्यक न करें।

06 अप्रैल 2011

पंडित जी के टोटके

प्रारब्ध की बात छोड़ दें, तो भी परमेश्वर द्वारा कुछ वस्तुओं में धनप्राप्ति के गुणधर्म किये गए हैं, यह बात निर्विवाद है। जिस प्रकार यज्ञादिक कर्मों द्वारा स्वर्ग की प्राप्ति होती है, बरसात होती है या देश पर आये महान संकट दूर होते हैं, उसी प्रकार कुछ ख़ास साधनाएं और टोटके किये जाएं, तो मनुष्य को धन की प्राप्ति अवश्य होती है और घर में सुख-सम्रद्धि आती है। ये टोटके बिलकुल सरल हैं और इसके लिए जरूरी चीजें भी, सहज ही में उपलब्ध की जा सकती हैं। इसमें आपको पूर्ण श्रद्धा अवश्य होनी चाहिए तो आइये करें ये लाभदायक व कुछ ख़ास उपाय।
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1.      भर लें अपने भण्डार गृह
जिस स्थान पर होली जलाई जाती रही हो, वहां पर होली जलने से एक दिन पहले की रात्री में एक मटकी में गाय का घी, तिल का तेल, गेहूं और ज्वार तथा एक ताम्बे का पैसा रखकर मटकी का मुंह बंद करके गाड़ आएं। रात्रि में जब होली जल जाए, तब दूसरे दिन सुबह उसे उखाड़ लाएं। फिर इन सब वस्तुओं को पोटली में बांधकर जिस वास्तु में रख दिया जाएगा, वह वास्तु व्यय करने पर भी उसमें निरंतर वृद्धि होती रहेगी, और आपके भंडार भरे हुए रहेंगे।

2.     अगर आप चाहते हैं की आपके प्रतिष्ठान में बिक्री ज्यादा हो तो यह करें 
आप अपने व्यापार में अधिक पैसा प्राप्त करना चाहते हैं और चाहते हैं की आपके व्यापार की बिक्री बढ़ जाए तो आप वट वृक्ष की लता को शनिवार के दिन जाकर निमंत्रण दे आएं। (वृक्ष की जड़ के पास एक पान, सुपारी और एक पैसा रख आएं) रविवार के दिन प्रातः काल जाकर उसकी एक जटा तोड़ लाएं, पीछे मुड़कर न देखें। उस जटा को घर लाकर गुग्गल की धूनी दें तथा 101 बार इस मंत्र का जप करें- 
ॐ नमो चण्ड अलसुर स्वाहा। 

3.    छोटे बच्चों को नजर लगने पर- 
अगर आप चाहते हैं की छोटे बच्चों को नजर न लगे इसके लिए हाथ में चुटकी भर रक्षा लेकर ब्रहस्पतिवार के दिन 'ॐ चैतन्य गोरखनाथ नमः मंत्र का 108 बार जप करें। फिर इसे छोटी-सी पुडिया में डालकर काले रेशमी धागे से बच्चे के गले में बाँधने पर बुरी नजर नहीं लगती।

4.    अपने व्यापार में करें मनोवांछित उन्नति- 
अगर आप अपने व्यापार में मनोवांछित उन्नति करना चाहते हैं तो सोमवार को प्रातः नवनिर्मित अंगूठी को गंगाजल में धोकर गाय के दूध में डुबो दें, उसमें थोड़ी-सी शक्कर, तुलसी के पत्ते और कोई भी सफ़ेद फूल डाल दें। इसके पश्चात स्नान ध्यान से निवृत्त होकर अंगूठी को पहन लें। ऐसा करने से व्यापार में मनोवांछित उन्नति प्राप्त होगी।

5.    कन्या के विवाह में विलम्ब होने पर- 
अगर आपकी कन्या के विवाह में विलम्ब हो रहा हो या कन्या के लिए योग्य वर की तलाश पूरी नहीं हो रही हो तो किसी भी गुरूवार के दिन प्रातःकाल नहा धोकर बेसन के लड्डू स्वयं बनाएं। उनकी गिनती 109 होनी चाहिए। फिर पीले रंग की टोकरी में पीले रंग का कपड़ा बिछाकर उन लड्डूओं को उसमें रख दें तथा अपनी श्रद्धानुसार कुछ दक्षिणा रख दें। पास के किसी शिव मंदिर में जाकर विवाह हेतु प्रार्थना कर घर आ जाएं।

6.    आपके ज्यादातर कार्य असफल हो रहे हैं तो यह करें- 
आप चाहते हैं की आपके द्वारा किये गए कार्य सफल हो लेकिन कार्य के प्रारम्भ होते ही उसमें विध्न आ जाते हैं और वह असफल हो जाते हैं इसके लिए आप यह करें: प्रातःकाल कच्चा सूत लेकर सूर्य के सामने मुंह करके खड़े हो जाएं। फिर सूर्य देव को नमस्कार करके 'ॐ हीं घ्रणि सूर्य  आदित्य श्रीम' मंत्र बोलते हुए सूर्य देव को जल चढ़ाएं। जल में रोली, चावल, चीनी तथा लाल पुष्प दाल लें। इसके पश्चात कच्चे सूत को सूर्य देव की तरफ करते हुए गणेशजी का स्मरण करते हुए सात गाँठ लगाएं। इसके पश्चात इस सूत को किसी खोल में रखकर अपनी कमीज की जेब में रख लें, आपके बिगड़े कार्य बनाने लगेंगे।

