17 जनवरी 2010

सपनों को पूरा करने में मदद करते हैं सपने

महान रसायन विज्ञानी फ्रेडरिक आगस्ट कैकुले सन्‌ 1865 में कार्बनिक पदार्थ बैंजीन की संरचना की खोज में लगे थे। वे इस काम में इस तरह डूबे रहते कि उन्हें न दिन की खबर रहती, न रात की। यह समस्या उनके दिलो-दिमाग पर इस तरह हावी थी कि उन्हें इसके अलावा कुछ और सूझता ही नहीं था। इसके बावजूद उन्हें सफलता नहीं मिल पा रही थी।

सर्दियों में एक दिन प्रयोगशाला में काम करते-करते थक जाने पर वे कुछ देर आराम करने के इरादे से एक अँगीठी के पास कुर्सी लगाकर बैठ गए। थोड़ी ही देर में उनकी आँख लग गई और उन्हें एक सपना दिखाई दिया कि कार्बन के 6 परमाणु उनकी प्रयोगशाला की अँगीठी के ऊपर नाच रहे हैं।

नाचते-नाचते वे अचानक एक-दूसरे का हाथ पकड़कर एक वृत्ताकार संरचना में व्यवस्थित हो गए। तभी उनकी नींद टूट गई और वे सपने के बारे में सोचने लगो। कुछ देर के सोच-विचार के बाद वे इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि उनके सपने की ही तरह बैंजीन में कार्बन के 6 परमाणु एक-दूसरे से गोलाई में जुड़े रहते हैं।

इस निष्कर्ष के आधार पर उन्होंने प्रयोग शुरू किए और नतीजा सपने जैसा ही आया। इस प्रकार उनके सपने ने एक बहुत बड़ी समस्या हल कर दी।

दोस्तो, रूसी कहावत है कि सोती लोमड़ी सपने में मुर्गियाँ ही गिनती रहती है, क्योंकि जागते हुए वह इसी उधेड़बुन में लगी रहती है कि मुर्गियों को कैसे पकड़े। इसी तरह किसी काम या उलझन में होने पर व्यक्ति को उठते-बैठते, खाते-पीते, सोते-जागते उस काम के सिवाय कुछ नहीं सूझता।

वह बात उसके मन-मस्तिष्क पर इस तरह हावी रहती है कि उसे आसानी से नींद नहीं आती। यदि आती भी है तो वह उसी के बारे में सोचते-सोचते सोता है और एक झटके के साथ जागकर फिर से उस पर सोचना शुरू कर देता है।

ऐसे में उसके ख्वाब भी उस विषय से कैसे अछूते रह सकते हैं। वह सपने में भी अपने आपको उन्हीं परिस्थितियों में पाता है, जिनमें कि वह जागृत अवस्था में रहता है। तब कई बार उसके सपने उसे उस समस्या का हल भी सुझा देते हैं। जरूरत होती है सिर्फ उन्हें समझने की। लेकिन कहा जाता है कि सपनों के सहारे जिंदगी नहीं जी जाती, क्योंकि वे हकीकत से दूर होते हैं। यह बात पूरी तरह सही नहीं है।

कहते हैं कि मूर्खों के सपने मूर्खतापूर्ण होते हैं। तो फिर समझदारों के सपने भी समझदारीभरे होंगे। यानी महत्वपूर्ण यह है कि सपने देख कौन रहा है। इसलिए यदि आप अपने सपने पूरे करने के लिए सही राह पर चल रहे हैं, तो आपके सपने भी आपको गलत राह नहीं दिखाएँगे। मुसीबत में पड़ने पर वे आपको उससे निकलने की राह भी सुझाएँगे बशर्ते आप उनकी मानें, उन्हें पढ़ना जानें।

यदि आप भी कैकुले भी तरह अपने सपने में छिपे गूढ़ अर्थ को जान गए तो आपके भी सपने पूरे होंगे वर्ना वे सिर्फ सपने ही रह जाएँगे।

