25 मार्च 2011

समय का चक्र घुमाओ

हर सफल इंसान की सफलता के पीछे उसकी कड़ी मेहनत और लगन तो होती ही है, उससे ज्यादा जरूरी उसका 'टाइम मैनेजमेंट' होता है। अगर किसी भी व्यक्ति को सफलता का 'स्वाद' चखना है, तो उसे समय के चक्र को अपने हाथ में रखना होगा, नहीं तो समय तो निकलेगा ही सफलता से भी कोसों दूर चला जाएगा। एक तरीके से देखा जाए तो टाइम मैनेजमेंट का हर इंसान की जिन्दगी में बड़ा महत्व है, जिसे समझना बहुत जरूरी है। अक्सर लोग भागदौड़ में रहते हैं? कार्यस्थल पर जल्दी पहुँचते हैं और देर तक रूकते हैं? शनिवार और रविवार को भी काम पर रहते हैं? लगातार थकान और चिडचिडापन महसूस करते रहते हैं? स्टूडेंट में भी यही समस्या देखी जाती है। विशेषज्ञ कहते हैं की छात्र-छात्राएं परीक्षा के समय काफी हडबडी में होते हैं। कारण इन लोगों में भी समय को मैनेज करने की क्षमता नहीं होती है।
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इसलिए समय  को मैनेज करना उतना ही जरूरी है, जितनी जिन्दगी में सफलता। टाइम मैनेजमेंट के सूत्रों को अपने जीवन में अपनाएं और देखिये कि कैसे कार्यस्थल पर और निजी जिन्दगी में भी सारी चीजें आपके नियंत्रण में आ जाती है।



1.   योजनाबद्ध रूप से काम करना टाइम मैनेजमेंट की पहली शर्त है, लेकिन सिर्फ बड़ी-बड़ी योजनाएं ही न बनाएं, बल्कि उन्हें लागू भी कीजिये और उन पर कायम भी रहिये। 
2.   ध्यान रहे कि आपकी योजना वास्तविकता के बहुत करीब हों, जिसमें किसी किस्म के गैर जरूरी व्यवधान आने की गुंजाइश न रहे। परीक्षा के समय अपने विषयों के हिसाब से ऐसी योजना बनाएं जिससे आपको अतिरिक्त मेहनत न करनी पड़े। 
3.    योजना के प्रति विस्तृत नजरिया अपनाएं। परिवार, दोस्तों, शौक, मनोरंजन, वर्जिश और घूमने फिरने के लिए बचाकुचा समय देने की बजाय इन कामों के लिए अलग से समय निकालें। 
4.   फुर्सत के पल समय की बर्बादी नहीं होते, बल्कि पहले से निर्धारित आराम का समय आपको चीजों को तरतीब में रखने और आपकी कार्यक्षमता को बढाने में मददगार होता है। 
5.    सभी कामों को तयशुदा समय में पूरा करें। किसी काम को अच्छी तरह से करना एक बात है और उसे पूरा करने के तनाव में बार-बार योजना देखना और परेशान रहना दूसरी बात। 
6.    ना कहना भी एक योग्यता है, इसके अभाव में आप बहुत ज्यादा जिम्मेदारियां ओढ़ते चले जाते हैं और इस कारण आपकी सोची-समझी योजनाएं धराशायी हो जाती हैं। इसका सरल अर्थ है काम को लेकर तनाव न पालें। 
7.    अपनी प्राथमिकताएं निर्धारित करें और उनके महत्व तथा अनिवार्यता को ध्यान में रखते हुए उन्हें क्रम में रखें। सबसे महत्वपूर्ण काम को सबसे पहले हाथ में लें, उसके बाद दूसरे नंबर को और इस तरह कम महत्व के काम की और बढ़ते जाएं। 
8.    समय के साथ काम करने से आपकी आँफिस या काम करने की जगह अच्छी ईमेज बनेगी। 
9.    काम समय के अन्दर तो करें, लेकिन जल्दबाजी में बिगड़ना नहीं चाहिए। 
10.  समय पर काम होने से आपको गलतियाँ सुधारने का समय मिलेगा। 