7.    गर्भ धारण करने के लिए- 
अगर आपको किसी कारणवश गर्भ धारण नहीं हो रहा हो तो मंगलवार के दिन कुम्हार के घर आएं और उसमें प्रार्थना कर मिट्टी के बर्तन वाला डोरा ले आएं। उसे किसी गिलास में जल भरकर दाल दें। कुछ समय पश्चात डोरे को निकाल लें और वह पानी पति-पत्नी दोनों पी लें। यह क्रिया केवल मंगलवार को ही करनी है अगर संभव हो तो उस दिन पति-पत्नी अवश्य ही रमण करें। गर्भ की स्थिति बनते ही उस डोरे को हनुमानजी के चरणों में रख दें।

8.    अपने घर-गृहस्थी को बनाएं सुखी- 
अक्सर हम गृहस्थ जीवन में देखते हैं तो गृहस्थ का सामान टूट-फूट जाता है या सामान चोरी हो जाता है। जो भी आता है असमय ही ख़त्म हो जाता है। रसोई में बरकत नहीं रहती है तो ऐसी स्त्रियाँ भोजन बनाने के बाद शेष अग्नि को न बुझाएं और जब सब जलकर राख हो जाए तो राख को गोबर में मिलाकर रसोई को लीप दें। फर्श हो तो उस राख को पानी में घोलकर उसी पानी से फर्श डालें। यह क्रिया कई बार करें। घर-गृहस्थी का छोटा-मोटा सामान, गिलास, कटोरी, चम्मच आदि सदैव बने रहेंगे।

9.    इच्छा के विरूद्ध कार्य करना पड़ रहा हो तो- 
अगर आपको किसी कारणवश कोइ कार्य अपनी इच्छा के विपरीत करना पड़ रहा हो तो आप कपूर और एक फूल वाली लौंग एक साथ जलाकर दो-तीन दिन में थोड़ी-थोड़ी खा लें। आपकी इच्छा के विपरीत कार्य होना बंद हो जाएगा।
  
10.    दाम्पत्य जीवन से झगड़े दूर करें ऐसे- 
अगर आपका दाम्पत्य जीवन अशांत है तो आप रात्री में शय न करते समय पत्नी अपने पलंग पर देशी कपूर तथा पति के पलंग पर कामिया सिन्दूर रखें. प्रातः सूर्यदे के समय पति देशी कपूर को जला दें और पत्नी सिन्दूर को भवन में छिटका दें। इस टोटके से कुछ ही दिनों में कलह समाप्त हो जाती है।

11.    बेरोजगारी दूर करने हेतु- 
अगर आपको नौकरी या काम नहीं मिल रहा है और आप मारे-मारे फिर रहे हैं तो एक दागरहित बड़ा नीबूं लें और चौराहे पर बारह बजे से पहले जाकर उसके चार हिस्से कर लें और चारों दिशाओं में दूर-दूर फेंक दें। फलस्वरूप बेरोजगारी की समस्या समाप्त हो जाएगी।

12.    भाग्योदय करने के लिए करें यह उपाय-
अपने सोए भाग्य को जगाने के लिए आप प्रात सुबह उठकर जो भी स्वर चल रहा हो, वही हाथ देखकर तीन बार चूमें, तत्पश्चात वही पांव धरती पर रखें और वही कदम आगे बाधाएं। ऐसा नित्य-प्रतिदिन करने से निश्चित रूप से भाग्योदय होगा।

13.    त्वचा रोग होने पर यह करें- 
त्वचा संबंधी रोग केतु के दुष्प्रभाव से बढ़ते हैं। यदि त्वचा संबंधी घाव ठीक न हो रहा हो तो सायंकाल मिट्टी के नए पात्र में पानी रखकर उसमें सोने की अंगूठी या एनी कोइ आभूषण दाल दें। कुछ देर बाद उसी पानी से घाव को धोने के बाद अंगूठी निकालकर रख लें तथा पाने किसी चौराहे पर फेंक आएं। ऐसा तीन दिन करें तो रोग शीघ्र ठीक हो जाएगा।

14.    मंदी से छुटकारा पाएं ऐसे- 
अगर आपके व्यापार में मंदी आ गयी है या नौकरी में मंदी आ गयी है तो यह करें। किसी साफ़ शीशी में सरसों का तेल भरकर उस शीशी को किसी तालाब या बहती नदी के जल में डाल दें। शीघ्र ही मंदी का असर जाता रहेगा और आपके व्यापार में जान आ जाएगी।

15.    भय को दूर करें ऐसे-
अगर आपको बिना कारण भय रहता हो या सांप-बिच्छू या वन्य पशुओं का भय रहता हो तो यह करें : बांस की जड़ जलाकर उसे कान पर धारण करने से भय मिट जाता है। निर्गुन्डी की जड़ अथवा मोर पंख घर में रख देने से सर्प कभी भी घर में प्रवेश नहीं करता। रवि-पुष्य योग में प्राप्त सफ़ेद चादर की जड़ लाकर दाईं भुजा पर बाँधने से वन्य पशुओं का भय नहीं रहता है साथ ही अग्नि भय से भी छुटकारा मिल जाता है। केवड़े की जड़ कान पर धारण करने से शत्रु भय मिट जाता है।