दूसरी ओर, कहावत है कि बिल्ली को छिछड़ों के ख्वाब। अकसर यह बात नकारात्मक सेंस में सामने वाले पर कटाक्ष में कही जाती है कि उसे किसी बात या कार्य विशेष के अलावा कुछ नहीं सूझता। इसमें कटाक्ष भले ही हो, लेकिन यह बात भी जानने की है कि हम जो पाना चाहते हैं, जब तक उसके सपने नहीं देखेंगे तो उसे पाएँगे कैसे। सपने होंगे तभी तो उन्हें हकीकत में बदलने की कोशिश करेंगे।

इसलिए खूब सपने सँजोओ ताकि उन्हें पूरा कर सको। फिर भले ही दिन हो या रात। दिन के सपने को लोग भले ही दिवास्वप्न कहकर नकार ही क्यों न दें, कैकुले के दिवास्वप्न ने ही तो इतनी बड़ी खोज को प्रकाश में लाने में मदद की।

और अंत में, कैकुले की 7 सितंबर को जन्मतिथि थी। एक बार अपने सपने पर किसी के द्वारा किए गए कटाक्ष के जवाब में उन्होंने कहा था- 'आओ चलो, अपने सपनों से सीखें श्रीमान। तब संभवतः हम हकीकतों से सीख पाएँगे।' इसलिए सपनों से सीखकर सपने पूरे करें। अरे भई, बिना कुछ किए ख्वाब पूरे होने वाले नहीं।

सुखी, सफल जीवन के सूत्र

*जिम्मेदारी एक शक्ति है, न कि बोझ।
* जीवन में सिर्फ इच्छाएँ नहीं पालिए, लक्ष्य बनाइए।
*सोचिए जो भी मेरे पास है, मेरे लिए खास है।
*हमारी तीन महत्वपूर्ण संपत्तियाँ हैं- शरीर, समय एवं मनोवृत्ति।
*सफलता के तीन नियम हैं- मेहनत, आत्मविश्वास एवं आत्मविकास।
*कोई भी काम सिर्फ काम चलाने के लिए नहीं, परंतु आगे बढ़ने के लिए करें।
*यदि आप पूरी जिंदगी के लिए खुशी चाहते हैं तो अपने काम से प्यार करना सीखें।
*असफलता वह अवसर है, जब आप अधिक समझदारी से दोबारा शुरुआत कर सकते हैं।
*खुश रहना भी एक आदत है। लगन से मेहनत करना भी एक आदत है।
*कोल्हू का बैल सारा दिन घूमता रहता है, लेकिन रहता वहीं का वहीं है।
*पढ़े-लिखे होने से अच्छा है, पढ़ते-लिखते रहना।
*दलदल में रहोगे, तो तैरना नहीं सीखोगे।
*ख्वाहिश को पूरा करने की कोशिश करें ताकि भविष्य में खेद नहीं रहे कि कोशिश नहीं की थी।
*सीधी बातचीत मित्रता बनाए रखने का श्रेष्ठ तरीका है।
*हर दिन की शुरुआत सुखद, संतुष्ट व सुखी नजरिए से कीजिए। आप पाएँगे कि आपका दिन सुखद व सफल गुजरेगा।

तभी बने काम, जब गणपति करे आराम

किसी भी मांगलिक कार्य के पहले किस देवता का सर्वप्रथम पूजन हो, इसे लेकर देवताओं में गहरा मतभेद चल रहा था। कोई हल न सूझने पर वे प्रजापिता ब्रह्मा के पास पहुँचे। उनकी समस्या सुनकर ब्रह्माजी ने निर्णय दिया कि जो सारी पृथ्वी की परिक्रमा कर सबसे पहले उनके पास पहुँचेगा, वही प्रथम पूज्य का सम्मान पाएगा। इसके लिए सभी तैयार हो गए।