23 मार्च 2011

नेटवर्किंग कमाल

1.  आपके संपर्क आपको बहुत हद तक नौकरी दिलाने में मददगार साबित हो सकते हैं। अगर आप किसी संस्थान में नौकरी पाने के इच्छुक हैं तो आपको किसी ऐसे व्यक्ति से संपर्क साधना चाहिए, जो आपके लिए रास्ता बना सके। इसका तात्पर्य यह नहीं की आप गलत साधनों का प्रयोग करें। उदहारण के तौर पर एक व्यक्ति कंपनी में नौकरी करना चाहता था। जब उसने इस कंपनी का विज्ञापन देखा तो अपने संपर्क के द्वारा उसने अपना रिज्यूम उस कंपनी के प्रबंधक को दे दिया। उसने उन लोगों को भी पछाड दिया, जो उससे कहीं ज्यादा योग्य थे। इसका कारण समय पर की गयी नेट्वर्किंग तकनीक का उपयोग था। इस कंपनी के नियोक्ता का जवाब था की क्यों वह किसी और व्यक्ति के पीछे दौड़ें जब उसे सही इंसान आसानी से मिल गया है। 
2.   जब आप ऐसे व्यक्ति से मिलने जाएं तो पहले से ही योजना बला लें। घर से ही सारी तैयारी कर के जाएं, जिस कंपनी में आप जा रहे हैं, उसके बारे में पूरी जानकारी पहले से प्राप्त कर लें। पहले से ही सोच-विचार कर लें की उस व्यक्ति से मिलकर आप क्या कहना चाहेंगे? जैसे की आपकी योग्यता के द्वारा संस्थान को क्या फायदा हो सकता है?
3.   उस व्यक्ति को भविष्य की योजनाओं को बताने के अलावा कुछ ऐसा भी बताइये जो आपकी कार्यकुशलता को भी उजागर करे। वार्तालाप को संस्थान की कठिनाइयों पर केन्द्रित करें और उन जरूरतों को पूरा करने के उपाय बताएं, जिनके बारे में ध्यान नहीं दिया गया है। इस दौरान अपनी क्षमताओं का  सही प्रयोग करने से आप सबका ध्यान अपनी तरफ केन्द्रित का सकते हैं। 
4.   वह व्यक्ति जिसके संपर्क के द्वारा आप नौकरी प्राप्त करने में सफल रहे हैं। आपको उसका आभारी होना चाहिए। साथ ही उसे भी कुछ ऐसी जानकारी दे सकते हैं, जो उसके जीवन में काम आए।
5.    आपको समय के पहले ही अपना सोर्स ढूँढने की कोशिश करनी चाहिए। कुछ लोग उस समय चौकन्ने होते हैं, जब कंपनी जाँब के लिए विज्ञापन निकालती है। दरअसल यह एक लम्बी प्रक्रिया होती है। अगर आप लगातार संस्थान या कंपनी के उचित व्यक्ति से संपर्क बना लेते हैं तो आप विज्ञापन निकलने के पहले ही नौकरी पा सकते हैं। ऐसी स्थिति में आप मात्र एक उम्मीदवार होंगे। छोटी और मझली कंपनियों में अक्सर ऐसा ही होता है। 
6.   हर दिन दो व्यक्तियों से संपर्क बनाने की कोशिश करें, जितने ज्यादा लोगों से मिलोगे उतने ही जाँब मिलने की संभावना होगी। मसलन फ्रेंड्स, इंडस्ट्री लीडर और अच्छे बड़े नियोक्ता आदि। दो लोगों से मिलने का मतलब सप्ताह में 10 लोगों से और महीने में चालीस नए लोगों से मिल सकते हैं। एक बात का ध्यान रखिये की मिलकर मुलाक़ात करना सबसे बेहतर तरीका होता है। यदि आप अलग-अलग शहर में हैं तो मेल, फोन या फिर पत्राचार से संपर्क बना सकते हैं।
7.    तर्कपूर्ण प्रश्न ही पूछिए और अपने नेट्वर्किंग साथी को भी वार्तालाप में शामिल कीजिये। ऐसी स्थिति में सिर्फ बोलते ही मत रहिये, कोशिश अधिक से अधिक सुनने की कीजिए।
8.    जब आप मिलने जाएं तो कंपनी के माहौल को देख कर ही चुनाव करें की आपको किस तरह से कपडे पहनने हैं। कपडे साफ़-सुथरे और सादगीपूर्ण पहनें। उन में ज्यादा इत्र का प्रयोग भी न करें। स्वयं को सुव्यवस्थित रखें।
9.    अपने संपर्कों को कभी टूटने मत दीजिये। एक व्यक्ति जिसका लक्ष्य एक बड़े संस्थान में नौकरी पाना था, उसने उस कंपनी के इक्कीस लोगों से संपर्क साधा जब तक उसे नौकरी नहीं मिली। हर सभा के बाद अपने नेट्वर्किंग साथी को धन्यवाद पत्र जरूर लिखिए। अगर आपको मनपसंद संस्थान में नौकरी मिल गई है तो ऐसे प्रस्ताव जरूर भेजिए जो संस्थान की प्रगति में सहायक हो सकते हैं।
10.    नेट्वर्किंग की तुलना हम डेटिंग से कर सकते हैं। डेटिंग में कभी पहली मुलाक़ात में शादी की आशा नहीं करनी चाहिए। उसी प्रकार नेट्वर्किंग में भी पहली मुलाक़ात में नौकरी मिल जाने की आशा नहीं करनी चाहिए। आपका काम जानकारी प्राप्त करना है। उस व्यक्ति का नाम व फोन नंबर लिख लीजिये और कोशिश करते रहिये। उससे अधिक जानकारी प्राप्त करने से नौकरी मिलने के आसार बढ़ जाते हैं। स्वयं को जोशीले, उत्साहित प्रस्तुत करें, लेकिन उसमें स्वार्थीपन न हो। 