16.    अगर आपके परिवार में कोई रोगग्रस्त हो तो यह करें. 
अगर स्वास्थ्य में सुधर न होता हो तो यह उपाय करें: एक देशी अखंडित पान, गुलाब का फूल और कुछ बताशे रोगी के ऊपर से 31 बार उतारें तथा अंतोक चौराहे पर रख दें। इसके प्रभाव से रोगी की दशा में शीघ्रता से सुधार होगा।

17.    पारिवारिक सुख-शांति के लिए- 
अगर आपके परिवार में अशांति रहती है और सुख-चैन का अभाव है तो प्रतिदिन प्रथम रोगी के चार भाग करें, जिसका एक गाय को, दूसरा काले कुत्ते को, तीसरा कौवे को तथा चौथा टुकड़ा किसी चौराहे पर रखवा दें तो इसके प्रभाव से समस्त दोष समाप्त होकर परिवार की शांति तथा सम्रद्धि बढ़ जाती है।
  
18.    अपनाएं सुखी रहने के कुछ नुस्खे- 
ब्रहस्पतिवार या मंगलवार को सात गाँठ हल्दी तथा थोड़ा-सा गुड इसके साथ पीतल का एक टुकड़ा इन सबको मिलाकर पोटली में बांधें तथा ससुराल की दिशा में फेंक दें तो वहां हर प्रकार से शांति व सुख रहता है।
कन्या अपनी ससुराल में रहते हुए यह करें। मेहँदी तथा साबुत उरद जिस दिशा में वधु का घर हो, उसी दिशा में फेंकने से वर-वधु में प्रेम बढ़ता है।
किसी विशेष कार्य के लिए घर के निकलते समय एक साबुत नीबू लेकर गाय के गोबर में दबा दें तथा उसके ऊपर थोड़ा-सा कामिया सिन्दूर छिड़क दें तथा कार्य बोलकर चले जाएं तो कार्य निश्चित ही बन जाता है।
 सावन के महीने में जब पहली बरसात हो तो बहते पानी में विवाह करने से दुर्भाग्य दूर हो जाता है।
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19.    अविवाहित व अधिक उम्र की कन्या के विवाह के लिए- 
अगर आपकी लडकी अविवाहित है या उसकी उम्र बहुत ज्यादा हो चुकी है इसके कारण विवाह होने में रूकावटें आ रही हो तो इसके लिए एक उपाय है: देवोत्थान एकादशी कच और देवयानी की मिट्टी की मूरतें बनाकर उन मूर्तियों में हल्दी, चावल, आते का घोल लगाकर उनकी पूजा करके उन्हें एक लकड़ी के फट्टे से ढक लेते हैं. फिर उस फट्टे पर कुमारी कन्या को बिठा दिया जाता है तो उसका विवाह हो जाता है।
20    राई से करें दरिद्रता निवारण- 
पैसों का कोइ जुगाड़ न बन रहा हो तथा घर में दरिद्रता का वाश हो तो यह करें: एक पानी भरे घड़े में राई के पत्ते डालकर इस जल को अभिमंत्रित करके जिस भी किसी व्यक्ति को स्नान कराया जाएगा उसकी दरिद्रता रोग नष्ट हो जाते हैं।

21.   स्वप्न में भविष्य जानें इस तरह भी- 
अगर आप स्वप्न में भविष्य की बात मालूम करना चाहते हैं तो जंगल में जाकर जिस वृक्ष पर अमर बेल हो, उसकी सात परिक्रमा कर अमर बेल्युक्त एक लकड़ी को तोड़ लाएं। फिर उस लकड़ी को धुप देकर जला दें तथा लता को सिरहाने रखकर विचार करते हुए सो जाएं तो स्वप्न में भविष्य की बात मालूम हो जाती है।

01 अप्रैल 2011

भूलना भूल जाएं

कुछ छात्र ऐसे होते हैं जो प्रश्नों को ध्यान से न तो पढ़ते हैं और न ही विषय को समझने की कोशिश करते हैं। ऐसे छात्र  रट्टा लगा कर विषय सामग्री को याद करते हैं, लेकिन जैसे ही परीक्षा होती है और प्रश्न आ जाते हैं जो की नहीं रटे गए हैं ऐसी स्थिति में वह छात्र रटा हुआ भी भूल जाता है। भूलने का कारण यह होता है की छात्र ने विषय को ध्यान से नहीं पढ़ा, बल्कि उसका रट्टा लगाया है। बहुत से छात्र ऐसे भी होते हैं, जिनकी समस्या कुछ-कुछ भूलने से सम्बंधित होती है। उनका दसवीं या बारहवीं तक तो परीक्षा परिणाम अच्छा आता है परन्तु काँलेज में आते ही अंकों का स्तर गिरने लगता है। इसका मुख्य कारण यह है की स्कूल के दिनों में छात्र अनुशासन में रहते हैं परन्तु काँलेज में आते ही वह स्वतंत्र हो जाते हैं और इसका सारा असर उनके परीक्षा परिणाम पर पड़ता है और छात्रों को लगता है की अब उन्हें ठीक से चीजें याद नहीं हो पा रही हैं। अच्छी याददाश्त का होना बहुत ही महत्वपूर्ण है अतः जरूरी है की आप अपनी भूलने की आदत को सुधारें। अभ्यास एवं कुछ सरल तकनीकों को अगर आप अपनाएं तो भूलने की बीमारी को सुधारा जा सकता है।