नियत समय पर दौड़ शुरू हुई। सभी अपने-अपने वाहनों को तेजी से दौड़ाने लगे, ताकि पहला स्थान पा सकें, लेकिन गणेश अपनी जगह पर ही खड़े थे। उनके साथ बड़ी दिक्कत थी। एक तो उनका भारी-भरकमशरीर और छोटे-छोटे पैर। ऊपर से उनका वाहन चूहा। वह बेचारा कितना जोर लगाता? अपनी कमजोरियों के मद्देनजर वे जीतने का कोई दूसरा उपाय सोच रहे थे।

अचानक वे कूदकर चूहे पर बैठे और कैलाश पर्वत पहुँचे। वहाँ उन्होंने शिव-पार्वती को एकसाथ बिठाकर उनकी सात बार परिक्रमा लगाई और सीधे ब्रह्मा के पास पहुँच गए। जब बाकी देवता वहाँ पहुँचे तो गणेश को देखकर उन्हें हैरानी हुई, तभी ब्रह्मा ने घोषणा की कि गणेश विजेता हैं। आज से सबसे पहले पूजा इनकी ही होगी। इस पर एक देवता बोला- गणेश कैसे जीत सकता है?

इसने तो पृथ्वी की परिक्रमा की ही नहीं है। ब्रह्मा- गणेश ने पृथ्वी की ही नहीं, बल्कि समस्त ब्रह्मांड की सात बार परिक्रमा की है। ये पृथ्वी स्वरूपा माता और ब्रह्मांड के स्वरूप पिता का चक्कर लगाकर आए हैं। ब्रह्मा की बात सुनकर सभी देवताओं ने गणेश को प्रथम पूज्य मान लिया।

दोस्तो, बुद्धि कौशल से व्यक्ति क्या नहीं पा सकता? फिर गणेशजी तो स्वयं बुद्धि के देवता हैं। वे तो इसका इस्तेमाल करेंगे ही। उन्होंने किया भी और इसी के बल पर वे प्रथम पूज्य बने। इसी तरह आप भी बुद्धि के बल पर सभी को पीछे छोड़ते हुए आगे निकल सकते हैं। वैसे गणेशजी का व्यक्तित्व गुणों की खान है। यदि आपने इन्हें जान-समझकर अपने अंदर उतार लिया तो फिर सफलता की दौड़ में आप भी कभी पीछे नहीं रहेंगे। उनकी तरह हर व्यक्ति को बड़े सिर का होना चाहिए।

यानी उसकी सोच का दायरा विस्तृत होना चाहिए, संकुचित या छोटा नहीं, तभी बिना भेदभाव के सबका भला सोचा और किया जा सकता है। गणेशजी के सूप जैसे बड़े कान बताते हैं कि सूप की ही तरह श्रेष्ठ बातों को ग्रहण करें और शेष को छिलके की तरह उड़ा दें। बड़े कान इस बात के भी प्रतीक हैं कि आप सुनें ज्यादा और बोलेंकम। इसलिए गणपति का मुख भी छोटा है। वैसे भी कम बोलना बुद्धिमानी की निशानी है।

गजानन की नाक यानी सूँड भी बड़ी है, जो दूर तक सूँघ सकती है। दूर तक सूँघना यानी दूरदर्शी होना। व्यक्ति को चाहिए कि वह आगे की पहले ही भाँप जाए। उनकी छोटी आँखें प्रतीक हैं सूक्ष्म दृष्टि की। यदि आपकी दृष्टि सूक्ष्म होगी तो कोई भी चीज आपकी नजर सेबच नहीं पाएगी। गणपति का पूरा दाँत श्रद्धा का और आधा दाँत प्रतिभा का प्रतीक है।