नेट्वर्किंग क्या है? 
+   उन लोगों से संपर्क साधना जो आपकी सहायता कर सकते हैं। 

इसका फायदा क्या है? 
+   आपको वर्त्तमान या भविष्य में नौकरी दिला सकते हैं। 
+   आपको उन लोगों से मिला सकते हैं, जिन्हें लोगों की जरूरत है। 
+   आपको नई कंपनियों या एनी जानकारी दे सकते हैं। 

भ्रम और सच्चाइयां 
भ्रम : आपको केवल उन्हीं लोगों से संपर्क साधना चाहिए जो आपकी मदद कर सकते हैं। 
सच्चाई : स्वयं को सीमित मत करिए। अपनी सोच को संकीर्ण मत होने दीजिये। आपको नौकरी दिलाने में कोइ भी सहायक हो सकता है। 
भ्रम : नेट्वर्किंग स्थापित करने के लिए केवल सही व्यक्ति को जानना जरूरी है। 
सच्चाई : यह आप पर निर्भर करता है की आप को संपर्क किस तरह से मदद करते हैं। 
भ्रम : अजनबी आपको नौकरी दिलाने में असहाय होते हैं। 
सच्चाई : अगर आपने अपना प्रस्ताव सही तरीके से रखा है तो ज्यादा से ज्यादा लोग आपकी मदद करते हैं। 

अपने संपर्कों की सूची बनाएं. अपनी सूची को पिरामिड के आकार में बनाएं, जिसके तीन स्तर हों। 
पहला : इसमें वे लोग आते हैं जिन से हमारा संपर्क लगातार बना रहता है। हम इन से आसानी से बात भी कर सकते हैं। इनमें हमारे रिश्तेदार, पड़ोसी और दोस्त आते हैं। इस सूची में दस से पंद्रह लोग हो सकते हैं। 
दूसरा : इस स्तर में सहकर्मी और परिचित लोग आते हैं जिनसे आप कभी-कभी मिलते हैं और आप से व्यावसायिक तौर पर जुड़े हैं। 
तीसरा : इस स्तर में आने वाले लोगों से संपर्क साधने में सबसे ज्यादा कठिनाई होती है। इसमें वे लोग आते हैं, जो आपके लिए अजनबी हैं और उनके बारे में पहले और दूसरे स्तर के लोगों से सुना है या अखबार या टेलीफोन निर्देशिका में पढ़ा है। 
अब जब आपने अपने संपर्कों की सूची बना ली है तो डेटाबेस तैयार कीजिये -
नेटवर्क डेटाबेस :-
निम्नलिखित जानकारी होना जरूरी : नाम, शीर्षक, संस्थान का पता, व्यवसाय का पता, घर का पता, दूरभाष, फैक्स नंबर, ईमेल का पता, संपर्क की प्रकृति, दूसरे संस्थान और लोगों के नाम, कौन सा व्यक्ति कितना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा और भी कई तरह से यह मददगार साबित हो सकता ह।

20 मार्च 2011

सेक्सः स्त्रियां भी तोड़ें नियम

सेक्स दांपत्य जीवन का एक अहम हिस्सा है, मगर कई बार कल्पनाशीलता के अभाव में यह उबाऊ भी हो सकता है। इसका नतीजा सामने आता है पहले सेक्स के प्रति उकताहट के रूप में और फिर यह आपसी संबंधों में आई नीरसता में बदल जाता है। यह सुनने में अजीब लग सकता है मगर उकताहट भरा सेक्स अक्सर दांपत्य जीवन को भी उकताहट भरा बना देता है। इतना ही नहीं पति-पत्नी के बीच की आपसी समझदारी पर भी इसका असर देखा जा सकता है। इसका असर इतना गहरा होता है कि सेक्स विशेषज्ञ कहते हैं कि आम जीवन में पति-पत्नी के बीच बातचीत और उनके तौर-तरीकों को देखकर बताया जा सकता है कि उनकी सेक्स लाइफ कैसी है।