    एकाग्रचित होकर पढ़ें इससे आप सामान्य की उपेक्षा दस गुना अधिक याद रख पाएंगे।
    बेहतर स्मृति के लिए आवश्यक है की आप याद की गयी पाठ्य सामग्री को दोहराएं। हालांकि  इससे बुद्धि में कोइ सीधा इजाफा नहीं होता, किन्तु बार-बार दोहराव आपके लिए कुछ ऐसा अवश्य छोड़ जाता है, जिससे स्मृति में बढ़ोतरी होती है। जो भी याद करना हो उसे बोलकर याद कीजिये और अंत में याद किये हुए को लिख डालिए।
    किसी नई चीज को सीखने के लिए यह आवश्यक है कि आप तनाव मुक्त एवं थकान रहित रहें। भूलने की बीमारी से छुटकारा पाने के लिए आप रोजाना सुबह-शाम 10 से 15 मिनट तक यह व्यायाम अवश्य करें। सबसे पहले आप बिस्तर पर सीधा लेट जाए। उसके पश्चात अपने दिमाग से सब कुछ निकाल दें और पूरी ताकत से अपने शरीर को कास लें। फिर धीरे-धीरे अपने शरीर को ढीला छोड़ दें।

25 मार्च 2011

सुनने के बड़े-बड़े फायदे

बात तो टके की है ज्यादा सुनोगे तो ज्यादा पाओगे, किन्तु ऐसा होता नहीं है। आँफिस हो या कोइ ऐसी महत्वपूर्ण जगह आमतौर पर लोग सुनते कम हैं और बोलने की कोशिश ज्यादा करते हैं या फिर अपने आपको बेहतर सिद्ध करने के चक्कर में बातचीत के कुछ अंश सुनकर और उन्हीं को पकड़कर सामने वाले पर हावी होने के प्लान बनाने लगते हैं। ऐसे मौके बार-बार आते हैं। मसलन इंटरव्यू देते समय, किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से चर्चा के समय या फिर ऐसी कोई ख़ास जगह जहाँ पर अपने आपको श्रेष्ठ घोषित करना होता है। अंगरेजी में एक कहावत है की 'We often hear but Seldom Listen', यानी हम सुनते तो हैं, लेकिन अच्छे श्रोता नहीं बन पाते। इससे हम कई जगह नुकसान कर लेते हैं, जो हमारे कैरियर के लिए ठीक नहीं है। वैसे सुनाने के कई फायदे हैं। सामने वाला क्या कह रहा है, उसकी हर बात पर गौर कर सकते हैं। यह भी पहचान सकते हैं की वह कितना बुद्धिमान है? वह जो कह रहा है वह आपके लिए कितना लाभदायक है? कई बार तो एक छोटी-सी बात आपके लिए महत्वपूर्ण बन जाती है। आप उसी के आधार पर आँफिस में कोई 'आइडियल आइडिया' रख सकते हैं।, जिससे आपके प्रोमोशन का मार्ग खुल सकता है, पर अधिकाँश समय ऐसा नहीं होता है। दूसरा व्यक्ति क्या कह रहा है, इसे ठीक से सुनना काफी प्रयासों की मांग करता है। यदि आप भी अच्छे श्रोता नहीं हैं तो आप कई बड़े-बड़े फायदों से वंचित रह सकते हैं। 

आपको अपने आप में अच्छा श्रोता बनाने के गुणों को विकसित करना है, तो कुछ आदतों से छुटकारा पाना बहुत जरूरी है।

  • दूसरा व्यक्ति क्या कह रहा है, हम अक्सर उसे बहुत कम सुन पाते हैं, क्योंकि हमारे दिमाग में पहले से ही कई दूसरे सवाल घूम रहे होते हैं जैसे की "यह व्यक्ति वास्तव में क्या सोच रहा या महसूस कर रहा है?" या "यह सारी बातें बताने के पीछे इसका मकसद क्या है?" या "कहीं यह मुझे बेवकूफ बनाने की कोशिश तो नहीं कर रहा है?
  • आपका दिमाग इस बात की तैयारी में जुटा रहता है की आगे क्या बोलना है और आप इस ओर बिलकुल लापरवाह हो जाते हैं की क्या कहा जा रहा है?
  • आप सिर्फ उन्हीं बातों को सुन रहे होते हैं, जिन्हें आप सुनना चाहते हैं और उन बातों को नजरअंदाज कर जाते हैं, जो आपके मनमाफिक नजर नहीं आतीं। 
  • आमने-सामने की बातचीत के दौरान आपका ध्यान भटक जाता है और अधिकाँश बात अनसुनी कर जाते हैं। 
  • आप अन्य व्यक्ति द्वारा कही जा रही बातों को अपने अनुभवों से जोड़ने में जुड़ जाते हैं।
  • आप जैसे ही संवेदनवाहक का मूल्यांकन करने लगते हैं, सन्देश को सुनना भूल जाते हैं। 
  • बातचीत के मुद्दों को जल्दी-जल्दी बदलना यह दिखाता है की जो बात कही जा रही है, उसमें आपकी दिलचस्पी नहीं है।
  • आप जो कहा गया है, उसे सुनते तो हैं, लेकिन तत्काल ही उसे भुला भी देते हैं। 
  • घर में नीले रंग के वस्त्र, नीले रंग के पर्दे, नीले रंग की चादरें व दीवारों पर भी नीला रंग करें। हर बात पर सहमत हो जाना भी यह दिखाता है की आप या तो भलमनसाहत में सब सुन रहे हैं या फिर टकराव को टालने के लिए। 
  • कई बार आप जिन शब्दों या विचारों के बारे में जानते नहीं हैं, उन्हें नजरअंदाज कर जाते हैं। ऐसे में भी आप पूरी बात नहीं सुन पाते।
 