यदि प्रतिभा कम होगी तो भी चलेगा, लेकिन श्रद्धा पूरी होगी, तो आप जो भी कर रहे हैं, उसमें सफलता मिलेगी ही। उनका बड़ा उदर बताता है कि बातों को पचाना सीखें। इधर की बात उधर नकरें। गणपति के छोटे पैर प्रेरणा देते हैं कि उतावले मत बनो। संयम रखकर ही सफलता की राह पर आगे बढ़ा जा सकता है। इस तरह गणेशजी के व्यक्तित्व के हर पहलू में कोई न कोई संदेश छिपा है, जिसे हमें जानना-समझना चाहिए।

और अंत में, आज गणेश चतुर्थी पर घर-घर में गणेश मूर्ति की स्थापना कर उनकी पूजा-अर्चना की जाएगी, ताकि हमारे सारे काम निर्विघ्न संपन्ना होते रहें। काम की सफलता में उनके आशीर्वाद के साथ ही यह भी जरूरी है कि आपका गणपति ठिकाने पर रहे। यहाँ गणपति माने हमारा मन। शास्त्रों में इंद्रियों को गण और मन को उनका स्वामी या पति माना गया है, तो मन हुआ न गणपति।

इसलिए कोई भी काम करने से पहले सर्वप्रथम अपने मन रूपी गणपति का पूजन करें ताकि कोई विघ्न खड़ा न हो, क्योंकि यही किसी भी कार्य के दौरान हमारा ध्यान भंग कर, भटकाकर सबसे ज्यादा विघ्न डालता है। यदि आपका यह गणपति आराम से रहेगा, तभी आपके सभी कार्य निर्विघ्न होंगे। गणपति बप्पा मोर्‌या।

द ग्रेट जीएम 'श्री गणेश' के फंडे

जिंदगी के हर क्षेत्र में मैनेजमेंट बहुत जरूरी है फि‍र वो चाहे पढ़ाई हो या करि‍यर, घर का काम हो या ऑफि‍स का। ऐसे तो सभी मैनेजमेंट गुरु मैनेजमेंट के अपने-अपने फंडे देते रहते हैं। लेकि‍न इस बार हम आपको बता रहे हैं वि‍घ्‍नहर्ता 'श्रीगणेश' के मैनेजमेंट फंडे। श्री गणेश से जुड़ी हर चीज और वि‍चार हमें कोई ना कोई मैनेजमेंड फंडा जरूर बताता है, जरूरत है तो बस उसे पहचानने की। गणेशजी बुद्धि‍ के देवता हैं और उन्‍हें बद्धि‍ से ही समझा जा सकता है।

सही इस्तेमाल
यदि हम श्री गणेश और प्रबंधन की बात करें तो सबसे पहले हमें उनके वाहन चूहे पर ध्यान देना चाहिए, जो एक प्रबंधक को यह सिखाता है कि कैसे छोटे-से स्रोत का भी सही प्रबंधन कर उसका बेहतर ढंग से इस्तेमाल कर सकते हैं।

लगातार आगे
गणेशजी सौम्य, शांति और चंचलता के प्रतीक हैं। एक प्रबंधक में केवल शांति ही नहीं, चंचलता का गुण मार्केट में आगे निकलने के लिए आवश्यक है। इसी गुण से वह कंपनी या कॉलेज में एक सफल प्रबंधक साबित हो सकता है।

संकट दूर करे
विघ्नहर्ता का एक अर्थ प्रबंधक होता है, जो कठिन से कठिन परिस्थिति में तमाम तरह के विघ्नों को जल्द से जल्द हर कर विघ्नहर्ता बन जाए। इसीलिए गणेश प्रथम वंदनीय हैं।

बुद्धि व चतुराई
गणेशजी की जीवनलीला का वह प्रसंग जिसमें कार्तिकजी और गणेशजी के बीच हुई प्रतियोगिता भी प्रबंधन के गुर सिखाती है। प्रतियोगिता जीतने के लिए समय प्रबंधन और परिस्थिति में तुरंत कार्य करने की क्षमता चाहिए।