बदलते दौर में स्त्रियां
बदलते दौर ने हर जगह स्त्रियों की भूमिका को बदला है। गौर करें तो अब घर के तमाम अहम फैसले पत्नियां ही करने लगी हैं। रात को डिनर में क्या बनेगा से लेकर ड्राइंगरूम की सजावट, कार का मॉडल और बच्चों के लिए कौन सा स्कूल बेहतर रहेगा... अक्सर स्त्रियां ही तय करने लगी हैं। बाहरी जीवन में आए इस बदलाव का असर शयनकक्ष पर भी पड़ा है। पहले के मुकाबले सेक्स में उनकी सक्रियता बढ़ी है। बदलते समय के साथ पुरुषों न सिर्फ इस बदलाव को स्वीकार किया है बल्कि वे इसे सकारात्मक तौर पर लेने लगे हैं।

पत्नियों की भूमिका बदली
गौर करें तो रूटीन सेक्स लाइफ को दिलचस्प बनाने की जिम्मा अब सिर्फ पति पर नहीं डाला जा सकता। स्त्रियां अपनी सेक्सुअलिटी और सेक्स इच्छाओं के प्रति जागरुक हो रही हैं। सेक्स भी उनका पैसिव रोल नहीं रह गया है, अब वे इसमें बराबर की भागीदार हैं। यहां सेक्स एक्सपर्ट्स के उन सुझावों पर एक नजर डालेंगे जिन्हें वे खास तौर पर आज के दौर की स्त्रियों को ध्यान में रखकर देते हैं।

नियम बनाएं नहीं नियम तोड़ें
सेक्स एक्सपर्ट्स की सबसे जरूरी सलाह यह है कि सेक्स लाइफ को दिलचस्प बनाने का कोई नियम नहीं है। बल्कि वे बेडरूम में बिताए क्षणों को सुखद बनाने के लिए नियम बनाने की जगह नियम तोड़ने पर ज्यादा जोर देते हैं। उनका मानना है कि पत्नियों का नियम तोड़ना दंपति की सेक्स लाइफ में एक नई ऊर्जा भर देता है। आइये देखें वो कौन से नियम हैं जिन्हें तोड़ने का साहस कभी-कभार हर पत्नी को करना चाहिए।

अनावृत होने से डरें नहीं
आम तौर पर शादी के कुछ साल बाद सेक्स को तमाम कामों की तरह फटाफट निपटाने पर ज्यादा जोर दिया जाने लगता है। इसका सबसे पहला असर यह होता है कि पत्नियां पूरी तरह से अपने कपड़े उतारने से डरती हैं। उन्हें यह भी डर होता है कि ऐसी स्थिति में परिवार के किसी सदस्य ने बुला लिया तो? फिलहाल यहां एक्सपर्ट्स की राय मानें और कभी-कभार पति के सेक्सी मूड को देखते हुए उऩ्हें अपने शरीर के उतार-चढ़ाव से खेलने का पूरा मौका दें। यह स्त्रियों में अपनी सेक्सुअलिटी के प्रति आत्मविश्वास पैदा करेगा।

फोरप्ले को नजरअंदाज न करें
सेक्स में फोरप्ले की भूमिका को नजरअंदाज न करें। इसे महज एक शारीरिक क्रिया में न बदल दें। दरअसल फोरप्ले ही पति-पत्नी मे आपसी संवाद और समझदारी बढ़ाता है। यह आपके सेक्स को ज्यादा उत्तेजक, उत्साह से भरा बनाता है। देर तक आपके भीतर उसकी सिहरन बरकरार रहती है। इतना ही नहीं यह आपकी व्यस्त दिनचर्या से आपके मन-मस्तिष्क को बाहर निकालता है, आपको ज्यादा फ्रेश और ज्यादा उर्जा से भरा हुआ बनाता है।

मल्टीपल आर्गेज्म आजमाएं
मप्लीपल आर्गेज्म के बारे में स्त्रियों ने सुना तो बहुत होता है मगर उसके व्यावहारिक रूप के बारे में उन्हें कुछ भी पता नहीं होता है। शोध बताते हैं कि आर्गेज्म के बाद भी स्त्रियों की योनि में देर तक उत्तेजना बनी रहती है। यानी आपका शरीर तृप्ति के बाद भी सहवास की मांग करता रहता है। अक्सर संसर्ग के बात दंपति एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं और इस सुख से वंचित रह जाते हैं। तो यह नियम तोड़ने के लिए जरूरी है कि सहवास खत्म होने के बाद भी प्रेम करना जारी रखें। आपके पति को दोबारा तैयार होने में थोड़ा वक्त लगेगा। फोरप्ले को दोबारा किया जा सकता है। अपने साथी से नाजुक अंगों को दोबारा सहलाने को कहें। आप दोबारा ज्यादा मादकता से भरे सुख को पाने के लिए तैयार होंगी।

अंधेरे की आजादी
अंधेरा आपके सेक्स व्यवहार को एक नई आजादी देता है। आप तौर पर दंपति सेक्स के दौरान तेज रोशनी नापसंद करते हैं। मगर इस बार धीमे नाइट लैंप को भी आफ कर दें। अंधेरे में एक-दूसरे के शरीर के स्पर्श को महसूस करें। एक-दूसरे की सांसों के उतार-चढ़ाव और कानों में गूंजती फुसफुसाहट और अस्फुट आवाजें आपके लिए एक नया अनुभव होंगी...