समय का चक्र घुमाओ

हर सफल इंसान की सफलता के पीछे उसकी कड़ी मेहनत और लगन तो होती ही है, उससे ज्यादा जरूरी उसका 'टाइम मैनेजमेंट' होता है। अगर किसी भी व्यक्ति को सफलता का 'स्वाद' चखना है, तो उसे समय के चक्र को अपने हाथ में रखना होगा, नहीं तो समय तो निकलेगा ही सफलता से भी कोसों दूर चला जाएगा। एक तरीके से देखा जाए तो टाइम मैनेजमेंट का हर इंसान की जिन्दगी में बड़ा महत्व है, जिसे समझना बहुत जरूरी है। अक्सर लोग भागदौड़ में रहते हैं? कार्यस्थल पर जल्दी पहुँचते हैं और देर तक रूकते हैं? शनिवार और रविवार को भी काम पर रहते हैं? लगातार थकान और चिडचिडापन महसूस करते रहते हैं? स्टूडेंट में भी यही समस्या देखी जाती है। विशेषज्ञ कहते हैं की छात्र-छात्राएं परीक्षा के समय काफी हडबडी में होते हैं। कारण इन लोगों में भी समय को मैनेज करने की क्षमता नहीं होती है।
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इसलिए समय  को मैनेज करना उतना ही जरूरी है, जितनी जिन्दगी में सफलता। टाइम मैनेजमेंट के सूत्रों को अपने जीवन में अपनाएं और देखिये कि कैसे कार्यस्थल पर और निजी जिन्दगी में भी सारी चीजें आपके नियंत्रण में आ जाती है।



1.   योजनाबद्ध रूप से काम करना टाइम मैनेजमेंट की पहली शर्त है, लेकिन सिर्फ बड़ी-बड़ी योजनाएं ही न बनाएं, बल्कि उन्हें लागू भी कीजिये और उन पर कायम भी रहिये। 
2.   ध्यान रहे कि आपकी योजना वास्तविकता के बहुत करीब हों, जिसमें किसी किस्म के गैर जरूरी व्यवधान आने की गुंजाइश न रहे। परीक्षा के समय अपने विषयों के हिसाब से ऐसी योजना बनाएं जिससे आपको अतिरिक्त मेहनत न करनी पड़े। 
3.    योजना के प्रति विस्तृत नजरिया अपनाएं। परिवार, दोस्तों, शौक, मनोरंजन, वर्जिश और घूमने फिरने के लिए बचाकुचा समय देने की बजाय इन कामों के लिए अलग से समय निकालें। 
4.   फुर्सत के पल समय की बर्बादी नहीं होते, बल्कि पहले से निर्धारित आराम का समय आपको चीजों को तरतीब में रखने और आपकी कार्यक्षमता को बढाने में मददगार होता है। 
5.    सभी कामों को तयशुदा समय में पूरा करें। किसी काम को अच्छी तरह से करना एक बात है और उसे पूरा करने के तनाव में बार-बार योजना देखना और परेशान रहना दूसरी बात। 
6.    ना कहना भी एक योग्यता है, इसके अभाव में आप बहुत ज्यादा जिम्मेदारियां ओढ़ते चले जाते हैं और इस कारण आपकी सोची-समझी योजनाएं धराशायी हो जाती हैं। इसका सरल अर्थ है काम को लेकर तनाव न पालें। 
7.    अपनी प्राथमिकताएं निर्धारित करें और उनके महत्व तथा अनिवार्यता को ध्यान में रखते हुए उन्हें क्रम में रखें। सबसे महत्वपूर्ण काम को सबसे पहले हाथ में लें, उसके बाद दूसरे नंबर को और इस तरह कम महत्व के काम की और बढ़ते जाएं। 
8.    समय के साथ काम करने से आपकी आँफिस या काम करने की जगह अच्छी ईमेज बनेगी। 
9.    काम समय के अन्दर तो करें, लेकिन जल्दबाजी में बिगड़ना नहीं चाहिए। 
10.  समय पर काम होने से आपको गलतियाँ सुधारने का समय मिलेगा। 