एक दंत
श्री गणेश का एक दाँत बताता है कि आपको अपनी खासियत बचाकर रखना चाहिए और फालतू चीजों का त्याग कर देना चाहिए। इससे आप अपने कामों को ज्यादा बेहतर ढंग से कर सकते हैं और अनचाही परेशानियों से बच सकते हैं।

छोटे पैर
किसी काम को बेहतर ढंग से अंजाम देने के लिए आपको अपना संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। श्री गणेश के छोटे पैर न केवल यह संदेश देते हैं कि आपको अपना संतुलन बनाए रखना है बल्कि यह भी बताते हैं कि किस तरह धीरे-धीरे और छोटे-छोटे कदमों से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ा जा सकता है। इसी रणनीति के जरिए आप अपने कदमों के निशान छोड़ सकते हैं।

अलार्तानेस
श्री गणेश का चूहा अलर्टनेस और मूवमेंट्स का प्रतीक है। यह बताता है कि आपको कामयाब होने के लिए हमेशा अलर्ट रहना चाहिए और समय के हिसाब से गतिशील और सक्रिय रहना चाहिए।

पचाने की ताकत
श्री गणेश का बड़ा पेट भी अपने में बड़े अर्थ समाहित किए हुए है। यह बताता है कि आप में अच्छी -बुरी तमाम बातों को पचाने की ताकत होना चाहिए। अक्सर यह देखा जाता है कि स्टूडेंट्स या युवा किसी की बात सुनकर चाहे-अनचाहे रिएक्ट करते हैं या बिना सोचे-समझे कुछ कर बैठते हैं। उनके लिए बड़े पेट का प्रतीक बताता है कि पहले उस बात को समझो-जानो और फिर किसी काम को अंजाम दो।

साथ करो
श्री गणेश के हाथ में रोप भी दिखाई देती है। यह इस बात की प्रतीक है कि आपको अपने आसपास या टीम के सदस्यों को साथ लेकर उन्हें कॉमन गोल के प्रति प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे टीम भावना पैदा होती है और सामूहिक ढंग से गोल हासिल कर सकते हैं।

मोदक
और आपने ऊपर बताए तमाम फंडे अपनाकर सफलता और समृद्धि पा ली है तो जाहिर है दुनिया आपके कदमों में होगी। सभी आपसे प्रभावित होंगे और आपकी प्रशंसा करेंगे। मोदक मेहनत, लगन और साधना का प्रतीक है।