सेक्सुअल फैंटेसी शेयर करें
महिलाएं अक्सर अपनी सेक्सुअल फैंटेसी शेयर करने से हिचकिचाती हैं। आमतौर पर उन्हें इस बात का भय सताता है कि कहीं पति ने उन्हें गलत समझ लिया तो... मगर यह नियम तोड़ने के लिए भी आपको साहस करना होगा। एक सर्वे के मुताबिक पति न सिर्फ पत्नियों की सेक्सुअल फैंटेसी के बारे में जानने को उत्सुक रहते हैं बल्कि यह उनके भीतर उत्तेजना भी बढ़ाता है। आप उनके लिए सिर्फ एक सेक्स मशीन नहीं बल्कि इच्छाओं से भरी एक बहुआयामी स्त्री के रूप मे सामने आती हैं। तो एक अपनी कल्पनाएं आजमा कर देखें॥ उन्हें बताएं कि आपने सपना देखा कि आपके फेवरेट फिल्म स्टार ने आपको गोद में उठा रखा था.. फिर देखिए वे आपकी कल्पनाओं में कैसे पंख लगाते हैं...

कामसूत्रः ... अगर मूड में आ गए हैं तो हड़बड़ी मत करिए। मंजिल तक पहुंचने में वक्त लीजिए।

13 मार्च 2011

ऐसे बचें जागने से

अक्सर आपने छात्रों को यह कहते सुना होगा की सामान्य दिनों में तो उन्हें अच्छी नींद आती है, लेकिन परीक्षा के दिनों में उन्हें नींद नहीं आती. बिस्तर पर घंटों लेते रहने के बावजूद भी गहरी नींद उनसे कोसों दूर रहती है. क्या आपने इस विषय पर कभी गंभीरता से सोचा है की आखिर ऐसा क्यों होता है? छात्रों में एक-दूसरे से आगे बढ़ने की चाह ने उन्हें अति मह्त्वकांशी बना दिया है. माता-पिता होशियार बच्चों से अपने बच्चों की तुलना करते हैं. माता-पिता के दबाव के कारण भी स्टूडेंट चैन से सो नहीं पाता उसे अनिंद्रा का रोग लग जाता है. परीक्षा में सफलता हासिल करने की ललक नींद न आने का बहुत बड़ा कारण है.
छात्र इस समय पढाई में ही न जुटे रहें बल्कि अपनी हाँबी को भी समय दें. इससे दिमाग हल्का होता है और वे खुद को रिलेक्स महसूस करेंगे, जिससे नींद आने में भी मदद मिलती है.
० परिवार या दोस्तों के साथ सप्ताह में एक बार घूमने जरूर जाएं. इससे मन प्रसन्न रहता है और नींद आने में भी मदद मिलती है.
० परिवार के सभी सदस्यों को दिन में कम से कम एक बार साथ भोजन करना चाहिए. इससे बाच्चों में अकेलापन व असुरक्षा की भावना ख़त्म होने लगती है. वे खुद को हल्का महसूस करेंगे और उन्हें अच्छी नींद भी आएगी. यदि छात्र चाहें तो वे खुद भी नींद न आने जैसे स्थिति पर काबू पाकर एक गहरी व अच्छी नींद ले सकते हैं. अगर वे निमन बातों पर ध्यान दें तो-
० गुनगुने पानी से शाम को स्नान करें, कमरे का वातावरण सामान्य हो.
० शरीर की अच्छी तरह से मालिश करें, संगीत का आनंद लें.
० दूध व दही का इस्तेमाल करें.
० ज्यादा चाय, कांफी व सिगरेट का सेवन न करें.
० व्यायाम करें क्योंकि व्यायाम के जरिये शरीर में संतुलन बना रहता है. छात्रों को सुबह या शाम को टहलने जरूर जाना चाहिए. हो सके तो योग जरूर करें.
० जल्दी सोने की आदत डालें, बिस्तर आरामदायक हो.
० सोने से पहले पढाई न करें और पढाई बिस्तर पर न करें.
० सोने से पहले दिमाग पर किसी तरह का बोझ न रखें. क्योंकि इससे गहरी नींद नहीं आती.