23 मार्च 2011

नेटवर्किंग कमाल

1.  आपके संपर्क आपको बहुत हद तक नौकरी दिलाने में मददगार साबित हो सकते हैं। अगर आप किसी संस्थान में नौकरी पाने के इच्छुक हैं तो आपको किसी ऐसे व्यक्ति से संपर्क साधना चाहिए, जो आपके लिए रास्ता बना सके। इसका तात्पर्य यह नहीं की आप गलत साधनों का प्रयोग करें। उदहारण के तौर पर एक व्यक्ति कंपनी में नौकरी करना चाहता था। जब उसने इस कंपनी का विज्ञापन देखा तो अपने संपर्क के द्वारा उसने अपना रिज्यूम उस कंपनी के प्रबंधक को दे दिया। उसने उन लोगों को भी पछाड दिया, जो उससे कहीं ज्यादा योग्य थे। इसका कारण समय पर की गयी नेट्वर्किंग तकनीक का उपयोग था। इस कंपनी के नियोक्ता का जवाब था की क्यों वह किसी और व्यक्ति के पीछे दौड़ें जब उसे सही इंसान आसानी से मिल गया है। 
2.   जब आप ऐसे व्यक्ति से मिलने जाएं तो पहले से ही योजना बला लें। घर से ही सारी तैयारी कर के जाएं, जिस कंपनी में आप जा रहे हैं, उसके बारे में पूरी जानकारी पहले से प्राप्त कर लें। पहले से ही सोच-विचार कर लें की उस व्यक्ति से मिलकर आप क्या कहना चाहेंगे? जैसे की आपकी योग्यता के द्वारा संस्थान को क्या फायदा हो सकता है?
3.   उस व्यक्ति को भविष्य की योजनाओं को बताने के अलावा कुछ ऐसा भी बताइये जो आपकी कार्यकुशलता को भी उजागर करे। वार्तालाप को संस्थान की कठिनाइयों पर केन्द्रित करें और उन जरूरतों को पूरा करने के उपाय बताएं, जिनके बारे में ध्यान नहीं दिया गया है। इस दौरान अपनी क्षमताओं का  सही प्रयोग करने से आप सबका ध्यान अपनी तरफ केन्द्रित का सकते हैं। 
4.   वह व्यक्ति जिसके संपर्क के द्वारा आप नौकरी प्राप्त करने में सफल रहे हैं। आपको उसका आभारी होना चाहिए। साथ ही उसे भी कुछ ऐसी जानकारी दे सकते हैं, जो उसके जीवन में काम आए।
5.    आपको समय के पहले ही अपना सोर्स ढूँढने की कोशिश करनी चाहिए। कुछ लोग उस समय चौकन्ने होते हैं, जब कंपनी जाँब के लिए विज्ञापन निकालती है। दरअसल यह एक लम्बी प्रक्रिया होती है। अगर आप लगातार संस्थान या कंपनी के उचित व्यक्ति से संपर्क बना लेते हैं तो आप विज्ञापन निकलने के पहले ही नौकरी पा सकते हैं। ऐसी स्थिति में आप मात्र एक उम्मीदवार होंगे। छोटी और मझली कंपनियों में अक्सर ऐसा ही होता है। 
6.   हर दिन दो व्यक्तियों से संपर्क बनाने की कोशिश करें, जितने ज्यादा लोगों से मिलोगे उतने ही जाँब मिलने की संभावना होगी। मसलन फ्रेंड्स, इंडस्ट्री लीडर और अच्छे बड़े नियोक्ता आदि। दो लोगों से मिलने का मतलब सप्ताह में 10 लोगों से और महीने में चालीस नए लोगों से मिल सकते हैं। एक बात का ध्यान रखिये की मिलकर मुलाक़ात करना सबसे बेहतर तरीका होता है। यदि आप अलग-अलग शहर में हैं तो मेल, फोन या फिर पत्राचार से संपर्क बना सकते हैं।
7.    तर्कपूर्ण प्रश्न ही पूछिए और अपने नेट्वर्किंग साथी को भी वार्तालाप में शामिल कीजिये। ऐसी स्थिति में सिर्फ बोलते ही मत रहिये, कोशिश अधिक से अधिक सुनने की कीजिए।
8.    जब आप मिलने जाएं तो कंपनी के माहौल को देख कर ही चुनाव करें की आपको किस तरह से कपडे पहनने हैं। कपडे साफ़-सुथरे और सादगीपूर्ण पहनें। उन में ज्यादा इत्र का प्रयोग भी न करें। स्वयं को सुव्यवस्थित रखें।
9.    अपने संपर्कों को कभी टूटने मत दीजिये। एक व्यक्ति जिसका लक्ष्य एक बड़े संस्थान में नौकरी पाना था, उसने उस कंपनी के इक्कीस लोगों से संपर्क साधा जब तक उसे नौकरी नहीं मिली। हर सभा के बाद अपने नेट्वर्किंग साथी को धन्यवाद पत्र जरूर लिखिए। अगर आपको मनपसंद संस्थान में नौकरी मिल गई है तो ऐसे प्रस्ताव जरूर भेजिए जो संस्थान की प्रगति में सहायक हो सकते हैं।
10.    नेट्वर्किंग की तुलना हम डेटिंग से कर सकते हैं। डेटिंग में कभी पहली मुलाक़ात में शादी की आशा नहीं करनी चाहिए। उसी प्रकार नेट्वर्किंग में भी पहली मुलाक़ात में नौकरी मिल जाने की आशा नहीं करनी चाहिए। आपका काम जानकारी प्राप्त करना है। उस व्यक्ति का नाम व फोन नंबर लिख लीजिये और कोशिश करते रहिये। उससे अधिक जानकारी प्राप्त करने से नौकरी मिलने के आसार बढ़ जाते हैं। स्वयं को जोशीले, उत्साहित प्रस्तुत करें, लेकिन उसमें स्वार्थीपन न हो। 