वर्तमान को समझोगे नहीं तो अँधेरे में रहेगा भविष्य

एक नया बस ड्राइवर शहर से दूर सुनसान इलाके में स्थित फैक्टरी से रात पाली के कर्मचारियों को शहर वापस ला रहा था। चूँकि कर्मचारी थके-हारे थे, इसलिए बस में बैठते ही सो गए। इससे बस में सन्नाटा छाया हुआ था।
रास्ता बहुत ऊबड़-खाबड़ था और ड्राइवर का भी यह पहला अनुभव था, इसलिए उसे रास्ते की गड्ढों की जानकारी नहीं थी। फिर भी वह गड्ढों की परवाह किए बिना निश्चिंत होकर गाड़ी चला रहा था। जब भी बस किसी गड्ढे के कारण उछलती तो कोई कर्मचारी पीछे से चिल्लाता- अबे, ठीक से चला। क्यों नींद खराब करता है। यह सुनकर वह घबरा जाता, लेकिन पीछे मुड़कर नहीं देखता।
जब सड़क का कुछ ज्यादा ही खराब हिस्सा आया तो गाड़ी झूलने लगी। इस पर सवारियाँ शोर मचाने लगीं। डर के मारे ड्राइवर ने गाड़ी की स्पीड बढ़ा दी। इससे गाड़ी और भी डाँवाडोल होने लगी। अचानक एक कर्मचारी उठा और उसके कंधे को झिंझोड़कर बोला- अबे, क्या बहरा है या पिए हुए है।
खुद तो मरेगा, हमें भी मरवा देगा। ठीक से चला। तब तक पसीना-पसीना हो चुका ड्राइवर जोर से चिल्लाया- बचाओ-बचाओ। इसके साथ ही पूरी ताकत से गाड़ी के ब्रेक लगा दिए। कुछ देर बाद उसने हिम्मत करके पीछे देखा और फिर जोर-जोर से हँसने लगा। दोस्तो, जानते हैं वह ड्राइवर जोर-जोर से क्यों हँसा? इसलिए कि इससे पहले वह शववाहिनी का ड्राइवर था और उसे यही भान था कि वह शववाहिनी में शव ले जा रहा है। जब भी कोई सवारी टोकती तो वह यह सोचकर घबरा जाता कि मुर्दा बोल कैसे रहा है। अंत में वास्तविकता समझ में आने पर वह अपनी ही सोच पर हँसने लगा।
दरअसल लगातार एक जैसा काम करते रहने से वह उसके दिलो-दिमाग पर छा जाता है। तब काम बदलने पर भी उसका वह रूटीन, उसकी आदत उसका पीछा नहीं छोड़ती और वह अवचेतन अवस्था में अतीत में चला जाता है। यही कारण है कि किसी नई संस्था में आने के बाद भी कई बार व्यक्ति के मुँह से वर्तमान संस्था के नाम की जगह पुरानी संस्था का नाम निकल जाता है।
तारीख डालने में पुराना महीना या साल लिख देना भी इसी तरह की आदत के चलते होता है। ऐसा वाकया होने पर व्यक्ति को हर बार एक जोर का झटका लगता है, जो उसे अतीत से निकालकर वर्तमान में लाता है और बताता है कि अब तुम्हारी दुनिया बदल गई है। तब वह भी अपनी मूर्खता पर उस ड्राइवर की तरह जोर से हँस या मुस्करा देता है और यही झटके उसे नए माहौल में ढालते जाते हैं।
इस प्रक्रिया में पुराने और नए अनुभव आपस में टकराते हैं। जिस व्यक्ति का दिमाग जितना ज्यादा खुला होता है, वह उतनी जल्दी नए माहौल में ढल जाता है। जिनके अंदर अस्वीकृति का भाव होता है, वे अतीत से बाहर नहीं निकल पाते।
नया माहौल उनमें घुटन पैदा करता है और वे उसके अनुसार अपने को ढाल नहीं पाते।यदि आप भी किसी भी तरह के बदलाव से गुजर रहे हैं या बदलाव चाहते हैं, तो आपको अपने सिर से अतीत के भूत को उतारना होगा। तभी आप खुद को बदलकर अपना भविष्य सँवार पाएँगे। जो लोग अतीत से चिपके रहते हैं, वे मुर्दों की तरह रहते हुए अतीत बन जाते हैं और किसी शववाहिनी के ड्राइवर की तरह अपना ही शव ढोते रहते हैं।
उनका वर्तमान बार-बार उनके कंधे पर हाथ रखकर चेताता भी है, लेकिन वे वर्तमान से इस तरह डरे रहते हैं कि वह उन्हें भूत की तरह लगता है और वे उसे देखने तक से कतराते हैं। और जो अतीत वाकई भूत हो चुका है, वही उन्हें रास आता है। इस कारण वर्षों से एक ही काम में लगे कई लोग नए काम की सुनकर ही सिहर उठते हैं, क्योंकि वे सोचते हैं कि वे कुछ और नहीं कर पाएँगे। इस डर से वे अपने प्रगति के अवसरों को गँवाकर अपना भविष्य अंधकारमय बनाते जाते हैं।
इसलिए व्यक्ति को लगातार एक जैसा काम नहीं करना चाहिए, ताकि वह उसकी आदत न बन जाए, क्योंकि कोई भी आदत आसानी से छूटती नहीं। यदि आप प्रगति चाहते हैं तो अपने क्षेत्र से जुड़े अन्य काम को भी करना सीखें।
इससे आपके सीखने की आदत भी जिंदा रहती है और आप टाइप्ड होने से बच जाते हैं। तब आपका बॉस भी आपको नए-नए काम देकर आगे बढ़ाता जाता है। अरे भई, रहे होगे कभी फन्नो खाँ। आज की बात करो।