सेक्स से जुड़े आश्चर्यजनक तथ्य

सेक्स को हमेशा से इंसान एक खास संवेदना के रूप में देखता है। गौर करें तो किसी भी व्यक्ति के जीवन की खुशियां बहुत कुछ उसकी सेक्स लाइफ पर ही निर्भर होती हैं। मगर जीवन का इतना अहम हिस्सा होने के बावजूद इंसान की यह संवेदना हमेशा एक रहस्य का आवरण लिए रहती है।

प्राचीन कहावतों पर यकीन करें तो सेक्स को कोई अपने जीवन काल में भी पूरा नहीं समझ सकता, क्योंकि वह ब्रह्मांड की तरह विस्तृत, गहरा और असीम है। प्रत्येक व्यक्ति का यौन अनुभव दूसरे किसी से अलग हो सकता है। आइए हम आपको सेक्स से जुड़े कुछ आश्चर्यजनक तथ्य बताते हैं, उम्मीद है कि यह आपके लिए दिसचस्प होगा।

इंसान और डाल्फिन, विश्व की दो ऐसी प्रजातियां हैं जो अपने आनंद के लिए सेक्स का सहारा लेती हैं।

यदि पूरी दुनिया भर में हो रही सेक्सुअल गतिविधियों पर नजर डाली जाए तो यह एक दिन में करीब 100 मिलियन बैठती है।

पुरुष औसतन प्रत्येक सात सेकेंड में एक बार सेक्स के बारे में सोचते हैं।

अमेरिका मे हुए एक शोध से पता चला है कि बीते तीन दशकों में वहां के एक औसत पुरुष की शुक्राणु संख्या में करीब तीस प्रतिशत की गिरावट आई है।

यौन क्रिया के दौरान महिलाओं के मुकाबले पुरुषों को कहीं ज्यादा पसीना आता है। स्त्रियां की शारीरिक संरचना में बदन से निकलने वाले पानी को नियंत्रित करने की क्षमता होती है।

मानव शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा त्वचा है। एक औसत वयस्क के शरीर में इसका वजन छह पाउंड होता है।

आज धड़ल्ले से इस्तेमाल होने वाला कंडोम सन 1500 में ही अस्तित्व में आ गया था।

कंडोम का सबसे दिलचस्प इस्तेमाल द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान देखने में आया था। उस वक्त सिपाही अपनी राइफलों की नली को इससे ढका करते थे क्योंकि भीतर खारा पानी जाने से वह खराब हो जाती थीं।

यौन क्रिया काफी खर्चीली भी है। इस तरह कि एक औसत महिला पूरी तरह से उत्तेजित होकर सेक्स क्रिया करने के दौरान 70 से 120 कैलोरी प्रति घंटे की दर से खर्च करती है और एक पुरुष 77 से 155 कैलोरी।

शायद आपके लिए यह जानना दिलचस्प हो कि चुंबन से दंतक्षय की दर को कम किया जा सकता है। क्योंकि अतिरिक्त लार से मुंह साफ रखने में मदद मिलती है। एक मिनट के लिए लिया गया चुंबन शरीर की 26 कैलोरी जला सकता है।

किसी व्यक्ति के पूरे जीवन में चुंबन के लिए खर्च किए जाने वाले समय को जोड़ा जाए...तो यह 336 घंटे या 20.160 मिनटों के बराबर बैठता है। यानी कि पूरे जीवन में कुल 14 दिन।

सिर्फ नपुंसकता 26 अमेरिकी राज्यों में तलाक के लिए बड़ा आधार है।

महिलाओं के लिए संभोग एक कारगर दर्द निवारक है। क्योंकि संभोग के दौरान शरीर में एंडोमार्फीन का स्राव होता है, जो कि एक शकितशाली दर्द निवारक माना जाता है।

मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि पश्चिमी समाज में पैर यौन आकर्षण का सबसे प्रमुख केंद्र हैं।

सेक्स में सक्रिय व्यक्ति की दाढ़ी उसकी निष्क्रिय अवस्था में रहने की तुलना में कही ज्यादा तेजी से बढ़ती है।

एक स्वस्थ मनुष्य संभोग के दौरान करीब पांच मिलीलीटर वीर्य स्खलित करता है, जिसमें तीस करोड़ से पचास करोड़ तक शुक्राणु मौजूद होते हैं।