नेट्वर्किंग क्या है? 
+   उन लोगों से संपर्क साधना जो आपकी सहायता कर सकते हैं। 

इसका फायदा क्या है
+   आपको वर्त्तमान या भविष्य में नौकरी दिला सकते हैं। 
+   आपको उन लोगों से मिला सकते हैं, जिन्हें लोगों की जरूरत है। 
+   आपको नई कंपनियों या एनी जानकारी दे सकते हैं। 

भ्रम और सच्चाइयां 
भ्रम : आपको केवल उन्हीं लोगों से संपर्क साधना चाहिए जो आपकी मदद कर सकते हैं। 
सच्चाई : स्वयं को सीमित मत करिए। अपनी सोच को संकीर्ण मत होने दीजिये। आपको नौकरी दिलाने में कोइ भी सहायक हो सकता है। 
भ्रम : नेट्वर्किंग स्थापित करने के लिए केवल सही व्यक्ति को जानना जरूरी है। 
सच्चाई : यह आप पर निर्भर करता है की आप को संपर्क किस तरह से मदद करते हैं। 
भ्रम : अजनबी आपको नौकरी दिलाने में असहाय होते हैं। 
सच्चाई : अगर आपने अपना प्रस्ताव सही तरीके से रखा है तो ज्यादा से ज्यादा लोग आपकी मदद करते हैं। 

अपने संपर्कों की सूची बनाएं. अपनी सूची को पिरामिड के आकार में बनाएं, जिसके तीन स्तर हों। 
पहला : इसमें वे लोग आते हैं जिन से हमारा संपर्क लगातार बना रहता है। हम इन से आसानी से बात भी कर सकते हैं। इनमें हमारे रिश्तेदार, पड़ोसी और दोस्त आते हैं। इस सूची में दस से पंद्रह लोग हो सकते हैं। 
दूसरा : इस स्तर में सहकर्मी और परिचित लोग आते हैं जिनसे आप कभी-कभी मिलते हैं और आप से व्यावसायिक तौर पर जुड़े हैं। 
तीसरा : इस स्तर में आने वाले लोगों से संपर्क साधने में सबसे ज्यादा कठिनाई होती है। इसमें वे लोग आते हैं, जो आपके लिए अजनबी हैं और उनके बारे में पहले और दूसरे स्तर के लोगों से सुना है या अखबार या टेलीफोन निर्देशिका में पढ़ा है। 
अब जब आपने अपने संपर्कों की सूची बना ली है तो डेटाबेस तैयार कीजिये -
नेटवर्क डेटाबेस :-
निम्नलिखित जानकारी होना जरूरी : नाम, शीर्षक, संस्थान का पता, व्यवसाय का पता, घर का पता, दूरभाष, फैक्स नंबर, ईमेल का पता, संपर्क की प्रकृति, दूसरे संस्थान और लोगों के नाम, कौन सा व्यक्ति कितना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा और भी कई तरह से यह मददगार साबित हो सकता ह।

20 मार्च 2011

सेक्सः स्त्रियां भी तोड़ें नियम

सेक्स दांपत्य जीवन का एक अहम हिस्सा है, मगर कई बार कल्पनाशीलता के अभाव में यह उबाऊ भी हो सकता है। इसका नतीजा सामने आता है पहले सेक्स के प्रति उकताहट के रूप में और फिर यह आपसी संबंधों में आई नीरसता में बदल जाता है। यह सुनने में अजीब लग सकता है मगर उकताहट भरा सेक्स अक्सर दांपत्य जीवन को भी उकताहट भरा बना देता है। इतना ही नहीं पति-पत्नी के बीच की आपसी समझदारी पर भी इसका असर देखा जा सकता है। इसका असर इतना गहरा होता है कि सेक्स विशेषज्ञ कहते हैं कि आम जीवन में पति-पत्नी के बीच बातचीत और उनके तौर-तरीकों को देखकर बताया जा सकता है कि उनकी सेक्स लाइफ कैसी है।

बदलते दौर में स्त्रियां
बदलते दौर ने हर जगह स्त्रियों की भूमिका को बदला है। गौर करें तो अब घर के तमाम अहम फैसले पत्नियां ही करने लगी हैं। रात को डिनर में क्या बनेगा से लेकर ड्राइंगरूम की सजावट, कार का मॉडल और बच्चों के लिए कौन सा स्कूल बेहतर रहेगा... अक्सर स्त्रियां ही तय करने लगी हैं। बाहरी जीवन में आए इस बदलाव का असर शयनकक्ष पर भी पड़ा है। पहले के मुकाबले सेक्स में उनकी सक्रियता बढ़ी है। बदलते समय के साथ पुरुषों न सिर्फ इस बदलाव को स्वीकार किया है बल्कि वे इसे सकारात्मक तौर पर लेने लगे हैं।

पत्नियों की भूमिका बदली
गौर करें तो रूटीन सेक्स लाइफ को दिलचस्प बनाने की जिम्मा अब सिर्फ पति पर नहीं डाला जा सकता। स्त्रियां अपनी सेक्सुअलिटी और सेक्स इच्छाओं के प्रति जागरुक हो रही हैं। सेक्स भी उनका पैसिव रोल नहीं रह गया है, अब वे इसमें बराबर की भागीदार हैं। यहां सेक्स एक्सपर्ट्स के उन सुझावों पर एक नजर डालेंगे जिन्हें वे खास तौर पर आज के दौर की स्त्रियों को ध्यान में रखकर देते हैं।