ये मंत्र जपो, आगे बढ़ो

श्री गणेश बुद्धि, ज्ञान, सफलता और समृद्धि के देवता हैं। उनके मंत्र के जरिए युवा वह सब पा सकते हैं जिसकी वे इच्छा करते हैं। ये सात मंत्र वि‍श्वास के साथ जपने से आपको आत्‍मवि‍श्वास मि‍ल सकता है जो आपको करि‍यर बनाने में सबसे ज्‍यादा मदद करता है। श्रीगणेश के मंत्र वस्‍तुत: सि‍द्धि‍ मंत्र हैं। हर मंत्र में श्रीगणेश की एक खास शक्ति‍ वि‍द्यमान है। इन मंत्रों को सही वि‍धि‍ और सही उच्‍चारण के साथ कि‍या जाए तो इसके कई लाभ मि‍लते हैं। यह भी जरूरी है कि‍ इन मंत्रों को पूरी आस्‍था और श्रद्धा से कि‍या जाना चाहि‍ए।

1। ओम श्रीगणेशायनमः
यह मंत्र एक सकारात्मक और शुभ शुरुआत के लिए उपयोगी है। आपका चाहे कोई प्रोजेक्ट हो, रिसर्च पेपर हो या करियर या फिर कोई अन्य काम, इस मंत्र के जाप से आप सफलता अर्जित कर सकते हैं।

2। ओम गं गणपतये नमः
इस मंत्र की सहायता से आप सुप्रीम नॉलेज और शांति से गहरे जुड़ सकते हैं। बिना किसी रुकावट के आप सफलता पा सकते हैं।

3। ओम विनायकाय नमः
इस मंत्र के जाप से आप अपने कॉलेज, क्लास, ऑफिस या वर्क प्लेस पर शिखर पर पहुँच सकते हैं यानी वह पोजिशन हासिल कर सकते हैं, जहाँ सब कुछ आपके नियंत्रण में होता है यानी शीर्ष पर। विनायक का अर्थ है सब कुछ आपके नियंत्रण में है।

4। ओम विघ्ननाशायनमः
जिंदगी और करियर में तमाम तरह की बाधाएँ आती हैं। इस मंत्र का लगातार जाप करने से आप, आपकी बॉडी और कॉस्मोस की रुकी ऊर्जा बह निकलती है और आप पूरी कुशलता और कार्यक्षमता के साथ अपने लक्ष्यों को हासिल कर लेते हैं।

5। ओम सुमुखायनमः
इस मंत्र का अर्थ है कि मुख ही नहीं, आपकी भावना, आपका मस्तिष्क, आपका मन और आत्मा सुंदर होना चाहिए। उनमें आने वाले भाव और इच्छाएँ सुंदर हों। इसलिए भीतरी सुंदरता होगी तो वह मुख पर प्रकट होगी और आप जो कहेंगे, वह सुंदर होगा, प्रेरणास्पद होगा।

6। ओम क्षिप्र प्रसादायनमः
किसी भी तरह की आशंका, संकट,निगेटिव इनर्जी होगी तो आप इस मंत्र के जरिए उसे दूर सकते हैं। सारी बाधाओं से पार पा सकते हैं। इस मंत्र से तुरंत आशीर्वाद मिलता है।