07 मार्च 2011

तनाव को पराजित करें

परिक्षा का नाम सुनकर अच्छे-अच्छों के होश उड़ जाते हैं। शायद यही कारण है की इससे लोगों में तनाव पैदा हो जाता है। इस समस्या से सबसे ज्यादा पीड़ित स्टूडेंट्स होते हैं। अक्सर देखा गया है की परिक्षा के समय छात्र-छात्राएं अपना आत्मविश्वास खो देते हैं। कई स्टूडेंट्स तो बीमार तक पद जाते हैं। दुनियाभर के साइकोलाँजिस्टों के अनुसार परिक्षा के समय 80 प्रतिशत छात्र-छात्राओं का जीवन असामान्य हो जाता है। जरूरत है थोड़े से उपायों की।

विशवास : आपको मौक़ा तभी मिलता है जब आप उसके काबिल हैं। अपनी पूरी मेहनत और परिश्रम लगा दें। साथ ही अपने पर विशवास रखें की आप कर सकतें हैं। परीक्षा के समय ऐसी ही सोच की जरूरत होती है।

परेशानियां : अगर पढाई के समय आपको कुछ समझ नहीं आ रहा है, तो उसे लेकर परशान न हों। आप अगर उसे और पढने की कोशिश करें तो उलझ भी सकते हैं, इसलिए टीचर की राय से पढ़ें।

घबराइए नहीं : परीक्षा हर साल होती है तो इसे देने में घबराहट कैसी? जीवन में आप ऐसे कई कार्य करेंगे की बाद में इन परीक्षाओं को मामूली कहेंगे। पढाई को रोज के जिन्दगी का हिसासा बनाइये इससे परीक्षा के दौरान पढने में आपको न परेशानी होगी और न स्ट्रेस।

पढ़ने के तरीके : कभी-कभी ऐसा होता है आप पढ़ते जा रहे हैं और ना तो कुछ समझ आ रहा है और उस समय ना ही कुछ याद हो रहा है, क्योंकि आपका दिमाग कहीं और ही है। पढ़ते-पढ़ते हम खो जाते हैं। हमारा एकाग्रता भंग हो जाती है और पता नहीं कौन सी उलझन या सोच में डूब जाते हैं जो हमारे पढाई से कोसो दूर है। इस सबसे बचने के लिए पढने के नए तरीके सोचिये कभी लिख कर पढ़िए तो कभी चलते-चलते पढ़ें। जब भी मौक़ा मिले कागज़ निकाला और याद करने लगे। तार्किक, फार्मूले याद नहीं होते। उन्हें अपने जीवन से जोडिये और फिर तुरंत आपको सब याद हो जाएगा।

सहयोग : मम्मी-पापा आपको इस समय सबसे ज्यादा सहयोग दे सकते हैं, क्योंकि यह इस दौर से निकल चुके हैं। अपने दोस्त, टीचर का थोडा सहयोग भी आपको घबराहट से बाहर निकाल सकता है, इसलिए इन्ससे बात करने से हिचकिचाइए मत।

एक्जाम स्ट्रेस : परिक्षा के समय छात्र-छात्राओं का जीवन असामान्य हो जाता है। साथ ही व्यवहार में भी काफी परिवर्तन देखने को मिलता है। नींद न आना, भूख कम हो जाना परिक्षा के दिनों में आम बात होती है, लेकिन इस समस्या से निदान भी पाया जा सकता है।  

06 मार्च 2011

स्त्रियों में सेक्स संबंधी उदासीनता

महिलाओं से जुड़ा एक बेहतर पॉपुलर सवाल है, "आखिर एक औरत के मन में है क्या?" अमेरिका में चिकित्सकों और शोधकर्ताओं की एक पूरी टीम इस सवाल का जवाब पाने में जुट गई और इस तलाश में कई अहम जानकारियां सामने आईं। दरअसल इस सवाल में अक्सर पूछा जाने वाला एक और अहम सवाल छिपा होता है जो निश्चित तौर पर एक स्त्री के सेक्स संबंधी दिलचस्पियों की पड़ताल करता है। यह सवाल दरअसल स्त्री की उम्र और सेक्स के रिश्ते से जुड़ा हुआ है। कई लोग मानते हैं कि एक स्त्री की उम्र उसकी सेक्स संबंधी दिलचस्पियों पर काफी असर डालती है। यह माना जाता है कि उम्र बढ़ने के साथ एक स्त्री काम क्रीड़ाओं में पहले जैसी दिलचस्पी नहीं लेती।