नियम बनाएं नहीं नियम तोड़ें
सेक्स एक्सपर्ट्स की सबसे जरूरी सलाह यह है कि सेक्स लाइफ को दिलचस्प बनाने का कोई नियम नहीं है। बल्कि वे बेडरूम में बिताए क्षणों को सुखद बनाने के लिए नियम बनाने की जगह नियम तोड़ने पर ज्यादा जोर देते हैं। उनका मानना है कि पत्नियों का नियम तोड़ना दंपति की सेक्स लाइफ में एक नई ऊर्जा भर देता है। आइये देखें वो कौन से नियम हैं जिन्हें तोड़ने का साहस कभी-कभार हर पत्नी को करना चाहिए।

अनावृत होने से डरें नहीं
आम तौर पर शादी के कुछ साल बाद सेक्स को तमाम कामों की तरह फटाफट निपटाने पर ज्यादा जोर दिया जाने लगता है। इसका सबसे पहला असर यह होता है कि पत्नियां पूरी तरह से अपने कपड़े उतारने से डरती हैं। उन्हें यह भी डर होता है कि ऐसी स्थिति में परिवार के किसी सदस्य ने बुला लिया तो? फिलहाल यहां एक्सपर्ट्स की राय मानें और कभी-कभार पति के सेक्सी मूड को देखते हुए उऩ्हें अपने शरीर के उतार-चढ़ाव से खेलने का पूरा मौका दें। यह स्त्रियों में अपनी सेक्सुअलिटी के प्रति आत्मविश्वास पैदा करेगा।

फोरप्ले को नजरअंदाज न करें
सेक्स में फोरप्ले की भूमिका को नजरअंदाज न करें। इसे महज एक शारीरिक क्रिया में न बदल दें। दरअसल फोरप्ले ही पति-पत्नी मे आपसी संवाद और समझदारी बढ़ाता है। यह आपके सेक्स को ज्यादा उत्तेजक, उत्साह से भरा बनाता है। देर तक आपके भीतर उसकी सिहरन बरकरार रहती है। इतना ही नहीं यह आपकी व्यस्त दिनचर्या से आपके मन-मस्तिष्क को बाहर निकालता है, आपको ज्यादा फ्रेश और ज्यादा उर्जा से भरा हुआ बनाता है।

मल्टीपल आर्गेज्म आजमाएं
मप्लीपल आर्गेज्म के बारे में स्त्रियों ने सुना तो बहुत होता है मगर उसके व्यावहारिक रूप के बारे में उन्हें कुछ भी पता नहीं होता है। शोध बताते हैं कि आर्गेज्म के बाद भी स्त्रियों की योनि में देर तक उत्तेजना बनी रहती है। यानी आपका शरीर तृप्ति के बाद भी सहवास की मांग करता रहता है। अक्सर संसर्ग के बात दंपति एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं और इस सुख से वंचित रह जाते हैं। तो यह नियम तोड़ने के लिए जरूरी है कि सहवास खत्म होने के बाद भी प्रेम करना जारी रखें। आपके पति को दोबारा तैयार होने में थोड़ा वक्त लगेगा। फोरप्ले को दोबारा किया जा सकता है। अपने साथी से नाजुक अंगों को दोबारा सहलाने को कहें। आप दोबारा ज्यादा मादकता से भरे सुख को पाने के लिए तैयार होंगी।

अंधेरे की आजादी
अंधेरा आपके सेक्स व्यवहार को एक नई आजादी देता है। आप तौर पर दंपति सेक्स के दौरान तेज रोशनी नापसंद करते हैं। मगर इस बार धीमे नाइट लैंप को भी आफ कर दें। अंधेरे में एक-दूसरे के शरीर के स्पर्श को महसूस करें। एक-दूसरे की सांसों के उतार-चढ़ाव और कानों में गूंजती फुसफुसाहट और अस्फुट आवाजें आपके लिए एक नया अनुभव होंगी...

सेक्सुअल फैंटेसी शेयर करें
महिलाएं अक्सर अपनी सेक्सुअल फैंटेसी शेयर करने से हिचकिचाती हैं। आमतौर पर उन्हें इस बात का भय सताता है कि कहीं पति ने उन्हें गलत समझ लिया तो... मगर यह नियम तोड़ने के लिए भी आपको साहस करना होगा। एक सर्वे के मुताबिक पति न सिर्फ पत्नियों की सेक्सुअल फैंटेसी के बारे में जानने को उत्सुक रहते हैं बल्कि यह उनके भीतर उत्तेजना भी बढ़ाता है। आप उनके लिए सिर्फ एक सेक्स मशीन नहीं बल्कि इच्छाओं से भरी एक बहुआयामी स्त्री के रूप मे सामने आती हैं। तो एक अपनी कल्पनाएं आजमा कर देखें॥ उन्हें बताएं कि आपने सपना देखा कि आपके फेवरेट फिल्म स्टार ने आपको गोद में उठा रखा था.. फिर देखिए वे आपकी कल्पनाओं में कैसे पंख लगाते हैं...

कामसूत्रः ... अगर मूड में आ गए हैं तो हड़बड़ी मत करिए। मंजिल तक पहुंचने में वक्त लीजिए।