7। ओम वक्रतुण्डाय हूं
जब स्थिति आपके नियंत्रण से बाहर हो या लोग आपके बारे में नकारात्मक विचार रखते हों या आप हताश और निराश हों तो इस मंत्र का जाप करें। इससे लाभ मिलेगा यानी तुरंत प्रसाद मिलेगा। इन मंत्रों को जपने से तमाम तरह की बाधाओं और बुरी शक्ति‍यों से मुक्ति‍ मि‍लती है। इन मंत्रों से सकारात्‍मक ऊर्जा प्रवाहि‍त होती है और आशीर्वाद स्‍वरूप सफलता, समृद्धि‍, बुद्धि‍ और ज्ञान हासि‍ल होता है।

दृड़ इरादों के आगे नहीं ठहरती अपंगता

पर्णा सचदेव रायपुर के कांगेर वैली अकादमी में सातवीं कक्षा में पढ़ती है। वह की-बोर्ड वाले वाघ यन्त्र बजाती है। वह पढ़ाई में बहुत तेज है और हर साल परीक्षा में 85 फीसदी या उससे ज्यादा अंक लेकर उत्तीर्ण होती है। वह स्कूल में होने वाली अन्य गतिविधियों में भी बहुत अच्छा परफार्म करती है। उससके माता-पिता उस पर बहुत ध्यान देते हैं और उसके स्कूली समय को छोड़कर बाकी पूरा समय उसके साथ ही जुगारते हैं। वे उसके हर पाठ को कम्पूटर पर उपलोड करने में मदद करते हैं। यहाँ तक कि उन्होनें उसके पठान-पाठन से जुड़े तमाम अध्यायों को कम्पूटर पर उपलोड किया है ताकि उसे पढने में आसानी हो।

अब आप पूछ सकते हैं कि इसमें क्या ख़ास बात है? यदि अपर्णा के माता-पिता कि तरह दुसरे बच्चों के माता-पिता भी उनके साथ पूरा समय गुजारें तो बच्चे सौ फीसदी अंक भी हासिल कर सकते हैं। आपका कहना सही है, लेकिन मैंने अभी अपर्णा के बारे में आपकी पूरी तरह नहीं बताया। अपर्णा आपकी ओर सीधा देखेगी। उसका ज्यादातर ध्यान इस बात पर होगा कि वह आपको गौर से सुन सके। ऐसा इसलिए क्योकिं उसकी आँखों में नब्बे फीसदी रोशनी नहीं है। उसके माता-पिता ने सभी विषयों के अध्यायों को कम्पूउतेर पर उपलोड कर दिया है इस तरह अब वह पढने के लिहाज से फांट साइज़ को अपने हिसाब से बढ़ा सकती है। यही कारन है कि उसे सौ फीसदी अंक नहीं मिलते, फिर भी वह बहुत अच्छे अंकों के साथ उत्तीर्ण होती है।

जब वह वार्षिक कार्यक्रमों के दौरान पुरस्कार लेने के लिए मंच पर जाती है, तब कोई भी नहीं कह सकता उसकी नज़र बेहद धुंदली है और उसकी आँखों में सिर्फ दस फीसदी रोशनी है। वह चस्मा नहीं पहन सकती और चिकित्सा जगत में उसकी इस व्याधि के लिए उपचार नहीं है, हालाकिं उसके अभिभावकों को पूरी उम्मीद हा कि आगामी कुछ वर्षों में इसका निदान मिल जाएगा। इस कारण से उसके अभिभावक चिकित्सा जगत में होने वाली हलचलों के रोज़ संपर्क में रहते हैं। अपर्णा के पिता हर उस बच्चे कि मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं जो द्रिष्टिदोष से पीड़ित है। उन्होनें इसके बारें में काफी जानकारी जुटा ली है और इसे अलग-अलग श्रेणियों के मुताबिक वर्गीकृत कर दिया है। उन्हें जान्ने वाले लोग कहते हैं कि वह द्रिष्टिबाधिता के लिए चलता-फिरता एन्साइक्लोपीडिया है।