लाइफ पार्टनर भी जिम्मेदार
हालांकि हाल में हुए कई शोध से यह बात साफ हो गई है कि मध्यम आयु वर्ग की महिलाओं मे संभोग के प्रति दिलचस्पी होना अथवा न होना सिर्फ बढ़ती उम्र पर निर्भर नहीं करता। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि उसका और उसके लाइफ पार्टनर का स्वास्थ्य कैसा है और सेक्स संबंधी गतिविधियों में वे कितनी दिलचस्पी लेते हैं। आम धारणा के विपरीत शोध में यह पाया गया है कि मध्यम आयु में भी औरतें न सिर्फ सेक्सुअली काफी सक्रिय होती हैं बल्कि कई मामलों में उनकी दिलचस्पी बढ़ती भी पाई गई है।

शोध के दौरान जब यह जानकारी हासिल करने की कोशिश की गई कि जो महिलाएं सेक्स में सक्रिय नहीं हैं उसके पीछे क्या वजह है, तो पता चला कि कई भावनात्मक कारणों से उनकी सेक्स और अपने पार्टनर में दिलचस्पी खत्म हो चुकी है। उम्र बीतने के साथ औरतों में सेक्स के प्रति रूचि खत्म होने का बड़ा कारण उनके पार्टनर का व्यवहार होता है। पार्टनर में सेक्स के प्रति दिलचस्पी घटना या किसी प्रकार की अक्षमता का सीधा असर स्त्रियों की यौन सक्रियता पर पड़ता है। ऐसी भी स्त्रियां हैं जिनकी सेक्स में दिलचस्पी खत्म होने की अन्य वजहें भी रही हैं, मगर उनकी संख्या कम है।

उल्लेखनीय है कि यह शोध जर्नल ऑफ अमेरिकन जराचिकित्सा सोसाइटी की ओर से किया गया था। इसमें मध्यम आयु वर्ग की सेक्स संबंधी हर तरह की दिलचस्पियों को शामिल किया गया था, जिसमें हस्तमैथुन भी शामिल था। शोध के दौरान स्त्रियों का एक बड़ा वर्ग सेक्सुअल एक्टीविटीज में उम्र बढ़ने के साथ ज्यादा सक्रिय होता पाया गया। शोध से यह स्पष्ट नतीजे सामने आए कि किसी भी स्त्री कि सेक्स संबंधी सक्रियता का उसकी उम्र के साथ कोई सीधा रिश्ता नहीं है। बल्कि वह उम्र बढ़ने के साथ सेक्स का ज्यादा आनंद उठा सकती है। शोध कार्य में लगे डाक्टरों की टीम की कुछ सिफारिशों में यह भी शामिल था कि किसी भी स्त्री के सेक्स हेल्थ को उसके पूरे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से अलग रखकर नहीं देखा जा सकता।

कुछ सुझाव
यह पूरा अध्य्यन जर्नल ऑफ अमेरिकन जराचिकित्सा सोसायटी में प्रकाशित हुआ था। इस आधार पर मनोवैज्ञानिकों तथा सेक्स सलाहकारों ने कुछ सुझाव भी रखे हैं।

ध्यान दें आपकी पार्टनर किसी दवा के साइड इफेक्ट की वजह से भी सेक्स में दिलचस्पी खो सकती है। यदि ऐसा है तो डाक्टर की सलाह लें।

कई बार स्त्रियां मानसिक दबाव के चलते भी सेक्स में रुचि नहीं लेती हैं। बच्चों में ज्यादा व्यस्त हो जाने तथा सामाजिक मान्यताओं के चलते उन्हें लगता है सेक्स बहुत दिलचस्पी लेना उचित नहीं। इसके लिए जरूरी है के कपल थोड़ा समय अपने लिए भी निकालें।

कई बार खान-पान संबंधी आदतों का भी सेक्स लाइफ पर असर पड़ता है। कुछ खाने के आइटम व्यक्ति में उत्तेजना को कायम रखते हैं और उनका मूड बनाने में मदद करते हैं। बढ़ती उम्र में खान-पान पर ध्यान देकर सेक्स लाइफ को बेहतर बनाया जा सकता है।

कई बार ऐसा होता है कि बच्चों के बाद महिलाएं अपने शरीर को लेकर असहज हो जाती हैं और हीन भावना का शिकार हो बैठती हैं। इसके चलते भी वे सेक्स से जी चुराने लगती हैं। इसका सबसे बेहतर इलाज है नियमित व्यायाम। इससे न सिर्फ शरीर को खूबसूरत बनाया जा सकता है बल्कि यह मूड बनाने में भी मददगार है।

बढ़ती उम्र में घर-परिवार और बढ़ती कामकाजी जिम्मेदारियों के कारण वे थकने लगती हैं और सेक्स के लिए उनमें पर्याप्त एनर्जी नहीं बचती। इसके लिए जरूरी है कि भागदौड़ के बीच थोड़ा वक्त अपने लिए भी निकाला जाए। किसी भी कपल को चाहिए कि वे खुद के आराम और मनोरंजन के लिए वक्त निकालें।